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Dated: Thursday, September 29, 2011y

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प्रकाशनार्थ

पूर्व वित्त व वर्तमान गृह मंत्री चिदम्बरम


सम्पादक महोदय, दैनिक जागरण.

आप के सम्मानित दैनिक के माध्यम से मै पाठकों का ध्यान सोनिया के रोम राज्य में नागरिकों के संवैधानिक {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)} लूट की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ|

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है – शत्रु की रणनीति जानो. हम ईसाइयत और इस्लाम की रणनीति को नहीं जानते, अतएव मानव जाति ही समाप्त हो जायेगी. क्यों कि मुसलमान गैर-मुसलमान को कत्ल करेगा (कुरान ८:३९) और ईसाई गैर-ईसाई को. (बाइबल, लूका १९:२७). इस प्रकार जो भी ईसाइयत और इस्लाम, बाइबल और कुरान और भारतीय संविधान का समर्थक है, मानवता का शत्रु है.

इंडिया में लोकतंत्र नहीं सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है. सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. 

कांग्रेस ने जिन ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए किया है. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों व उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है.

यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

भारतीय संविधान ने दया के पात्र राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. भारतीय संविधान के संरक्षक, प्रतिरक्षक और आस्थावान लोग वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश हैं| इन लोगों ने सोनिया की दासता स्वीकार कर अपनी नारियां, सम्पत्ति और जीवन ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दिया है| दया के पात्र विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है. इस कार्य के लिए हम आप का सहयोग चाहते हैं. क्या आप हमे सहयोग देंगे?

भ्रष्टाचार सोनिया करती है, नौकरी थोमस की जाती है जेल राजा जाते हैं. इस सच्चाई को छिपाते हुए मीडिया को लज्जा क्यों नहीं आती? जज, मीडिया व सरकार सोनिया को संरक्षण देने के अपराधी हैं.

अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के मेरे बन्धु माननीय श्री सुब्रमनियन स्वामी का धन्यवाद करते हैं, जिनके भगीरथ प्रयत्न से दूसरे श्रेणी का चोर पकड़ा गया, लेकिन चोरों की सरगना तो सोनिया है, वह आज भी पकड़ के बाहर है. लेकिन वह पकड़ में तभी आ सकती है, जब हम भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का उन्मूलन करें.

ऐसा तभी सम्भव है जब इस देश का नौजवान सोनिया और भारतीय संविधान के विरुद्ध खड़ा हो. आर्यावर्त सरकार को सहयोग दे. आर्यावर्त सरकार स्वामी अमृतानंद के सपनों को साकार करना चाहती है और स्वामी जी का सपना है, ईसाइयत और इस्लाम के समूल नाश का.

धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया. उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. क्या आप हम लोगों की सहायता करेंगे, ताकि सोनिया व उसके मातहत आप की आँखों के सामने आप की सम्पत्ति और घर न लूट ले, आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर न मार डाले जाएँ, नारियों का सोनिया बलात्कार न करा पाए और आप कत्ल न हों? (बाइबल, याशयाह १३:१६).

यदि आप पलटवार में आर्यावर्त सरकार को सहयोग नहीं देंगे तो मानव जाति ही मिट जायेगी. 

मै नीचे भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को उधृत करता हूँ:-

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

राज्य के स्थापना का उद्देश्य प्रजा के जान-माल की रक्षा करना है. इस अनुच्छेद के अधीन राज्य प्रजा को स्वयं लूटता है. भारतीय संविधान के उद्देशिका में समाजवादी शब्द ३-१-१९७७ को जोड़ा गया और १९९२ में बिना संशोधन के अपना टनों सोना बिकने के बाद मुद्रा का २३% अवमूल्यन करके देश बाजारी व्यवस्था पर उतर आया. फिर भी यह अनुच्छेद ज्यों का त्यों बना हुआ है. इस अनुच्छेद के अनुसार व्यक्ति की स्थिति किसान के पशु से अधिक नहीं है. जिसकी सम्पत्ति चाहती है, सोनिया लूट लेती है.

आजकल सभीलोग भ्रष्टाचारके विरुद्ध मुहिम छेड़े हुए हैं. लेकिन भारतीय संविधान जन को लूटने के लिए बना है.

जनसेवक की नियुक्ति नागरिकों को लूटने के लिए की गई है. जन को लूटना ही जनसेवक के पदीय कर्तव्य का निर्वहन है. जन को इस लूट का विरोध करने का कोई अधिकार नहीं है. लूट दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७, जिनमे से १९७ को नीचे उद्धृत कर रहा हूँ, से संरक्षित है. लेकिन सबकी सम्पत्ति और पूँजी लूटने वाली सोनिया सरकार भ्रष्टाचारी नहीं है.

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... (सोनिया) सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार नागरिक के पास धन का संकेन्द्रण नहीं होना चाहिए. जनता की सम्पत्ति लूटना लोकसेवक की संवैधानिक जिम्मेदारी है. अतएव भ्रष्टाचार के लिए भारतीय संविधान उत्तर दायी है, लोकसेवक नहीं. यदि घोटाले की रकम मिल भी जाये तो भी राहुल के अनुसार रकम का ९५% सोनिया व उसके मातहत और उपकरण खा जायेंगे. जनता को कुछ नहीं मिलने वाला.

कर व्यापारी या उद्योगपति नहीं देते. अंततः उसे गरीब नागरिक ही देता है. १६.६७% से अधिक कर लूट है और किसानों व मजदूरों की आत्महत्या का कारण भी. चूंकि सोनिया को ईसा की आज्ञा ईसा का राज्य स्थापित करने व वैदिक सनातन धर्म को मिटाने की है. अतः इस लूट में सोनिया सरकार को कोई बुराई नहीं दिखाई देती.

जहां भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) सोनिया को जनता को लूटने का असीमित अधिकार देता है, वहीँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन लोकसेवक के लूटको अपराध तबतक नहीं मानाजाता, जबतक लोकसेवक लूट कर सोनिया या उसके मातहत को हिस्सा देता है. वह अपराधी तभी बनता है, जब सोनिया हिस्सा न पाए.

राज्यपालों और प्रेसिडेंट को भारतीय संविधान के संरक्षण, संवर्धन व पोषण का अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत भार सौंपा गया है. लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है. जो भी लूट का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है. निर्णय करें! सोनिया के हाथों मौत चाहते हैं या सम्माननीय जीवन?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी


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AyodhyaP Tripathi,
Sep 29, 2011, 1:25 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 29, 2011, 1:27 AM
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