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न्याय

http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/There-is-public-frustration-tardy-litigation-Pranab_5_2_9838207.html

महामहिम प्रणब दा!

दैनिक जागरण के अनुसार आप ने न्याय में विलम्ब के लिए असंतोष व्यक्त किया है| पूरा समाचार उपरोक्त लिंक पर उपलब्ध है|

भारतीय संविधान और कानून न्याय के लिए नहीं संकलित किये गए हैं| वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया और १८५७ से ईसा के साम्राज्य का विरोध करने लगे| जो बाइबल के अनुसार अपराध है| ईसा ने ईसाइयों को स्पष्ट आदेश दे रक्खा है. "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७). इसके अतिरिक्त बाइबल के अनुसार अपने द्वितीय आगमन पर ईसा जेरूसलम में विश्व का राजा बन कर बैठेगा| वैदिक सनातन धर्म सहित सभी धर्मों और उनके अनुयायियों को नष्ट कर देगा और केवल अपनी पूजा करवाएगा|

हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा और ईसाइयत की बारी है| चुनाव द्वारा भी कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते थे| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है|

आप सोनिया द्वारा मनोनीत दया के पात्र मातहत हैं| आप ने इंडिया के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के समक्ष वचन दिया है, 'मैं प्रणब मुखर्जी, ईश्वर की शपथ लेता/ सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक राष्ट्रपति पद के कर्तव्यों का निर्वहन सत्यनिष्ठा से करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूंगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूंगा।'

भारतीय संविधान सबको दास बनाकर लूटने और जो दास न बने उसे कत्ल करने के लिए संकलित किया गया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद(१) की शर्त है,

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९()- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) भाग मौलिक अधिकार|

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९() है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है| इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! ( आई आर १९५१ एस सी ४५८)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९() की शर्त है,

"३९()- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९().

दंड प्रक्रिया संहिता

धारा १९६| राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – () कोई न्यायालय, - 

(क) भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय के अधीन या धारा १५३(), धारा २९५() या धारा ५०५ की उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा

(ग) भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८() में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं|

अथवा

(१-) कोई न्यायालय, -

(क)      भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १५३() या धारा ५०५ की उपधारा () या उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

(ख)      ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति से ही करेगा, अन्यथा नहीं|

१९७| न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम (दोनों ही अल्पसंख्यक नहीं हैं| फिरभी धूर्तता पूर्वक स्वीकार किये गए हैं) को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत इस्लाम मिशन जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| (कुरान :१२)

 (संदर्भः महाभारत, शान्तिपर्व, अध्याय 15)

दण्डः शास्ति प्रजाः सर्वा दण्ड एवाभिरक्षति ।

दण्डः सुप्तेषु जागर्र्ति दण्डं धर्म विदुर्बुधाः ॥2

भावार्थः (अपराधियों को नियंत्रण में रखने के लिए दण्ड की व्यवस्था हर प्रभावी एवं सफल शासकीय तंत्र का आवश्यक अंग होती है ।) यही दण्ड है जो प्रजा को शासित-अनुशासित रखता है और यही उन सबकी रक्षा करता है । यही दण्ड रात्रिकाल में जगा रहता है और इसी को विद्वज्जन धर्म के तौर पर देखते हैं ।

लेकिन आप स्वयं न्याय और दंड व्यवस्था के शत्रु हैं| आप ने उस संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ ली है, जो आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| नागरिक के पास शिकायत का भी अधिकार नहीं है|

अजान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| न मस्जिद से साम्प्रदायिक विद्वेष और वैमनस्यता की शिक्षा देना ही उपरोक्त धाराओं के अधीन अपराध माना जाता है| लेकिन अजान, कुरान और मस्जिद का विरोध घोर अपराध है| अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी आत्मरक्षार्थ मस्जिदों में विष्फोट करने के अपराध में जेलों में हैं| प्रेसिडेंट व हर राज्यपाल ने अजान व मस्जिद को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), पुलिस के संरक्षण और दंप्रसंकीधारा१९६ के कवच में रखा है| अजान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इसके विपरीत जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध कर रहा है, दंप्रसंकीधारा१९६ के अंतर्गत जेल में ठूस दिया जा रहा है|

आप विकल्पहीन व दया के पात्र हैं| या तो स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| आप के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| आप चाहें तो ऐसे भारतीय संविधान को आर्यावर्त सरकार रद्द करेगी| सम्पादक|

 

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