JantaKi Adalt me

Your Request/Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2013/14589

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दिनांक: रविवार, 8 सितम्बर 2013य

मित्रों| मैं जनता की अदालत से एक फरियाद करना चाहता हूँ|

हमने सुना है कि देश में नेशनल लीगल अथोरिटी है| वह मुफ्त न्याय दिलाती है|

यदि यह सही है तो नेशनल लीगल अथोरिटी मेरे निम्नलिखित मामलों में न्याय करके दिखाए|

१.      मैं सिचाई विभाग में अवर अभियंता था, लेकिन मुझे पेंशन नहीं मिल रही है| राज्य लोकसेवा न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) में याचिका डालने के कारण मुझे नौकरी से निकाल दिया गया| २९-११-१९९४ में ट्रिब्यूनल का फैसला मेरे पक्ष में हुआ| काफी प्रयास के बाद भी मुझे आज तक पेंशन नहीं दी जा रही है और न कोई सुनवाई हो रही है| अपने सभी मामले मैं सर्वोच्च न्यायालय को भेज चुका हूँ| क्या नेशनल लीगल अथोरिटी कुछ कर सकती है?  

http://www.aryavrt.com/pension-sat-appeal

२.      ईस्ट इंडिया कम्पनी के जमाने में केवल लावारिशों की सम्पत्ति राजवाह (escheat} होती थी| पाकपिता गाँधी ने आप को बिना ढाल-तलवार के ऐसी आजादी दी है, कि आप आज भी ब्रिटेन उपनिवेश की प्रजा हैं| न आप के पास सम्पत्ति रखने का अधिकार है और न जीने का| भारतीय संविधान की शपथ लेने वालों और लोकसेवकों ने अपनी सम्पत्ति, धरती और नारियां तक ईसाइयों व मुसलमानों को सौंप रखी हैं|

३.      अपना व अपनी वैदिक सनातन संस्कृति का भला चाहें तो मेरी भूमियाँ, जिसे सोनिया ने लूट ली हैं, मुझे वापस दिला दीजिए| विवरण नीचे के यूआरएल पर उपलब्ध है:-

http://www.aryavrt.com/gnl-case

http://www.aryavrt.com/nl2pm-pdf

४.      भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से राजस्व अभिलेखो में हेरा फेरी कर लोकसेवकों ने मेरी १.८८ एकड़ भूमि लूट ली| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपनी जांच में जालसाजी २८ जुलाई, १९८९ को प्रमाणित की है| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपराधी लोकसेवकों को दंडित नहीं किया लेकिन ९-८-१९८९ को सभी विपक्षियों की सहमति पर बदले में भूमि देने का आदेश पारित किया| उपरोक्त आदेशों के विरुद्ध कोई अपील भी नहीं की गई है| लेकिन मुझे भूमि आज तक नहीं दी गई|

http://www.aryavrt.com/muj11w15c-jan-lokpal

५.      राज्यपाल बनवारी ने सोनिया के दबाव में मेरी भूमि खेसरा ९२७/४ रकबा ०.२० एकड़ मौजा तुर्कमान पुर तप्पा कस्बा, परगना हवेली, तहसील सदर, जिला गोरखपुर, आतंक के बल पर लूटी हुई है| इस भूमि पर राजस्व अभिलेखों में मेरा नाम ई० सन० १९९४ तक ही उपलब्ध है| इसके बाद इस भूमि से मेरा नाम निरस्त कर दिया गया| इसी अभिलेख के आधार पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ज्वाईंट रजिस्ट्रार ने जुलाई २८, १९८९ में भूमि पर मेरा कब्जा होने की आख्या दी| जिसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर बदले में भूमि देने सुझाव दिया| लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राजस्व अभिलेखों में जालसाजी करने वाले अधिकारियों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के प्राप्त कवच के कारण, दंडित करने का आदेश नहीं दिया| न मुझे भूमि दिलाने का ही साहस जुटा सकी|

६.      इस भूमि का वाद १६९८/१९८७ आज भी चल रहा है| लेकिन जिस आधार, यानी खेसरा- खतौनी ९२७/४, जिसके बल पर यह वाद प्रस्तुत किया गया, वही मिटा दिया गया, तो बताइये कि मैं क्या कर लूँगा?

७.      कोई न्यायालय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अस्तित्व में रहते, न जज का कुछ बिगाड़ सकती है और न लोकसेवकों का|

८.      भ्रष्टाचार भारतीय संविधान से प्रायोजित है| विकल्पहीन लोकसेवकों की नियुक्ति ही लूटने के लिए की जाती है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ|  जहां भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के मौलिक अधिकार को सांसदों और जजों ने मिलकर नागरिकों से लूट लिया और अनुच्छेद ३९() व्यक्ति को सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं देता, वहीं दंप्रसं की धारा १९७ ने सत्ता का केन्द्रीयकरण सोनिया के हाथों में कर दिया है| सोनिया के मनोनीत लुटेरों के विरुद्ध कहीं सुनवाई नहीं हो सकती| यह कहना गलत है कि कानून सबके लिए एक समान है अथवा कानून अपना कार्य करता है| सोनिया द्वारा दंप्रसं की धारा १९७ भयादोहन के लिए उपयोग में लाई जा रही है| लोकसेवक, पुलिस, नागरिक जज सभी दंप्रसं की धारा १९७ से पीड़ित हैं| आज अपराधी वह है जिसे सोनिया अपराधी माने| यही कारण है कि जहां येदियुरप्पा और मधु कोड़ा जेल गए, वहीं किसानों, लोकसेवकों और यहाँ तक कि रामप्रसाद बिस्मिल जैसे उन हुतात्माओं तक की जमीनें लूटने, जिसके बलिदान के कारण वे मुख्य मंत्री राज्यपाल बने, वाले मुख्य मंत्री मुलायम मायावती जेल नहीं भेजे जा रहे हैं| चुनाव द्वारा भी जनता सोनिया की लूट से मुक्ति नहीं पा सकती|

 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

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