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धारा १९६

सेवा में,

महामहिम श्री तेजेन्द्र खन्ना, उपराज्यपाल, दिल्ली

विषय: आत्मरक्षा में लिखे गए लेखों व प्रदर्शनों के विरुद्ध लम्बित अभियोगों को वापस लेने की मांग|

संदर्भ: प्राथमिकी संख्या ४०६/२००३ और १६६/२००६ थाना नरेला| बाहरी दिल्ली|

महोदय,

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

स्पष्टतः अंग्रेजों की कांग्रेस द्वारा संकलित भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की असाधारण सामरिक योजना ने वैदिक सनातन संस्कृति के समूल नाश में अभूतपूर्व बड़ी सफलता प्राप्त की है| जहाँ भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ईसाइत और इस्लाम के सभी मिशन और जिहाद, वैदिक सनातन संस्कृति के विरुद्ध आक्रमण को संरक्षणपोषण व संवर्धन दे रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है, वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है| ईसाई और मुसलमान को तो उनके मजहब ही वीर्यहीन कर शासक के वश में कर चुके हैं, हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को वश में कर हैं|

प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया गया कोई कार्य अपराध नहीं है|(भारतीय  दंड संहिता की धारा ९६).

अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और जजों ने मुसलमानों का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार किया हुआ है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबललूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार है। चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|  

मस्जिदों और चर्चों से उपरोक्त प्रसारण और शिक्षायें भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं माने जाते| लेकिन भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है|

इनका नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल के अधीन है| अन्य कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं-अज़ान का प्रसारण करने वाले और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले किसी इमाम के विरुद्ध अभियोग नहीं चला सकता| लेकिन प्राइवेट प्रतिरक्षा में भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ के अधिकार का प्रयोग करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने के लिए संस्तुति देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों ही विवश हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त ईसाइयत और इस्लाम को कवच देने के लिए ही राष्ट्रपति और राज्यपाल को क्रमशः अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेनी पड़ती है|

जेहोवा और अल्लाह खूनी, लुटेरे और बलात्कारी हैं| भारतीय संविधान इनका संरक्षक एवं पोषक है| जजों ने भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है| भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ व १०५ हमें हर मुसलमान और ईसाई को कत्ल करने का अधिकार देती है| आर्यावर्त सरकार ईसाइयत, इस्लाम और तथाकथित प्रजातंत्र को मिटाना चाहती है| जिन्हें सम्मानित जीवन चाहिए-हमसे जुड़ें|

प्रजातंत्र नहीं सोनियातंत्र

इंडिया में गणतंत्र नहीं जेसुइट सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है| ईसाई व सोनिया सहित इंडिया के नागरिक ईसा की भेंड़े हैं| इंडिया के ईसाई व मुसलमान सहित किसी नागरिक के पासजीने का अधिकार है और पूँजी सम्पत्ति रखने का| संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग). सर्वविदित है कि प्रेसिडेंटप्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया| प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं| अब नए प्रेसिडेंट महामहिम प्रणब दादा भी सोनिया द्वारा मनोनीत हो गए| फिर चुनाव की नौटंकी किसलिए? यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

हम आर्यावर्त सरकार के बागी हैं| हम भारतीय संविधान, कुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानते हैं और मस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं| हम जानना चाहते हैं कि अजान का विरोध और मस्जिद का विष्फोट अपराध कैसे है? हम पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाह और धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग देने वाले अल्लाह को ईश्वर मामने के लिए तैयार नहीं हैं|

हम जानना चाहते हैं कि सबको अपने अधीन कराने वाला, (बाइबल, लूका १९:२७), मनुष्य के पुत्र का मांस खाने व लहू पीने की शिक्षा देने वाला (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), तलवार चलवाने वाला (बाइबल, मत्ती १०:३४), धरती पर आग लगवाने वाला (बाइबल, लूका १२:४९), परिवार में शत्रुता पैदा कराने वाला {(बाइबल, मत्ती १०:३५-३६) व (बाइबल, लूका १२:५१-५३)}, बेटी से विवाह कराने वाला (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) व मनुष्य को भेंड़ बनाने वाला ईशा ईश्वर का पुत्र कैसे है?

क्यों कि जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| मन्दिरों के चढ़ावों को लूट रहे हैं|

वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३)]. मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणास्रोत को नष्ट न कर दें| उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणास्रोत कुरान (कुरान ८:३९) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) हैकेवल वे ही संस्कृतियां जीवित बचीं, जिन्होंने भारत में शरण लिया| इसीलिए परभक्षी संस्कृतियां ईसाइयत और इस्लाम वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना चाहती हैं, ताकि सबको अपना दास बना कर निर्ममता पूर्वक लूटा जा सके|

आप अपराधी हैं ईसाइयों के यदि आप गैरईसाई हैं और मुसलमानों के भी यदि आप गैरमुसलमान हैं। या तो आप मात्र अल्लाह की पूजा नहीँ करते हैं (कुरआन २१:९८ व नमाज) अथवा ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीँ करते हैं। (बाइबललूका १९:२७). आज तक यह निर्णय नहीँ हो पाया कि इन अपराधी देवताओं में कौन असली है जब कि सब अपने देवताओं को सर्वोच्च बताते हैं। अतः यदि वैदिक संस्कृति न बची तो ये स्वयं आपस में लड़ कर डाइनासोर की भांति मिट जाएंगे। मानवजाति को बचाना हो तो सहयोग दें|

अमेरिका आज भी है, लेकिन वहाँ के मूल निवासी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को ईसाई निगल गए| अब सोनिया के मनोनीत राज्यपाल काले भारतीयों और उनकी वेदिक सनातन संस्कृति को निगलने के लिए विवश हैं| वह भी ईसाइयत और इस्लाम के संरक्षणपोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन निम्नलिखित शपथ ले कर:-

 मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|

आप दया के पात्र हैं| आप ने अपने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). इसके बदले में सोनिया का ईसा आप को अपनी बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस :३६) से विवाह का व अल्लाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार दे चुका है| जहां भारतीय संविधान ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीँ आप को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

राज्यपालों के पास कोई विकल्प भी नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| आप के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही आप ही नहीं, सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं||

आप के संस्तुति पर ही जज हमारे विरुद्ध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोग चला रहे हैं| क्यों कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन किसी नागरिक या पुलिस या जज के पास उपरोक्त धाराओं के अधीन अभियोग चलाने का अधिकार ही नहीं है| यानी आप मानवता के हत्यारे हैं|

क्या आप को लज्जा नहीं आती कि आप के पूर्वजों का साम्राज्य पूरे विश्व पर था| आज आप किसान के पशु की भांति आतताइयों की दासता करने केलिए विवश हैं|

अतएव आप से अनुरोध है कि निज हित में आप अविलम्ब हमारे अभियोग वापस लें और सोनिया को बंदी बनाने में हमारी गुप्त सहायता करें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी फोन ९१५२५७९०४१ 

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AyodhyaP Tripathi,
Apr 11, 2013, 7:41 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Apr 11, 2013, 7:40 PM
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