Masjid Vidhvansak Sarkar

Masjid Vidhvansak Sarkar

सेवा में,

महामहिम उपराज्यपाल महोदय,

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली – ११००५४,

विषय: अभियोग प्राथमिकी संख्या ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला, बाहरी दिल्ली|

महामहिम जी,

कांग्रेस संकलित भारतीय संविधान में आस्था निष्ठा की शपथ लेते ही आप सोनिया के भेंड़ हैं| भेंड़ सम्पत्ति नहीं रखते| माँ-बहन नहीं जानते| मंदिर, गाय और गंगा नहीं जानते| आप के पास गाय, मंदिर और बहन बेटियां क्यों रहे?

इंडिया के प्रत्येक नागरिक के पास ईसाइयत और इस्लाम को मिटाने का भारतीय दंड संहिता की धाराओं १०२ १०५ के अधीन कानूनी अधिकार है| लेकिन राज्य ही राज्य से लड़ सकता है| आर्यावर्त सरकार की स्थापना वैदिक सनातन धर्म के रक्षा के लिए की गई है| निर्णय आप व इंडिया के नागरिकों के हाथ में है| क्या आप हम लोगों की सहायता करेंगे, ताकि आप की आँखों के सामने सोनिया आप की सम्पत्ति व पूँजी आप से छीन ले, आप के घर लूट ले, आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर मार डाले जाएँ, नारियों का सोनिया बलात्कार करा पाए और आप कत्ल हों? (बाइबल, याशयाह १३:१६). आर्यावर्त सरकार, यदि आप सहयोग करें तो, इन खूनी संस्कृतियों को धरती पर नहीं रहने देगी|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() का संकलन कर वैदिक सनातन धर्म मिटाने का प्रबंध १९४९ में ही हो चुका है| अज़ान ईशनिंदा है| मस्जिद सेना वास हैं| मस्जिदों से जजों के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा दी जाती है| गैर-मुसलमान को कत्ल करने से मुसलमान जन्नत पायेगा| (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). क्या न्यायपालिका विचार करेगी?

अपना अस्तित्व चाहें तो ईसाइयत और इस्लाम का बहिष्कार करें| धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया| उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं|

मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है और कानपूर में गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा नाथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| तब मेरी सहायता प्रधान मंत्री राव और मुख्यमंत्री कल्याण ने की थी| आप हमारी गुप्त सहायता करें तभी आप बच सकते हैं| क्यों कि मैं धर्म युद्ध लड़ रहा हूँ|  मैं नहीं चाहता कि धरती पर राम का कोई नाम लेवा न बचे| आप क्या चाहते हैं?

भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) न किसी का जीवन सुरक्षित है। (बाइबललूका १९:२७) व (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०.६.१९७९ से लुप्त व ३९ग)]. किसी का उपासना गृह सुरक्षित नहीं। [(बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३) (अज़ान व कुरआन १७:८१)]. आजादी नहीं भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व {भारतीय संविधान, अनुच्छेद ६ (ब)(।।)} आस्था की आजादी नहीं। (व्यवस्था विवरण, १३:६-११) व (कुरान ४:८९)]. यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबल, निर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबललूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक अधिकार है। तकिय्या व कितमान के अधीन यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है। इसी प्रकार प्रत्येक ईमाम भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के प्रावधानों का उल्लंधन करते हुए, अज़ान व नमाज द्वारा गैर मुसलमानों की आस्था का अपमान करता है, काश्मिर को भारत से अलग करने की मांग करता है-फिर भी पुलिस व प्रशासन अज़ान व नमाज को बंद कराने की कोई कार्यवाही नहीं कर सकती, क्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन आप आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं। क्यों कि राष्ट्रपति व आप ने भारतीय संविधान व कानूनों को बनाए रखने की शपथ ली है। राज्यपालों की एक विशेषता और है। यह लोग जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। आज कल यह लोग सुपर प्रधानमंत्री एंटोनिया माइनो उर्फ सोनिया गांधी द्वारा मनोनीत किए जा रहे हैं, जो जेसूइट है। जिसे ईसा ने भारत को अर्मगेद्दन द्वारा ईसाई राज्य बनाने का आदेश दिया हुआ है।

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने व सबको अपना दास बनाने के लिए रखा गया है| अल्लाह व उसके साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). सोनिया के साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी है| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति बची और केवल उसी की पूजा तो हो सकी, अब ईसा और ईसाइयत की बारी है| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

Http://www|countdown|org/armageddon/antichrist|htm

मस्जिद से ईमाम अज़ान का प्रसारण करता है| अज़ान के बोल को नीचे अक्षरशः उद्धृत कर रहा हूँ:-

~अज़ान~

पूरे अज़ान को नीचे पढ़ें और बताएं कि इनमे धार्मिक सद्भाव का शब्द कौन सा है?

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्य, उपास्य नहीं।

●  अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूत, प्रेषित, संदेष्टा, नबी, Prophet) हैं।

●  हय्या अ़लस्-सलात (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ नमाज़ के लिए।

●  हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ भलाई और सुफलता के लिए।

●  अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बार, सिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में), अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार), अर्थात् कोई पूज्य, उपास्य नहीं, सिवाय अल्लाह के।

अज़ान यद्यपि सामूहिक नमाज़ के लिए बुलावाहै, फिर भी इसमें एक बड़ी हिकमत यह भी निहित है कि विशुद्ध एकेश्वरवाद(उपासना की दासता) की निरंतर याद दिहानी होती रहे, इसका सार्वजनिक एलान होता रहे। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के ईशदूतत्व के, लगातारदिन प्रतिदिनएलान के साथ यह संकल्प ताज़ा होता रहे कि कोई भी मुसलमान (और पूरा मुस्लिम समाज) मनमानी जीवनशैली अपनाने के लिए आज़ाद नहीं है बल्कि हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के आदर्श के अनुसार एक सत्यनिष्ठ, नेक, ईशपरायण जीवन बिताना उसके लिए अनिवार्य है। (काफिरों को कत्ल किया जाता रहे| काफ़िर नारियों का बलात्कार होता रहे| धरती को दार-उल-इस्लाम बनाया जाता रहे)

अज़ान के ये बोल 1400 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इंडिया में ही नहीं, पूरी दुनिया में नमाज़ियों को मस्जिद में बुलाने के लिए लगभग डेढ़ हज़ार साल से निरंतर यह आवाज़ लगाई जाती रही है। यह आवाज़ इस्लामी शरीअ़त के अनुसार, सिर्फ़ उसी वक़्त लगाई जा सकती है जब नमाज़ का निर्धारित समय गया हो। यह समय है:

सूर्योदय से घंटा-डेढ़ घंटा पहले।  (फ़ज्र की नमाज़)

दूपहर, सूरज ढलना शुरू होने के बाद। (जु़हर की नमाज़)

सूर्यास्त से लगभग डेढ़-दो घंटे पहले। (अस्र की नमाज़)

सूर्यास्त के तुरंत बाद।   (मग़रिब की नमाज़)

सूर्यास्त के लगभग दो घंटे बाद।  (इशा की नमाज़)

इसके अतिरिक्त ईमाम द्वारा मस्जिद में दी जाने वाली शिक्षाओं को ध्यान पूर्वक सुनिए|

ईमामों को जजों और राज्यपालों द्वारा महिमामंडित (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) कुरान के आदेशों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की भी आवश्यकता नहीं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर, वह भी जजों के षड्यंत्र से (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार याचिका १, २०११), आप के कर से प्राप्त १० अरब रुपयों में से वेतन लेकर ईमाम बदले में कुरान के सूरह अनफाल (८) की सभी मुसलमानों को सीधी शिक्षा देते हैं| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). अज़ान द्वारा ईमाम स्पष्ट रूप से गैर-मुसलमानों को चेतावनी देते हैं कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है| अल्लाह के आदेश से ईमाम कहता है, "काफ़िर मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं|" (कुरान ४:१०१). कुछ खुत्बे कुरान के सूरह अनफाल (८) में स्पष्ट दिए गए हैं| अल्लाह निश्चय रूप से कहता है कि उसने मुसलमानों को जिहाद के लिए पैदा किया है, "युद्ध (जिहाद) में लूटा हुआ माल, जिसमे नारियां भी शामिल हैं, अल्लाह और मुहम्मद का है|" (कुरान ८:१, ४१ व ६९). "जान लो जो भी माल लूट कर लाओ, उसका ८०% लूटने वाले का है| शेष २०% अल्लाह, मुहम्मद, ईमाम, खलीफा, मौलवी, राहगीर, यतीम, फकीर, जरूरतमंद आदि का है|" (कुरआन ८:४१). लूट ही अल्लाह यानी सत्य है| लूट में विश्वास करने वाले विश्वासी हैं| "गैर-मुसलमानों के गले काटो, उनके हर जोड़ पर वार करो और उनको असहाय कर दो| क्यों कि वे अल्लाह के विरोधी हैं," (कुरआन ८:१२). "जो भी अल्लाह और मुहम्मद के आदेशों का उल्लंघन करता है, वह जान ले कि अल्लाह बदला लेने में अत्यंत कठोर है|" (कुरआन ८:१३). "काफ़िर के लिए आग का दंड है|" (कुरआन ८:१४). "जब काफिरों से लड़ो तो पीठ न दिखाओ|" (कुरआन ८:१५). "तुमने नहीं कत्ल किया, बल्कि अल्लाह ने कत्ल किया|" (कुरआन ८:१७). "मुसलमानों को लड़ाई पर उभारो|" (कुरआन ८:६५). तब तक बंधक न बनाओ, जब तक कि धरती पर खून खराबा न कर लो| (कुरआन ८:६७). जो भी लूट का माल तुमने (मुसलमानों ने) प्राप्त किया है, उसे परम पवित्र मान कर खाओ| (कुरआन ८:६९). सत्य स्पष्ट है| काफिरों को आतंकित करने व समाप्त करने के लिए मुसलमानों में जोश पैदा करते हुए अल्लाह कहता है, “जब तुम काफिरों से लड़ो, तो उनको इस तरह परास्त करो कि आने वाले समय में उन्हें चेतावनी मिले| काफ़िर यह जान लें कि वे बच नहीं सकते| (कुरआन ८:६०). जो मुसलमान नहीं वह काफ़िर है| कत्ल से कुफ्र बुरा है (कुरान २:१९१). इस्लाम है तो काफ़िर कि मौत पक्की|

उपरोक्त प्रसारण ईश्वर की निंदा क्यों नहीं है?

जब केवल अल्लाह की ही पूजा हो सकती है, तो सर्वधर्म सम भाव कहाँ है? पंथनिरपेक्षता कहाँ है? वस्तुतः अज़ान काफिरों के इष्ट देवों की निंदा है| ईश निंदक को अल्लाह ने कत्ल करने की आज्ञा दे रखी है| अतएव मुसलमान क्यों न कत्ल कर दिए जाएँ? इसके अतिरिक्त मस्जिदों से मुसलमान काफिरों और मुसलमानों के बीच धर्म के आधार पर शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करते हैं, जो भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध है| जिसे नीचे उद्धृत कर रहा हूँ:-

“1[153. धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना--जो कोई--

“()बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय या भाषायी या प्रादेशिक समूहों, जातियों या समुदायों के बीच असौहार्द्र अथवा शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएं,धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करेगा, अथवा

“() कोई ऐसा कार्य करेगा,जो विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और जो लोकप्रशान्ति में विघ्न डालता है या जिससे उसमें विघ्न पड़ना सम्भाव्य हो, 2[अथवा]

“2[() कोई ऐसा अभ्यास, आन्दोलन, कवायद या अन्य वैसा ही क्रियाकलाप इस आशय से संचालित करेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे या यह सम्भाव्य जानते हुए संचालित करेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे अथवा ऐसे क्रियाकलाप में इस आशय से भाग लेगा कि किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए भाग लेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे और ऐसे क्रियाकलाप से ऐसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्यों के बीच, चाहे किसी भी कारण से,भय या संत्रास या असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है या उत्पन्न होनी सम्भाव्य है,]

“वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से,या दोनों से दंडित किया जाएगा ।

“(2) पूजा के स्थान आदि में किया गया अपराध--जो कोई उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अपराध किसी पूजा के स्थान में या किसी जमाव में, जो धार्मिक पूजा या धार्मिक कर्म करने में लगा हुआ हो, करेगा, वह कारावास से, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।]”

भारतीय संविधान का अनुच्छेद () जाति हिंसक, बलात्कारी दासता पोषक है| देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९()- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद () भाग मौलिक अधिकार|

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९() है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९() की शर्त है,

"३९()- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९().

राष्ट्रपति, राज्यपाल या लोकसेवक दया के पात्र हैं| उन्होंने अपने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). इसके बदले में सोनिया का ईसा उन को बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस :३६) से विवाह का व अल्लाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार दे चुका है| जहां भारतीय संविधान ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीँ उनको वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

राष्ट्रपति, राज्यपाल या लोकसेवक के पास कोई विकल्प भी नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| आप के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही आप ही नहीं, सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं||

यह लोग याद रखें कि जिस भांति यह लोग मुझे लूट रहे और प्रताडित कर रहे हैं, उसी भांति यह लोग भी सोनिया द्वारा लूटे जायेंगे| आज मुख्यमंत्री लोग सोनिया के दबाव में प्रदेश के जिहादियों के अभियोग वापस ले रहे हैं| इस्लाम का संरक्षण, संवर्धन और पोषण कर रहे हैं| कल उन को सोनिया इन्हीं अपराधों में जेल में डाल देगी|

याद रखिये कि यदि आप धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म आप की रक्षा करेगा| मैं मनुस्मृति को उद्धृत करता हूँ,

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत|

अर्थ: रक्षा किया हुआ धर्म ही रक्षा करता है, और अरक्षित धर्म मार डालता है, अतएव अरक्षित धर्म कहीं हमे मार डाले, इसलिए बल पूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए| (मनु स्मृति :१५).

इसके अतिरिक्त हमारे यहाँ लोकोक्ति है,

अर्थ: रक्षा किया हुआ धर्म ही रक्षा करता है, और अरक्षित धर्म मार डालता है, अतएव अरक्षित धर्म कहीं हमे मार डाले, इसलिए बल पूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए| (मनु स्मृति :१५).

लक्ष्मी के हैं चार सुत, धर्म, अग्नि, नृप, चोर|

जेठे का निरादर करो, शेष करें भंड़ फोड़|

लक्ष्मी के चार बेटे धर्म, अग्नि, राजा और चोर हैं| या यूं कह लीजिए कि धन की चार गति है| लक्ष्मी चंचला है| कहीं टिकती नहीं है| लक्ष्मी को धर्म पर व्यय करेंगे तो आप का यश बढ़ेगा| आप की हर तरह ईश्वर, संत समाज और दुखी दीन जन सहायता करेंगे और आप की कीर्ति बढायेंगे| अन्यथा आप की सम्पत्ति या तो अग्नि में स्वाहा होगी, या सोनिया ले लेगी अथवा चोर चुरा लेंगे| आप एफआईआर भी न कर पाएंगे| हो सकता है कि आप की स्थिति पोंटि चड्ढा की भांति न हो जाये|

यदि आप वैदिक सनातन धर्म का निरादर करेंगे और रक्षा नहीं करेंगे तो मारे जायेंगे| वैदिक सनातन धर्म पूरे विश्व में था| मैं ईसाइयत और इस्लाम का विरोधी हूँ| सोनिया के दबाव में जजों व लोकसेवकों ने मेरी सकल सम्पदा पर अधिकार कर रखा है| इतना ही नहीं मेरे बच्चों ने कांग्रेस से मिल कर मेरी अपनी अर्जित सम्पत्ति से मुझे बेदखल कर रखा है| न जज मेरी सहायता कर पा रहे हैं, न पुलिस और अधिकारी| मैं सिचाई विभाग में अवर अभियंता था, लेकिन मुझे पेंशन भी नहीं मिल रही है|

http://www.aryavrt.com/muj11w15c-jan-lokpal

http://www.aryavrt.com/ahc-rg-12806y

http://www.aryavrt.com/pension-sat

लेकिन बिना आप के संस्तुति के ईमामों द्वारा किये जाने वाले उपरोक्त अपराधों के विरुद्ध शिकायत करने या अभियोग चलाने का किसी के पास अधिकार नहीं है! प्रमाण नीचे दे रहा हूँ:-

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

धारा १९६- राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – () कोई न्यायालय, - 

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय के अधीन या धारा १५३(), धारा २९५() या धारा ५०५ की उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा          

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८() में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं| ...|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन प्रत्येक राष्ट्रपति और अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|”

उपरोक्त १५३(क) कानून सन १८६० में बना था| तब से आज तक अज़ान का प्रसारण और मस्जिदों से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा राज्यपालों के संरक्षण, संवर्धन और पोषण में आज तक जारी है| यानी असली खूनी, आतंकवादी, लुटेरे और बलात्कारी तो राष्ट्रपति और राज्यपाल हैं|

यानी उपरोक्त धारा आम नागरिक, पुलिस और यहाँ तक कि जजों को भी मस्जिद से काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे और अज़ान देकर ईशनिंदा करने वाले ईमामों के अपराधों के विरुद्ध शिकायत करने के अधिकार से भी वंचित करती है! सोनिया द्वारा मनोनीत राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन अपराधी ईमामों का संरक्षण, संवर्धन और पोषण करने के लिए विवश है| सर्वोच्च न्यायालय खजाने से ईमामों को वेतन दिलवा चुकी है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). हज सहायता दिलवा रही है| Prafull Goradia vs UOI WP1 2011. न्यायपालिका ने कुरान बाइबल को अभयदान दे रखा है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

प्रजातंत्र संख्या के आधार पर सरकार बनाने पर आधारित व्यवस्था है| मुसलमानों को चार विवाह और तीन तलाक का अधिकार और लव जेहाद की छूट सोनिया सरकार ने वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए दिए हुए है| सोनिया सरकार मस्जिदों से इमामों से ईशनिंदा करवा रही है और काफिरों को कत्ल करने और इंडिया को दार उल इस्लाम बनाने की शिक्षा दिलवा रही है|

भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व के मिटने का खतरा है|

जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| मन्दिरों के चढ़ावों को लूट रहे हैं|

वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३)]. 

स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो अर्मगेद्दन के लिए ईसा इस्लाम को भी मिटा देगा|

केवल वे ही संस्कृतियां जीवित बचीं, जिन्होंने भारत में शरण लिया| इसीलिए परभक्षी संस्कृतियां ईसाइयत और इस्लाम वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना चाहती हैं, ताकि सबको अपना दास बना कर निर्ममता पूर्वक लूटा जा सके|

नेताओं, सुधारकों, संतों, मीडिया, इस्लामी मौलवियों, मिशनरी और लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैंसच छुपा नहीं है, न ही इसे जानना मुश्किल है| मानव उन्मूलन की कीमत पर आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है| मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणा स्रोत को नष्ट न कर दें| उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणा स्रोत कुरान (कुरान ८:३९) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) है

एक प्रमुख अंतर यह भी है कि जहां ईसाइयत और इस्लाम को अन्य संस्कृतियों को मिटाने में लंबा समय लगा वहीँ वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए २६ नवम्बर, १९४९ को संविधान बना कर ईसाइयत और इस्लाम के हाथों में सौँप दिया गया है|

अज़ान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| न मस्जिद से साम्प्रदायिक विद्वेष और वैमनस्य की शिक्षा देना ही उपरोक्त धाराओं के अधीन अपराध माना जाता है| लेकिन अज़ान, कुरान और मस्जिद का विरोध घोर अपराध है| अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी मस्जिदों में विष्फोट के अपराध में जेलों में हैं| प्रेसिडेंट व हर राज्यपाल ने अज़ान व मस्जिद को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), पुलिस के संरक्षण और दंप्रसंकीधारा१९६ के कवच में रखा है| अज़ान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इसके विपरीत जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध कर रहा है, दंप्रसंकीधारा१९६ के अंतर्गत जेल में ठूस दिया जा रहा है|

उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि मस्जिद और अज़ान का धरती पर बने रहना मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा है| आर्यावर्त सरकार अज़ान का उन्मूलन और मस्जिदों का सफाया करेगी| क्या आप हमारी सहायता करेंगे? मेरे विरुद्ध आप ने ४९ अभियोग चलाए लेकिन मुझे आप के ही जज कभी दंडित न कर सके| मुझे आप के अधीनस्थ जज दंडित कर भी नहीं पाएंगे| मेरी ऊर्जा को व्यर्थ न कीजिये| मेरी सहायता कर अपनी रक्षा कीजिए|

भवदीय:-

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी फोन +९१ ९१५२५७९०४१/९८६८३२४०२५

 

 

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