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स्वतंत्रता दिवस?

राम और रहीम कृष्ण और करीम का एका पाकिस्तान में सम्भव न हुआ| जिन्होंने देश के टुकड़े किये| पाकिस्तान से हिंदुओं को ठोकरें मार कर भगा दिया| उनकी नारियों को नंगा करके जुलूस निकाला| नारियों को पशुओं की भांति बाजारों में बेचा| नारियों का बलात्कार किया| हिंदुओं के खेत, घर व पैत्रिक सम्पत्तियां लूट लीं| हिंदुओं को जान बचा कर भागने को विवश किया| उनको इंडिया में रोके जाने का और उनका गुणगान करने के लिए आप १५ अगस्त को उत्सव मनाते हैंक्या आप को लज्जा नहीं आती?

१४ अगस्त, १९४७ का वायसराय माउन्टबेटन १५ अगस्त को गवर्नर जनरल बना व मुसलमान जवाहरलाल नेहरु प्रधान मंत्री| दोनों ने हिंदुओं को कत्ल कराया| देश के टुकड़े कराए| नारियों का बलात्कार कराया| और ईसाइयत और इस्लाम को शरण, संरक्षण और धर्मान्तरण का अधिकार दिया| आप हमें किस बात की बधाई दे रहे हैं? इंडिया को हत्यारों के हाथों सौंपने की? देश के बंटवारे की? नरसंहार की? या नारियों के बलात्कार की?

इंडिया के नागरिकों के स्व (अपने) तन्त्र की सीमायें हैं| इंडिया के नागरिक इन सीमाओं से बाहर नहीं जा सकते|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग इसलिए लड़ रहे हैं कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास बनें| मुसलमान और ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार करने पायें| आप के घर लूट लिए जाएँ और आप कत्ल न कर दिए जाएँ| मैं आतताई अल्लाह जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हूँ| और कुरान बाइबल को धर्म पुस्तक स्वीकार करता हूँ| मै भारतीय संविधान, कुरान बाइबल को मानवता का शत्रु मानता हूँ| जो ऐसा नहीं मानता, वह दया का पात्र है|

जो लोग १५ अगस्त को अपने लोगों की हत्या और अपनी नारियों के बलात्कार का उत्सव मनाते हैं, अत्यंत निम्न श्रेणी के आत्मघाती, धूर्त और निर्लज्ज हैं|

आप को स्वतंत्रता कभी नहीं मिली! भारतीय संविधान का संकलन एक धोखा है| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||)} और राष्ट्रकुल का एक सदस्य भी|

जी हाँ हम मस्जिद और चर्च नहीं रहने देना चाहते क्यों कि यहाँ मानव मात्र को ईश्वर से अलग कर दिया जाता है| मनुष्य को कत्ल करने अथवा वीर्यहीन हो कर दास बनने के लिए विवश किया जाता है|

http://www.aryavrt.com/veerya-1

क्या आप बतायेंगे?

'मात्र अल्लाह पूज्य है' उपासना की आजादी कैसे है? पुलिस के संरक्षण में अज़ान व नमाज़ द्वारा मुसलमान आप का अपमान और ईशनिंदा क्यों करते हैं? दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा राष्ट्रपति और राज्यपाल ईशनिंदक मुसलमानों और ईसाइयों' को संरक्षण क्यों दे रहे हैं?

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को अल्पसंख्यक घोषित कर वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| चढ़ावों को लूट रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है|

आप अकेले यह युद्ध नहीं लड़ सकते| धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया| उनके आशीर्वाद से आर्यावर्त सरकार आप के लिए लड़ रही है| क्या आप आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे, ताकि सोनिया आप की आँखों के सामने आप की सम्पत्ति और घर न लूट ले, आप लोगों का मांस न खाये और रक्त न पिए| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर न मार डाले जाएँ, नारियों का सोनिया बलात्कार न करा पाए और आप कत्ल न हों? (बाइबल, याशयाह १३:१६).

२६ नवम्बर १९४९ को हमारे साथ छल हुआ था| संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे| क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ| संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ| फिर हम इंडिया के लोगों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है| इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है| इस प्रकार हमने सोनिया के रोम राज्य को चुनौती दी है| आसमा बिन्त मरवान, बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं| (बाइबल, लूका १९:२७). http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं| जो लोग हमें तबाह कर रहे हैं, वे यह याद रखें कि वे न स्वयं जीवित बचेंगे और न मानव जाति|

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया| उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग भी ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल, ईसाइयत, चर्च, इस्लाम, अजान और मस्जिद विरोधी हमारे ९ अधिकारी इस समय विभिन्न जेलों में निरुद्ध हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| काबा हमारी है| अजान गाली है| कुरान सारी दुनियां में फुंक रही है| हम अजान नहीं होने देंगे| इंडिया में एक भी मस्जिद नहीं रहने देंगे| हमें आत्म रक्षा के अधिकार के प्रयोग के लिए दंडित किया जा रहा है| भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है| अनुच्छेद २९(१) का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है| भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है|

संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर ईसाइयत और इस्लाम को अपने लूट, हत्या, बलात्कार और धर्मान्तरण की संस्कृति को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दिया गया है| इसके अतिरिक्त राज्यपालों और प्रेसिडेंट को भारतीय संविधान के संरक्षण, संवर्धन व पोषण का अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत भार सौंपा गया है| लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है| जो भी लूट व अजान का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है| इसलिए धरती पर अजान होना और मस्जिद रहना गैर-मुसलमान के गले पर रखी हुई तलवार है|

देश, धर्म और प्राण की रक्षा चाहें तो १५ अगस्त का बहिष्कार करने में हमारी सहायता करें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सूचना सचिव)

 

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AyodhyaP Tripathi,
Aug 11, 2013, 12:29 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Aug 11, 2013, 12:27 PM
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