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धर्म निंदा पर आपत्ति?

मुफ्ती उसे कहते हैं, जिसे पूरी कुरान याद हो| ऐसे ही रट्टू मुफ्ती एजाज अरशद कासमी को सोशल नेटवर्किंग साइट के लेख धर्म विरुद्ध व आपत्ति जनक लगे| जज ने सामग्री हटाने का निर्णय भी कर दिया, लेकिन १४ सौ वर्षों से मस्जिदों से चिल्लाई जाने वाली अजान किसी को आपत्ति जनक नहीं लगती| शासकों को भी अजान, मस्जिद, इस्लाम और कुरान में इसलिए बुराई नहीं दिखाई देती कि मुसलमानों ने स्वेच्छा से दासता स्वीकार कर लिया है| अजान में मुसलमान ईमाम के कथन का विवरण नीचे की लिंक में पढ़ें, http://www.aryavrt.com/fatwa

मस्जिदों से ईमामों के खुतबों को ध्यान पूर्वक सुनिए. 

ईमामों को कुरान के आदेशों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की भी आवश्यकता नहीं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर आप के कर से प्राप्त १० अरब रुपयों में से वेतन लेकर ईमाम बदले में कुरान के सूरह अनफाल (८) की सभी मुसलमानों को सीधी शिक्षा देते हैं. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). अजान द्वारा ईमाम स्पष्ट रूप से गैर-मुसलमानों को चेतावनी देते हैं कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. अल्लाह के आदेश से ईमाम कहता है कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं. (कुरान ४:१०१). खुतबे कुरान के सूरह अनफाल (८) में स्पष्ट दिए गए हैं. अल्लाह निश्चय रूप से कहता हैं कि उसने मुसलमानों को जिहाद के लिए पैदा किया है, युद्ध (जिहाद) में लूटा हुआ माल, जिसमे नारियां भी शामिल हैं, अल्लाह और मुहम्मद का है. (कुरान ८:१, ४१ व ६९). जान लो जो भी माल लूट कर लाओ, उसका ८०% लूटने वाले का है. शेष २०% अल्लाह, मुहम्मद, ईमाम, खलीफा, मौलवी, राहगीर, यतीम, फकीर, जरूरतमंद आदि का है. (कुरआन ८:४१). लूट ही अल्लाह यानी सत्य है. लूट में विश्वास करने वाले विश्वासी हैं. (कुरआन ८:२). विश्वासी लूट के लिए घर छोड़ देते हैं, (कुरआन ८:५). मै गैर-मुसलमानों में भय पैदा करता हूँ. तुम अंतिम गैर-मुसलमान को मिटा दो. (कुरआन ८:७). गैर-मुसलमानों के गले काटो, उनके हर जोड़ पर वार करो और उनको असहाय कर दो. क्यों कि वे अल्लाह के विरोधी हैं, (कुरआन ८:१२). जो भी अल्लाह और मुहम्मद के आदेशों का उल्लंघन करता है, वह जान ले कि अल्लाह बदला लेने में अत्यंत कठोर है. (कुरआन ८:१३). काफ़िर के लिए आग का दंड है. (कुरआन ८:१४). जब काफिरों से लड़ो तो पीठ न दिखाओ. (कुरआन ८:१५). तुमने नहीं कत्ल किया, बल्कि अल्लाह ने कत्ल किया. (कुरआन ८:१७). मुसलमानों को लड़ाई पर उभारो. (कुरआन ८:६५). तब तक बंधक न बनाओ, जब तक कि धरती पर खून खराबा न कर लो. (कुरआन ८:६७). जो भी लूट का माल तुमने (मुसलमानों ने) प्राप्त किया है, उसे परम पवित्र मान कर खाओ. (कुरआन ८:६९). सत्य स्पष्ट है. काफिरों को आतंकित करने व समाप्त करने के लिए मुसलमानों में जोश पैदा करते हुए अल्लाह कहता है, जब तुम काफिरों से लड़ो, तो उनको इस तरह परास्त करो कि आने वाले समय में उन्हें चेतावनी मिले. काफ़िर यह जान लें कि वे बच नहीं सकते. (कुरआन ८:६०) जो मुसलमान नहीं वह काफ़िर है| कत्ल से कुफ्र बुरा है (कुरान २:१९१). इस्लाम है तो काफ़िर कि मौत पक्की| क्यों रहे इस्लाम?

यह आश्चर्य है कि मुफ्ती और जज को कुरान के उपरोक्त आदेश आपत्तिजनक नहीं लगते. ऐसा नहीं है कि मेरी माँ के हत्यारे जज को उपरोक्त लेखों का ज्ञान नहीं है| मुझको इसी हत्यारे जज ने थाना नरेला के दो प्राथमिकियों १०/२००१ व ११०/२००१ में न्यायिक अभिरक्षा में तिहाड़ जेल भेजा था| लेकिन हर जज विवश है, यदि मुफ्ती की बात नहीं मानेगा तो दिल्ली उच्च न्यायालय के जज शमित मुखर्जी की भांति जेल चला जायेगा|

संविधान के अनुच्छेद ३१ के संशोधन को मान्यता, समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कन्याओं को पब में शराब पीने और नंगे नाचने का अधिकार, सगोत्रीय विवाह के कानून तो जजों ने ही पास किये हैं. बचना हो तो सोनिया को जेल भेजने में हमें सहयोग दीजिए.

दया के पात्र विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही आप ईसा की भेंड़ हैं.

आत्मघाती और धर्मद्रोही जजों को ज्ञात होना चाहिए कि यह संस्कृतियों का युद्ध है. ईसाइयत और इस्लाम आतताई और दास बनाने वाली संस्कृतियां हैं. भारतीय संविधान, ईसाइयत और इस्लाम है तो मानव जाति बच नहीं सकती| इस सत्य को छिपाने के ही लिए दंप्रसं की धारा १९६ का संकलन किया गया है| जो भी सच लिखेगा, मिटा दिया जायेगा| यानी आप की मृत्यु पक्की|

हमने बाबरी ढांचा गिराया है. क्यों कि विवाद का मूल बिंदु है कि अपराध स्थल मस्जिद धरती पर क्यों रहें? मस्जिद बचाने वाले अपराधी हैं. स्वयं मैकाले के कथनानुसार १८३५ ई० तक मैकाले को पूरे इंडिया में एक भी भिखारी या चोर नहीं मिला क्यों कि तब वैदिक सनातन धर्म आधारित राजतंत्र था. पढ़ें मेरी पुस्तक ‘अजान’. हमारे १२ अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं. मनुष्य के पुत्र का मांस खाने वाली और लहू पीने वाली सोनिया (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) द्वारा हम इसलिए सताए जा रहे हैं कि हम जानना चाहते हैं कि नारियों की लूट व उनके बलात्कार को निंदनीय न मानने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान ४:२४; २३:६; ३३:५० व ७०:३०). मुहम्मद की अपनी ही पुत्रवधू जैनब के साथ मुहम्मद का निकाह कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, ३३:३७-३८). लुटेरा व हत्यारा अल्लाह ईश्वर कैसे है? मूर्ति भंजन कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). हत्या, लूट, बलात्कार, धर्मान्तरण और राष्ट्रांतरण की संहिता कुरान धर्मपुस्तक कैसे है?

जब हमने बाबरी ढांचा गिराया था तो मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़े गए, जिनमे से ३८ की विधिवत प्राथमिकियां पंजीकृत हैं. जिसका विवरण हमारी पुस्तक 'अजान' के १० वें संलग्नक में उपलब्ध है. इन्हें आप हमारी वेब साईट http://www.aryavrt.com/azaan पर निः शुल्क पढ़ सकते हैं.

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

बाबरी विध्वंस के ४९ अभियुक्त बने और १७ वर्षों तक लिब्रहान आयोग जाँच की नौटंकी करता रहा. हमने १५ जनवरी २००१ को शपथपत्र दिया कि ढांचा हमने गिराया है, उसे चुरा लिया. जनता का ८ करोड़ रुपया डकार गया. लेकिन हमारे मंदिरों को तोड़ने वाला कोई अभियुक्त नहीं और न कोई जाँच आयोग. ४ मस्जिदों के विष्फोट के लिए हम भगवा आतंकवादी हैं! हम जानना चाहते हैं कि १०८ मंदिर तोड्वाने वाली सोनिया सरकार कौन है?

आतंकवादी भगवा धारी हैं या सरकार? हमारे मंदिरों पर सोनिया सरकार का कब्जा है, क्या किसी मस्जिद या चर्च पर भी सोनिया सरकार का कब्जा है?

हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो निरस्त कर दी गई. मैंने पत्रक ‘मुसलमानों भारत छोड़ो’ और ‘ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था. जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया. बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ. अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं. मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी. वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, दिल्ली से चल रहा है. इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है. मैं अजान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ.

मै अस्सी साल का बूढ़ा व्यक्ति हूँ| मुझे जेल में २००१ में ही डॉक्टरों ने जहर दिया| जज के आगे झुकने के पहले सोसल वेबसाइट के स्वामी मानव जाति के हित में इस्लाम को जड़ से मिटाने में अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार का सहयोग करें|

भवदीय:-

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

 

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AyodhyaP Tripathi,
Dec 24, 2011, 6:30 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Dec 24, 2011, 6:29 AM
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