Human Rights Violation

ANNEXURE-1(AX1)

एलिजाबेथ को चुनौती

विषय: प्राथमिकी संख्याएं ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला, उत्तर पश्चिम दिल्ली (विचाराधीन) MM वि० संदीप गुप्ता रोहिणी|

१.      भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार और पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईशनिन्दक ईमाम मुसलमानों को आप के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है, जो भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध है. लेकिन मुसलमान अपराध मुक्त है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इतना ही नहीं! भारतीय न्याय व्यवस्था का मुकुट सर्वोच्च न्यायालय ईमामों को ईशनिंदा और जाति हिंसा करने के बदले में सरकारी खजाने से वेतन (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) और मुसलमानों को हज अनुदान दिलवाता है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/).

२.      पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपाल, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, ईसाई व मुसलमान को, भारतीय संविधान और कानूनों द्वारा संरक्षणपोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

३.      अतएव भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त कानूनी अधिकार से मैं सन १९९१ से आज तक चर्च, मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध कर रहा हूँ. जिसके कारण एलिजाबेथ के मातहतों और उपकरणों द्वारा मनोनीत राज्यपालों द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देकर उपरोक्त अभियोगों सहित मेरे विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ५० अभियोग चले, जिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं.

४.      मैं स्वीकार करता हूँ कि हम ग्राहम स्टेन्स और उसके दो पुत्रों की हत्या के अभियुक्त हैं. हमारे दारा उर्फ रविन्द्रपाल सिंह १९९९ से जेल में बंद हैं. हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे धनंजय देसाई भी जेल में बंद हैं. साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकर|

५.      चूंकि दोनों अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है,  अतएव हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो जजों द्वरा निरस्त कर दी गई| मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था| जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया| बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ| अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं| मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, ०६-०२-२०१३ को निरस्त हो गया| इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है| मैं अज़ान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ| ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता| (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है| (मनुस्मृति ८:३०८). हम् भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को निरस्त करना चाहते हैं| हम मानव जाति को बचाना व विदेशी बैंकों में जमा देश का धन वापस लाना चाहते हैं और एलिजाबेथ राज्यपालों के माध्यम से आप को लूट रही व मिटा रही है| किसके साथ हैं आप?

६. मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्धरत हूँ. इसलिए भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ का अपराधी हूँ. विवरण के लिए नीचे धारा का उल्लेख है:- 

121. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना--जो कोई 1[भारत सरकार] के विरुद्ध युद्ध करेगा, या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा, वह मॄत्यु या 2[आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा 3[और जुर्माने से भी दंडनीय होगा]

मैं एलिजाबेथ को चुनौती देता हूँ कि मेरे विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन अभियोग चलाए और मुझे मृत्युदंड दे.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Your Registration Number is : DARPG/E/2015/00862

Pgportal.gov.in

 यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त पंजीकृत न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|


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