Muj11W19 Lokpal

Request/Grievance Registration No.

: PRSEC/E/2011/07063 Dated: May 8, 2011y

With President Secretariat, New Delhi-110004

लोकमत के अदालत में:-

भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९() भ्रष्टाचारी है. देखें:-

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. 

अनुच्छेद ३९(ग).

उपरोक्त अनुच्छेद ने नागरिक को किसान के पशु से भी निकृष्ट बना दिया है. उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार जिसके पास भी सम्पत्ति या पूँजी है, वह अपराधी है. टाटा व 

अम्बानी के पास सम्पत्ति व पूँजी इसलिए है कि वे जनता को लूट कर सोनिया तक हिस्सा पहुंचाते हैं. जिस दिन जनता को लूटना बंद करेंगे, सोनिया उनका सब 

कुछ छीन लेगी.

राज्य के स्थापना का उद्देश्य प्रजा के जान-माल की रक्षा करना है. अनुच्छेद ३९(ग) के अधीन राज्य प्रजा को स्वयं लूटता है. भारतीय संविधान के उद्देशिका में समाजवादी 

शब्द ३-१-१९७७ को जोड़ा गया और १९९१ में बिना संशोधन के अपना टनों सोना बिकने के बाद मुद्रा का २३% अवमूल्यन करके देश बाजारी व्यवस्था पर उतर आया. 

फिर भी यह अनुच्छेद ज्यों का त्यों इसलिए बना हुआ है. जिसकी सम्पत्ति चाहती है, सोनिया लूट लेती है. कार्ल मार्क्स ने सम्पत्ति का समाजीकरण किया था. वह भी 

विफल हो गया. लूटने का तरीका नीचे देखें:-

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था  जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार नागरिक के पास धन का संकेन्द्रण नहीं होना चाहिए. अतएव जनता की सम्पत्ति लूटना लोकसेवक की संवैधानिक जिम्मेदारी है. अतएव 

भ्रष्टाचार के लिए भारतीय संविधान उत्तर दायी है, लोकसेवक नहीं. लोकसेवक के विकल्प हीनता का तो सोनिया शोषण करती है. यदि लोकसेवक को नौकरी करनी है 

तो उसे को लूटना पड़ेगा. सोनिया को हिस्सा देना पड़ेगा. यदि घोटाले की रकम मिल भी जाये तो भी राहुल के अनुसार रकम का ९५% सोनिया व उसके मातहत 

और उपकरण खा जायेंगे. लेकिन जनता को फिर भी कुछ नहीं मिलने वाला. उपरोक्त कानूनों से मै स्वयं पिछले २४ वर्षों से पीड़ित हूँ. देखें नीचे लिंक पर:-

 http://www.aryavrt.com/nl-petition-transfered

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है. इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८)

हम भारत के वैदिक पंथी, जो अल्पसंख्यकों में अल्पसंख्यक हैं, संसद से मांग करते हैं कि   लोकपाल बिल पर चर्चा करने के पहले भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३१ पुनर्जीवित किया जाये. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ समाप्त किया जाये.

देश के नागरिक मीडिया के भ्रामक प्रचार से बचें. भारत आज भी ब्रिटिश उपनिवेश (dominion) है. स्व(अपना)तन्त्र नहीं. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||) और राष्ट्रकुल का सदस्य भी. भारत में कोई लोकतंत्र नहीं है. भारत में सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुना गया सोनिया तन्त्र है. सर्व विदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री का मनोनयन सोनिया ने ही किया है. सभी राज्यपालों का मनोनयन सोनिया ही करती है और सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं

सोनिया द्वारा मनोनीत राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ लेते है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण दे कर जजों व लोकसेवकों को जनता को लूटने के लिए नियुक्त किया गया है| जब तक जज तारीख पर १० रूपये भेंट लेते हैं, इलाहाबाद उच्च न्यायलय का रजिस्ट्रार तारीख देने के लिए ५०० रूपये और जब तक चौराहे पर ट्राफिक पुलिस वसूली करता है, इन्हें तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता जब तक सोनिया को हिस्सा मिलता हैं, उनको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन सोनिया अपने द्वारा मनोनीत राज्यपालों से संरक्षण दिलवाती है. हिस्सा न मिले तो सोनिया संरक्षण वापस करवा लेती है.

अतएव भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहें तो संविधान के उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) को संविधान से हटाने, अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित करने और धारा १९७ को भी हटाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें.

उपरोक्त कानूनों के प्रभाव के कारण सोनिया ने गोरखपुर, उत्तर प्रदेश स्थित हुतात्मा राम प्रसाद बिस्मिल जी के स्मारक की ३.३ एकड़ भूमि ३३ करोड़ रुपयों में बेंच दी. उस स्थल पर बिस्मिल जी की मूर्ती और पुस्तकालय तो है, लेकिन राजस्व अभिलेखों से बिस्मिल जी के स्मारक का नाम गायब है. इसी प्रकार मेरी पैत्रिक भूमि के राजस्व अभिलेखों को मिटा दिया गया. इस पत्रिका मै इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दो आदेश संलग्नक १ व २ प्रमाण के लिए उपरोक्त लिंक पर उपलब्ध हैं. दोनों ही मामले सोनिया के शासन में आने के बाद से ही प्रेसिडेंट एपीजे अबुल कलाम व प्रतिभा के संज्ञान में हैं.

राजस्व लोकसेवकों ने अभिलेखों में जालसाजी कर मेरा ही नहीं, हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का नाम भी गायब कर दिया. जिसके बलिदान के कारण प्रतिभा जैसी आर्थिक ठगिनी प्रेसिडेंट बनी, जब उसे ही नहीं छोड़ा, तो सोनिया किसे छोडेंगी? जिन राजस्व अभिलेखों के आधार पर जज ने सन १९८९ में मेरा कब्जा माना, ई० सन १९९४ से उन अभिलेखों से भी मेरा नाम हटा दिया गया है. मेरा तो वाद भी चला. लेकिन हुतात्मा का वाद न लखनऊ उच्च न्यायालय चला और न इलाहबाद. पूर्व राष्ट्रपति के संज्ञान में होने के बाद भी सोनिया ने स्मारक लूट लिया. जज या नागरिक लोकसेवकों का कुछ नहीं बिगाड़ सके, क्योंकि उन्हें राज्यपाल बनवारी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण देने के लिए विवश हैं. इस प्रकार भारतीय संविधान ही भ्रष्ट है. देखें अनुच्छेद ३९ग और लुप्त अनुच्छेद ३१..

लोकपाल कानून तो जाने कब बनेगा? लेकिन बिस्मिल जी का और मेरा मामला सिद्ध है. राजस्व कर्मियों ने राजस्व अभिलेखों में जालसाजी की है. इसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने जांच में स्वीकार किया है. लेकिन सोनिया के पास जनता को लूटने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त हुआ है. सोनिया के लिए जो लोकसेवक जनता को लूट रहे हैं, उन के विरुद्ध अभियोग चलाने का अधिकार न्यायपालिका के पास नहीं है. और जब तक अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का वर्चस्व रहेगा, न्यायपालिका का प्रभाव शून्य है. जब जज ही असहाय है तो लोकपाल क्या कर लेगा? सोनिया की डकैती निर्बाध चलती रहेगी. सन १९८९ से आज तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय अपने आदेशों का अनुपालन न करा सका और न करा ही सकता है. लोकपाल विधेयक से जुड़े अन्य लोग भले न जानते हों, लेकिन शांति भूषण न्याय मंत्री भी रहे हैं और कानून विद भी हैं. मुझे उनसे जवाब चाहिए कि वे देश को क्यों ठग रहे हैं?

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ली है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

लोकपाल विधेयक पर बहस और विरोध का नाटक जनता का ध्यान सोनिया के लूट और वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के प्रयत्न को छिपाने के लिए, चल रहा है. सर्वविदित है कि भारतीय संविधान सर्वोपरि है. अतएव भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के प्रभाव में रहते भ्रष्टाचार नहीं मिटाया जा सकता.

वैदिक राज्य में चोर, भिखारी और व्यभिचारी नहीं होते थे. स्वयं मैकाले ने २ फरवरी १८३५ को इस बात की पुष्टि की है. लेकिन भारत का संविधान ही चोर है. 

भारतीय संविधान को चोर कहना सोनिया के रोम राज्य के विरद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है और संसद व विधानसभाओं के 

विशेषाधिकार का हनन भी. जो भी इस सच्चाई को कहे या लिखेगा, उसे सोनिया दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में जेल भेजवा देंगी. मुसलमान ईश निंदा में कत्ल करेगा. 

मै ४२ बार हवालात और जेल गया हूँ| अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के १२ अधिकारी बिना अपराध सन २००८ से जेलों में बंद हैं.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

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May 8, 2011, 2:35 AM
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