Jan Lokpal Fraud

Your Request/Grievance Registration No.

: PRSEC/E/2011/06263 Dated: April 25, 2011

With President Secretariat, New Delhi-110004

जनता की अदालत में:-

विषय: भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

जन लोकपाल कानून की सीमाएं

मुझे इस बात से मतलब नहीं कि आप हिंदू हैं या मुसलमान अथवा ईसाई. आप के सामने मै भारतीय संविधान और उपनिषद के अंश रखता हूँ. निर्णय करें किसे चाहेंगे? क्या आप सम्पत्ति पर अधिकार न् चाहेंगे?

http://www.khapre.org/portal/url/sa/sahitya/upanishad/Z70916054515(%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%BD%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A4%A6%E0%A5%8D).aspx

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?

मेरी भूमि खसरा संख्या ८८६ रकबा १.६८ व ९२७/४ ०.२० एकड़, मौजा तुर्कमान पुर, तप्पा कस्बा, परगना हवेली, तहसील सदर, जिला गोरखपुर, सोनिया ने लूटी है.

राजस्व लोकसेवकों ने अभिलेखों में जालसाजी कर मेरा ही नहीं, हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का नाम भी गायब कर दिया. जिसके बलिदान के कारण प्रतिभा जैसी आर्थिक ठगिनी प्रेसिडेंट बनी, जब उसे ही नहीं छोड़ा, तो सोनिया किसे छोडेंगी? जिन राजस्व अभिलेखों के आधार पर जज ने सन १९८९ में मेरा कब्जा माना, ई० सन १९९४ से उन अभिलेखों से भी मेरा नाम हटा दिया गया है. मेरा तो वाद भी चला. लेकिन हुतात्मा का वाद न लखनऊ उच्च न्यायालय चला और न इलाहबाद| पूर्व राष्ट्रपति के संज्ञान में होने के बाद भी सोनिया ने स्मारक लूट लिया| जज या नागरिक लोकसेवकों का कुछ नहीं बिगाड़ सके, क्योंकि उन्हें राज्यपाल बनवारी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण देने के लिए विवश हैं. संरक्षण नहीं देंगे तो राज्यपाल एनडी तिवारी की भांति यौन अपराध में नप जायेंगे| लेकिन बेटी से विवाह कराने वाला ईसा (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और पुत्रवधू से निकाह कराने वाला अल्लाह आप का ईश्वर बना रहेगा! (कुरान, ३३:३७-३८). इस प्रकार भारतीय संविधान ही भ्रष्ट है| देखें अनुच्छेद ३९ग और लुप्त अनुच्छेद ३१. अपनी खैर मनाएं शांति व प्रशांत भूषण. दोनों पर हमले जारी हैं|

पाठक अपना भ्रम दूर करें| भारत में कोई लोकतंत्र नहीं है. भारत में सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुना गया सोनिया तन्त्र है. सर्व विदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री मनमोहन का मनोनयन सोनिया ने ही किया है. सभी राज्यपालों का मनोनयन सोनिया ही करती है और सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं.

उपरोक्त दोनों भूमियों को सोनिया ने, भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से, मायावती व राजस्व कर्मियों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन राज्यपाल बनवारी से संरक्षण दिला कर, लूटा हुआ है| नीचे प्रस्तुत लिंक के संलग्नक १ द्वारा लोक सेवकों द्वारा कृत अपराध के लिए पिछले २२ वर्षों से किसी को न दंडित किया गया और न मुझे संलग्नक २ के अनुसार बदले में भूमि ही दी गई. इन भ्रष्टाचारियों का जज क्या बिगाड सके? विवरण नीचे उद्धृत वेबसाइट में देखें:-

http://www.aryavrt.com/nl-petition-transfered

भारत के नागरिक सोनिया के भेंड़ हैं. सम्पत्ति उपार्जित कर सकते हैं, अर्जित नहीं. भारतीय संविधान नागरिक को उसकी सम्पत्ति से बेदखल कर चुका है. प्रमाण नीचे है:-

संवैधानिक लूट की इस कार्यशैली को समझने के लिए पाठक को भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को ध्यान से पढ़ना पड़ेगा. नीचे उद्धृत कर रहा हूँ:-

३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

सन १९५० से आजतक किसी ने उपरोक्त अनुच्छेद का विरोध नहीं किया! लोकपाल कानून क्या कर लेगा?

उपरोक्त अनुच्छेद के संकलन का फलितार्थ समझिए. सम्पत्ति का संकेन्द्रण तो हो लेकिन सोनिया के पास. इसके गणित को समझिए. इस अनुच्छेद के अधीन नागरिक की सारी सम्पत्ति सोनिया की है. लोक सेवक को नागरिक की सम्पत्ति को लूट कर सोनिया तक पहुचाने के लिए ही नियुक्त किया जाता है. नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोक सेवक को नागरिक को लूटना पड़ेगा.

जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों सोनिया व हामिद की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी छोड़ दें.

पीड़ित को शिकायत करने का या शिकायत का संज्ञान लेने का अधिकार न तो पुलिस के पास है और न जज के पास. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन अभियोग चलाने की अनुमति देने का अधिकार आतंकवादी और महाभ्रष्ट प्रेसिडेंट या राज्यपाल के पास है. इन सबका नियंत्रण सोनिया के पास है. भारतीय संविधान का संकलन नागरिकों को किसान के पशु की भांति दास बनाकर लूटने व वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है. जनता पार्टी अध्यक्ष एस स्वामी के अनुसार लूट का अधिकतम हिस्सा सोनिया को मिला है. सोनिया के विरुद्ध जाँच कौन करेगा?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को 20-06-1979 से भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है. इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८).

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

फिर भी आप को विवश किया जाता है कि आप न्यायपालिका को स्वतंत्र माने. श्री अनुपम खेर पर विशेषाधिकार के हनन का आरोप और शांति व प्रशांत भूषणों पर न्यायालय के अवमानना के आरोप इसके जीते जागते प्रमाण हैं. लोकपाल क्या कर लेगा?

आतताई ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने के लिए विवश सोनिया की चाकरी करने वाली प्रतिभा और प्रदेशों के राज्यपाल व इसी भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले जज मानव जाति के शत्रु हैं. यदि घोटाले की रकम मिल भी जाये तो भी राहुल के अनुसार रकम का ९५% सोनिया व उसके मातहत और उपकरण खा जायेंगे. लेकिन जनता को फिर भी कुछ नहीं मिलने वाला.

लोकपाल कानून से अब जजों और प्रधान मंत्री को मुक्त करने की वकालत हो रही है. भ्रष्टाचार की जड़ तो संयुक्त रूप से भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ है. यदि सचमुच भ्रष्टाचार मिटाना है, तो इनको समाप्त कीजिये और सम्पत्ति के मौलिक अधिकार का अनुच्छेद ३१ पुनर्जीवित कीजिए|

अन्ना और कालनेमि (योगगुरू रामदेव) उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) और धारा १९७ के उन्मूलन की मांग नहीं कर रहे हैं. फिर भी प्रेस ने उनको महान नेता बना दिया है. क्यों कि देश के नागरिकों को संविधान का ज्ञान नहीं है, लेकिन शांति और प्रशांत कानूनविद हैं. देश की पीठ में लोकपाल कानून की आड़ में छुरा भोंक रहे हैं.

लोकपाल और लोकायुक्त का जिन्न तो भ्रष्टाचार के असली कारण भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को बचाने के लिए पैदा  किया गया है. इस चाल के पीछे सोनिया है.

देश की जनता को अब जजों और सीबीआई के समानांतर एक नया लूट में हिस्सा खाने वाला लोकपाल/लोकायुक्त  मिलेगा. जनता कुटरचित परभक्षी भारतीय संविधान से सावधान रहे.

जबतक भारतीय संविधान है, भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा. फिर भी यदि कोई व्यक्ति यह सोचता है कि लोकपाल कानून न्याय कर पायेगा तो पहले गोरखपुर की मेरी व हुतात्मा बिस्मिल की भूमि सोनिया से वापस करा दे.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी 

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ap tripathi,
Apr 26, 2011, 3:35 AM
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