Ghatak Bhartiya Smvidhan

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President Secretariat, New Delhi - 110004

Dated; Monday, January 02, 2012y

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महामहिम प्रनब दा,

घातक भारतीय संविधान

राज्यसभा बहस दिनांक सितम्बर २, १९५३ से उद्धृत;

उन्होंने (अम्बेडकर ने) अंग्रेजों की घृणा के कारण अर्जित देश के प्रजातंत्र की धारणाओं का उपहास किया; जैसे कि यह धारणा कि राज्यपाल को कोई भी विवेकाधीन अधिकार देना अलोकतांत्रिक है| “हम ने उत्तराधिकार प्राप्त किया है कि राज्यपाल के पास कोई अधिकार कत्तई नहीं होने चाहिए, यह कि उसे (राज्यपाल को) रबर की मुहर मात्र होना चाहिए”| सदस्य (अम्बेडकर) ने समझाया, “यदि एक मंत्री, कितनी भी दुष्टता पूर्वक राज्यपाल के समक्ष कोई प्रस्ताव रखता है, तो उसे (राज्यपाल को) पूर्णतः स्वीकार करना पड़ेगा! हमने देश में प्रजातंत्र की इसी रूप-रेखा का विकास किया है|” ...

बाद में अपने बहस में उन्होंने (अम्बेडकर ने) कहा, “मेरे मित्र मुझसे कहते हैं कि मैंने भारतीय संविधान का निर्माण किया| लेकिन मैं यह कहने के लिए तैयार हूँ कि मैं पहला व्यक्ति होऊंगा, जो इस संविधान को आग लगाऊंगा| मैं भारतीय संविधान को नहीं चाहता| भारतीय संविधान किसी का हित नहीं करता ...” (सिवाय एलिजाबेथ के)

क्या भारतीय जन(ता)खा पार्टी बताएगी कि क्यों नरेंद्र मोदी और येदियुरप्पा अपराधी हैं और भारतीय संविधान, दस्यु सुन्दरी एलिजाबेथ व मायावती अपराधी नहीं? सम्बन्धित कानून आप व मीडिया के संज्ञान के लिए नीचे उद्धृत कर रहा हूँ,

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

संविधानकेअनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार नागरिक की स्थिति किसान के बैल की रह गई है| एफडीआई तो देश के हित में है, लेकिन नागरिक के पास सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देश हित में नहीं! दंप्रसं की धारा १९७ के अनुसार नागरिक की सम्पत्ति और पूँजी लूटना तब तक अपराध नहीं है, जब तक एलिजाबेथ को उसका हिस्सा मिले. अपराध वह तभी माना जा रहा है, जब एलिजाबेथ लूट में हिस्सा नहीं पा रही है| यह कैसा लोकतंत्र है? क्या आप बताएँगे? मेरा आरोप है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाले योगगुरू, अन्ना, पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी और श्री श्री रविशंकर सभी एलिजाबेथ द्वारा पोषित अथवा भयादोहित अपराधी हैं| जिन्हें लोकसेवकों के भ्रष्टाचार तो दिखाई देते हैं, लेकिन संविधानकेअनुच्छेद ३९(ग) का भ्रष्टाचार दिखाई ही नहीं देता! न दंप्रसंकीधारा१९७ में कोई बुराई दिखाई देती है|

क्या मै जान सकता हूँ कि क्यों मधु कोड़ा को सरकार ने अपराधी माना है लेकिन मायावती को अपराधी नहीं मान रही है? क्या आप को नहीं लगता स्वयं भारतीय संविधान ही निकृष्टतम भ्रष्टाचारी है? और दंप्रसं की धारा १९७ एलिजाबेथ को एकाधिकार देती है कि वह जिसे चाहे उसे जेल में ठूस दे?

बीजेपी यानी भारतीय जन(ता)खा पार्टी धूर्तों अथवा मूर्खों का दल है| अगर इनमे एक भी सचरित्र, बुद्धिमान व वैदिक सनातन धर्म प्रेमी होता तो काले कानूनों संविधानकेअनुच्छेद ३९(ग) व दंप्रसं की धारा १९७ के उन्मूलन के लिए आंदोलन करता| ज्ञातब्य है कि मुलायम व मायावती को दस्यु सुंदरी एलिजाबेथ ने अपने मातहत राज्यपाल महामहिम बनवारी से दंप्रसं की धारा १९७ के अधीन संरक्षण दिलवाया हुआ है और लूट में हिस्सा खा रही है| सोनिया का बेटा राहुल गाँधी उर्फ राउल विन्ची प्रदेश में घूम घूम कर प्रदेश को स्वर्ग बनाने के वादे कर रहा है| अगर मुलायम व मायावती को दंप्रसं की धारा १९७ के अधीन महामहिम राज्यपाल द्वारा दिया गया संरक्षण आज वापस हो जाये तो वे दोनों (मुलायम व मायावती) सीबीआई द्वारा जेल भेज दिए जायेंगे| सोनिया व राहुल नंगे हो जायेंगे| उप्र भाजपा की मुट्ठी में आ जायेगा|

अगर भारतीय जन(ता)खा पार्टी वैदिक सनातन धर्म का इतना भला भी नहीं कर सकती, तो देश व वैदिक सनातन धर्म की शत्रु है और जनता इन धूर्त पार्टियों व इनके रोम राज्य को समुद्र में डुबो दे| अन्यथा मानव जाति ही डायनासोर की भांति मिट जायेगी|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

सोमवार, 2 जनवरी 2012य

 

आप का शत्रु भारतीय संविधान है.


वस्तुतः हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार से जुड़े बागियों ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है. हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है. {(बाइबलउत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म सहित मानव जाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है. भारत में मुसलमानों और ईसाइयों को इसलिए रोका गया है कि दोनों ने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है. हमारा कथन है कि यदि आप अपनी, अपने देश व अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ ईसाइयत और इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान को, निजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए.


मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँ, हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (एलिजाबेथ द्वारा) हथियार बना लिया गया है.


ईसाइयत और इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, उन्होंने वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ एलिजाबेथ काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है. जिन्हें देश, वैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए-हमारी सहायता करें.


ऐसे ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन एलिजाबेथ के लिए लूट, हत्या और बलात्कार के संरक्षण हेतु चाकरी करने वाले राष्ट्रपति, प्रदेशों के राज्यपाल और भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले भ्रष्ट जज, (भारतीय संविधानतीसरी अनुसूचीप्रारूप ४ व ८), वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति के शत्रु हैं| 

इन लोगों से बड़ा निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता 

है?

 

४ मस्जिदों में धमाके के कारण हम भगवा आतंकवादी हैं. और १०८ मंदिर तोड़ने वालो की संरक्षक एलिजाबेथ सरकार आतंकवादी नहीं! दूध की धुली है. हमारे पास भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है. यद्यपि भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३१ बदला भी गया और लुप्त भी हुआ, लेकिन उपरोक्त धारा आज भी प्रभावी है. जिन मस्जिदों से हमारे ईश्वर को गाली दी जाती है और जिन पुस्तकों कुरान व बाइबल में हमें कत्ल करने की आज्ञा है, आप सहयोग दें, उन्हें हम नहीं रहने देंगे.


मात्र हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी ही ईसाइयत और इस्लाम को मिटा सकते हैं. एलिजाबेथ इसे जानती है, इसीलिए आतंकित है.


प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है. लुटेरे संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति का अधिकार ही नहीं देता. भारतीय संविधान को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता. जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन, एलिजाबेथके मनोनीत, राज्यपालों द्वारा शासित हैं. अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में और भारतीय संविधान के अनुच्छेद  २९(१) के संरक्षण में, ईसाइयत व इस्लाम - मिशन व  जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का  पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो  जाये." (सूरह  अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. यदि आप पलटवार में आर्यावर्त सरकार को सहयोग नहीं देंगे तो  मानव जाति ही मिट जायेगी. 

किसी गैर मुसलमान को जीने का अधिकार न मुसलमान देता है और न किसी उस व्यक्ति को जीने का अधिकार ईसाई  देता है, जो ईसा को अपना राजा नहीं मानता. फिर स्वतंत्रता कैसे मिली? यह पूछते ही  या तो आप ईश निंदा में कत्ल हो जायेंगे या भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ अथवा २९५ में जेल में होंगे. जज तो राज्यपाल का बंधुआ मजदूर है. अपराधी वह है, जिसे एलिजाबेथ का मातहत राज्यपाल  अपराधी माने.



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