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जनता की अदालत में...

पाठक अपना भ्रम दूर करें. भारत न स्वतंत्र है और न कोई लोकतंत्र है. भारत में सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुना गया सोनिया तन्त्र है. प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री का मनोनयन सोनिया ने ही किया है. सभी राज्यपालों का मनोनयन सोनिया ही करती है और सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. भारत आज भी ब्रिटिश उपनिवेश (dominion) है. स्व(अपना)तन्त्र नहीं. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||) और भारत राष्ट्रकुल का सदस्य भी है.

मै मानव मात्र का ध्यान भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ. इनकी तर्कपूर्ण विवेचना कीजिए. ए नीचे उद्धृत है:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान भाग ३ मौलिक अधिकार.

३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

दंड प्रक्रिया संहिता

धारा १९६. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – (१) कोई न्यायालय, - 

(क)  भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय ६ के अधीन या धारा १५३(क), धारा २९५(क) या धारा ५०५ की उपधारा (१) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

(ख)  ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा

(ग)   भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८(क) में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं.

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

साम्प्रदायिक सद्भाव

हम ईसा को राजा नहीं मानते. देश की छाती पर सवार सोनिया ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

“… मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै न उनकी आयु का विचार करूंगी, न लिंग का, न परिस्थिति का. मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव न हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|

जकात-सदका, रोजा, ईमान, नमाज और हज इस्लाम के स्तम्भ हैं। इस्लाम के धार्मिक सद्भाव की हवा निकालनी मानवता के हित में आवश्यक है. ‘शहादा’ इस्लाम की पहली शर्त है और यही अजान नमाज की शुरुआत भी. मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर चिल्लाई जाने वाली अजान में ईमाम क्या कहते हैं? उनके ही शब्दों में नीचे पढ़ें और बताएं कि अजान में धार्मिक सद्भाव का शब्द कहाँ है:-

यहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्य, उपास्य नहीं।

●  अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूत, प्रेषित, संदेष्टा, नबी, Prophet) हैं।

●  हय्या अ़लस्-सलात (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ नमाज़ के लिए।

●  हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ भलाई और सुफलता के लिए।

●  अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बार, सिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में), अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार), अर्थात् कोई पूज्य, उपास्य नहीं, सिवाय अल्लाह के।

धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था. (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें. अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? सोचिये.

डेनिअल वेबस्टर ने कहा है, हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. संघ परिवार व सरकार हमारे राम राज्य को अतिवादी और आतंकवादी मानते है और मुस्लिम परस्त है. अतएव मानव जाति के शत्रु है. सोनिया को ईसा का राज्य स्थापित करना है. हमसे पाकपिता गाँधी ने स्व(अपना)तन्त्रता और रामराज्य का वादा किया है. अमेरिकीभारतीय और संयुक्त राष्ट्र संघ का सार्वभौमिक मानवाधिकार का घोषणापत्र हमे उपासना की आजादी का वचन देते है. हमें अल्लाह के उपासना की दासता/अधीनता और ईसा का रोम राज्य स्वीकार करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता. मस्जिद गिराना गैर-मुसलमान का कानूनी अधिकार है. जो भी ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है, मानव जाति का शत्रु है.

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग नहीं चाहते कि वैदिक सनातन धर्म मिटे. नारियों का बलात्कार हो. आप शासकों के दास रहें. परभक्षी, हत्यारी संस्कृतियों 

को संरक्षण देने के लिए प्रेसिडेंट और राज्यपाल विवश हैं. जज सोनिया के मातहत हैं. मानव का विनाश आसन्न है.

संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे. क्योंकि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ. संविधानका संकलन कर उसे जनताके 

सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ. फिर हम भारत के लोगोंने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत/ आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का 

दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने सोनिया के रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा 

बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं. इससे भी भयानक बात यह है कि 

आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं|

यह लड़ाई योगगुरू और अन्ना नहीं लड़ सकते. काबा हमारी है. अजान गाली है और कुरान सारी दुनिया में फुंक रही है. मुसलमान इस्लाम छोड़े या भारत.

सोनिया द्वारा मनोनीत जो राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ लेते है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

जजों व लोकसेवकों को इस बात के लिए लज्जा नहीं है कि उनको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण दे कर जनता को लूटने के लिए नियुक्त किया गया है| जब तक जज के अर्दली तारीख पर १० रूपये भेंट लेते हैं, इलाहाबाद उच्च न्यायलय का रजिस्ट्रार तारीख देने के लिए ५०० रूपये और जब तक चौराहे पर ट्राफिक पुलिस वसूली करता है, इन्हें तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता जब तक सोनिया को हिस्सा मिलता हैं, उनको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन सोनिया अपने द्वारा मनोनीत राज्यपालों से संरक्षण दिलवाती है. हिस्सा न मिले तो सोनिया संरक्षण वापस ले लेती है. सोनिया ने मेरी व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल के स्मारक की भूमि लूटी है. सोनिया को जेल भेजने का कानून कहाँ है?

http://www.aryavrt.com/nl-petition-transfered

पटेल को रजवाड़ों का राज्य और इंदिरा को प्रिवीपर्स छीनने में कानून के अभाव में भी कोई समय नहीं लगा. भारतीय संविधान व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के प्रभाव में सोनिया को रतन टाटा, मुकेश-अनिल अम्बानी आदि को लूटने से मात्र आर्यावर्त सरकार बचा सकती है| जनता के समझ में आये तो मेरा सहयोग करें.

अतएव भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहें तो संविधान के उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) को संविधान से और धारा १९७ को दंड प्रक्रिया संहिता से हटाने और अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित करने में हमारी सहायता करें. उपाय है सोनिया जेल जाये.

४ मस्जिदों के विष्फोट के लिए हमारे १२ अधिकारी जेलों में हैं. मात्र कश्मीर में १९९२ में तोड़े गए १०८ मंदिरों की जांच सोनिया क्यों नहीं करेगी? हमे विश्व से उत्तर चाहिए| बाइबल और कुरान कब जब्त होगी?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी.

 

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ap tripathi,
Jun 1, 2011, 9:24 PM
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ap tripathi,
Jun 1, 2011, 9:25 PM
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