Kautumbik Vyabhichar

कौटुम्बिक व्यभिचार (Incest)

जेहोवा और अल्लाह मूसा और मुहम्मद के बिचौलिये और मनुष्य को, किसान के पशु/दास की भांति अधीन कर, उपयोग करने के लिए मुखौटे हैं| इनका अस्तित्व ही नहीं है| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने खतना को मजहब से जोड़ दिया है| किसान के सांड़ की भांति दास बनने के लिए यहूदी और मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं और जीवन भर रोगी, अशक्त और दास बन कर जीते हैं| यहाँ विश्वामित्र और मेनका का प्रसंग प्रासंगिक हैइंद्र ने वीर्यवान विश्वामित्र को पराजित करने के लिए मेनका को विश्वामित्र को सौंप दिया. सभी दिव्यास्त्रों एवं ब्रह्मास्त्र का ज्ञान रखते हुए भी विश्वामित्र उनका उपयोग नहीं कर पाए. हार कर उनको राम लक्षमण का सहारा लेना पड़ा. मूसा और मुहम्मद ने तो इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं ईसा ने बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट दी है और अल्लाह ने मुहम्मद का निकाह मुहम्मद की पुत्रवधू जैनब (कुरान, ३३:३७-३८) से कराया| 

आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५()].  विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]

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नाथ जी को नमस्ते!

आप बताएं कि बुराई का विरोध होना ही चाहिए. लेकिन साथ ही साथ भेद भाव नहीं होना चाहिए.

आप यह भी बताएं कि लूट और नारी बलात्कार के प्रलोभन पर ही तो ईसाइयत और इस्लाम का अस्तित्व है| ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करियेचाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबलव्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबलउत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण में|

क्या किसी के पास उपरोक्त तथ्यों को प्रकाशित करने का साहस हैमेरे लिखने पर विश्वास न कीजिएऊपर दिए संदर्भों को बाइबलकुरान और संविधान में देखिये|

पुलिस उपायुक्त के निर्भीक को आपने खूब प्रचारित किया. बेटी (बाइबलकोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह कराने वाले ईसापुत्रवधू (कुरान३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाहनारी के बलात्कारी को स्वर्ग देने वाले (बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०) जेहोवा और अल्लाह को प्रचारित करके दिखाएँ|

क्या आप जानते हैं कि जेहोवा और अल्लाह नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग (बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०) देते हैं? (दोनों ईश्वर हैं और आशा राम बापू और राधे माँ?)

अल्लाह द्वारा ५२ वर्षीय मुहम्मद का ६ वर्ष की आयशा से निकाह करने को भी बताएं.

हर अल्पसंख्यक को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित धरती के प्रत्येक नारी के बलात्कार का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देने का भी प्रचार करें.

आप बताएं कि संयुक्त राष्ट्र संघ आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. [UDHR अनु०२५(२)].

याद रखें! हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत नहीं है| ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उसने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना कर (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) छिन्न भिन्न कर दिया है|  हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| जबकि ब्रिटेन और अमेरिका में कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे गुरुकुलों में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है. हमारे यहाँ विद्यालयों में यौन शिक्षा नहीं दी जाती और न ही गर्भ निरोधक गोलियाँ बांटी जाती

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खतना कराने वाले हैं ही क्यों?

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

बाइबल, उत्पत्ति १७:११

और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.

अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| अतएव अब्रह्मी संस्कृतियों को धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है| अविश्वासियों को भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार प्राप्त है| जो बिना अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटाए सम्भव नहीं है| आरएसएस यह युद्ध नहीं लड़ सकती| अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के सदस्य बनें|

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकताईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उन के उपासना की स्वतंत्रता छीनते हैं? धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

इनके विपरीत वेद का कथन है,

अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या|

तस्यां हिरण्ययः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः||

अथर्ववेद;१०.२.३१.

अर्थ - (अष्टचक्रा, नव द्वारा अयोध्या देवानां पूः) आठ चक्र और नौ द्वारों वाली अयोध्या देवों की पुरी है, (तस्यां हिरण्ययः कोशः) उसमें प्रकाश वाला कोष है , (स्वर्गः ज्योतिषा आवृतः) जो आनन्द और प्रकाश से युक्त है|

अमेरिका आज भी है, लेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगी, आप का मांस खाएगी और लहू पीयेगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३).  इंडिया तो रहेगा| लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी न रहेंगे| यदि रहेंगे भी तो दास बन कर| बचना हो तो अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिये| यह युद्ध मात्र हम लड़ सकते हैं| चर्चों व मस्जिदों से ईसाई व मुसलमान को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| अतएव चर्च व मस्जिद नष्ट करना भारतीय दंड संहिता के धारा १०२ के अधीन सबका कानूनी अधिकार है| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे ९ अधिकारी २००८ से जेलों में बंद हैं| जिन लोगों को अपना जीवन, अपनी आजादी और अपनी नारियों का और अपना सम्मान चाहिए, वे हमे सहयोग दें तो हम अब्रह्मी संस्कृतियों को नहीं रहने देंगे|

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

अहम् ब्रह्मास्मि बनाम भेंड़ और मुजाहिद

ब्रह्म यानी चेतन परमाणु सच्चिदानंद ईश्वर का सूक्षतम लेकिन सम्पूर्ण अंश है| यह व्याख्या के परिधि में आ ही नहीं सकता| इसकी मात्र अनुभूति हो सकती है| इसे समझने के लिए मैं एक लघु कथा का आश्रय लेता हूँ|

एक गांव में चार अंधे रहते थे| उस गांव में एक हाथी आया| गावं के लोग हाथी देखने के लिए उमड पड़े| अंधे भी गए| लेकिन वे देख तो सकते नहीं थे| अतएव, सभी अंधों ने हाथी को छुआ| जिसके हाथ में हाथी का कान लगा, उसने बताया कि हाथी सूप है| जिसके हाथ पैर लगा उसने बताया कि हाथी खम्भा है| जिसके हाथ शरीर लगा उसने बताया कि हाथी पहाड़ है और जिसके हाथ पूँछ लगी उसने बताया कि हाथी रस्सी है|

'अहम् ब्रह्म अस्मि' का तात्पर्य

अहम् ब्रह्मास्मि का सरल हिन्दी अनुवाद है कि मैं ब्रह्म हूँ । साधारण व्यक्ति दिग्भ्रमित हैं। इसका कारण यह है लोग - जड़ बुद्धि व्याख्याकारों के कहे को अपनाते है। किसी भी अभिकथन के अभिप्राय को जानने के लिए आवश्यक है कि उसके पूर्वपक्ष को समझा जाय। हम वैदिक पंथी उपनिषदों के एक मात्र प्रमाणिक भाष्यकार आदिशंकराचार्य के कथन को प्रमाण मानते हैं, जो किसी व्यक्ति-मन में किसीभी तरह का अंध-विश्वास अथवा विभ्रम नहीं उत्पन्न करना चाहते थे।

इस अभिकथन के दो स्पष्ट पूर्व-पक्ष हैं-

१) वह धारणा जो व्यक्ति को अधीन करने के लिए धर्म का आश्रित बनाती है। जैसे, एक मनुष्य क्या कर सकता है, करने वाला तो कोई और ही है। मीमांसा दर्शन का कर्मकांड-वादी समझ , जिसके अनुसार फल देवता देते हैं, कर्मकांड की प्राविधि ही सब कुछ है । वह दर्शन व्यक्ति सत्ता को तुच्छ और गौण करता है- देवता, मन्त्र और धर्म को श्रेष्ठ बताता है। एक व्यक्ति के पास पराश्रित और हताश होने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचता। धर्म में पैगंबर/पौरोहित्य के वर्चस्व तथा कर्मकांड की 'अर्थ-हीन' दुरुहता को (अहम् ब्रह्मास्मि) का अभिकथन चुनौती देता है।

२) सांख्य-दर्शन की धारणा है कि व्यक्ति (जीव) स्वयं कुछ भी नहीं करता, जो कुछ भी करती है -प्रकृति करती है। बंधन में भी पुरूष को प्रकृति डालती है तो मुक्त भी पुरूष को प्रकृति करती है। यानी पुरूष सिर्फ़ प्रकृति के इशारे पर नाचता है। इस विचारधारा के अनुसार तो व्यक्ति में कोई व्यक्तित्व है ही नहीं।

इन दो मानव-सत्ता विरोधी धारणाओं का खंडन और निषेध करते हुए शंकराचार्य मानव-व्यक्तित्व की गरिमा की स्थापना करते हैं। आइये, समझे कि अहम् ब्रह्मास्मि का वास्तविक तात्पर्य क्या है?

अहम् यानी मैं स्वयं ब्रह्मअस्मि यानी हूँ और यही सच है और यह उतना ही सच है जितना कि दो और दो का चार होना|

ब्रह्म है मानव के रोम-रोम में उपलब्ध चेतन परमाणु| यह सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं।

व्यक्ति का यह सर्वशक्तिमान चेतन परमाणु वीर्य में निहित है| आतताई अब्रह्मी संस्कृतियां खतना द्वारा व्यक्ति के इसी वीर्य को नष्ट कर उसे दास बना चुकी हैं| ईसाइयों ने कुमारी माओं को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है|

अहम् ब्रह्मास्मि का तात्पर्य यह निर्देशित करता है कि मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों! आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही है अहम् ब्रह्मास्मि का अन्यतम तात्पर्य।

जिन्हें परेशानी नहीं है

§  लव जेहाद से|

§  जेहोवा और अल्लाह के नारी बलात्कार की पूरी छूट से| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६).

§  ईसा द्वारा बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह करने की अनुमति से|

§  अल्लाह द्वारा मुहम्मद की पुत्रवधू जैनब का (कुरान, ३३:३७-३८) और ५२ वर्षीय मुहम्मद का ६ वर्ष की आयशा से निकाह करने से|

        § भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित धरती के प्रत्येक नारी के बलात्कार की छूट से|

उन्हें दामिनी के बलात्कार पर दर्द क्यों हो रहा है?

“फिल्म इतिहासकार बताते हैं कि इस (राजा हरीशचंद्र गूंगी फिल्म) का निर्माण कार्य तो शुरू हो गया लेकिन एक बार इस फिल्म पर संकट के बादल छाने लगे। इस बार समस्या थी फिल्म की नायिका तारामती। दरअसल इस फिल्म में नायिका का एक ख़ास किरदार था और दादा साहब भी यही चाहते थे कि इस किरदार को कोई युवती ही निभाये। इसके लिए उन्होंने काफी प्रयास किये लेकिन सफलता नहीं मिली। यहाँ तक कि फाल्के ने कोठे वालियों से भी इस फिल्म में अभिनय करने का निवेदन किया लेकिन उन्होंने ने भी साफ़ मना कर दिया। उनका जवाब था कि हम कैमरे के सामने बेशर्मी नहीं कर सकते। उनकी तलाश तब ख़त्म हुई जब उन्हें एक ईरानी रेस्तरां में एक रसोईया मिला। जब फाल्के ने उससे बातचीत की तो वह तैयार भी हो गया।“ 

आरुषी परीक्षण, गौहाटी के बार बाला को संरक्षण आदि आने वाले समाज को चेतावनी है कि हमें अपनी बेटियां नौकरों और लव जेहादियों को सौंप देना पड़ेगा| हमें चरित्रहीनता में ईसाइयों को पीछे छोड़ देना पड़ेगा| शीघ्र ही बाप बेटी व स्वसुर और पुत्रवधू के यौन सम्बन्ध को अनैतिक नहीं माना जायेगा| कुमारी माएं हमारे घरों को शोभायमान करेंगी! सहजीवन, समलैंगिक सम्बन्ध और भाई बहन के विवाह को तो न्यायपालिका ही कानूनी मान्यता दे चुकी है| जब कि आज से मात्र १०० वर्ष पूर्व दादा साहेब फाल्के को वेश्याओं ने भी फिल्मों में काम करने से मना कर दिया था| आज फिल्मों में काम करने वाली तमाम नारियां सम्माननीय सांसद और मुख्यमंत्री हैं|

पुलिस बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह कराने वाले ईसा और पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाह के विरुद्ध कार्यवाही करके दिखाए|

मीडिया नारी के बलात्कारी को स्वर्ग देने वाले (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) जेहोवा और अल्लाह के विरुद्ध समाचार प्रकाशित कर के दिखाए|

लूट और नारी बलात्कार के प्रलोभन पर ही तो ईसाइयत और इस्लाम का अस्तित्व है|

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

आर्यावर्त सरकार  नरेन्द्र मोदी के व्यभिचार के सीडी के जाँच का स्वागत करती है और जानना चाहती है कि बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले ईसाइयत और इस्लाम के विरुद्ध सरकार क्या कार्यवाही करेगी? क्या मीडिया के पास इस सत्य को प्रकाशित करने का साहस है? मेरे लिखने पर विश्वास न कीजिए| नीचे दिए संदर्भों को बाइबल, कुरान और संविधान में देखिये|

“16) उनकी आँखों के सामने ही उनके बच्चों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया जायेगा। उनके घर लूटे जायेंगे और उनकी पत्नियों के साथ बलात्कार किया जायेगा।“ 

इसायाह का ग्रन्थ : अध्याय 13 नियम १६

देखें नीचे उद्धृत लिंक पर:-

http://www.biblemitr.com/bible.php?BookType=OLD&BookID=29&Chapter=13

यदि कोई सोचता है कि वह अपनी युवा हो चुकी कुंवारी बेटी (प्रिया) के प्रति उचित नहीं कर रहा है और यदि उसकी कामभावना तीव्र है, तथा दोनों को ही आगे बढ़ कर विवाह कर लेने की आवश्यकता है, तो जैसा वह चाहता है, उसे आगे बढ़ कर वैसा कर लेना चाहिए. वह पाप नहीं कर रहा है. उन्हें विवाह कर लेना चाहिए. (बाइबल, १ कोरिन्थिंस ७:३६)” उपरोक्त कथन एलिजाबेथ के बाइबल का है| किसकी माँ ने दूध पिलाया है कि प्रकाशित कर दे? उसकी लाश भी न मिलेगी|

देखें नीचे उद्धृत लिंक पर:-

http://www.christiancourier.com/articles/950-does-the-bible-conflict-with-itself-in-the-matter-of-incest

http://bhaandafodu.blogspot.in/2012_01_01_archive.html

"अपनी पत्नियों के साथ (और) जो औरतें तुम्हारे कब्जे में हों; उनके साथ सहवास करने में कोई निंदनीय काम नहीं है "सूरा -मआरिज 70:30 

अल्लाह ने मुहम्मद के बेटे जैद  की पत्नी से मुहम्मद का निकाह कराया.

३७. याद करो (ऐ नबी), जबकि तुम उस व्यक्ति से कह रहे थे जिस पर अल्लाह ने अनुकम्पा की, और तुमने भी जिस पर अनुकम्पा की कि, ‘अपनी पत्नी को अपने पास रोके रखो और अल्लाह का डर रखो, और तुम अपने जी में उस बात को छिपा रहे हो जिसको अल्लाह प्रगट करने वाला है.  तुम लोगों से डरते हो, जबकि अल्लाह इसका ज्यादा हक रखता है कि तुम उससे डरो.’ अतः जब जैद उस (जैनब) से अपनी जरूरत पूरी कर चुका तो हमने उसका (जैनब का) तुमसे निकाह कर दिया, ताकि इमानवालों पर अपने मुंह बोले बेटों की पत्नियों के मामले में कोई तंगी न रहे जबकि वे उनसे अपनी जरूरत पूरी कर लें. अल्लाह का फैसला तो पूरा हो कर ही रहता है. (कुरान सूरा ३३, अल-अहजाब आयत ३७)

३८. नबी पर उस काम में कोई तंगी नहीं जो अल्लाह ने उसके लिए ठहराया हो. यही अल्लाह का दस्तूर उन लोगों के बारे में भी रहा है जो पहले गुजर चुके हैं-और  अल्लाह का काम तो जंचा-तुला होता है. (कुरान सूरा ३३, अल-अहजाब आयत ३८)

जहां सती अपराधिनी है, वहीँ बार बालाएँ और कॉल बालाएं सम्माननीय|

मैं नीचे राम चरित मानस की पंक्तियाँ उद्धृत कर रहा हूँ,

अनुज बधू भगिनी सुत नारी| सुनु सठ कन्या सम ए चारी|

इन्हहिं कुदृष्टि बिलोकइ जोई| ताहि बधे कछु पाप न होई||

राम चरित मानस, किष्किन्धाकाण्ड; ८:४

अर्थ: [श्री रामजी ने कहा] हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्रवधू और कन्या – ए चारों समान हैं| इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता|

अतएव आर्यावर्त सरकार को मुसलमानों व ईसाइयों का वध करने का धार्मिक अधिकार है|

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| चढ़ावों को लूट रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

एलिजाबेथ की परेशानी

एलिजाबेथ को परेशानी यह है कि हमारा ईश्वर जारज और प्रेत नहीं हैजारज हमारे लिए अपमानजनक सम्बोधन हो सकता हैलेकिन अंग्रेजों का शासक परिवार सम्मानित जारज हैइतना ही नहीं ईसाइयों का मुक्तिदाता ईसा ही जारज हैहम वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देतेहमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतींहमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतींहमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जातीइससे वीर्यहीनता के प्रसार और देश के नागरिकों को बैल व भेंड़ बनाने में एलिजाबेथ को कठिनाई हो रही है|

सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता मिल गई है| आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५()].  विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”] गांड मारिये और मराइए और जजों के गुण गाइए|

मानव उन्मूलन की कीमत पर आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ बनी हुई है| नेताओं, सुधारकों, संतों, मीडिया, इस्लामी मौलवियों, मिशनरी और जजों सहित लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैं. सच छुपा नहीं है, न ही इसे जानना मुश्किल हैमुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणा स्रोत को नष्ट न कर दें. उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणा स्रोत कुरान (कुरान ८:३९) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) है

दासों, भिखारियों और चोरों का जनक मैकाले!

http://www|facebook|com/permalink|php?story_fbid=323173214391682&id=323155717726765

(२ फरवरी १८३५ को ब्रिटिश संसद में दिया लार्ड मैकाले का भाषण)-

"मैंने भारत की ओर-छोर की यात्रा की है पर मैंने एक भी आदमी ऐसा नहीं देखा जो भीख मांगता हो या चोर हो। मैंने इस मुल्क में अपार संपदा देखी है। उच्च उदात्त मूल्यों को देखा है। इन योग्यता मूल्यों वाले भारतीयों को कोई कभी जीत नहीं सकता यह मैं मानता हूं, तब तक; जब तक कि हम इस मुल्क की रीढ़ ही ना तोड़ दें, और भारत की रीढ़ है उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत।

इसलिए मैं यह प्रस्ताव करता हूं कि भारत की पुरानी शिक्षा व्यवस्था को हम बदल दें। उसकी संस्कृति को बदलें ताकि हर भारतीय यह सोचे कि जो भी विदेशी है, वह बेहतर है। वे यह सोचने लगें कि अंग्रेजी भाषा महान है अन्य देशी भाषाओं से। इससे वे अपना सम्मान खो बैठेंगे। अपनी देशज जातीय परंपराओं को भूलने लगेंगे और फिर वे वैसे ही हो जाएंगे जैसा हम चाहते हैं, सचमुच एक आक्रांत एवं पराजित राष्ट्र।

-लार्ड मैकाले

सम्पत्ति मात्र वीर्य में स्थित चेतन परमाणु, जिसे वेद ब्रह्म कहते हैं, है| मानव ब्रह्म का अंश है| ब्रह्म ने सारा ज्ञान ब्रह्मकमल में दे रखा है| विद्या मात्र ब्रह्मविद्या है और ज्ञान मात्र ब्रह्मज्ञान| वीर्यरक्षा के बिना ब्रह्मज्ञान सम्भव नहीं| वीर्य के रक्षा की शिक्षा गुरुकुलों में निःशुल्क दी जाती थी, जिसे मैकाले ने मिटा दिया| भारतीय संविधान की शपथ लेने वाले वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति की रक्षा नहीं कर सकते| दास संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को मिटाने में अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें|

मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, ओज, तेज और स्मृति का जनक है|

वीर्य ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोत है| वीर्यवान सांड को बांधा भी नहीं जा सकता| दास (बैल) बनानेकेलिए किसान सांड़को वीर्यहीन करदेताहै| वीर्यहीन होते ही वह बैल बन कर किसान के लिए अन्न पैदा करता है, जिसे किसान स्वयं खा जाता है और बैल को भूसा खिलाता है| दास बनानेहेतु पैगम्बरोंने बलात्कार, खतना कुमारी मरियम को मजहबसे जोड़ दिया|

वीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों और शक्तिवान का दास ही बन सकता है, स्वतन्त्र नहीं रह सकता| वीर्यहीन व्यक्ति का मानवाधिकार नहीं होता| वीर्य हीन मनुष्य रोगग्रसित चलता फिरता मुर्दा और दास है|

यहूदी या मुसलमान किसको पसंद करेंगे?

ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकता? ईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उसका खतना करा कर दास बनाता है? ईश्वर को, जो उस को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उस के उपासना की स्वतंत्रता को छीनता है?

हर मुसलमान व यहूदी यह याद रखे कि उसको दास बनाया गया है| वस्तुतः मूसा और मुहम्मद नामक पैगम्बरों ने उसको दास बनाने के लिए उसका खतना करा कर उसके ब्रह्म को उससे छीनने का घृणित और अक्षम्य अपराध किया है| वे तो मर गए लेकिन अपनी वरासत शासकों और पुरोहितों को सौंप गए हैं| अगर उन्होंने अब भी पैगम्बरों द्वारा गढे गए जेहोवा और अल्लाह का परित्याग नहीं किया तो मानव जाति बचेगी नहीं|

जेहोवा यहूदियों का व अल्लाह मुसलमानों का शत्रु|

जेहोवा और अल्लाह मनुष्य को दास बना कर लूटने के लिए मुखौटे हैं|

धृतराष्ट्र के न्यायपालिका ने जुए में हारने के बाद पांडवों को निर्णय दिया था कि दास के अधिकार नहीं होते| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो लिखते हैं कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (अधीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर महोदय यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक वेश्यावृत्ति को संरक्षण देना है| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने, किसान के सांड की भांति, यहूदियों व मुसलमानों को दास बनाने के लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया है| यहूदी और मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं और जीवन भर रोगी, अशक्त और दास बन कर जीते हैं|

किसान सांड़ को वीर्यहीन कर दास बना लेता है और (अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं का प्रयोग कर दास बनाती हैंमनुष्य को दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग हैउसको वीर्यहीन करनाखतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक हैपीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक वेश्यावृत्ति और समलैंगिक सम्बन्ध को संरक्षण देना हैइसी प्रकार मूसा से लेकर एलिजाबेथ तक मानवमात्र को वीर्यहीन कर रहे हैं|

पूरा विवरण देखें:- http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

इतना ही नहीँ, मुसलमान स्वेच्छा से अपनी कब्र खोद रहे है। इस्लाम अपने अनुयायियों का ही शत्रु है। इस्लाम का अल्लाह अपने अनुयायी मुसलमानों से वादे जन्नत की करता है, लेकिन १४०० से अधिक वर्षो से मुसलमानों को कब्र में सड़ा रहा है और आगे कयामत तक सड़ाएगा। मुसलमान यह न भूलें कि ईसाई वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए उनका दोहन कर रहे हैं|

हम वीर्यहीन बनने के लिए तैयार नहीं हैं| विद्या, स्वतंत्रता और विवेक के लिए ईसाइयत और इस्लाम मजहबों में कोई स्थान नहीं है| कुरान २:३५ व बाइबल, उत्पत्ति २:१७| हम गायत्री मंत्र द्वारा ईश्वर से बुद्धि को सन्मार्ग पर ले जाने की प्रार्थना करते हैं| हमारी गीता मानव मात्र को उपासना की आजादी देती है| (गीता ७:२१), 

हम जेहोवा और अल्लाह के उपासना की दासता स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं| अजान व नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| मैं आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हूँ और न अजान व नमाज को पूजा मानता हूँ|

हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह कराने वाले ईसा व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाह और धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग देने वाले (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) जेहोवा और अल्लाह को ईश्वर मामने के लिए तैयार नहीं हैं|

शासक, समाजवाद, ईसाइयत और इस्लाम यहूदी और मुसलमान का खतना अथवा यौन शिक्षा अथवा मुक्त यौन सम्बन्ध की आजादी के बहाने आप को वीर्य हीन बना कर दास बना रहे हैं व ईसाई को भेंड़ बना रहे हैं| प्रजा तंत्र के ठग आप की नसबंदी कराते हैं|

दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करिये|

जो उपलब्धि इस्लाम ई० स० ७१२ से ई० स० १८३५ तक अर्जित कर सका, उससे अधिक ईसाइयत ने मात्र ई० स० १८३५ से ई० स० १९०५ के बीच अर्जित कर लिया| एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की दौड़ में सबसे आगे है| मात्र वर्षों की अवधि में एलिजाबेथ ने वैदिक सनातन संस्कृति की जड़ें ही नष्ट कर दी हैं| कुमारी माताओं को सम्मानित किया जा चुका है| लव जेहाद, बेटी व पुत्रवधू से विवाह, सहजीवन समलैंगिक मैथुन, सगोत्रीय विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है| बारमें दारूपीने वाली बालाओं कासम्मान हो रहा है! विवाह सम्बन्ध अब बेमानी हो चुके हैं| स्कूलों में यौन शिक्षा लागू हो गई है| अब एलिजाबेथ टाटा, बिड़ला, अम्बानी आदि को लूटने के लिए एफडीआई लागू कर चुकी है|

सती प्रथा बंद करने के लिए राजा राम मोहन राय पैदा हुए| लेकिन आश्चर्यजनक रूप से (Honour killing), तलाक और मेहर का पिछले १४०० से अधिक वर्षों से एक भी विरोधी पैदा नहीं हुआ!

सर्वोच्च न्यायालय अपने शपथ से बंधी है| ईसाइयों और मुसलमानों, जिन्हें धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं, के विरुद्ध अभियोग नहीं चला रही है| इसके कारण मानव जाति के अस्तित्व को खतरा है|

यह आश्चर्य ही है कि ईसा पूर्व १५३० वर्ष से आज तक किसी व्यक्ति ने मनुष्य के ईश्वरीय शक्ति को छीनने वाले 'खतना' का विरोध नहीं किया!

आप्त 


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