General 19113




Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 25 Year 25 ISSUE 02, Jan 11  - 17 2019. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj19W02 KL19113o

||श्री गणेशायेनमः||

एलजी को पुनर्स्मरण १३ जनवरी. २०१९
महामहिम उप राज्यपाल, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली,
देखें लिंक
http://www.aryavrt.com/kl_gali-bdo_lg-16d08

महामहिम महोदय,
मैं बाइबिल, कुरान, उपनिवेश व भारतीय संविधान विरोधी, बाबरी विध्वंसक, काफिर, साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त 
अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी फोन +९१ ९८६८३२४०२५ हूँ.
आप जब चाहें मुझे किसी ईसाई या मुसलमान द्वारा कत्ल करवा सकते हैं. इसके अलावा आप मेरी फांसी के लिए संस्तुति भी दे सकते हैं. मौलिक अधिकार ईसाइयों व मुसलमानों को भासं के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है.
राजीव दीक्षित की भांति मुझे भी आप की एलिजाबेथ की स्वतंत्र उपनिवेश सरकार ने जहर दिया था. मैं मरा नहीं. आप बाइबिल, कुरान और संविधान के संरक्षक, पोषक और संवर्धक हैं. (भासं का अनुच्छेद१५९)
बपतिस्मा, अजान यानी ईशनिंदा और काफिरों को कत्ल करने के खुतबे के प्रसारण का विरोध करने के कारण दंप्रसं की धारा १९६ के अधीन संस्तुति दे कर आप के पूर्ववर्ती महामहिमों ने ५० अभियोग चलवाए. लेकिन सन १८६० से आज तक कोई ईसाई या मुसलमान ईशनिंदा का अभियुक्त नहीं बना. 
आर्यावर्त सरकार के मुख्यालय की पश्चिमी गली पर आप ने मुझे कत्ल करने के लिए भूमाफिया तैनात कर दिया है. इस गली के अतिक्रमण का रोहिणी कोर्ट में विवाद सं० २२ सन २०१० थाना शाहबाद डेयरी चल रहा है. दौरान विवाद आप ने २०१३ मे नये भूमाफिया को गली दे दी. अब आप लिखते हैं कि मेरा विवाद आप से संबंधित ही नहीं है. 
आप एलिजाबेथ की आतंक के साए मे नौकरी करने के लिए विवश हैं. १० करोड़ अमेरिकी रेड इंडियन और उनकी माया संस्कृति लुप्त हो गई. अब १२५ करोड़ ब्लैक इंडियन और सनातन संस्कृति की बारी है.
अप्रति

On Tuesday, May 15, 2018, LISTENING POST <lggc.delhi@nic.in> wrote:

LG’s Listening Post deals only complaints pertaining to various departments of Govt. of NCT of Delhi/ Delhi Police/DDA/ Local bodies. Hence returned.

Thanks

सनातन धर्म की आधारशिलाएं गौ, गुरुकुल, गायत्री और गंगा नष्ट हो चुकी है. भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ उपनिवेशवासी को प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार देती है. भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अनुसार प्राइवेट प्रतिरक्षा के लिए किया गया कोई कार्य अपराध नहीं है. सन १८६० से आज तक इस कानून में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। जब परिवर्तन नहीं हुआ तो फिर अपराध कहाँ हुआ? जमानत किसलिए? मालेगाँव मामले मे क्यों अभियोग चलवा रहे हैं हमारे अधिकारियों पर? सीधे क्यों नहीं कहते कि एलिजाबेथ को वैदिक सनातन संस्कृति और उसके अनुयायियों को मिटाना है.
   ईसाइयत और इस्लाम अपने अपने हठधर्मिता के अनुसार मानवमात्र को जीने का अधिकार नहीं देते. भादंसं की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन प्रत्येक काफ़िर, मुझे, साध्वी प्रज्ञा व उनके अन्य सह अभियुक्तों को मस्जिद और उसमे एकत्र जिहादियों को नष्ट करने का कानूनी अधिकार है. दोनों धाराएँ इंडियन उपनिवेश में सन १८६० से आज तक लागू हैं. इन धाराओं में, मस्जिद में विष्फोट की तिथि तक, कोई परिवर्तन हुआ हो, तो एलिजाबेथ और उसके जज बताएं. मैंने भादंसं की धारा ९९ के अंतर्गत सदा ही प्राइवेट प्रतिरक्षा की मांग की है, जिसे देने मे एलिजाबेथ सरकार सदा विफल रही है।
चुनाव द्वारा बाइबिल, कुरान और भारतीय संविधान में कोई परिवर्तन संभव नहीं है. जब तक इनका महिमामंडन होगा, सनातन धर्म मिटता रहेगा.
उपनिवेश वासियों को सन १९४७ मे अपहृत स्वतंत्रता युद्ध को लड़ना पड़ेगा, अन्यथा अमेरिकी रेड इंडियन और माया संस्कृति की भांति मिट जाएंगे

देश स्वतंत्र नहीं स्वतंत्र उपनिवेश है. राष्ट्र कुल (Common Wealth) का सदस्य है और सभी ब्रिटिश कानून ही लागू हैं. 
ब्रिटिश कानूनों, भसं, बाइबिल और कुरान पर किसीका जोर नहीं है.
उपनिवेशवासी अज़ान, नमाज, ईमाम या कुरान को ईशनिंदा का दोषी नहीं ठहरा सकते| लेकिन यदि उपनिवेशवासी बाइबल, कुरान, बपतिस्मा, अज़ान का विरोध करेंगे तो ईश-निंदक हैं| कमलेश तिवारी की भांति रासुका में बंद हो जायेंगे. इस्लाम ईशनिंदा के बदले मृत्युदंड देता है. 
सलमान की जमानत रातोरात जज बदल कर ७२ घंटे के अंदर कराई गई है. अब मक्का फैसले के जज ने स्तीफा दिया है. 
वैदिक राजतंत्र बनाम लोकतंत्र
“न मे स्तेनो जनपदे न कदर्यो न मद्यपो| 
“नाना हिताग्निर्नाविद्वान्‌ न स्वैरी स्वैरिणी कुत: || 
छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक
“न मेरे राज्य में कोई चोर है, न कंजूस स्वामी , न कोई शराबी , न कोई यज्ञकर्मों से रहित, न कोई अविद्वान| न कोई परस्त्री गामी तो ऐसी स्त्रियां कहां होंगी |”
ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| (कुरान ८:३९). चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]. बेटी से विवाह कीजिए. (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). पुत्र वधू से निकाह कीजिए. (कुरान ३३:३७-३८). बिना विवाह बच्चे पैदा कीजिए. [UDHR अनु०२५(२)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)] और जिसे भी चाहें अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार से.
यह कि कोई भी कानूनविद बताए कि बपतिस्मा व अजान सर्वधर्म समभाव और सेकुलर कैसे है? विश्व की सबसे बड़ी आबादी ईसाई व मुसलमान अल्पसंख्यक कैसे हैं? देश के ८ प्रदेशों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गया.  क्यों नहीं हुआ? हर व्यक्ति अपराधी है. या तो ईसा को राजा नहीं मानता अथवा केवल अल्लाह की पूजा नहीं करता. वह कत्ल कर दिया जाएगा.
http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng
इन खूनियों को अपनी संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार क्यों दिया गया है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| 
इस अनुच्छेद ने धरती की सभी नारियों के मर्यादा का हनन कर रखा है और किसी का जीवन सुरक्षित नहीं.
मेरे अपराध अधिक गंभीर हैं. मुझे सरकार ने सन २००० से आजतक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? 
योगी जी! दोष हमारा है. हम उपनिवेश का विरोध नहीं करते. बाइबिल, कुरान और संविधान का विरोध नहीं करते. बपतिस्मा, अजान और खुत्बे का विरोध नहीं करते.
पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना सलमान का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद २९(१). काफ़िर को कत्ल करने व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलने के लिए सलमान को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, राष्ट्रपति, राज्यपाल व जज, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार करने के लिए विवश हैं| जज बाइबिल और कुरान के हठधर्मी आदेशों के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकते. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| 
सलमान काफिरों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे| 
क्या आपको नहीं लगता कि आप अपने सर्वनाश के लिए विवश हैं?
काफिरों को इस्लाम के बारे में चार सीधी सच्चाईयाँ 
जाननी चाहियें| अज्ञान वश काफ़िरों ने घातक धारणा 
बना रखी है कि उनके अपने धर्म की भांति इस्लाम भी 
एक धर्म है| मै अपने प्रतिवाद में चार सच्चाईयाँ उद्धृत कर रहा हूँ:-
१.काफिरों को धोखा देने के लिए मुसलमान तकिय्या (कुरान३:२८ व १६:१०६) का प्रयोग कर यह विश्वास दिलाते हैं कि कुछ दिग्भ्रमित मुसलमानों ने उनके मजहब
का अपहरण कर लिया है और इस्लाम को बदनाम
 कर रहे हैं| लेकिन इस्लाम का अपहरण नहीं होता है| यद्यपि काफ़िर ऐसा ही मानते हैं क्यों कि उनकी गलत 
धारणा है कि सभी धर्म समान हैं|काफ़िरों की यह त्रुटिपूर्ण धारणा इसलिए है कि वे समझते हैं कि कोई धर्म शांतिप्रिय नागरिकों की हत्या और
लूटमार कोबढ़ावा कैसे दे सकता है? अतः सचमुच ही कुछ सिरफिरे मुसलमानों ने इस्लाम का अपहरण 
कर रखा है| यदि एक बार काफिरों को इस्लाम की 
असलियत समझ में आ जाये तो वे  इस्लाम से बचने का सही मार्ग ढूँढना प्रारम्भ कर देंगे|
२.इस्लाम की उन्नति के लिए अल्लाह मुसलमानों को धोखा देने की अनुमति देता है| इसे अल्लाह तकिय्या 
कहता है|लेकिन काफिरों को तकिय्या के इस्लामी 
सिद्धांत का ज्ञान नहींहै| तकिय्या के सिद्धांत का 
ज्ञान काफिरों को अल्लाह कीधोखाधड़ी से बचायेगा| वे मौलवियों व ईमामों की हर बात परविश्वास करना बंद कर देंगे|
३| धरती पर शरिया कानून लगाने के लिए प्रयत्नशील 
रहना हर मुसलमान का मजहबी दायित्व है| इसे जिहाद 
कहा जाताहै| हर व्यक्ति को मुसलमान बनाना और धरती को शरिया आधारित इस्लामी राज्य बना लेना ही जिहाद है| यदि काफ़िरइस सच्चाई को जान लें तो वे इस्लाम को 
धरती पर टिकने नहींदेंगे|
४ चूंकि मूर्ख मुसलमानों ने (कुरान २:३५) स्वेच्छा से 
शासकोंकी दासता स्वीकार कर ली है| अतः शासक 
निज हित मे इस्लाम को संरक्षा, सुरक्षा और 
बढ़ावा दे रहे हैंऔर सच्चाई को छिपाने के हर 
प्रयास कर रहे हैं|
संविधान मे आस्था व निष्ठा लेते ही आप विवश हो चुके हैं. आप अपने ही प्रदेश के कैराना मे हिंदुओं को वापस नहीं बसा पा रहे हैं.
हिंदुस्तान में ही हिंदू अल्पसंख्यक घोषित नहीं किया जा सकता! कश्मीर, नागालैंड व मिजोरम प्रमाण हैं. कत्ल कर दिया जाता है. अपने पुलिस के संरक्षण में अजान यानी ईशनिन्दा सुनना व सुनवाना आप की विवशता है. गोरक्षकों को आप ने जघन्य अपराधी घोषित कर दिया है. आप अपने शासन में गोरक्षपीठ नष्ट करने के लिए विवश हैं.
आशाराम को जेल, सहारा श्री सुब्रत राय को जेल, कर्णन को जेल आने वाले भविष्य का ट्रेलर है. या तो सनातन संस्कृति रहेगी अथवा ईसाइयत और इस्लाम.
प्राथमिकता तय कर लीजिए. 
मेरे मामले में आपको नियमानुसार कार्रवाई करनी है. वैसे भी एलिजाबेथ आप के पीछे पड़ी है. आप का एलिजाबेथ पर आक्रमण मानव जाति के लिए वरदान होगा. यद्यपि आपको आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी.
आप चाहें तो स्वयं को सुरक्षित कर के भी मेरी सहायता कर सकते हैं.
अप्रति
पुर्नस्मरण २९.०६.२०१८
भवदीय:-

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सूचना सचिव)

आर्यावर्त सरकार,

७७ खेड़ा खुर्द, दिल्लीः ११० ०८२.

चल दूरभाष: (+९१) ९८६८३२४०२५

ईमेल : aryavrt39@gmail.com

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