Kanth Danga 14710

कांठ दंगा

“कांठ में शुक्रवार को हुए बवाल के लिए एसएसपी धर्मवीर सिंह ने स्थानीय भाजपा सांसद सर्वेश सिंह को जिम्मेदार ठहराया है। एसएसपी ने शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस कर कहा कि सांसद ने मंदिर पर लाउडस्पीकर लगवाया, जो बवाल कारण बना।...“ 

क्या आर्यावर्त सरकार जान सकती है कि मंदिर से लाउडस्पीकर पर ऐसा क्या कहा गया कि बवाल हो गया?

क्यों कि मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा अविश्वासियों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इन धाराओं के अस्तित्व में आने के बाद से आज तक, मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं किया गया और न आज तक मस्जिदों के लाउडस्पीकर उतारे गए|

इसके विपरीत मंदिरों में घोषणा की जाती है, ‘धर्म की जय हो| अधर्म का नाश हो|| प्राणियों में सद्भावना हो... विश्व का कल्याण हो...| मंदिर के इन घोषणाओं से राज्यपाल अजीज आजिज क्यों हो गए?

इंडियन उपनिवेश की मल्लिका एलिजाबेथ का षड्यंत्र स्पष्ट है. अमेरिकी माया संस्कृति की भांति वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है. क्यों कि जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है, वहीँ एलिजाबेथ के दास अज़ीज़ कुर्रेशी द्वारा ईशनिंदा के विरोधियों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ को लागू कर प्रताड़ित किया जा रहा है.

क्या एसएसपी बताएंगे कि, क्या हम ईमामों की भांति बांग लगाते हैं या नमाज पढ़ते हैं कि मात्र ईश्वर ही पूज्य है? हमारे किस धर्म ग्रन्थ में लिखा है कि जो आर्य नहीं है, उसे कत्ल कर दो| हम ने कब कहा कि या तो वेदिक पंथ  स्वीकार करो, अथवा जजिया दो अन्यथा हम तुम्हें कत्ल करेंगे| हमने मुसलमानों के साथ नहीं रह पाने की घोषणा कर के देश का बंटवारा कब कराया? कत्ल करने, लूटने और नारी बलात्कार के बदले ईश्वर ने हमें स्वर्ग कब दिया? गैर मुसलमानों के विरुद्ध मुसलमानों का जिहाद और जाति हिंसा तो कश्मीर में आज भी जारी है|

क्या एसएसपी जानते हैं कि कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा हैधरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार हैजो काफ़िर इस कठोर सच्चाई का विरोध करेगा, उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी जायेगी. उसका नार्को टेस्ट किया जायेगा. उसे जेल में जहर दिया जायेगा, ताकि वह घुट घुट कर मरे. हमारी साध्वी प्रज्ञा के साथ यही किया गया है. उसके मुंह में गोमांस ठूसा जायेगा. हमारे जगतगुरु एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ के साथ यही किया गया. सभी जज जानते हैं. क्या किसी जज के पास न्याय करने का साहस है?

Your Registration Number is : GOVUP/E/2014/01314 

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यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त पंजीकृत न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|


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