Muj13W13 Abolish Azaan

बंद करो अज़ान

भारतीय संविधान का संकलन ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के नरसंहार व सबको अपना दास बनाने के लिए किया गया है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) जाति हिंसक, बलात्कारी दासता पोषक है| देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९()- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) भाग मौलिक अधिकार|

ईस्ट इंडिया कम्पनी के जमाने में केवल लावारिशों की सम्पत्ति राजवाह (escheat} होती थी| पाकपिता गाँधी ने आप को बिना ढाल-तलवार के ऐसी आजादी दी है, कि आप आज भी ब्रिटेन उपनिवेश की प्रजा हैं| न आप के पास सम्पत्ति रखने का अधिकार है और न जीने का| सम्विधान की शपथ ले कर शासकों ने अपनी नारियां तक ईसाइयों व मुसलमानों को सौंप रखी हैं|

ज्ञातव्य है कि भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) नागरिक को सम्पत्ति और पूँजी रखने के अधिकार से वंचित करता है| अनुच्छेद ३९(ग) नीचे उद्धृत है, जिस के अनुच्छेद ३९() की शर्त है,

"३९()- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९().

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

धारा १९६- राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – () कोई न्यायालय, - 

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय के अधीन या धारा १५३(), धारा २९५() या धारा ५०५ की उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८() में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं| ...|

सोनिया के मनोनीत राज्यपाल दंप्रसं की धारा १९७ से भयादोहित लोकसेवकों के माध्यम से नागरिकों को लूट रहे व कत्ल करा रहे हैं| अभियोग उन लोकसेवकों पर चलते हैं, जो नागरिकों को लूटते नहीं अथवा लूट कर सोनिया को हिस्सा नहीं देते|

आर्यावर्त सरकार मीडिया से भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ पर सच्चाई को छिपाने के विरुद्ध स्पष्टीकरण चाहती है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हत्यारी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को अपनी अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार दिया है|

अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना अनुच्छेद २९(१) और जजों ने मुसलमानों का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार किया हुआ है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| विशेष देखें, http://www.aryavrt.com/hmara-kathan-11404

ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबललूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार है। चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|  

मस्जिदों और चर्चों से उपरोक्त प्रसारण और शिक्षायें भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं माना जाता| लेकिन भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है|

भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति और राज्यपाल के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं-अज़ान का प्रसारण करने वाले और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले किसी इमाम के विरुद्ध अभियोग नहीं चला सकता| लेकिन भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ व १०५ के अधिकार का प्रयोग करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने के लिए संस्तुति देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों ही विवश हैं| भारतीय संविधान में ईसाइयत और इस्लाम को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए ही राष्ट्रपति और राज्यपाल को क्रमशः अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेनी पड़ती है| इसलिए असली आतंकवादी तो जज, राष्ट्रपति और राज्यपाल हैं|

कत्ल करने की शिक्षा देने वाले ईमामों को तो सर्वोच्च न्यायालय वेतन दिलवा रही है (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) और संजय दत्त को आत्मरक्षा में हथियार रखने के अपराध में जेल भेज रही है| जो हमें भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त कानूनी अधिकार का जजों द्वारा अपहरण है|

जेहोवा और अल्लाह खूनी, लुटेरे और बलात्कारी हैं| भारतीय संविधान इनका संरक्षक एवं पोषक है| जजों ने भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है| भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ व १०५ हमें हर मुसलमान और ईसाई को कत्ल करने का अधिकार देती है| आर्यावर्त सरकार ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान को मिटाना चाहती है| इंडिया के हर नागरिक को आत्म रक्षा के लिए हथियार दिलाना सर्वोच्च न्यायालय की नैतिक जिम्मेदारी है|

प्रजातंत्र नहीं सोनियातंत्र

इंडिया में गणतंत्र नहीं जेसुइट सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है| ईसाईयों व सोनिया सहित इंडिया के नागरिक ईसा की भेंड़े हैं| इंडिया के ईसाई व मुसलमान सहित किसी नागरिक के पासजीने का अधिकार है और पूँजी सम्पत्ति रखने का| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग). सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया| प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं| अब नए प्रेसिडेंट महामहिम प्रणब दादा भी सोनिया द्वारा मनोनीत हो गए| फिर चुनाव की नौटंकी किसलिए? यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

कौन है सोनिया?

देश की छाती पर सवार जेसुइट सोनिया ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै उनकी आयु का विचार करूंगी, लिंग का, परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

लेकिन यह युद्ध वर्तमान भारतीय संविधान के अस्तित्व में रहते इसकी शपथ लेने वाले और उनके अधीनस्थ लोकसेवक नहीं लड़ सकते. मात्र आर्यावर्त सरकार को सहयोग दे सकते हैं, वह भी गुप्त रूप से|           सम्पादक.

 

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AyodhyaP Tripathi,
Apr 3, 2013, 2:41 AM
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