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अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पीपी पांडे भगोड़ा घोषित?

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है| वर्तमान परिस्थितियों में सोनिया द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें और कत्ल करें, तो जेल जाएँ और न लूटें और कत्ल करें, तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| भारतीय संविधान ने इनकी पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक नागरिक ईसा की भेंड़ है| अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं हैकल तक मूल अपराधी अमित शाह थे| आज अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पीपी पांडे अपराधी क्यों हैं?

क्या सीबीआई को मालूम है कि जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम के लोगों को अल्पसंख्यक घोषित कर वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति और मूल निवासियों को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| अमेरिका आज भी है|  इंडिया भी रहेगा| लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी रहेंगे| ईसा ने दस करोड से अधिक अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल लिया| सोनिया वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगी, जजों का मांस खाएगी और लहू पीयेगी| (बाइबल, यूहन्ना :५३). ईसा विश्व के सभी धर्मों को नष्ट कर केवल अपनी पूजा कराएगा!

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

न्यायपालिका यह नहीं देख पा रही है कि मस्जिदों से ईमाम अजान द्वारा गैर मुसलमान नागरिकों के इष्ट देवताओं की निंदा करता है? ईमाम मस्जिदों से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देता है| न्यायपालिका सोनिया के हाथ की कठपुतली बनने से बचे| क्या जजों को मालूम है कि केवल वे ही संस्कृतियां जीवित बचीं, जिन्होंने भारत में शरण लिया| इसीलिए परभक्षी संस्कृतियां ईसाइयत और इस्लाम वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना चाहती हैं, ताकि सबको दास बनाकर निर्ममता पूर्वक लूटाजा सके|

मुहम्मद ने अपना पैशाचिक इस्लाम तमाम गज़वों द्वारा फैलाया| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() और कुरान के सहयोग से उनका जिहाद दिन दूना रात चौगुना फल फूल रहा है| ईसाइयत और इस्लाम ने हमारे पूर्वजों का नरसंहार किया| नारियों का बलात्कार किया| धर्मान्तरण किया और कर रहे हैं| लेकिन न्यायपालिका को भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत पीपी पांडे का प्राइवेट प्रतिरक्षा का प्रयत्न अपराध दिखाई दे रहा है!

क्या एक ईसाई मुसलमान, जो ईसाई मुसलमान नहीं रहना चाहता, अपना मजहब त्याग सकता है? ऐसा करने वाला ईसाई मुसलमान क्या जीवित बचेगा? न्यायपालिका को (कुरान :१०१ और १०२) और (बाइबल, व्यवस्था विवरण १३:-११) पढ़ना चाहिए| क्या भारतीय संविधान के अनुच्छेद २५ से प्राप्त नागरिक की यही उपासना की आजादी है? क्या न्यायपालिका किसी ईसाई या मुसलमान के विरुद्ध ईशनिंदा और कत्ल करने के लिए शिक्षा देने के अपराध में भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३/२९५ के अधीन अभियोग चलाने की मांग कर सकती है? क्या न्यायपालिका अपने बुद्धि का प्रयोग करने के लिए स्वतन्त्र है? क्या एक काफ़िर किसी मुसलमान देश में अपना धर्म पालन कर सकता है? क्या न्यायपालिका ने शिया और सुन्नी के बीच दंगों के बारे में सुना है? क्या न्यायपालिका ने ईशनिंदा के अपराध में मुसलमान द्वारा मुसलमान के हत्या की खबर सुनी है?

न्यायपालिका को ज्ञात होना चाहिए कि हमारे पूर्वज इंजीलवादी ईसाई लुटेरे मुसलमान द्वारा कत्ल किये गए और नारियों का बलात्कार किया गया| अब न्यायपालिका अपने अपमान कर्ता उन्हीं दास बनाने वाली असभ्य विश्वासी मजहबों के बचाव का अपराध कर रही है| हम वैदिक पंथी अथवा न्यायपालिका अपने पूर्वजों के हत्यारे मजहबों के निष्ठावान या आभारी नहीं हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() की शर्त और संरक्षण में वे अजान द्वारा हमारी हत्या धर्मांतरण की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैं|

न्यायपालिका सावधान हो| अपने लोगों, अपनी नारियों, अपने पूर्वजों और अपने मूल वैदिक सनातन संस्कृति के साथ विश्वासघात करे| क्या न्यायपालिका को उन सम्प्रदायों का बचाव करने में लज्जा नहीं आती, जिन्होंने उसके पूर्वजों को दारुण दुःख दिए और जो न्यायपालिका के जजों को मिटाने का कोई अवसर नहीं गवाने वाले? इन दैत्य गंदे मजहबों का बचाव करने के स्थान पर न्यायपालिका को वैदिक सनातन संस्कृति का बचाव करना चाहिए| न्यायपालिका का जज आज चाहे मुसलमान या ईसाई जो हो, पूर्व में वह वैदिक सनातन संस्कृति का अनुयायी ही था| न्यायपालिका को अपने पूर्वजों के वैदिक सनातन संस्कृति के वरासत पर गर्व होना चाहिए, जिसने मानव जाति को इतना कुछ दिया है|

न्यायपालिका यह देख पाने में असमर्थ है कि दास जेसुइट और जिहादियों ने, जो स्वयं दास हैं, उसको (न्यायपालिका को) ईसा और अल्लाह की आड़ में अपना मातहत और उपकरण बना रखा है और जिहाद और मिशन के बल पर अपना साम्राज्य थोप रखा है|

खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो लिखते हैं कि पराजित शत्रु को जीवन भर अधीन कर दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| सैतानों जेहोवा और अल्लाह ने, किसान के सांड की भांति, यहूदियों मुसलमानों को दास बनाने लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया है| लूट और यौन सुख का ऐसा लोभ है कि यहूदी और मुसलमान अपने शत्रुओं को नहीं पहचानते!

जिसे आज के वैज्ञानिक परमाणु कहते हैं| उसे हमारे ही नहीं ईसाइयों मुसलमानों के  पूर्वज भी ब्रह्म कहते थे| आज की परमाणु ऊर्जा विज्ञान जड़ (निर्जीव) परमाणुओं के भेदन पर आश्रित परमाणु ऊर्जा विज्ञान है| सर्व विदित है कि ऊर्जा निर्जीव ईंधन के आधे भार को प्रकाश की गति के वर्ग को गुणा करने के बराबर है| चेतन परमाणु में उससे भी अधिक ऊर्जा है| हमारे पूर्वजों का विज्ञान जैविक परमाणुओं के भेदन पर आधारित है| इसी परमाणु भेदन को कुण्डलिनी जागरण कहा जाता है| हमारा ज्ञान और विज्ञान आज के जड़ परमाणु उर्जा के ज्ञान से अत्यधिक प्रभावी है| महाभारत काल में अश्वस्थामा के ब्रह्मास्त्र के संधान और लक्ष्य भेदन के प्रकरण से स्पष्ट होता है कि ब्रह्मास्त्र स्वचालित नहीं थे| एक बार छोड़ देने के बाद भी उनकी दिशा और लक्ष्य भेदन को नियंत्रित किया जा सकता था| इतना ही नहीं लक्ष्य पर वार कर ब्रह्मास्त्र छोड़ने वाले के पास वापस भी जाते थे| उनके मलबों को ठिकाने लगाने की समस्या नहीं थी| विकिरण से जीवन को होने वाली हानि की समस्या नहीं थी| यहूदीधर्म और इस्लाम खतने वीर्य हानि द्वारा मानव मात्र में ब्रह्म से प्राप्त इसी अपार शक्ति को छीनने के अपराधी हैं| इन्हें धरती पर रहने का अधिकार नहीं है| ब्रह्म ज्ञान की शिक्षा गुरुकुलों में दी जाती थी| गुरुकुलों को मैकाले ने मिटा दिया| इन आसुरी संस्कृतियों को मानवता के हित में मिटाने में और गुरुकुलों और गौ संवर्धन को पुनर्स्थापित करने में क्या आप हमारी सहायता करेंगे?

हर मुसलमान ईसाई यह याद रखे कि उसको दास बनाया गया है| वस्तुतः मूसा और मुहम्मद नामक पैगम्बरों ने उसको दास बनाने के लिए उसका खतना करा कर उसके ब्रह्म को उससे छीनने का घृणित और अक्षम्य अपराध किया है| वे तो मर गए लेकिन अपनी वरासत शासकों और पुरोहितों को सौंप गए हैं| अगर उन्होंने अब भी पैगम्बरों द्वारा गढे गए जेहोवा और अल्लाह का परित्याग नहीं किया तो मानव जाति बचेगी नहीं|

इशरत और उसके साथी मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करने आये थे| हर ईमाम अज़ानप्रसारण द्वारा काफिरों के इष्ट देवों की निंदा करता है| मस्जिदों से कत्ल करने की शिक्षा देता है| अतएव इस्लाम या उसके अनुयायियों का वध अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पीपी पांडे का नैतिक दायित्व है| हम उनके कार्य की प्रशंसा करते हैं और जजों का अपना शत्रु मानते हैं|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jul 4, 2013, 7:33 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Jul 4, 2013, 7:34 AM
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