Muj13W03 Sanvaidhanik loot


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 03, Jan 18-24, 2013. This issue is Muj13W03 Sanvaidhanik loot

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


Muj13W03 Sanvaidhanik loot

विषय: असहाय जज.

सन्दर्भ: दंड प्रक्रिया संहिता के धारा १९७ की संस्तुति|

http://www.aryavrt.com/muj11w15c-jan-lokpal

महामहिम दादा जी को सादर प्रणाम!

अरक्षितारम् राजानं बलिषड्भागहारिणम्|

तमाहुः सर्वलोकस्य समग्रमलहारकम्|| (मनुस्मृति ८:३०८)

यानी वैदिक सनातन धर्म में राज्य को १६.६७% से अधिक कर लेने का अधिकार नहीं है| अतः यदि आप साथ दें तो आर्यावर्त सरकार हत्यारों और लुटेरों की संहिता भारतीय संविधान को निरस्त करेगी| सोनिया के रोम राज्य में कर की सीमा ९५% है|

ईस्ट इंडिया कम्पनी के जमाने में केवल संतानहीनों की सम्पत्ति राजवाह (escheat} होती थी. पाकपिता गाँधी ने आप को बिना ढाल-तलवार ऐसी आजादी दी है, कि आप आज भी ब्रिटेन उपनिवेश की प्रजा हैं. {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान} न आप के पास सम्पत्ति रखने का अधिकार है, न उत्पादन के साधन रखने का {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)} और न जीने का. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)}. भारतीय संविधान की शपथ लेने वालों व लोकसेवकों ने अपनी सम्पत्ति, धरती और नारियां तक ईसाइयों व मुसलमानों को सौंप रखी हैं.

राज्य के स्थापना का उद्देश्य प्रजा के जान-माल की रक्षा करना है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया ( आई आर १९५१ एस सी ४५८) और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही दिनांक २०--१९७९ से मिटा दिया गया है.

"३९()- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९().

इस अनुच्छेद के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल स्वयं नागरिकों को लूटने की और लोकसेवकों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण देने की शपथ लेते हैं. (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९).

अपना व अपनी वैदिक सनातन संस्कृति का भला चाहें तो मेरी सम्पत्तियाँ, जिसे सोनिया ने लूट ली हैं, मुझे वापस दे दीजिए| विवरण नीचे के विभिन्न यूआरएल पर उपलब्ध है:-

खेड़ाखुर्द विस्तार के पंजीकृत कालनी में मेरा एक स्व अर्जित - अर्ध निर्मित भूखंड है| इस भूमि पर मेरे अपने ही पुत्रों ने ताला तोड़ कर अधिकार कर लिया है| इसके पूर्व ६ मार्च से ११ मार्च, २०१३ के बीच मेरे पुत्रों ने मुझे गोरखपुर में बंधक बनाया था| इसकी सूचना तार द्वारा मैंने उप्र व केन्द्र सरकार दोनों को दी थी, परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई| इस समय मामला अतिरिक्त जिलाधिकारी उत्तर दिल्ली के पास लम्बित है और मैं ऋषिकेश में भीख मांगने के लिये विवश हूँ| मामला न्यायालय में विचाराधीन हो गया है| सन १९८९ के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के बिना विचाराधीन आदेश का कुछ न हो सका| सोनिया के कठपुतली जजों के विचाराधीन मामले में हो ही क्या सकता है?

http://www.aryavrt.com/kland-forcible-dispossession

Request/Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2013/11308

http://helpline.rb.nic.in/

http://www.aryavrt.com/gnl-case

http://www.aryavrt.com/nl2pm-pdf

मैं नवम्बर सन १९६६ से २००० तक उप्र सिचाई विभाग में अवर अभियंता के पद पर सेवा रत रहा| राज्य लोकसेवा न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) में याचिका डालने के कारण मुझे नौकरी से निकाल दिया गया| २९-११-१९९४ में ट्रिब्यूनल का फैसला मेरे पक्ष में हुआ| काफी प्रयास के बाद भी मुझे आज तक पेंशन नहीं दी जा रही है और न कोई सुनवाई हो रही है|

http://www.aryavrt.com/pension

http://www.aryavrt.com/ahc-rg-12806y

मैं लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से राजस्व अभिलेखो में हेरा फेरी कर लोकसेवकों ने मेरी १.८८ एकड़ भूमि लूट ली| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपनी जांच में जालसाजी २८ जुलाई, १९८९ को प्रमाणित की है| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपराधी लोकसेवकों को दंडित नहीं किया लेकिन ९-८-१९८९ को सभी विपक्षियों की सहमति पर बदले में भूमि देने का आदेश पारित किया| उपरोक्त आदेशों के विरुद्ध कोई अपील भी नहीं की गई है| लेकिन मुझे भूमि आज तक नहीं दी गई| न्यायपालिका से आदेश होते हुए भी ९ अगस्त, १९८९ से अपनी ही भूमि पर जा भी नहीं सकता|

सोनिया का ऐसा आतंक है कि न तो मैं अपनी जमीन ही पा सकता हूँ और न पेंशन ही| सोनिया के पास मुझे मिटाने का अधिकार (बाइबल, लूका १९:२७) व भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व २९(१) से प्राप्त है| सोनिया के पास जजों को मुट्ठी में रखने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ से प्राप्त है|

इतना ही नहीं, चूंकि मैं हुतात्मा बिस्मिल के स्मारक से जुड़ा था, इसलिए सोनिया के दबाव में मुलायम ने हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल की ३.३ एकड और मेरी १.८८ एकड व २१० वर्ग मीटर भूमि लूटी हुई है| जिसके बलिदान के कारण लोकसेवक मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति और राज्यपाल बने, जब उसे ही नहीं छोड़ा, तो किसे छोड़ेंगे?

लेकिन यह लूट का माल मुलायम के पास भी नहीं रहेगा| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तब सोनिया मुलायम को भी मिटा देगी| भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम के विरोधी हैं| ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| हमारे विषय में अधिक जानने के लिए आप को नीचे लिखी लिंकें पढ़नी पड़ेगी:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

http://www.aryavrt.com/Home/chargesheet-download

http://www.aryavrt.com/lutera-snvidhan

लोकसेवक यह न भूलें कि सोनिया मानवजाति को मिटाने में लिप्त है| आज पद, प्रभुता और पेट के लोभ में जो अपराध और पाप लोकसेवक कर रहे हैं, वह उनका ही काल बनेगा| इसका प्रमाण दिल्ली उच्च न्यायालय के जज शमित मुखर्जी के सामने आया है| विवरण नीचे की लिंक पर देखें:-

http://www.hindu.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=20030523002904600.htm&date=fl2010/&prd=fline&

विचित्र बात यह है कि अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सबकी सम्पत्ति के मौलिक अधिकार छीनने वाला सर्वोच्च न्यायालय अपराधी नहीं है, लुटेरे लोकसेवकों को संरक्षण देने वाली दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ भी अपराधी नहीं है और सबके सम्पत्ति और उत्पादन के साधन लूटने वाला भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) भी अपराधी नहीं है – लेकिन विनोद खत्री की सम्पत्ति को लूटने से रोकने वाला जज शमित मुखर्जी अपराधी है| क्यों कि जज ने सोनिया के लूट में बाधा पहुंचाई|

प्रजातंत्र नहीं सोनियातंत्र

दादा! लूटती सोनिया है और दंड लोकसेवक पाते हैं| इंडिया में गणतंत्र नहीं - जेसुइट सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है| ईसाईयों व सोनिया सहित इंडिया के नागरिक ईसा की भेंड़े हैं| इंडिया के ईसाई व मुसलमान सहित किसी नागरिक के पासजीने का अधिकार है और पूँजी सम्पत्ति रखने का| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग). सर्वविदित है कि आप यानी प्रेसिडेंट महामहिम प्रणब दादा का मनोनयन सोनिया ने किया| प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं| चुनाव द्वारा भी अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| फिर चुनाव की नौटंकी किसलिए? यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए पूर्वजों ने रक्त? फिर भी आत्मरक्षार्थ लोकसेवक नहीं लड़ सकते| वे मात्र हमारी गुप्त सहायता कर सकते हैं| क्या लोकसेवकों के पास साहस है?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Grievance Regn No is:PRSEC/E/2013/19022

PGPORTAL: DLGLA/E/2013/00411 


Comments