Kalyugi Kalnemi Ramdev

कलयुगी कालनेमि रामदेव

पाठक सहित योगगुरु रामदेव यह न भूलें कि इंडिया के नागरिक भेंड़ और सोनिया के दास हैं| दास के नागरिक अधिकार नहीं होते| पांडवों के सामने उनकी पत्नी द्रोपदी नंगी होती रही और वे कुछ न कर सके| बिना अपराध हमारे जगतगुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ और साध्वी प्रज्ञा अक्टूबर २००८ से बंद हैं| अपराध स्थल मस्जिद और खूनी सोनिया व हामिद सत्ता के शिखर पर हैं| योगगुरु रामदेव के गुरु स्वामी शंकरदेव का १४ जुलाई, २००७ से पता नहीं है| इसी आधार पर योगगुरु रामदेव जिंदगी भर जेल में सड़ जायेंगे| इस अभियोग पर कार्यवाही न कर अन्य मामलों में कार्यवाही संदेहास्पद है| योगगुरु कालनेमि की भूमिका में हैं|

मेरा आरोप है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध या लोकपाल की नियुक्ति के लिए लड़ने वाले योगगुरू, अन्ना, पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी, पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण और श्री श्री रविशंकर सभी सोनिया द्वारा पोषित अथवा भयादोहित अपराधी हैं| जिन्हें लोकसेवकों के भ्रष्टाचार तो दिखाई देते हैं, लेकिन संविधानकेअनुच्छेद ३९(ग) व दंप्रसंकीधारा१९७ के भ्रष्टाचार दिखाई ही नहीं देते! इन लोगों की भरपूर कोशिश है कि जनता समस्या की जड़ भारतीय संविधान पर ऊँगली न उठा पाए, अन्यथा सोनिया का सारा खेल खटाई में पड़ जायेगा|

संविधानकेअनुच्छेद ३९() के अनुसार नागरिक की स्थिति किसान के बैल से भी बुरी रह गई है| एफडीआई तो देश के हित में है, लेकिन नागरिक के पास सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देश हित में नहीं! दंप्रसं की धारा १९७ के अनुसार नागरिक की सम्पत्ति और पूँजी लूटना तब तक अपराध नहीं है, जब तक सोनिया को उसका हिस्सा मिले| अपराध वह तभी माना जा रहा है, जब सोनिया चाहती है| यह कैसा लोकतंत्र है? नागरिकों को आजादी कौन सी मिली है, क्या मीडिया सोनिया से पूछेगी?

चिदम्बरम सहित दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है. वर्तमान परिस्थितियों में सोनिया द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. भारतीय संविधान ने इनकी पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक नागरिक ईसा की भेंड़ है. अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. 

मुंबई एटीएस वालों ने हमारे आधुनिक दुर्गा साध्वी प्रज्ञा को नंगा किया. उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी. हमारे सेनापति पुरोहित का पैर तोड़ दिया. हमारे जगतगुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ के मुहं में गोमांस ठूसने वालों, हेमंत करकरे अन्य १७ को, योगगुरू रामदेव ने शहीद घोषित किया और ९० लाख रूपये इनाम भी दिए. अब योगगुरु रामदेव मानवता के हत्यारे मुसलमानों से मिल कर आप लोगों की हत्या करना व वैदिक सनातन धर्म मिटाना चाहते हैं| कुटरचित परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९() दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को बचाने के लिए ड्रामा कर रहे हैं| योगगुरु द्वारा ९० लाख का इनाम और देश व मानवता के हत्यारों का समर्थन का प्रमाण पाठक को निम्नलिखित साइटों से मिल जायेगा:-

http://www.thaindian.com/newsportal/world-news/kin-of-martyrs-of-mumbai-attacks-honoured-in-capital_100131300.html

http://www.aryavrt.com/Home/1-wary-of-yogguru-2

http://www.vijayvaani.com/FrmPublicDisplayArticle.aspx?id=941

http://www.aryavrt.com/Home/yogguru-supports-fatwa-on-vandemataram

http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-05-13/india/31689005_1_hindu-dalits-muslim-dalits-quota-benefits

जब कि योगगुरु रामदेव को भलीभांति ज्ञात है कि उन्हें पंतजलि योगपीठ रखने का ईसाइयत और इस्लाम अधिकार नहीं देते| [(बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८)] और न योगगुरु को जीवित रहने का ही अधिकार है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान २:१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित|]आश्चर्यजनक रूप से योगगुरु अपने धर्म, जाति और योगपीठ के लिए न लड़ कर मुसलमानों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैंसबकी सम्पत्ति और पूँजी लूटने वाले भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के विरुद्ध न लड़ कर कालाधन के लिए लड़ रहे हैं| जिस दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का दुरूपयोग कर सोनिया नागरिकों को निर्भीकता से लूट रही है, उसके उन्मूलन की योगगुरु रामदेव चर्चा भी नहीं करते| क्या जनता इन कालनेमियों और धूर्त नेताओं के हाथों जनता का भविष्य सुरक्षित है? पाठक विचार करें|

त्रेता का कालनेमि सफल नहीं हुआ| क्या आप चाहते हैं कि कलियुग का कालनेमि मानव जाति को मिटाने में सफल हो? यदि नहीं तो आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें|

 

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