Lutera Snvidhan

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Lutera Snvidhan

लुटेरा संविधान

१९९० से आज तक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन न हो सका| 

ईस्ट इंडिया कम्पनी के जमाने में केवल लावारिशों की सम्पत्ति राजवाह (escheat} होती थी| पाकपिता गाँधी ने इंडिया के नागरिकों को बिना ढाल-तलवार के ऐसी आजादी दी है, कि वे आज भी ब्रिटेन उपनिवेश की प्रजा हैं| भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व {भारतीय संविधान, अनुच्छेद ६ (ब)(।।)}. किसी के पास सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार नहीं है| भारतीय संविधान की शपथ लेने वालों और लोकसेवकों ने तो अपनी सम्पत्ति, धरती और नारियां तक ईसाइयों व मुसलमानों को सौंप रखी हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और लुप्त अनुच्छेद ३१ मीडियाकर्मियों सहित किसी को भी सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं देते!

"३९()- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९().

१९७- न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेते है, “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|

नागरिक के पास तो सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं है! लोकसेवकों को राज्य नागरिकों की सम्पत्ति व पूँजी लूटने के लिए नियुक्त करते हैं| सोनिया के मनोनीत राज्यपाल दंप्रसं की धारा १९७ से भयादोहित लोकसेवकों के माध्यम से नागरिकों को लूट रहे हैं| अभियोग उन लोकसेवकों पर चलते हैं, जो नागरिकों को लूटते नहीं अथवा लूट कर सोनिया को हिस्सा नहीं देते| आम नागरिक और यहाँ तक कि पुलिस और जज तक दंप्रसं की धारा १९७ के आगे विवश हैं|

आर्यावर्त सरकार मीडिया से भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ पर सच्चाई को छिपाने के विरुद्ध स्पष्टीकरण चाहती है|

मैं सिचाई विभाग में अवर अभियंता था| २९-११-१९९४ में ट्रिब्यूनल का फैसला मेरे पक्ष में हुआ| काफी प्रयास के बाद भी मुझे आज तक पेंशन नहीं दी जा रही है और न कोई सुनवाई हो रही है|

http://www.aryavrt.com/pension

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से राजस्व अभिलेखो में हेरा फेरी कर लोकसेवकों ने मेरी १.८८ एकड़ भूमि लूट ली| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपनी जांच में जालसाजी २८ जुलाई, १९८९ को प्रमाणित किया है| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपराधी लोकसेवकों को दंडित नहीं किया लेकिन ९-८-१९८९ को सभी विपक्षियों की सहमति पर बदले में भूमि देने का आदेश पारित किया| उपरोक्त आदेशों के विरुद्ध कोई अपील भी नहीं की गई है| लेकिन मुझे भूमि आज तक नहीं दी गई|

http://www.aryavrt.com/muj11w15c-jan-lokpal

मेरी भूमि खेसरा ४६७मि० रकबा २१० वर्ग मीटर मौजा लच्छीपुर तप्पा कस्बा, परगना हवेली, तहसील सदर, जिला गोरखपुर, का ९-२-१९९९ को दुबारा फर्जी बैनामा हो गया| खरीददार छाती ठोंक कर कहता है कि वह सोनिया का आदमी है| उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता| म्यूटेशन १७-११-१९९९ को निरस्त हो गया| (संलग्नक W). १७ जनवरी, २०१२ से इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कार्यवाही पर रोक लगा दी है|

१९९९ से आज तक न्यायपालिका, मामले ७०२४/२००० राज्य बनाम शिवमंगल, में अभियुक्त को आरोप पत्र तक न दे पाई| RTI का हास्यास्पद उत्तर संलग्नक W४ है|

http://www.aryavrt.com/ahc-rg-12806y

७७ खेड़ा खुर्द, दिल्ली-११००८२ स्थित मेरे अर्ध निर्मित आवास व १८०० वर्ग गज भूमि पर मेरे ३ बेटों ने गैर कानूनी कब्जा कर रखा है| मैं विवश हो कर ऋषिकेश में भिक्षा मांग कर खाता हूँ|

http://www.aryavrt.com/kland-forcible-dispossession

सबके विवरण लिंकों पर उपलब्ध हैं| क्या संयुक्तराष्ट्र के महासचिव बान की मून, एमनेस्टी इन्टरनेशनल, एशिया वाच, महामहिम प्रणब दा अथवा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मेरी मदद करेंगे?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

 

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