Ktl Maulik Adhikar

कत्ल मौलिक अधिकार


यह पत्र आदरणीय श्री पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी के लिए है.
मैं बाइबिल, कुरान व भारतीय संविधान विरोधी, बाबरी विध्वंसक, काफिर, साध्वी प्रज्ञा और मुख्यमंत्री योगी का सह अभियुक्त और उपनिवेश विरोधी अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी फोन +९१ ९८६८३२४०२५ हूँ. सन २००० से मैंने उपनिवेश के विरुद्ध युद्ध छेड़ रखा है. यह मृृत्युदंंड का अपराध है. भादंसं धारा १२१. जज ने स्वीकार किया है कि मैंने अल्लाह को लुटेरा, हत्यारा, बलात्कारी और बहुत कुछ अपमानजनक लिखा. अभी भी लिखता हूँ. लेकिन मुझे फांसी नहीं दी जा रही है. मुसलमान मौत का फतवा भी नहीं जारी कर रहे हैं. मैं चुनौती देता हूँ कि मुझे उखं सरकार युद्ध अपराधी घोषित करे. चाहे तो तोप से उड़ा दे. 
हमारी संस्कृति सांप्रदायिक यानी कम्यूनल है. इसकी गीता कहती है,

यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति।

तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्।।७:२१।।

अभिप्राय यह कि जो पुरुष पहले स्वभावसे ही प्रवृत्त हुआ जिस श्रद्धाद्वारा जिस देवताके स्वरूपका पूजन करना चाहता है (उस पुरुषकी उसी श्रद्धाको मैं स्थिर कर देता हूँ )। यह काफिर की सांप्रदायिक पूजा है. मात्र अल्लाह पूज्य है. सेकुलर पूजा है. 

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इस सांप्रदायिक पूजा को मैकाले के स्कूलों मे पढ़ाए जाने पर रोक है. भासंविधान का अनुच्छेद ३०.
लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डित संजय बहादुर उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं। वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" से लगातार तीन दिन तक तथाकथित शांतिदूत मुसलमान यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा, "निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या "ला इलाहा इलल्लाह", यानी मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. 'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर" कहना है।
कश्मीरी पंडित कश्मीर मे अल्पसंख्यक हैं या नहीं बाद में. अनुच्छेद २९(१) सनातनी को छोड़कर किसी भी वर्ग को लूट, बलात्कार, धर्मांतरक और हत्यारी संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार देता है. केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया है कि जज मौलिक अधिकार मामले में सुनवाई नहीं कर सकते. अजान के प्रसारण का अधिकार संविधान का संकलन कर मुसलमानों को रणनीति बना कर दिया गया है. मुसलमान इसका प्रतीदिन ५ बार प्रसारण कर काफिरों को चेतावनी दे रहे हैं कि काफिर अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं कर सकते. खुतबे द्वारा भी प्रसारित करते हैं कि काफिर कत्ल कर दिए जाएंगे. सरकार अपराध स्थल मस्जिद का विरोध न कर के उनका संरक्षण कर रही है. यह उपासना की आजादी कैसे है?
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यदि कुलश्रेष्ठ जी अल्लाह को ईश्वर मानते हैं और अल्लाह के अतिरिक्त किसी अन्य देवता की भी उपासना करते हैं तो काफिर हैं, स्वयं को जीवित न समझें. वे जीवित मात्र इस लिए हैं कि उनके आसपास मोमिनों की संख्या कम है. संख्या बल होते ही उनको भी कत्ल कर दिया जाएगा. जनसंख्या बढ़ाने की भी व्यवस्था कर ली गई है. मुसलमान को चार विवाह का अधिकार दिया गया है. काफिर दूसरा विवाह करे तो उसे जेल भेजने का कानून है. मुसलमान कहीं से आए, उसे नागरिकता मिल रही है. लेकिन हिंदू को नागरिकता नहीं दी जा रही है.
यह अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त मुसलमानों का संवैधानिक अधिकार है. इस मे पंथनिरपेक्ष मुसलमानों को लूट, बलात्कार और हत्या की संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार दिया गया है. ज्ञातव्य है कि मौलिक अधिकारों के मामले में बदलाव के लिए संसद का दो तिहाई बहुमत चाहिए. जो कभी नहीं मिलने वाला.
अजान जारी है. वह भी राजकोष से वेतन और पुलिस संरक्षण दे कर. अजान मुसलमानों का मौलिक अधिकार है. जिसके प्रसारण द्वारा काफिरों को चेतावनी दी जा रही है कि काफिरों को कत्ल कर दिया जाएगा. 
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी स्वयं को भी नहीं बचा सकते, आप को क्या बचाएंगे? चुनाव काफिरों को नहीं बचा सकता. अजान स्वयं भासंविधान से प्रायोजित है. आप के पास विकल्प मात्र भादंसं की धारा १०२ है. क्या श्री पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी इस दिशा में कुछ करेंगे?
अप्रति फोन +९१ ९८६८३२४०२५
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