KL REMINDER 2PM14404Y

! ॐ!

From: Ayodhya Prasad Tripathi

77, Khera Khurd, Delhi 110 082

Mob: 9868324025/9152579041

Letter No. 14404-1y                      Dated: Friday, April 04, 2014

सेवामें,

एलिजाबेथ के उपनिवेश इंडिया के माननीय प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह,

महोदय,

इस आवेदन के साथ मैं आप के कार्यालय के द्वारा भेजे गए अतिरिक्त जिलाधीश (उत्तर), कृपा नारायण मार्ग के वरिष्ठ नागरिक कोष्ठ में की गई शिकायत के न्यायालय की प्रति संलग्न कर रहा हूँ|

http://www.aryavrt.com/kland-forcible-dispossession

इसका विवरण मेरे द्वारा केन्द्र सरकार को भेजे गए शिकायत संख्या PRSEC/E/2011/16191, जिसे मैंने ७ अक्टूबर, २०११ को भेजा था, के उत्तर से भी स्पष्ट हो जायेगा| http://pgportal.gov.in/ यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

तब से आज तक तमाम प्रार्थना पत्रों के बाद भी वरिष्ठ नागरिक न्यायालय ने किसी तरह की सत्य प्रतिलिपि नहीं दी है| आप की सरकार ने यह उत्तर देकर अपना पल्ला झाड लिया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है| और न्यायालय कोई निर्णय करने के लिए बाध्य नहीं है|

मेरे मझले पुत्र मनोज त्रिपाठी ने मेरे विवादित भूमि के पश्चिम ओर की १६ फुट चौड़ी १०० फुट लम्बी गली बेच दी है| इसके पहले भी इस गली के कब्जे को लेकर मैंने शिकायत की थी और रोहिणी कोर्ट में उसका मुकदमा भी चल रहा था| मुझे उस मुकदमे की स्थिति का ज्ञान नहीं है| अब फिर उसी गली को घेरा जा रहा है| यदि महामहिम कोई कार्यवाही नहीं करते तो मुझे मेरे अपने ही बेटे कत्ल कर देंगे| मैं अब भय वश अपने विवादित भूमि पर नहीं जाता|

प्रधानमंत्री जी! भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का सन १९५० से आज तक एक भी विरोधी का किसी को ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर अथवा साध्वी प्रज्ञा - सबके विरोध को दबा दिया गया| मैं क्यों जीवित हूँ – मुझे स्वयं नहीं मालूम|

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

जिस प्रकार इस्लाम की विरोधी आसमा बिन्त मरवान को वीभत्स विधि से मुहम्मद के अनुयायियों ने उसके ५ अबोध बच्चो सहित कत्ल किया था, उसी प्रकार कैंसर से पीड़ित साध्वी प्रज्ञा को एलिजाबेथ के, आप सहित, मातहतों ने जीवित ही मार डाला है| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है और कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ डाला गया है| हमारे जगतगुरु के मुहं में गोमांस ठूसा गया| शिकायत करने के बाद भी बंधुआ जज कुछ न कर पाए| हमारे ९ अन्य अब्रह्मी संस्कृति विरोधियों को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि हम वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों से बचाना चाहते हैं| साध्वी प्रज्ञा अब्रह्मी संस्कृतियों से वैदिक सनातन संस्कृति को बचाने के प्रयत्न के कारण ही जेल में हैं| राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं|

अहम् ब्रह्मास्मि बनाम भेंड़ और मुजाहिद

ब्रह्म यानी चेतन परमाणु सच्चिदानंद ईश्वर का सूक्षतम लेकिन सम्पूर्ण अंश है| यह व्याख्या के परिधि में आ ही नहीं सकता| इसकी मात्र अनुभूति हो सकती है| इसे समझने के लिए मैं एक लघु कथा का आश्रय लेता हूँ|

एक गांव में चार अंधे रहते थे| उस गांव में एक हाथी आया| गावं के लोग हाथी देखने के लिए उमड पड़े| अंधे भी गए| लेकिन वे देख तो सकते नहीं थे| अतएव, सभी अंधों ने हाथी को छुआ| जिसके हाथ में हाथी का कान लगा, उसने बताया कि हाथी सूप है| जिसके हाथ पैर लगा उसने बताया कि हाथी खम्भा है| जिसके हाथ शरीर लगा उसने बताया कि हाथी पहाड़ है और जिसके हाथ पूँछ लगी उसने बताया कि हाथी रस्सी है|

वैदिक सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

खतना और वेश्यावृत्ति द्वारा वीर्य का क्षरण कराने वाले जेहोवा, ईसा और अल्लाह को हम ईश्वर क्यों मानें? क्या आप को नहीं लगता कि चर्च और मस्जिद अपराध के शिक्षा केन्द्र हैं?

हम अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| हम अज़ान का विरोध कर रहेमस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है और अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट कर रहे हैं| आइये इस धर्म युद्ध में हमारा साथ दीजिए| अपने पर नहीं तो अपने दुधमुहों और अपनी नारियों पर तरस खाइए| (कुरान २३:६). हम जो भी कर रहे हैं, भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा में कर रहे हैं| जो भी हमारे विरोधी हैं, मानवता के शत्रु हैं|

वीर्य ब्रह्म यानी चेतन परमाणु का मिश्रण है| प्रत्येक प्राणी में विद्यमान है| अप्राकृतिक मैथुन ईश्वर से स्वेच्छा से सम्बन्ध तोडना हैदास बनानेहेतु पैगम्बरोंने बलात्कार, खतना कुमारी मरियम को मजहबसे जोड़दिया| ईसाई के पास बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस :३६) से विवाह का अधिकार है और अल्लाह मुसलमान का पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से और ५२ वर्ष के व्यक्ति का ६ वर्ष की कन्या से निकाह करता है| मैकाले ने तो ब्रह्मचारी बनाने वाले गुरुकुलों को ही मिटा दिया|

आर्य बड़े भोले हैं| दो हजार से अधिक वर्षों से वे ईसाइयत/इस्लाम को समझ नहीं पाए हैं| उन्हें चाहिए कि वे अपनी आस्था वैदिक सनातन धर्म में व्यक्त करें| ईश्वर का अपमान करने वालों को कठोर दंड देने के लिए आर्यावर्त सरकार को मात्र १७% कर दें| इंडियन उपनिवेश के सरकार को कोई कर दें| मानव मात्र को ध्यान रखना चाहिए कि धोखाधड़ी से असावधान रहना सहिष्णुता नहीं है| असावधानी अपराधियों को बम धमाकों, लूट, हत्या व नारी बलात्कार को प्रोत्साहित ही करती है| अपराध सहन करना अनुकम्पा नहीं है| समझौतों से शांति नहीं स्थापित होने वाली| समझौतों ने विश्व का सामंन्जस्य चौपट कर रखा है| सभ्य राज्य अपराधियों से समझौते नहीं करते| मानव जाति टैक्स यानी कर अपराधियों को दंडित करने के लिए देती है| आज लगभग १-५ अरब लोग इस्लाम के दास हैं और दो अरब से अधिक प्रेत ईसा की विवेकहीन भेंड़े हैं, जिन्हें ईसा के नाम पर हत्या करने में तनिक भी हिचक नहीं| इस्लाम का मतलब शांति नहीं, बल्कि समर्पण है| अल्लाह का कुरान और ईसा का बाइबल मुसलमान और ईसाई से अन्य धर्मावलम्बियों की हत्या करने आज्ञा मानने की अपेक्षा करते हैं| मुसलमान न अपना मजहब त्याग सकता है और न कुरान के विरुद्ध एक शब्द बोल ही सकता है| मुसलमान इस्लाम से पीड़ित हैं व ईसाई ईसा से| वे प्रेत ईसा की विवेकहीन भेंड़े हैं| जहां इस्लाम मुसलमानों को असहिष्णुता की शिक्षा देता है, वहीं प्रेत जारज(जार्ज) ईसा हर उस व्यक्ति को कत्ल कराता है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता| तथाकथित पैगम्बर मूसा, ईसा और मुहम्मद तो रहे नहीं, अपनी वरासत सुल्तानों, राजाओं और शासकों को दे गए हैं, जो पुरोहितों, ईमामों व मीडिया कर्मियों का शोषण कर रहे हैं, जिसके कारण सत्य पर पर्दा पड़ा है| दूसरे की सम्पत्ति की चोरी और नारियों के यौन शोषण के लोभ ने हजारों वर्षों से मानव जाति को तबाह कर रखा है|

हम असभ्य भगवा आतंकवादी कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) और प्रेत नहीं है| ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उस ने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना दिया है| कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| जारज(जार्ज) हमारे लिए अपमानजनक सम्बोधन हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों का शासक परिवार सम्मानित जारज(जार्ज) है| इतना ही नहीं ईसाइयों का मुक्तिदाता ईसा ही जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत है| हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| इससे वीर्यहीनता के प्रसार और भेंड़ बनाने में एलिजाबेथ को कठिनाई हो रही है|

यहूदी या मुसलमान

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान :३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकता? ईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, सिद्धि, निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उसका खतना करा कर दास बनाता है? ईशा को, जो कौटुम्बिक व्यभिचार का संरक्षक है (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) या  ईश्वर को, जो उस को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है? अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उस के उपासना की स्वतंत्रता छीनता है?

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है|

भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को नोटिस कौन देगा?

प्रधानमंत्री जी! आप यह युद्ध नहीं लड़ सकते| मैंने न्यायपालिका को निम्नलिखित पत्र भेजे हैं| मानवजाति को बचाना हो मेरी गुप्त सहायता कीजिए|

आर्यावर्त सरकार संस्कृतियों का युद्ध लड़ रही है और इसे अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देकर नहीं लड़ा जा सकता| या तो अब्रह्मी संस्कृतियां रहेंगी अथवा वैदिक सनातन संस्कृति| जब कि न्यायमूर्ति जी ने भारतीय संविधान के अनुसूची ३ के प्रारूप ८ के अधीन अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने के असीमित मौलिक अधिकार देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को बनाये रखने की शपथ ली है| न्यायमूर्ति जी! आप अपने ही वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिये नियुक्त किये गए हैं|

मेरे निम्नलिखित मामले जिला न्यायलय गोरखपुर में विचाराधीन हैं,

दिवानी अपील स० ८/२०१० शिवाश्रय व० बनाम सरकार व०|

दिवानी वाद स० १६९८/१९८७ अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी बनाम सरकार

दिवानी वाद स० ६८३/१९९९ अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी बनाम शिवमंगल

फौजदारी ७०२४/२००० सरकार बनाम शिवमंगल इस मामले में आप के इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने CRIMINAL MISC. APPLICATION NO. 1973 OF 2012 U/S 482 CrPC. के क्रम में १७ जनवरी २०१२ से स्टे दे रखा है| तारीख लगवाने के लिए १००० रुपया आप के रजिस्ट्रार लिस्टिंग की घूस है| मैं देने की स्थिति में नहीं हूँ| इसलिए कुछ नहीं हो रहा है|

http://www.aryavrt.com/ahc-rg-12806y

निगरानी स० १८०/१३५/जी१९९९ वीर बहादुर बनाम अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी गोरखपुर कमिश्नरी|

मैंने सुना है कि ग़रीबों के लिए आप वकील की ब्यवस्था करते हैं| मेरे उपरोक्त मामलों में यदि कुछ कर दें तो आप की कृपा होगी|

मेरा एक अलग मामला CMWP9672/1988 WRIT ‘C’ GORAKHPUR इलाहाबाद उच्च न्यायालय में है|

इसमें तीन आदेश २८-०७-१९८९, ०९-०८-१९८९ व १०-०८-१९८९ हैं| इनकी प्रतियाँ मेरे वेबसाइट पर हैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/nl-anne-1-3

मैं सेवा निवृत लोकसेवक हूँ| मुझे जज के आदेश के बाद भी पेंसन नहीं मिलती| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/pension

मैं ८० वर्ष का बूढा व्यक्ति हूँ| चल फिर नहीं सकता| मेरी कभी भी हत्या हो सकती है|

स्वयं आप के पास भी न जीवित रहने का अधिकार है और न सम्पत्ति और पूँजी रखने का| यदि आप का अहित न हो तो मेरी जमीन के बदले उसी मूल्य की जमीन मुझे नॉएडा में दिलवा दीजिये|

इस धन से मैं गुरुकुलों की स्थापना करना चाहता हूँ| ताकि वैदिक सनातन संस्कृति बचे व मानव जाति की रक्षा हो सके| क्या आप ऐसा करेंगे?

ईश्वर ने सारा ज्ञान ब्रह्मकमल में दे रखा है| मुझे ५४ ब्रह्मचारी और १२ गुरुकुल चाहिए|

http://www.aryavrt.com

न्यायमूर्ति जी! मुझे भूल जाइये| अपने कल्याण हेतु वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा के लिये भगीरथ प्रयत्न कीजिए| ईश्वर आप का कल्याण करें|

 

भवदीय:

 

(अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी)

दिनांक: शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014य

Your Registration Number is : DARPG/E/2014/01819 

 

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