Jj aur CrPC196

IN THE COURT OF SH. SANDEEP GUPTA MM ROHINI DISTT. COURTS, DELHI

FIR No. 406/2003 u/s 153A PS NARELA DELHI.

FIR No. 166/2006 u/s 153A and 295A PS NARELA DELHI.

State Vs Ayodhya Prasad Tripathi and another

सुनवाई की तारीख़: फरवरी ११, २०१५.

मुख्य न्यायमूर्ति श्री दत्तू महोदय, सर्वोच्च न्यायालय. ११०००१

1.     आप के उपरोक्त जज ने, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन उपराज्यपाल दिल्ली की संस्तुति पर, भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन उपरोक्त दोनों अभियोग चलाए हैं. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के रहते आप असहाय हैं. आप को मस्जिदों से की जाने वाली ईशनिंदा और आप को कत्ल करने के खुत्बों को सुनने में लज्जा नहीं आती.

2.    अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ६० व १५९ और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं. मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा अविश्वासियों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इनके अस्तित्व में आने के बाद से आज तक, मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं की गईं. षड्यंत्र स्पष्ट है वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है. जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है, वहीँ ईशनिंदा के विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ और जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है. एलिजाबेथ को हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को कत्ल करना है क्यों कि हमारे पूर्वजों ने ईशा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया (बाइबल, लूका १९:२७ के साथ पठनीय) भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१). राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये जाने वाले अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं हमारा अपराध यह है कि हम एलिजाबेथ के उपनिवेश को चुनौती देते हैं हम जानना चाहते हैं कि मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

3.    इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश (डोमिनियन) है| {{भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अ० ६(ब)(||)} व कामनवेल्थ मेम्बर} और आप एलिजाबेथ के दास. १५ अगस्त, १९४७ से स्वातन्त्रय युद्ध को अपराध बना दिया गया है. आप देश के विवश प्रधान न्यायाधीश हैं. क्योंकि आप उपनिवेश, मस्जिद और अज़ान का विरोध नहीं कर सकते. आप को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं! मुसलमान भी दार उल इस्लाम तो चाहता है लेकिन उपनिवेश से मुक्ति नहीं!

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

4.     मस्जिद से ईमाम/मुअज्ज़िन काफिरों के ईष्टदेवों की अज़ान द्वारा ईशनिंदा करता है. काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देता है. जज आप के हत्यारों को वेतन और हज अनुदान दिलाते हैं! दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ ने आप को अपमान सहने के लिए विवश कर रखा है. आप को तो नाबदान के पानी में डूब मरना चाहिए. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

5.    जज न्याय करने का अधिकार उसी क्षण खो देते हैं, जिस क्षण वे भारतीय संविधान व विधियों की मर्यादा बनाये रखने की शपथ लेते हैं| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८}| क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर मुसलमान और ईसाई को जजों सहित जनसेवकों व मानव मात्र के नारियों के बलात्कार, लूट, हत्या और वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश का अब्रह्मी संस्कृतियों को असीमित मौलिक अधिकार देता है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के कवच से सुरक्षित जज, जनसेवक और जनता एलिजाबेथ के प्रतिनिधि राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं| जजों को डूब मरना चाहिए|

http://www.aryavrt.com/azaan-aur-snvidhan

6.     मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. इसके प्रमाण के विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

7.     मेरे विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अब तक ५० अभियोग लगे हैं. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के कवच के कारण आप के हाथ बंधे हैं. फिर भी भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन आप मुझे स्वयं मृत्युदंड दे सकते हैं. अतः सुनहरे अवसर का लाभ उठाइए. जयचन्द, मीरजाफर और २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी का अनुसरण कीजिए. एलिजाबेथ आप को मालामाल कर देगी.

http://www.aryavrt.com/muj14w33-smjhauta

8.     मैं उपरोक्त कथन का परिणाम जानता हूँ. मुझे न तो मरने का भय है और न यातना का. जज साहब मेरी चिंता न करें – अपनी खैर मनाएं. वैदिक सनातन संस्कृति की चारो आधार शिलाएं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री नष्ट कर दी गई हैं. ईसाई के पास मुसलमान को कत्ल करने और मुसलमान के पास ईसाई को कत्ल करने का भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. मानवजाति ही नष्ट होने के कगार पर है.

9.     जज साहब! यह युद्ध मात्र मैं लड़ सकता हूँ. क्यों कि मुझे जीवन से मोह नहीं है, न प्रतारणा का भय है और न मेरे पास खोने के लिए कुछ बचा है.  यदि आप मानवजाति का भला चाहते हों तो मेरी सहायता कीजिए.

आर्यावर्त सरकार,  (अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०)

फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१)

वर्तमान पता; मंगल आश्रम, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड.

CC to; BRITISH HIGH COMMISSIONER, President of India, PM NMO,

 

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