LG_ka Subhash Masjid

२०/०७/१२ २३:५५

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सुभाष पार्क में मस्जिद निर्माण

सोनिया माहौल बिगाड़ने में विश्वास नहीं करती, उसे अमेरिका के लाल इंडियनों और उनकी माया संस्कृति की भांति वैदिक सनातन धर्म और काले इंडियनों को मिटाना है|

भारत और वैदिक सनातन धर्म को हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ही बचा सकते हैं| निर्णय नौजवानों के हाथों में|

ईसाइयत/इस्लाम की जालसाज़ी मानव मात्र दास को बनाने अन्यथा कत्ल करने के लिए की गई है! हम ईसाइयत और इस्लाम को धरती पर नहीं रहने देंगे|

http://www.aryavrt.com/fatwa

 

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Your Request/Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2012/09948

President Secretariat, New Delhi - 110034

Dated; Saturday, Jul 21, 2012

Web site: http://helpline.rb.nic.in/

सुभाषपार्क में मस्जिद निर्माण|

विषय: आप की विवशता|

संदर्भ: आप द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन चलाए गए ४ अभियोग प्राथमिकी संख्याएँ ४४०/१९९६; ४८४/१९९६ थाना रूप नगर, उत्तरी दिल्ली और ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला|

दिल्ली में लालकिला के सामने सुभाषपार्क में आप के सहयोग से मस्जिद का निर्माण प्रारम्भ|

आप को भेजा गया स्पीडपोस्ट No. EV242730125IN SP SWARGASHRAM (249304) dtd 17/07/2012.

महामहिम श्री तेजेन्द्र खन्ना जी,

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

भारतीय संविधान का संकलन एक धोखा है| इसका संकलन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||)} और राष्ट्रकुल का एक सदस्य भी| स्वतंत्र ईसाइयों और मुसलमानों सहित कोई नहीं|

आप दया के पात्र काफ़िर हैं और काफिरों को मिटाने के लिए भारतीय संविधान का संकलन किया गया है| आप ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन निम्नलिखित शपथ ली है,  “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|” अतएव मस्जिद बनवाना आप का कर्तव्य है| आप पूरी निष्ठा से मस्जिद भी बनवा रहे हैं और सुभाष का नामोनिशान भी मिटा रहे हैं|

आप के दिल्ली में इंडिया गेट है| शहीदों के सम्मान में यहाँ एक स्मारक भी बना है| जिस पर ३० जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रपति हाजिरी देते हैं| इस स्मारक की दीवारों पर सुभाष, चंद्रशेखर, रामप्रसाद बिस्मिल, भगत सिंह आदि का नाम नहीं है| नाम उनके हैं, जिन्होंने अपने ही भाइयों को गोलियों से भूना था| रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर उत्तर प्रदेश में स्मारक के लिए ३.३ एकड भूमि दी गई थी, उसे राज्यपाल टी वी राजेश्वर ३३ करोड़ रुपयों में व्यापारियों और मुसलमानों को बेंच कर खा गए| अब आप सुभाष का नामोंनिशान मिटा रहे हैं|

आप ने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ व ३९(ग). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान २:१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:६). इसके बदले में आप को बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार मिला है| जहां ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार है, वहीँ लोकसेवकों को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

आप के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| आप के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं||

संस्कृतियों का युद्ध

मैं यह घोषणा करता हूँ कि मैंने १५३क के अधीन कोई अपराध नहीं किया है| ईसाइयत/इस्लाम की जालसाज़ी मानव मात्र दास को बनाने अन्यथा कत्ल करने के लिए की गई है! चूंकि बाइबल कुरान और  भारतीय संविधान कुटरचित अभिलेख हैं, जो मानव मात्र को दास बनाने अन्यथा हत्या करने के लिए निर्मित किये गए हैं; अतः भारतीय दंड संहिता की धाराओं ९७, १०२ व १०५ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधीन मुझे अपने व मानव जाति के प्राण रक्षा का अधिकार है| अतएव मैं इन संस्कृतियों को धरती पर नहीं रहने दूंगा|

मैं मानव मात्र से निवेदन करता हूँ कि ईसाइयों और मुसलमानों सहित जिसे भी सम्पत्ति व पूँजी का अधिकार, दासता से मुक्ति, अपनी नारियों का सम्मान, अपने पूर्वजों की संस्कृति आदि चाहिए, इस युद्ध मे मेरा साथ दें|

दिल्ली उच्च न्यायालय को इस मामले को एएसआई को सौंपने का कोई अधिकार नहीं है| न १८५७ के पूर्व की स्थिति कोई मतलब रखती है| क्यों कि काबा आर्यों का ज्योतिर्लिंग है, अजान ईशनिन्दा है, मस्जिदसेनावास हैं व कुरान सारी दुनिया में फुंक रही है.

१४३३ वर्ष पूर्व मुसलमान नहीं थे. सभी मुसलमान स्वधर्म त्यागी हैं. इस्लामी हठधर्म स्वधर्मत्यागी को कत्ल करता है. (कुरान ४:८९). हमारे पूर्वजों से भूल हुई है. उन्होंने इस्लाम की हठधर्मी को मुसलमानों पर लागू नहीं किया. हर काफ़िर आर्यावर्त सरकार को सहयोग दे. आर्यावर्त सरकार मुसलमानों की हठधर्मी मुसलमानों पर लागू करेगी. आर्यावर्त सरकार धरती पर इस्लाम नहीं रहने देगी|

आप को मैंने ३ शपथपत्र भेजे हैं, जिनको विद्वान सुश्री स्मिता गर्ग ने पत्रावली पर लेने से इंकार कर दिया है| मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है| मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया था| मैंने स्वीकारोक्ति के ६ शपथपत्र दिए थे, जिनमे से कोई पत्रावली पर उपलब्ध नहीं हैं| आशा करता हूँ कि आप प्राप्ति की सूचना देने की कृपा करेंगे|

शपथपत्रों को आप के पास भेजने का कारण यह है कि मेरे विरुद्ध अभियोग दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन आप के संस्तुति से चल रहे हैं| अतएव पिछले १६ वर्षों से भारतीय संविधानकी शपथलेने के कारण मेरे उत्पीड़नके अपराधीआप ही हैं| न्यायालय के अधिकार मेरे मामलेमें शून्य हैं| अगर न्यायालय ने मुझे सजा नहीं दिया, तो पीठासीन अधिकारी नौकरी नहीं कर पायेगा| अपने शपथ पत्र में मैंने प्रमाण सहित इसका विवरण दिया है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन इंडिया के नागरिक सोनिया के रोम राज्य के अपराधी हैं| (बाइबल, लूका १९:२७). अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को, अल्पसंख्यक घोषित कर, वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मस्जिद से अजान द्वारा ईशनिंदा कर रहे हैं, हमें कत्ल करने की शिक्षाएं दे रहे हैं और मंदिर तोड़ रहे हैं| चढ़ावों को लूट रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरानसूरह अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

आप और जज दया के पात्र हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ व ३९(ग) के अधीन आप ने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान २:१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:६). इसके बदले में आप के पास बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार है| जहां ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार है, वहीँ आप को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

आप यह युद्ध नहीं लड़ सकते| आप आत्मघाती और वैदिक सनातन धर्म के द्रोही हैं| मैं संस्कृतियों का युद्ध लड़ रहा हूँ| ईसाइयत और इस्लाम आतताई और दास बनाने वाली संस्कृतियां हैं| भारतीय संविधान, ईसाइयत और इस्लाम है तो मानव जाति बच नहीं सकती| इस सत्य को छिपाने के लिए दंप्रसं की धारा १९६ का संकलन किया गया है| जो भी सच लिखेगा उसको मिटाने के लिए आप ने शपथ ली है| आप ने भारतीय संविधान और कानूनों के रक्षा की शपथ ली है| (भारतीय संविधान का अनुच्छेद १५९).

प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के विषय में

96. प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें--कोई बात अपराध नहीं हैजो प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग में की जाती है

97. शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार--धारा 99 में अंतर्विष्ट निर्बन्धनों के अध्यधीनहर व्यक्ति को अधिकार है किवह--

पहला--मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षा करे ;

आर्यावर्त सरकार मानव मात्र के प्राणों की रक्षा करना चाहती है और आप हत्या कराने के लिए शपथ लेकर सोनिया द्वारा उप राज्यपाल मनोनीत किये गए हैं| आप को जीवित रहने का अधिकार नहीं है|

भवदीय,

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सूचना सचिव)

फोन; ९१५२५७९०४१

मंगल आश्रम, टिहरी मोड, ऋषिकेश, उ०ख०, २४९२०१

 दिनांक; शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

 

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