Kheda goli kand

खेड़ा गोलीकांड

काफिरों ने लव जिहाद का विरोध किया और बारम्बार खाप पंचायतें करते फिर रहे हैं| जिसका काफिरों के पास कोई अधिकार नहीं है| लव जिहाद सोनिया और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित है|

दया के पात्र लोकसेवकों ने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). इसके बदले में लोकसेवकों के पास भारतीय संविधान प्रदत्त बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस :३६) से विवाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार है| जहां ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार है, वहीँ लोकसेवकों को वैदिक सनातन धर्म को बचाने का कोई अधिकार नहीं है|

जाहिरा, बिलकिस और इशरत जहाँ मामलों का संज्ञान लेने वाले जज क्या सचिन और गौरव का मामला लेने का साहस कर सकते हैं?

लोकसेवक और जज दोनों ही अल्लाह और ईसा के अपराधी हैं| ईसाई व मुसलमान दोनों को ईसा व अल्लाह के हाथों कत्ल करेंगे| ईसाई व मुसलमान दोनों को इंडिया में वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए रोका गया है| लोकसेवक मुसलमानों को पद, प्रभुता और जीविका के लोभ में बचा रहे हैं| दोनों यह लड़ाई नहीं लड़ सकते| यदि आप जीवित रहना चाहते हों तो हम आप के लिये यह युद्ध लड़ सकते हैं|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() ने बलात्कारी मुसलमानों को अपनी संस्कृति को बनाये रखने की और राष्ट्रपति और राज्यपाल ने क्रमशः भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० १५९ के अधीन मुसलमानों की बलात्कारी संस्कृति के संरक्षणपोषण संवर्धन की शपथ ले रखी है| इसके अतिरिक्त मुसलमानों की बलात्कारी संस्कृति को कार्यान्वित करने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन उत्तरदायित्व भी सौंपा गया है|

राज्यपाल बनवारी शपथ ले कर अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रहे हैं| मुसलमानों के पास काफिरों की नारियों पर अधिकार करने और उनका बलात्कार करने का भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से और मुसलमानों के ‘मुस्लिम निजी कानून’ से भी प्राप्त अधिकार है| भारतीय संविधान के आस्था और निष्ठा की शपथ मुख्यमंत्री अखिलेश ने भी ली है| मुख्यमंत्री मुसलमानों के अधिकारों में व्यवधान कैसे डाल सकते हैं? जो भी काफ़िर मुसलमानों के निजी कानून और संवैधानिक अधिकार में रूकावट पैदा करेगा, उसे दंडित करना न्यायालय का भी उत्तरदायित्व है| क्यों कि जजों ने भी भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है|

वस्तुतः मुज़फ्फरनगर दंगे के उत्तरदाई भारतीय संविधान, कुरान, सोनिया, राष्ट्रपति और राज्यपाल बनवारी हैं| मुसलमानों ने तो अपने अधिकारों का उपयोग किया है| जब तक ईसाइयत, इस्लाम, भारतीय संविधान और लोकतंत्र का अस्तित्व रहेगा, काफिरों का नरसंहार नहीं रोका जा सकता|

काफ़िर के पास शिकायत करने का भी अधिकार नहीं है| फिर ज्ञापन न लेकर पुलिस ने भारतीय संविधान और कानूनों की रक्षा के उत्तदायित्व का निर्वहन किया है|

उपरोक्त सच्चाइयों को जो भी बताता या लिखता है वह भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का अपराधी बन जाता है| यही विधायक सोम के साथ हुआ है| यही मेरे साथ ५० बार हुआ| मेरे विरुद्ध ५ अभियोग आज भी चल रहे हैं|

यदि काफ़िर अपनी नारियों का सम्मान, अपनी सम्पत्ति और जीवन चाहते हैं तो उन्हें जड़ यानी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का विरोध करना पड़ेगा| क्यों कि वोट देकर भी काफ़िर इन कानूनों को नहीं बदल सकते|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१


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