kala dhan

Your Request/Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2012/10087

President Secretariat, New Delhi - 110004

Dated; Monday, July 23, 2012y

Web site: http://helpline.rb.nic.in/

This is a public document. Anyone can view the status from the web site by typing the above Request/Grievance Registration Number. There is no pass-word.

काला धन

काला धन से भी घातक समस्या भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल है| भारतीय संविधान  कुरान और बाइबल का संरक्षक, संवर्धक और पोषक है| इस देश के नागरिक भारतीय संविधान का अब भी आदर करते हैं, जिसके अनुच्छेद २९(१) ने नारी को बलात्कार की वस्तु घोषित कर रखा है| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). मानव मात्र को कत्ल किये जाने योग्य अपराधी घोषित कर रखा है| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). उपासना स्थल तोडना हर ईसाई व मुसलमान का संवैधानिक अधिकार घोषित कर रखा है| (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३)(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). हर नागरिक से सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार छीन रखा है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ को संविधान से ही गायब कर दिया| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से भी तसल्ली नहीं हुई तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ का भी संकलन कर डाला| सती प्रथा निवारण कानून, १९८७, द्वारा सती का महिमा मंडन करना अपराध घोषित करना काफी न था अतएव अब उज्ज्वला शर्मा का महिमामंडन कर पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी से अधिकार दिलाया जा रहा है|

इंडिया के नागरिक एक आक्रांत एवं पराजित राष्ट्र की भेंड़े हैं।

इंडिया के नागरिकों के पास प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| (भारतीय दंड संहिता की धाराएं १०२ व १०५). लेकिन जहां राज्य स्वयं वैदिक सनातन धर्म को मिटा रहा हो, वहाँ अधिकारों का कोई मतलब नहीं रह सकता है| आर्यावर्त सरकार की स्थापना वैदिक सनातन धर्म के रक्षा के लिए की गई है| निर्णय इंडिया के नागरिकों के हाथ में है| वोट द्वारा भी वे जीने, सम्पत्ति व पूँजी का अधिकार नहीं पा सकते|

भारतीय संविधान मानव जाति का शत्रु है| आज कल भ्रष्टाचार मिटाने और विदेशों में जमा धन वापस लाने की अन्ना व योगगुरू की मुहिम जारी है. पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी भ्रष्टाचार करने वालों को नंगा कर रहे हैं. इन लोगों में एक समानता है. यह लोग भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) का विरोध नहीं करते. न तो भ्रष्टाचार के संरक्षक दंप्रसं की धारा १९७ का विरोध करते हैं.

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग मान लेते हैं कि जन लोकपाल की नियुक्ति हो जाती है. विदेशों का सारा काला धन इंडिया आ जाता है. सारी भ्रष्टाचार की रकम भी सरकारी खजाने में पहुंच जाती है. तो भी जनता को क्या मिलेगा? रोम राज्य के भावी महाराज राहुल के कथनानुसार सारी रकम का ५%. शेष ९५% तो शासक (सोनिया) के मातहत और उपकरण खा जायेंगे. स्पष्ट है कि इनकी गिद्ध दृष्टि लूट पर एकाधिकार प्राप्त करने पर गड़ी है. मानव मात्र के अधिकारों से इनका कोई सरोकार नहीं|

आर्यावर्त सरकार भारत के नागरिकों को सम्पत्ति व पूँजी का अधिकार देगी| आर्यावर्त सरकार वैदिक सनातन धर्म को लागू करेगी|

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?

वैदिक राज्य में चोर, भिखारी और व्यभिचारी नहीं होते थे. स्वयं मैकाले ने २ फरवरी १८३५ को इस बात की पुष्टि की है. लेकिन इंडिया का संविधान ही चोर है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) व लुप्त अनुच्छेद ३१. लेकिन भारतीय संविधान को चोर कहना सोनिया के रोम राज्य के विरद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है और संसद व विधानसभाओं के विशेषाधिकार का हनन भी| जो भी इस सच्चाई को कहे या लिखेगा, उसे सोनिया दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में जेल भेजवा देंगी. मुसलमान ईश निंदा में कत्ल करेगा. मै ४२ बार हवालात और जेल गया हूँ| और हमारे ९ अधिकारी आज भी जेलों में बंद हैं..


Comments