Kanoon ka paalan

मैं, अप्रति, सूचना सचिव, आर्यावर्त सरकार, सन २००० से अब्रह्मी संस्कृतियों और उसके संरक्षक, पोषक और संवर्धक भासं आधारित लोकतंत्र  के विरुद्ध लड़ रहा हूँ. हमारी सरकार राजतंत्र आधारित है. इतिहास साक्षी है, जबतक राजतंत्र रहा, १८५८ तक भारत दलित व भिखारी विहीन सोनेकी चिडिय़ा रहा. हमारे तथाकथित कम्यूनल श्लोक का कथन है,
“न मे स्तेनो जनपदे न कदर्यो न मद्यपो| 
“नाना हिताग्निर्नाविद्वान्‌ न स्वैरी स्वैरिणी कुत: || 
छान्दोग्योपनिषद, ५ प्रपाठक, ११ खंड, ५वां श्लोक
न मेरे राज्य में कोई चोर है, न कंजूस स्वामी , न कोई शराबी , न कोई यज्ञकर्मों से रहित, न कोई अविद्वान| न कोई परस्त्री गामी तो ऐसी स्त्रियां कहां होंगी |”
१८५८ से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भारत पर शासन ब्रिटेन का है. १९४७ मे पंथनिरपेक्ष स्वतंत्र उपनिवेश और १९५० से भारतीय संविधान आधारित गणतंत्र है, जो सनातनी का अस्तित्व स्वीकार नहीं करता.
ईसाई व मुसलमान को अब्रह्मी संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार है. सनातनी का कोई अधिकार नहीं.
भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| (कुरान ८:३९).
चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]. बेटी से विवाह कीजिए. (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). पुत्र वधू से निकाह कीजिए. (कुरान ३३:३७-३८). बिना विवाह बच्चे पैदा कीजिए. [UDHR अनु०२५(२)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)] और जिसे भी चाहें अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार से. पूरे विवरण उद्धृत संदर्भों से प्राप्त करें.
यह कि कोई भी कानूनविद बताए कि बपतिस्मा व अजान सर्वधर्म समभाव और सेकुलर कैसे है? विश्व की सबसे बड़ी आबादी ईसाई व मुसलमान अल्पसंख्यक कैसे हैं? इंडिया के कश्मीर, नागालैंड व मिजोरम सहित ८ प्रदेशों मे हिंदू अल्पसंख्यक हो गया, लेकिन घोषित क्यों नहीं हुआ? हर व्यक्ति अपराधी है. या तो ईसा को राजा नहीं मानता अथवा केवल अल्लाह की पूजा नहीं करता. वह कत्ल कर दिया जाएगा.
http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng
भासंविधान की उद्देशिका धर्म और उपासना की स्वतंत्रता देती है. इन खूनियों को अपनी संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार क्यों दिया गया है? संविधान की उद्देशिका
भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का यानी सनातनियों का नरसंहार करने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| 
इस अनुच्छेद ने धरती की सभी नारियों के मर्यादा का हनन कर रखा है और किसी का जीवन सुरक्षित नहीं.
मेरे अपराध अधिक गंभीर हैं. मुझे सरकार ने सन २००० से आजतक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? दोष हमारा है. हम उपनिवेश का विरोध नहीं करते. बाइबिल, कुरान और संविधान का विरोध नहीं करते. बपतिस्मा, अजान और खुत्बे का विरोध नहीं करते.
पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमान का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद २९(१). काफ़िर को कत्ल करने व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलने के लिए मुसलमान को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, राष्ट्रपति, राज्यपाल व जज, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार करने के लिए विवश हैं| जज बाइबल और कुरान के हठधर्मी आदेशों के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकते. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| 
मुसलमान काफिरों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे| 

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