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Dated: Saturday, January 28, 2012y

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एक आवाहन!

गणतन्त्र दिवस का बहिष्कार करें.

गणतन्त्र एक अत्यंत घिनौना शब्द है. यह मुख्यत: तीन पाश्चात्य संस्कृतियों ईसाइयत, इस्लाम और मार्क्स के साम्यवाद का मिश्रण है. ईसाइयत और इस्लाम का प्रारम्भ बाइबल, उत्पत्ति व कुरान के इस हठधर्मी के साथ हुआ है कि जब आदम ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया तो दोनों सैतानो जेहोवा (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व अल्लाह (कुरान २:३५) ने आदम और हौवा को स्वर्ग से भगा दिया. जिसकी अंतिम परिणति मानव जाति का डायनोसार की भांति अंत है.

इंडिया में गणतंत्र नहीं सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है. सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं, जो आप को दास बनाये हुए है| यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त? क्या आप ने सोचा?

जहां हम आर्य ब्रहम की संततियां हैं, वहीं यह लोग अब्रहमिक संततियां हैं. जहां हम अपने ईश्वर से स्वतंत्रता और बुद्धि के प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं. (गायत्री मंत्र) वहीं इमाम दास बनने और बनाने के लिए गोलबंद हो कर मस्जिदों से चिल्लाते हैं. हमारा ईश्वर हमें उपासना की स्वतंत्रता देता है, (गीता ७:२१). भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९) व (कुरान २:१९१)..स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

दया के पात्र व विकल्पहीन नेताओं, सुधारकों, संतों, मीडिया, इस्लामी मौलवियों, मिशनरी और जजों सहित लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैं. सच छुपा नहीं है, न ही इसे जानना मुश्किल है.  मानव उन्मूलन की कीमत पर  आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है. मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणा स्रोत को नष्ट न कर दें. उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणा स्रोत (कुरान ८:३९) और (बाइबल, लूका १९:२७) है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| इनको ज्ञात होना चाहिए कि यह संस्कृतियों का युद्ध है. ईसाइयत और इस्लाम आतताई और दास बनाने वाली संस्कृतियां हैं. भारतीय संविधान, ईसाइयत और इस्लाम है तो मानव जाति बच नहीं सकती| इस सत्य को छिपाने के लिए दंप्रसं की धारा १९६ का संकलन किया गया है|

अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब भारत को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानोंका मजहबी व संवैधानिक अधिकारहै. ईसाको अर्मगेद्दोंद्वारा सभीसंस्कृतियों और उनके अनुयायियोंको कत्लकर अपनासाम्राज्य बनानाहैं| अपने हत्यारों को हम क्यों जीवित छोड़ें? (भारतीय दंड संहिता की धारा १०२)

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| ईसा १० करोड़ अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति निगल रही है.

एक प्रमुख अंतर यह भी है कि जहां ईसाइयत और इस्लाम को अन्य संस्कृतियों को मिटाने में परिश्रम व लंबा समय लगा वहीँ बिना श्रम या समय व्यय के वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए २६ नवम्बर, १९४९ को ही संविधान बना कर ईसाइयत और इस्लाम के हाथों में सौँप दिया गया है|

संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे. क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ. संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ. फिर हम भारत के लोगों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. हमने बाबरी ढांचा गिराया है और हम मालेगांव के अभियुक्त हैं| काबा हमारी है| अजान ईशनिंदा है और कुरान संसार में फुंक रही है| इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने सोनिया के रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं. इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं.

ईशनिन्दक अजान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| प्रेसिडेंट व हर राज्यपाल ने अजान व मस्जिद को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), पुलिस के संरक्षण और दंप्रसंकीधारा१९६ के कवच में रखा है| अजान देने के बदले सरकारें इमामों को सरकारी खजाने से वेतन दे रही हैं| वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से! (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). अजान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इसके विपरीत जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करता है, दंप्रसंकीधारा१९६ के अंतर्गत दंड पाता है|

राजा धर्मरक्षक होता है| धर्म राज्य के आश्रय से ही फलता फूलता है| जैनियों के २४ तीर्थंकर जैन धर्म की दीक्षा लेने के पूर्व राजा थे, लेकिन राजाश्रय के अभाव में जैन धर्म उतना नहीं फ़ैल सका, जितना अकेले अशोक के राजाश्रय से बौद्ध धर्म फैला| संघ सरकार ने वैदिक सनातन धर्म को संकट में डाल दिया है| वैदिक सनातन धर्म की रक्षा के लिए राजा और आर्यावर्त सरकार का होना आवश्यक है| मनु का आदेश है,

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत.

अर्थ: रक्षा किया हुआ धर्म ही रक्षा करता है, और अरक्षित धर्म मार डालता है, अतएव अरक्षित धर्म कहीं हमे न मार डाले, इसलिए बल पूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए. (मनु स्मृति ८:१५).

यदि आप वैदिक सनातन धर्म का निरादर करेंगे और रक्षा नहीं करेंगे तो आप मारे जायेंगे. आप का वैदिक सनातन धर्म पूरे विश्व में था. आज भारत में ही वैदिक सनातन धर्म मिट रहा है| आज हम इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि हम जेहोवा और अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं. अजान व नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं. हम मस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं. आइये इस धर्म युद्ध में हमारा साथ दीजिए| अपने पर नहीं तो अपने दुधमुहों और अपनी नारियों पर तरस खाइए| (बाइबल, याशयाह १३:१६). अगर जीवन, आजादी और सम्पत्ति का अधिकार चाहिए तो आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिए|

संविधान का अनुच्छेद २९(१) उन ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है जो हमें जीवित रहने, धरती रखने और नारी रखने का अधिकार नहीं देते. संविधान का अनुच्छेद ३९(ग), ईसाइयत और इस्लाम नागरिक को सम्पत्ति रखने का अधिकार ही नहीं देते. वैदिक संस्कृति, काफ़िर और भारत को बचाने का कोई कानून नहीं है. चुनाव द्वारा इसे कोई नहीं बदल सकता है

सोनिया कैथोलिक ईसाई है. धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है. (व्यवस्था विवरण, १३:६-११). व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है. (कुरान ४:८९). २०११ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे. न १४३१ वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे. अतएव धर्मत्यागी सोनिया व हामिद को उनके ही मजहब के अनुसार कत्ल करने का हमे भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार है. हमारे पूर्वजों से भूल हुई है. उन्होंने इस्लाम की हठधर्मी को मुसलमानों पर लागू नहीं किया. हर काफ़िर आर्यावर्त सरकार को सहयोग दे. आर्यावर्त सरकार मुसलमानों की हठधर्मी मुसलमानों पर लागू करेगी. मुसलमान या तो इस्लाम छोड़ें या भारत.

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. अनुच्छेद २९(१).का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है. अतएव गणतन्त्र दिवस के बहिष्कार की ईश्वर की आज्ञा है|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आप के लिए प्रताड़ित हो रहे हैं| हम न बचे तो न आप बचेंगे, न आप की आजादी, न आप का वैदिक सनातन धर्म और न आप की सम्पत्ति व नारियां| निर्णय कर लीजिए| आप के पास समय नहीं है|

सम्पादक.

  

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