Manavghati Bhartiya Snvidhan

मानवघाती भारतीय संविधान

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन संस्कृति और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए किया है| कांग्रेस ने जिन ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| ईसाइयत इस्लाम मिशन जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है|

देश की छाती पर सवार जेसुइट एलिजाबेथ ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै उनकी आयु का विचार करूंगी, लिंग का, परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

इंडिया में सरकार का मतलब ईसा की भेंड़ एलिजाबेथ है| ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अब एलिजाबेथ काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है| एलिजाबेथ के सहयोग से अर्मगेद्दन के पश्चात ईसा जेरूसलम को अपनी अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बनाएगा| बाइबल के अनुसार ईसा यहूदियों के मंदिर में ईश्वर बन कर बैठेगा और मात्र अपनी पूजा कराएगा| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा की बारी है| विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

उप राष्ट्रपति हामिद के मस्जिदों से ईमाम और मौलवी मुसलमानों को शिक्षा देते हैं कि गैर-मुसलमानों को कत्ल कर दो| इतना ही नहींमस्जिद से इस्लामी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तानी मौलिक धर्मतंत्री सैयद अबुल आला मौदूदी घोषित करता है कि इस्लाम विश्व की पूरी धरती चाहता है उसका कोई भूभाग नहीं, बल्कि पूरा ग्रह इसलिए नहीं कि ग्रह पर इस्लाम की सार्वभौमिकता के लिए तमाम देशों को आक्रमण कर छीन लिया जाये बल्कि इसलिए कि मानव जाति को इस्लाम से, जो कि मानव मात्र के सुख-समृद्धि(?) का कार्यक्रम है, लाभ हो|

मौदूदी जोर दे कर कहता है कि यद्यपि गैर-मुसलमान झूठे मानव निर्मित मजहबों को मानने के लिए स्वतन्त्र हैं, तथापि उनके पास अल्लाह के  धरती के किसी भाग पर अपनी मनुष्य निर्मित गलत धारणा की हुकूमत चलाने का कोई अधिकार नहीं| यदि वे (काफ़िर) ऐसा करते हैं, तो मुसलमानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे काफिरों की राजनैतिक शक्ति छीन लें और उनको (काफिरों को) इस्लामी तौर तरीके से जीने के लिए विवश करें|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने उपरोक्त वैदिक सनातन संस्कृति घाती ईसाइयत और इस्लाम को अपनी अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने नागरिकों से पूँजी और सम्पत्ति रखने का अधिकार छीन लिया है| देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९()- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) भाग मौलिक अधिकार|

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९() है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९() की शर्त है,

"३९()- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९().

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन राष्ट्रपति और अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, प्रतिरक्षण और संरक्षण करूँगा|

ईसाइयत और इस्लाम को परिरक्षण, प्रतिरक्षण और संरक्षण देने के लिए प्रेसिडेंट राज्यपाल विवश हैं| लोकसेवक ईसाइयत और इस्लाम का पोषण करने के लिए विवश हैं और न्यायपालिका ईसाइयत और इस्लाम को बनाये रखने के लिए विवश हैं! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) और (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). से आत्मघाती हैं इंडिया के राष्ट्रपति और राज्यपाल| राष्ट्रपति और राज्यपाल स्वयं को ही नहीं बचा सकते – नागरिकों को क्या बचायेंगे?

इंडिया के कोई कानून मुसलमानों और ईसाइयों पर लागू नहीं होते| इसके विपरीत उनको ‘मुस्लिम निजी कानून’ दिया गया है| ईमाम काफिरों के आस्था और ईश्वर का अजान द्वारा अपमान करता है, जो ईशनिन्दा है| जिसके लिए ईसाइयत और इस्लाम दोनों में मृत्युदंड का प्राविधान है| लेकिन १८६० से आज तक किसी ईमाम को बंदी नहीं बनाया गया| मस्जिदों से ईमाम और मौलवी काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं, लेकिन १८६० से आज तक मस्जिदों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं हुई| जो भी अजान और मस्जिद का विरोध करता है, उसका दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकारें उत्पीड़न करती हैं| धारा नीचे उद्धृत कर रहा हूँ,

धारा १९६| राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – () कोई न्यायालय, - 

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय के अधीन या धारा १५३(), धारा २९५() या धारा ५०५ की उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा   

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८() में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं| ...

राज्यपालों ने संविधान के अ० १५९ के अधीन नागरिकों से सम्पत्ति पूँजी छीनने की शपथ ली है न्यायपालिका ने संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है| लोकसेवकों को राज्य नागरिकों की सम्पत्ति पूँजी लूटने के लिए नियुक्त करते हैं| इंडिया में कोई लोकतंत्र नहीं है| एलिजाबेथ के मनोनीत राज्यपाल दंप्रसं की धारा १९७ से भयादोहित लोकसेवकों के माध्यम से नागरिकों को लूट रहे हैं| अभियोग उन लोकसेवकों पर चलते हैं, जो नागरिकों को लूटते नहीं अथवा लूट कर एलिजाबेथ को हिस्सा नहीं देते|

क्या मै जान सकता हूँ कि क्यों मधु कोड़ा, नरेंद्र मोदी और येदियुरप्पा को एलिजाबेथ के सरकार ने अपराधी माना है लेकिन मुलायम और मायावती को अपराधी नहीं मान रही है? क्या आप को नहीं लगता कि स्वयं भारतीय संविधान ही निकृष्टतम भ्रष्टाचारी है? और दंप्रसं की धारा १९७ एलिजाबेथ को एकाधिकार देती है कि वह जिसे चाहे उसे जेल में ठूस दे?

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

सर्वविदित है कि महामहिम प्रेसिडेंट प्रणब दा का मनोनयन एलिजाबेथ ने किया| प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत हैं|  फिर चुनाव की नौटंकी किसलिए? यदि एलिजाबेथ को ही देश की महारानी रहना था तो क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

जिसने भी भारतीय संविधान की शपथ ली है - दया का पात्र, दास, आत्मघाती और अपराधी है| भारतीय संविधान के शपथकर्ता ने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() के साथ पठित|] अपने मजहब का पालन करते हुए उसकी हत्या या तो ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) करेगा अथवा मुसलमान (कुरान :१९१). शपथकर्ता ने अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). इसके बदले में लोकसेवकों के पास बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस :३६) से विवाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार मिला है| जहां ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार है, वहीँ लोकसेवकों को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

 सम्पादक.


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AyodhyaP Tripathi,
Sep 29, 2012, 5:56 PM
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