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निष्पक्ष चुनाव२?

भ्रष्टाचार की जड़

चुनावआयोग सोनिया के मातहत राज्यपाल बनवारी द्वारा मायावती व मुलायम को दंप्रसंकीधारा१९७ में दिए गए संरक्षण को भ्रष्टाचार नहीं मानता और न ही आचार संहिता का उल्लंघन मानता है| भ्रष्टाचारी केवल वह है जो लूट कर सोनिया को हिस्सा न दे|

भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. अनुच्छेद २९(१).का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है| सोनिया को भय वैदिक सनातन धर्म से है. मुसलमान तो सोनिया की मुट्ठी में हैं|

अमेरिकी, अफ़्रीकी और आष्ट्रेलियाई आदि धरतियां आज भी हैं| अंतर पड़ा है वहाँ के आदिवासियों के स्वतंत्रता और संस्कृतियों के विनाश का| इन संस्कृतियों को मिटाने के लिए ईसाइयत और इस्लाम को परिश्रम करना पड़ा था| आप का वैदिक सनातन धर्म पूरे विश्व में था. आप के पास उपासना की आजादी थी (गीता ७:२१), जीने का अधिकार था और सम्पत्ति व पूँजी रखने का भी| (मनुस्मृति ८:३०८). लेकिन भारतीय संविधान का संकलन कर वैदिक सनातन धर्म और राज्य प्रणाली को बिना श्रम मात्र शब्दों की बाजीगरी से समाप्त कर दिया गया है|

इंडिया में जनतंत्र नहीं सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है. सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया| प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के बल पर लोकसेवक नागरिकों को लूट रहे हैं| नागरिक, पुलिस अथवा जज लोकसेवक पर तभी कार्यवाही कर सकते हैं, जब सोनिया या उसके मनोनीत प्रेसिडेंट या राज्यपाल अनुमति दें| यानी आज जनता को लूटने का एकाधिकार सोनिया के पास है| चुनावआयोग को इन काले कानूनों से परहेज नहीं है| मीडियाकर्मी भी जनताको इनकालेकानूनों से बचाना नहीं चाहते| मीडिया कर्मी सोनिया के इस एकाधिकार को छिपाने का अपराध करते हैं| यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

राज्यपाल की विशेषता यह है कि वह जनता का चुना प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि सोनिया का मनोनीत प्रदेश का शासक होता है, जिसे सोनिया जब चाहे उसके पद से हटा सकती है| यद्यपि राज्यपाल जनता का प्रतिनिधि नहीं होता, फिर भी जनता द्वारा चुनी हुई किसी भी सरकार को हटा कर राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है|

यह कैसा लोकतंत्र व चुनाव है, जिसमे सोनिया द्वारा मनोनीत राज्यपाल प्रदेश की जनता द्वारा चुने हुए सरकार को मिनटों में हटा देता है? येदियुरप्पा तो जेल जा सकते हैं; लेकिन मुख्य मंत्री मायावती व मुलायम जेल नहीं जा सकते! चुनाव द्वारा मतदाता भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) में कोई परिवर्तन नहीं कर सकते| ज्ञातव्य है कि अनुच्छेद २९(१) किसी को जीने का अधिकार नहीं देता और ३९(ग) किसी नागरिक को सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार नहीं देता| यहाँ तक कि मुसलमानों और ईसाइयों को भी नहीं|

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग भी जारज व प्रेत ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते (बाइबल, लूका १९:२७) और लुटेरे, (कुरान ८:१, ४१ व ६९), हत्यारे (कुरआन ८:१७) और बलात्कार कराने वाले अल्लाह की पूजा (कुरान २:१९१) नहीं करते| इसी अपराध के लिए हमें दंडित किया जा रहा है| इसीलिए हमारे ९ अधिकारी, जो ईसाइयत, चर्च, इस्लाम, अजान और मस्जिद विरोधी हैं, मालेगांव बम कांड में जेलों में हैं|

२६ जनवरी, इश्वी सन १९५० से आज तक भारतीय संविधान का हमारे जगत गुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ के अतिरिक्त एक भी विरोधी पैदा न हुआ| हमारे जगत गुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ इसलिए जेल में हैं और आज हम इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि हम अपना देश और वैदिक सनातन धर्म वापस चाहते हैं|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग इसलिए लड़ रहे हैं कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास न बनें. मुसलमान और ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार न करने पायें. आप के घर न लूट लिए जाएँ और आप कत्ल न कर दिए जाएँ. मैं आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हूँ. और न कुरान व बाइबल को धर्म पुस्तक स्वीकार करता हूँ. मै भारतीय संविधान, कुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानता हूँ. जो ऐसा नहीं मानता, वह दया का पात्र है.

दास बनाने के लिए किसान सांड को वीर्यहीन कर बैल बनाता है और शासक यहूदी और मुसलमान का खतना कर दास बनाते हैं; ईसाई को भेंड़ बनाते हैं और आप की नसबंदी कराते हैं| हम वीर्यहीन बनने के लिए तैयार नहीं हैं| स्वतंत्रता और विवेक के लिए इन मजहबों में कोई स्थान नहीं है| कुरान २:३५ व बाइबल, उत्पत्ति २:१७. हम गायत्री मंत्र द्वारा ईश्वर से बुद्धि को सन्मार्ग पर ले जाने की प्रार्थना करते हैं| हमारी गीता मानव मात्र को उपासना की आजादी देती है| हम जेहोवा और अल्लाह के उपासना की दासता स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं| हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह कराने वाले ईसा व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाह और धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग देने वाले (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) जेहोवा और अल्लाह को ईश्वर मामने के लिए तैयार नहीं हैं| अजान व नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं. मस्जिद जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं.

क्या आप को लज्जा नहीं आती कि आप के देश से कटे दो भूभाग पर दो इस्लामी राज्य हैं. नागालैंड में संघ सरकार के समानांतर दो ईसाई राज्य चल रहे है| एक करोड़ से कम आबादी वाले यहूदियों का अपना देश इजराइल है और आप का संसार में कोई राज्य नहीं! एकमात्र हिंदू राष्ट्र नेपाल भी समाप्त हो गया!!

आप अकेले यह युद्ध नहीं लड़ सकते. धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया. उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. क्या आप हम लोगों की सहायता करेंगे, ताकि सोनिया आप की आँखों के सामने आप की सम्पत्ति और घर न लूट ले, आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर न मार डाले जाएँ, नारियों का सोनिया बलात्कार न करा पाए और आप कत्ल न हों? (बाइबल, याशयाह १३:१६).

भारतीय संविधान ने राज्यपालों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने नागरिकों को लूटने व दास बनाने के अतिरिक्त {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)} कोई विकल्प नहीं छोड़ा है. वर्तमान परिस्थितियों में दंप्रसंकीधारा१९७ के अधीन सोनिया द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक नागरिक ईसा की भेंड़ है. अगर आप जीवित रहना चाहते हैं, तो आप के पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. सुभास की भांति मै आप से खून नहीं मांगता, मात्र भारतीय संविधान को मिटाने के लिए हर प्रकार का सहयोग चाहता हूँ|

सम्पादक.

 

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AyodhyaP Tripathi,
Mar 4, 2012, 9:32 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Mar 4, 2012, 9:31 AM
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