Muj13W02 EnBW


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 02, Jan 11-17, 2013. This issue is Muj13W02 EnBW

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


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विवश जज

विषय: विद्वान मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट श्री संदीप गुप्ता, रोहिणी का भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३अ व २९५अ के अभियोजन में गैर जमानती वारंट|

सन्दर्भ: प्राथमिकी स० ४०६/०३ व १६६/०६ थाना नरेला

न्यायपालिका, अज़ान व मस्जिद के विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंकों पर क्लिक करें,

http://www.aryavrt.com/Home/aatankvadi-bhrasta-judge

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उपरोक्त अभियोग भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३क व २९५क के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति पर चल रहे हैं| मैं इन धाराओं को नीचे उद्धृत करता हूँ,

[153. धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना--जो कोई--

() बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय या भाषायी या प्रादेशिक समूहों, जातियों या समुदायों के बीच असौहार्द्र अथवा शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएं, धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करेगा, --- वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।“

 “[295. विमर्शित और विद्वेपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों--जो कोई [भारत के नागरिकों के] किसी वर्ग की धार्मिक भावनओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान [उच्चारित या लिखित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा] करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि [तीन र्ष] तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।]

धारा १९६- राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – () कोई न्यायालय, - 

(क) भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय के अधीन या धारा १५३(), धारा २९५() - - - के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

(ख)  ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; - - - संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं|

क्यों संकलित की गईं उपरोक्त धाराएँ?

उपरोक्त धाराएँ ईमामों द्वारा मस्जिदों से प्रसारित की जाने वाली (ईशनिंदा)अज़ान और काफिरों के नरसंहार की शिक्षा देने वाले खुत्बों पर कभी लागू नहीं की गईं| क्यों कि इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश है {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान} और ईसाइयों और मुसलमानों सहित इंडिया के नागरिक अंग्रेजों के दास| दास के अधिकार नहीं होते| न दासों का अपमान होता है| अतएव उपरोक्त धाराएँ इसलिए बनाई गई हैं कि ईसाइयों और मुसलमानों को वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटाने में कोई अड़चन न पैदा हो| 

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर आप को अशक्त और पराजित कर रखा है| आप से आप की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया| मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९ग का संकलन करा कर, आप को कत्ल होने के लिए, सदा सदा के लिए आप की धरती छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| राष्ट्रपति और राज्यपालों को वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेने के लिये विवश कर दिया|

अपने पद, प्रभुता और पेट के लिए विवश राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान और कानूनों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेनी ही पड़ेगी| यानी राष्ट्रपति और राज्यपाल हर ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) व मुसलमान (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९) को अपनी ही हत्या का अधिकार देने व अपनी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए विवश हैं| ईमाम, जिन मस्जिदों से आप के हत्या की शिक्षा देते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की, काफिरों के नरसंहार की और काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उनको सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) पर राष्ट्रपति और राज्यपाल, वेतन दिलाते हैं| पुलिस संरक्षण देते हैं| काफिरों के कर के पैसे से मस्जिदों और हज भवनों का निर्माण कराते हैं| जो भी काफ़िर हत्या या ईशनिंदा के केंद्र मस्जिदों या ईमामों का विरोध करे उसकी हत्या का निर्देश कुरान में (कुरआन ८:१७) है जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). फिर भी राष्ट्रपति, राज्यपाल या लोकसेवक न लज्जित हैं न कुछ कर सकते हैं| न भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ या  भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का १९४७ से एक भी विरोधी का किसी को ज्ञान है! जानते हैं क्यों? क्यों कि ईसाइयत और इस्लाम का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या साध्वी प्रज्ञा-सबके विरोध को दबा दिया गया|

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

जिस प्रकार इस्लाम की विरोधी आसमा बिन्त मरवान को वीभत्स विधि से मुहम्मद के अनुयायियों ने उसके ५ अबोध बच्चो सहित कत्ल किया था, उसी प्रकार कैंसरग्रस्त साध्वी प्रज्ञा को सोनिया के मातहतों ने जीवित ही मार डाला है| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है और कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ डाला गया है| हमारे जगतगुरु के मुहं में गोमांस ठूसा गया| शिकायत करने के बाद भी बंधुआ जज कुछ न कर पाए| हमारे ९ अन्य ईसाइयत और इस्लाम विरोधियों को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम से बचाना चाहते हैं| साध्वी प्रज्ञा अपराध स्थल मस्जिदों के विरोध के कारण ही जेल में हैं|

तबके न्यायिक जांच और अल्लाह के (इल्हाम) संदेश ने आज ईशनिंदा और राज्य के विरुद्ध अपराध ने ले लिया है| मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| लेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति देकर, जजों से, उत्पीडित कराया जा रहा है| क्यों कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हत्यारी व लुटेरी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को अपनी - अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार दिया है| ईसाई और मुसलमान ईशनिंदा के अपराध में विरोध करने वालों को कत्ल कर रहे हैं और राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अपराध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देकर ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने व अपने ही सर्वनाश के लिये विवश हैं| राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं| ५ आज भी लम्बित हैं|

अतएव राष्ट्रपति, राज्यपाल या लोकसेवक अपनी खैर मनाएं| मानवीय न्याय के लिए निज हित में साध्वी के सपनों को साकार करने, हमारे अभियोग वापस लेने में, अज़ान बंद कराने, चर्च, मस्जिद, अज़ान और संविधान मिटाने में आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Grievance Regn No is:PRSEC/E/2013/19342


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AyodhyaP Tripathi,
Nov 25, 2013, 4:48 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Nov 25, 2013, 4:49 AM
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