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चिदम्बरम पर अभियोग एक धोखा?

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पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी कन्या सुहासिनीं हैदर का निकाह मुसलमान से किया है| इस्लाम हम काफिरों को जीवित रहने का अधिकार नहीं देता| सुहासिनी हमारे शत्रु पैदा कर रही है| हम काफिरों को कत्ल करने से सुहासिनी के बेटों को जन्नत मिलेगी|

कितने लोगों को पता है कि भारतीय संविधान का संकलन ही वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है? पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी सहित जिसने भी ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान में निष्ठा की शपथ ली है, मानवता का शत्रु है.

कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन ईसाइयत और इस्लाम को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है, {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)}, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए.

अतएव वैदिक सनातन धर्म की रक्षा के लिए ईसाइयत और इस्लाम का धरती से सफाया आवश्यक है.

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| जज, प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है. परभक्षी संविधान का अनुच्छेद २९(१) किसी नागरिक को जीने का अधिकार नहीं देता और ३९(ग) नागरिक को सम्पत्ति या पूँजी का अधिकार ही नहीं देता. दंप्रसं की धाराओं १९६ व  १९७ से भयभीत भारतीय संविधान को कोई हत्यारों का संरक्षक, भ्रष्टाचारी व आतंकवादी नहीं कह सकता.

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल, चर्च, मस्जिद, ईसाइयत और इस्लाम को मिटाना चाहते हैं और पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी अपनी बेटी देकर इस्लाम का पोषण कर रहे हैं| किसके साथ हैं आप?

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही.... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है. आप अन्ना, योगगुरू और स्वामी से बचें|

इंडिया में लोकतंत्र नहीं सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है. सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. आपकी आजादी व जीनेका अधिकार कहाँ है?

यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त? क्या आप ने सोचा?

चिदम्बरम सहित दया के पात्र जज, प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल रोमराज्यकी सर्वेसर्वा सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है. इन के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है.

जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन, सोनिया के मनोनीत राज्यपालों द्वारा शासित हैं. अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). 

स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. हमारे वैदिक सनातन धर्म व ईश्वर का अपमान करने वाले हर मुसलमान और ईसाई को दंप्रसं की धारा १९६ द्वारा संरक्षण प्राप्त है, लेकिन अपने प्राणों की रक्षा के लिए मांग करने वाले १२ लोग मस्जिद बचाने के लिए उसी दंप्रसं की धारा १९६ के अधिकार से भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन जेल में बंद हैं.

ईसा १० करोड़ सेअधिक अमेरिकी लालभारतीयों व उनकी मायासंस्कृतिको निगलगया. अब ईसाकीभेंड़ सोनिया कालेभारतीयों व उनकी वैदिकसंस्कृति को निगलरहीहै.

भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की जिसने भी शपथ ली है, उससे सोनिया का रोम राज्य अपेक्षा करता है, "३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;"

इतना ही नहीं, दंप्रसं की धारा १९७ के अंतर्गत अपराधी वह है, जिसे सोनिया अपराधी माने| १९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

प्रस्तुत २जी घोटाले के वास्तविक अपराधी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंप्रसं की धारा १९७ है| जिसके नियंत्रण में उपरोक्त एकाधिकारी कानून रहेंगे, वह जनता को लूटेगा और सोनिया की भांति किसी भी दंड से मुक्त रहेगा| यह तानाशाही है, लोकशाही नहीं|

यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व दंप्रसं की धारा १९७ का ही कमाल है कि जज उसे ही दंडित कर सकेगा जिसकी सोनिया अनुमति देगी! जज घोटालोंका अधिकतम हिस्सा लेनेवाली सोनिया को छू भी नहीं सकते|

क्या आप अपराधी को संरक्षण देने वाले दंप्रसं की धारा १९७ व भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) का उन्मूलन नहीं चाहेंगे? अगर यह धारा न होती तो क्या चिदंबरम अपराधी गुप्ता का अभियोग वापस ले सकते थे? यदि आप का उत्तर हाँ में हो तो आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिए|

कृपया दंप्रसं की धारा १९७ का अध्ययन करें| चिदम्बरम ने भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली है| नागरिकों की सम्पत्ति और पूँजी को लूटना चिदम्बरम का संवैधानिक उत्तरदायित्व है. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)}. चिदम्बरम को दण्डित सिर्फ सोनिया कर सकती है| यह सोनिया के पास दंप्रसं की धारा १९७ से प्राप्त विशेषाधिकार है| जज चिदम्बरम पर अभियोग ही नहीं चला सकते| स्वामी क्या कर लेंगे?

भ्रष्टाचार के विरुद्ध आज अन्ना, योगगुरू, श्री श्री रविशंकर और पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी लड़ रहे हैं| इनमे एक समानता है| कोई भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व दंप्रसं की धारा १९७ का विरोधी नहीं है| मेरा अनुरोध है कि ये लोग इन काले कानूनों का गहन अध्ययन करें और मानवता की रक्षा के लिए इनके उन्मूलन में हमें सहयोग दें| अन्यथा यह संदेश जायेगा कि सभी जनता को लूटने के लिए सोनिया से गुप्त समझौता कर आंदोलन कर रहे हैं| ताकि जनता को उनकी सम्पत्ति व पूँजी रखने से वंचित कर किसान के बैल की भांति दास बनाये रखा जाये|

आप अकेले यह युद्ध नहीं लड़ सकते. धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शीयोद्धाचिन्तकसमाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुएलेकिनमालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्धजगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया. उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. क्या आप हम लोगों की सहायता करेंगेताकि सोनिया आप की आँखों के सामने आप की सम्पत्ति और घर न लूट ले, आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर न मार डाले जाएँ, नारियों का सोनिया बलात्कार न करा पाए और आप कत्ल न हों? (बाइबलयाशयाह १३:१६). 

हम वेदों की आज्ञानुसार धर्म राज्य स्थापित करेंगे और आप धर्म निरपेक्ष हैं. बिना धर्म रक्षा के मानवता की रक्षा सम्भव नहीं है.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

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AyodhyaP Tripathi,
Dec 18, 2011, 6:39 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Dec 18, 2011, 6:37 AM
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