Muj13W07 Deivamuthu 13n24y


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 07, Feb 15-21, 2013. This issue is Muj13W07 Deivamuthu 13n24y

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


Muj13W07 Deivamuthu 13n24y

श्री देवामुथू जी! सम्पादक हिंदू वोइस,

कृपया अपने हिंदू वोइस बुलेटिन ४७ के लेख, “भारतीय संविधान के तोड़फोड़ पर रोक” का अवलोकन करें|

मुझे दुःख है कि अज्ञान वश आप मानवता के भयानक शत्रु मौत के फंदे {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} और परभक्षी {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)} भारतीय संविधान के तोड़फोड़/ उल्लंघन से पीड़ित हैं| आप से अनुरोध है कि आप वेबस्टर शब्दकोश में संस्कृति का अर्थ पढ़ें| आप को ज्ञात हो जायेगा कि मजहब संस्कृति का अविभाज्य अंश है और इस प्रकार आप कठपुतली न्यायपालिका से कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे| अतएव अपने श्रम और धन को नष्ट न करें| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aatankvadi-bhrasta-judge

श्री देवामुथू जी! हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार से जुड़े बागियों ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| ईसाइयत और इस्लाम के विरोध के कारण साध्वी प्रज्ञा सहित हमारे ९ अधिकारी जेलों में हैं| हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है| {(बाइबलउत्पत्ति :१७) (कुरान :३५)}| हमें ज्ञात हो गया है कि  भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को वैदिक सनातन धर्म सहित मानव जाति को मिटाने अन्यथा मानव मात्र को दास बनाने के लिए संकलित किया गया है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारायें १९६ व १९७ नागरिक को वैदिक सनातन संस्कृति के विनाश और सम्पत्ति व उत्पादन के साधन के लूट के विरुद्ध शिकायत करने के अधिकार से भी वंचित करती हैं! इंडिया में मुसलमानों और ईसाइयों को इसलिए रोका गया है कि दोनों ने, किसान के बैल की भांति, स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| वैदिक सनातन संस्कृति मिटाना दोनों के लिए ईश्वरीय आदेश है| श्री देवामुथू जी! यह संस्कृतियों का युद्ध है, जिसे आप नहीं लड़ सकते| मात्र मैं लड़ सकता हूँ, क्यों कि मेरे पास जीवन के अतिरिक्त खोने के लिये कुछ नहीं बचा है| मेरी लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति सोनिया के लिए सोनिया के मातहतों ने लूट ली है| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

http://www.aryavrt.com/victim-of-faiths

अज़ान द्वारा मस्जिद से ईशनिंदा और कत्ल करने के खुत्बे (शिक्षाएं) अपराध नहीं माने जाते| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन विवश राज्यपाल मस्जिदों से अज़ान और अल्लाह के कुरान के अनुसार मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले ईमाम के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत सन १८६० से आज तक कार्यवाही नहीं कर सके| भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का १९४७ से एक भी विरोधी का आज तक किसी को ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि ईसाइयत और इस्लाम का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान अथवा संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर - सबके विरोध दब गए|

भारतीय संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर ने सितम्बर, १९५३ को राज्य सभा में कहा,इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता|“ (यह कथन राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा है।) इस कथन से नेहरु कुपित हो गया| नारो के अध्यक्ष श्री डीके गुप्ता के अनुसार नेहरु के सहयोग से भरतपुर नरेश श्री बच्चू सिंह ने श्री अम्बेडकर को राज्य सभा के भीतर, तमाम सांसदों की उपस्थिति में, गोली मार दिया और किसी को विरोध करने का साहस नहीं हुआ| न किसी को पता है!

ईसाइयत और इस्लाम मानवता को वश में करने के लिए नपुंसक बना देने वाले गढ़े गए मजहब हैं. ईसाइयत और इस्लाम डायनासोर की भांति मानवजाति को दास बनाने अथवा मिटाने के लिए गढ़ा गया है. हम उस भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को क्यों स्वीकार करें, जिसने हमें मार डालने का मुसलमानों और ईसाइयों को निरंकुश मौलिक अधिकार प्रदान किया है? यह इन मजहबों के खिलाफ जागने और लड़ने का समय है. ईसाइयत और इस्लाम मानव जाति के लिए खतरा हैं. मुसलमानों और ईसाइयों के साथ कोई सह - अस्तित्व नहीं हो सकता है. जब तक मुसलमान व ईसाई मुहम्मद और यीशु में विश्वास करते हैं, वे मानवजाति के लिए और यहां तक ​​कि खुद एक दूसरे के लिए खतरा हैं. धर्मनिरपेक्षता और बहुसंस्कृतिवाद यहूदी, ईसाई और इस्लाम मजहबों की दासता की मांग के कारण दिवालिया हो चुके हैं. {अज़ान, (कुरान २:१९१-१९४ व ८:३९) और (बाइबल, पलायन, अध्याय २०, दस आज्ञाएँ, नियम ३ व ५) व (बाइबल, लूका १९:२७)}. द्वैतवादी नैतिकता की सहिष्णुता की संस्कृति पवित्र असहिष्णुता के सामने ढह जाती है| लेकिन भयवश बुद्धिजीवी इस असफलता की अनदेखी करते हैं| ईसाइयत और इस्लाम में स्वधर्म पालन या विश्वास की कोई स्वतंत्रता नहीं है|

मुसलमानों और ईसाइयों को अपने ईसाइयत और इस्लाम को त्यागना होगा, अपने नफरत की संस्कृति (केवल अल्लाह पूज्य है की अज़ान द्वारा घोषणा और अकेले यीशु मोक्ष प्रदान कर सकते हैं की घोषणा का परित्याग करना पडेगा) – गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों में साथी के रूप में शामिल होना होगा| अन्यथा गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को नैतिक अधिकार है कि वे मुसलमानों और ईसाइयों से स्वयं को अलग कर लें| ईसाइयत और इस्लाम को प्रतिबंधित करें| मुसलमानों और ईसाइयों के आव्रजन को प्रतिबंधित कर दें और उन्हें कत्ल कर दें, जो मानवजाति को दास बनाने अन्यथा कत्ल करने का षड्यंत्र कर रहे हैं - सर्वधर्म समभाव के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं| ईसाइयत और इस्लाम के आचरण मानवता और नैतिकता के विरुद्ध हैं|

ईसाइयत {(बाइबल, मत्ती १०:३४) व (बाइबल, लूका १२:४९)} और इस्लाम (कुरान २:२१६) निरंतर युद्धरत सम्प्रदाय हैं| दोनों ही लोकतंत्र की आड़ में विश्व में अपनी तानाशाही स्थापित करने के लिये मानवजाति के आजादी व चरित्र को मिटा रहे हैं| इस बर्बरता और सभ्यता और एक विश्व आपदा के बीच टकराव को टालने के लिए एक ही रास्ता है कि ईसाई और इस्लाम मजहब के भ्रम को बेनकाब किया जाय और उन्हें रहस्यमय नहीं रहने दिया जाय. गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को मुसलमानों और ईसाइयों के साथ शांति से जीने के लिए यह आवश्यक है कि ईसाइयत और इस्लाम से प्रत्येक ईसाई व मुसलमान को विलग कर दिया जाये|

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर, किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर आप को अशक्त और पराजित कर रखा है| आप से आप की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया| मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर सदा सदा के लिए आप की धरती को छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा ईसाइयत और इस्लाम का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

इस्लाम के ई० स० ७१२ के आक्रमण के बाद भी ई० स० १८३५ तक भारत सोने की चिड़िया रहा| हमारा पतन निःशुल्क गुरुकुलों के पतन के बाद हुआ| यदि आप अपना भला चाहें तो गुरुकुलों के पुनर्स्थापना में आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें| १२ वर्ष के भीतर भारत महाशक्ति बन जायेगा| अन्यथा मिटने के लिये तैयार रहें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Grievance Regn No is: DEPOJ/E/2013/00953

 

ĉ
AyodhyaP Tripathi,
Nov 25, 2013, 4:46 AM
Ċ
AyodhyaP Tripathi,
Nov 25, 2013, 4:47 AM
Comments