Muj13W10 Asylum 13d01


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 10, Mar 08-14, 2013. This issue is Muj13W10 Asylum 13d01

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


Muj13W10 Asylum 13d01

स०रा०स० मानवाधिकार घोषणा के अनुच्छेद १४ के अधीन राजनैतिक शरण की गुहार.

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है| तथाकथित पैगम्बरों ने मानवमात्र को बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास बना कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बना दिया है| किसी के पास ईसाइयत और इस्लाम के विरोध का साहस नहीं! मैं आर्यावर्त सरकार का सूचना सचिव हूँ और आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को इसलिए मिटाना चाहता हूँ कि संस्कृतियां मानव मात्र को वीर्यहीन यानी ईश्वर विहीन करके, अपने अनुयायियों सहित, सबको दास बनाकर, उपासना की आजादी का परित्याग करवा कर, किसान के पशु की भांति, मानवमात्र का शोषण करती हैं|

खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो लिखते हैं कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (अधीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर महोदय यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक वेश्यावृत्ति को संरक्षण देना है|

सैतानों मूसा और मुहम्मद ने, किसान के सांड़ की भांति, यहूदियों व मुसलमानों को दास बनाने के लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया है| यहूदी और मुसलमान गाजे बाजे के साथ खतना कराकर स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं और जीवन भर रोगी, अशक्त और दास बन कर जीते हैं| मरियम के अवैध बेटे ईशा को जेहोवा का एकलौता पुत्र मानने का कारण ही वैश्यावृति को संरक्षण देना है, ताकि सबको वीर्यहीन कर दास बनाया जा सके और जो ईसा का दास न बने उसे कत्ल किया जा सके| पूरा विवरण देखें:-

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

वैदिक सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

ठीक इसके विपरीत ईसाइयत और इस्लाम संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति और मूल निवासियों को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| ईसाइयत इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर संस्कृतियों को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, :३९). यानी ईसाई मुसलमान को कत्ल करेगा और मुसलमान ईसाई को|

किसी भी हरे भरे वृक्ष को नष्ट करने के लिए एक गिद्ध का निवास ही पर्याप्त है| इसी प्रकार किसी भी संस्कृति को मिटाने के लिए एक मुसलमान या ईसाई का निवास पर्याप्त है| अकेला कोलम्बस अमेरिका के लाल भारतीयों व उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अकेला मैकाले संस्कृत भाषा और गुरुकुलों को निगल गया| अकेला मुहम्मद अपने आश्रय दाता यहूदियों के तीन प्रजातियों बनू कैनुका, बनू नजीर और बनू कुरेज़ा को निगल गया| यदि ईसाइयत और इस्लाम रहेंगे तो मानवता नष्ट होगी| महामहिम की धरती तो रहेगी पर महामहिम की प्रजा व उनकी संस्कृति नहीं बचेगी|

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर, किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर, मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर इंडियन नागरिकों को अशक्त और पराजित कर रखा है| उनकी अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया| मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर सदा सदा के लिए इंडियन नागरिकों की धरती को छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा ईसाइयत और इस्लाम का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

प्राचीन कालमें महाराज अश्वपतिने कहा था

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

वैदिक सनातन संस्कृति की मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि आप का स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया| लेकिन यदि आप का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया| अतएव सोनिया ब्रह्मचारी और चरित्रवान बनाने वाली वैदिक सनातन संस्कृति से आतंकित है| क्यों कि ब्रह्मचारी और चरित्रवान दास नहीं बनाये जा सकते|

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

भारतीय संविधान ने जजों के न्यायिक योग्यता, मानवता और लोकसेवकों के चरित्र को मिटाकर उनको आतंकवादी और भ्रष्ट बना दिया है. लोकसेवकों को यह विचार करना है कि उनका उत्पीडन सोनिया नहीं करती| अपने पद, प्रभुता और पेट के लिये वे स्वयं ही अपनी आजादी, जीवन और धन गवाने के लिये विवश होचुके हैं|

ईसाइयत और इस्लाम का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर अथवा साध्वी प्रज्ञा - सबके विरोध को दबा दिया गया|

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया में मैंने ईसाइयत और इस्लाम कि विरोध कर अपना जीवन बर्बाद कर लिया| इस ८० वर्ष के बुड्ढे से कुछ सीखें| मैं सेवा निवृत लोकसेवक हूँ| मुझे जज के आदेश के बाद भी पेंसन नहीं मिलती| इसके अतिरिक्त मैं लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ – लेकिन ऋषिकेश में भिक्षा के अन्न पर जीवित हूँ| अज़ान और मस्जिद का विरोध करने के कारण मेरे ९ अधिकारी जेलों में बंद हैं| मेरे पास आज खोने के लिए जीवन के अतिरिक्त कुछ नहीं है| मुझे कत्ल करने के लिए सोनिया के मातहतों के अतिरिक्त मेरे अपने बेटे ढूंढ रहे हैं| मेरे मानवाधिकार की रक्षा के लिए आप ने संयुक्त राष्ट्रसंघ को वचन दिया है| मेरे विरुद्ध जज का गैर जमानती वारंट भी है| क्यों की मैंने ‘इशू में सैतान है’ पुस्तक का प्रकाशन किया है| क्या आप के पास मुझे राजनैतिक शरण देने का साहस है?

http://www.aryavrt.com/victim-of-faiths

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Grievance Regn No is:DEPOJ/E/2013/

  

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AyodhyaP Tripathi,
Nov 30, 2013, 9:24 AM
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