Fatwa

Request/Grievance Registration Number is PRSEC/E/2011/00704+01094+04087

Your Request/Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2011/04618

28 अप्रैल 2013

मानव जाति के न्यायालय में:-

विषय: प्राथमिकी सं० ४४०/१९९६ और ४८४/१९९६ थाना रूपनगर, दिल्ली व ४०६/२००३ और १६६/२००६ थाना नरेला, दिल्ली.

प्रेसिडेंट सचिवालय को लिखे गए मेरे उपरोक्त पत्रों का अवलोकन करें. १९९४ से आज तक किसी एलजी ने न मुझे मिलने का समय दिया और न पत्रों का उत्तर ही!

राहुल का फैसला ७ दिन में हो गया. अल्लाह (कुरान, ३३:३७-३८) और ईसा (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) क्रमशः पुत्रवधू व बेटी से विवाह कराते हैं. उनका फैसला कब व कितने दिन में होगा?

अफजल और कसाब को फांसी दिलाने के लिए धन्यवाद| मेरे विरुद्ध १९९७ से चलने वाले अभियोगों के कब फैसले होंगे? अहमद बुखारी पर एनबीडब्लू जारी करने वाले एमएम रोहिल्ला नौकरी से निकाले गए, अजान लगाने वाले ईमाम कब बंदी बनेंगे? नहीं बंद कराते तो मानवता की हत्या और अपमान की अपराधिनी एलिजाबेथ है|

अमेरिकी पादरी टेरी जोन्स ने कुरान जलाया.

"इस्‍लामाबाद. पाकिस्‍तान ने अमेरिका में पवित्र कुरान जलाए जाने की घटना को घिनौना कृत्‍यकरार देते हुए इस मुद्दे को संयुक्‍त राष्‍ट्र में उठाया है। पाकिस्‍तान ने अनुरोध किया है कि इस्‍लाम को लेकर लोगों के बीच बढ़ते डर को देखते हुए धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए तत्‍काल कदम उठाए जाएं। पाकिस्‍तानी राजदूत अब्‍दुल्‍ला हुसैन हारून ने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव बान की मून को लिखे पत्र में कहा है कि इस घटना से मुसलमानों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। (अज़ान यानी ईशनिंदा और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने से काफिरों के धार्मिक भावना को ठेस कभी नहीं पहुँचती). अमेरिका में फ्लोरिडा के एक चर्च के पादरी टेरी जोन्स ने अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमलों के विरोध में गत रविवार को कुरान की प्रति जलाई। ईरानियनवेबसाइट के मुताबिक इस पर एक संगठन ने फतवा जारी करते हुए जोन्‍स के कत्‍ल पर 22 लाख डॉलर का ईनाम भी रख दिया है।

कुरान, १७:८१ व २१:५८, बाइबल, याशयाह १३:१६ और भारतीय संविधान के अ० २९(१) के सहयोग से हमारे मंदिर तोड़े  जा रहे हैं. हमारी ५० हजार गौवें रोज  काटी जा रही हैं और अजान द्वारा पुलिस संरक्षण में उन दास मुसलमानों द्वारा  हमारे ईश्वर और आस्था का अपमान किया जा रहा है, जो मात्र मुहम्मद का चित्र  बना देने पर कत्ल करते हैं. जो कार्य हमारे पूर्वजों को १४०० से अधिक वर्षों से पूर्व कर देना चाहिए था, उसे देर से ही सही, पूरा करके ऐतिहासिक पुरुष आदरणीय श्री टेरी जोन्स ने सराहनीय कार्य किया है. मै उनके इस मानवता की सेवा के लिए बारम्बार धन्यवाद देता हूँ. यद्यपि ऐसा दुस्साहस मैंने १९९३ में ही दिल्ली संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय के सामने किया था, लेकिन पुलिस ने अभियोग न चला कर, मुझे बुरी तरह पीट कर छोड़ दिया था. भयभीत मीडिया ने समाचार प्रकाशित ही नहीं किया था| आर्यावर्त सरकार जानना चाहती है कि ईशनिंदा के अपराध में इमामों को मृत्यु दंड क्यों नहीं दिया जा रहा है|

धार्मिक सद्भाव

जकात-सदका, रोजा, ईमान, नमाज और हज इस्‍लाम के स्तम्भ हैं। इस्लाम के धार्मिक सद्भाव की हवा निकालनी मानवता के हित में आवश्यक है. शहादाइस्लाम की पहली शर्त है और यही अजान नमाज की शुरुआत भी. मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर चिल्लाई जाने वाली अजान में ईमाम क्या कहते हैं? उनके ही शब्दों में नीचे पढ़ें और बताएं कि इनमे धार्मिक सद्भाव का शब्द कौन सा है?:-

यहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्य, उपास्य नहीं।

●  अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूत, प्रेषित, संदेष्टा, नबी, Prophet) हैं।

●  हय्या अ़लस्-सलात (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ नमाज़ के लिए।

●  हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ भलाई और सुफलता के लिए।

●  अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बार, सिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में), अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार), अर्थात् कोई पूज्य, उपास्य नहीं, सिवाय अल्लाह के।’ (क्या यही एलिजाबेथ ब्रांड साम्प्रदायिक सद्भाव है?)

उपरोक्त अजान में सर्वधर्मसमभाव और अनेकता में एकता कहाँ है? ईमाम ईशनिंदा क्यों करते हैं? १८६० में भारतीय दंड संहिता बनी थी| आज तक इमामों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंडित क्यों नहीं किया गया?

स्वात निवासी मलाला युसुफजई को मात्र १३ वर्षों की अल्प आयु में पुरष्कार मिला| मलाला ने कहा, “खुशनसीब हैं वे लोग जो गैर-इस्लामी देशों में रहते हैं| आज भी पाकिस्तान, बंगलादेश, सउदी अरबिया, ईरान, ईराक, सोमालिया, अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम राष्ट्रों में लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी है| इस्लाम ने हमें आतंकवाद, मदरसे, हिंसा, दंगे, बम धमाकों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं दिया है| अच्छे भविष्य के लिए हमें इस्लाम का त्याग करना ही होगा|” मलाला यूसुफजई| हम मलाला के सपनों को साकार करना चाहते हैं|

किसी भी हरे भरे वृक्ष को नष्ट करने के लिए एक गिद्ध का निवास ही पर्याप्त है| इसी प्रकार किसी भी संस्कृति को मिटाने के लिए एक मुसलमान या ईसाई का निवास पर्याप्त है| अकेला कोलम्बस अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अकेला मैकाले संस्कृत भाषा और गुरुकुलों को निगल गया| अकेला मुहम्मद अपने आश्रय दाता यहूदियों के तीन प्रजातियों बनू कैनुका, बनू नजीर और बनू कुरेज़ा को निगल गया| मानव जाति के इन हत्यारों को छल पूर्वक भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा संरक्षण दे कर एलिजाबेथ आप को मिटाना चाहती है और हम आप को बचाना चाहते हैं| क्या आप हमारी सहायता करेंगे?

मस्जिदों से दिए जाने वाले ईमामों के खुतबों को ध्यानपूर्वक सुनिए.

ईमामों को कुरान के आदेशों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की भी आवश्यकता नहीं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर आप के कर से प्राप्त १० अरब रुपयों में से वेतन लेकर ईमाम बदले में कुरान के सूरह अनफाल (८) की सभी मुसलमानों को सीधी शिक्षा देते हैं. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). अजान द्वारा ईमाम स्पष्ट रूप से गैर-मुसलमानों को चेतावनी देते हैं कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. अल्लाह के आदेश से ईमाम कहता है, "काफ़िर मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं." (कुरान ४:१०१). कुछ खुतबे कुरान के सूरह अनफाल (८) में स्पष्ट दिए गए हैं. अल्लाह निश्चय रूप से कहता है कि उसने मुसलमानों को जिहाद के लिए पैदा किया है, "युद्ध (जिहाद) में लूटा हुआ माल, जिसमे नारियां भी शामिल हैं, अल्लाह और मुहम्मद का है." (कुरान ८:१, ४१ व ६९). "जान लो जो भी माल लूट कर लाओ, उसका ८०% लूटने वाले का है. शेष २०% अल्लाह, मुहम्मद, ईमाम, खलीफा, मौलवी, राहगीर, यतीम, फकीर, जरूरतमंद आदि का है." (कुरआन ८:४१). लूट ही अल्लाह यानी सत्य है. लूट में विश्वास करने वाले विश्वासी हैं. "काफिरों के गले काटो, उनके हर जोड़ पर वार करो और उनको असहाय कर दो. क्यों कि वे अल्लाह के विरोधी हैं," (कुरआन ८:१२). "जो भी अल्लाह और मुहम्मद के आदेशों का उल्लंघन करता है, वह जान ले कि अल्लाह बदला लेने में अत्यंत कठोर है." (कुरआन ८:१३). "काफ़िर के लिए आग का दंड है." (कुरआन ८:१४). "जब काफिरों से लड़ो तो पीठ न दिखाओ|" (कुरआन ८:१५). "तुमने नहीं कत्ल किया, बल्कि अल्लाह ने कत्ल किया." (कुरआन ८:१७). "मुसलमानों को लड़ाई पर उभारो." (कुरआन ८:६५). तब तक बंधक न बनाओ, जब तक कि धरती पर खून खराबा न कर लो. (कुरआन ८:६७). जो भी लूट का माल तुमने (मुसलमानों ने) प्राप्त किया है, उसे परम पवित्र मान कर खाओ. (कुरआन ८:६९). सत्य स्पष्ट है. काफिरों को आतंकित करने व समाप्त करने के लिए मुसलमानों में जोश पैदा करते हुए अल्लाह कहता है, “जब तुम काफिरों से लड़ो, तो उनको इस तरह परास्त करो कि आने वाले समय में उन्हें चेतावनी मिले. काफ़िर यह जान लें कि वे बच नहीं सकते. (कुरआन ८:६०). जो मुसलमान नहीं वह काफ़िर है| कत्ल से कुफ्र बुरा है (कुरान २:१९१). इस्लाम है तो काफ़िर कि मौत पक्की|

धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था. (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें. अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? सोचें|

आइये शल्य परीक्षण करें कि देश का कानून क्या कहता है?

भारतीय दण्ड संहिता, 1860

(1860 का अधिनियम संख्यांक 45)1

[6 अक्तूबर, 1860]

प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के विय में

96. प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें--कोई बात अपराध नहीं है, जो प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग में की जाती है ।

97. शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार--धारा 99 में अंतर्विष्ट निर्बन्धनों के अध्यधीन, हर व्यक्ति को अधिकार है कि, वह--

पहला--मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षा करे ;

दूसरा--किसी ऐसे कार्य के विरुद्ध, जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार की परिभाा में आने वाला अपराध है, या जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार करने का प्रयत्न है, अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की, चाहे जंगम, चाहे स्थावर संपत्ति की प्रतिरक्षा करे ।

 () रात्रि में एक ऐसे गॄह में प्रवेश करता है जिसमें प्रवेश करने के लिए वह वैध रूप से हकदार है । , सद््भावपूर्वक को गॄह-भेदक समझकर, पर आक्रमण करता है । यहां इस भ्रम के अधीन पर आक्रमण करके कोई अपराध नहीं करता किंतु क, के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार रखता है, जो वह तब रखता, जब उस भ्रम के अधीन कार्य न करता ।

99. कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है--यदि कोई कार्य, जिससे मॄत्यु या घोर उपहति की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित नहीं होती, सद््भावपूर्वक अपने पदाभास में कार्य करते हुए लोक सेवक द्वारा किया जाता है या किए जाने का प्रयत्न किया जाता है तो उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है, चाहे वह कार्य विधि-अनुसार सर्वथा न्यायानुमत न भी हो ।

यदि कोई कार्य, जिससे मॄत्यु या घोर उपहति की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित नहीं होती, सद््भावपूर्वक अपने पदाभास में कार्य करते हुए लोक सेवक के निदेश से किया जाता है, या किए जाने का प्रयत्न किया जाता है, तो उस कार्य विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है, चाहे वह निदेश विधि-अनुसार सर्वथा न्यायानुमत न भी हो ।

उन दशाओं में, जिनमें संरक्षा के लिए लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त करने के लिए समय है, प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है ।

इस अधिकार के प्रयोग का विस्तार--किसी दशा में भी प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार उतनी अपहानि से अधिक अपहानि करने पर नहीं हैं, जितनी प्रतिरक्षा के प्रयोजन से करनी आवश्यक है ।

स्पष्टीकरण 1--कोई व्यक्ति किसी लोक सेवा द्वारा ऐसे लोक सेवक के नाते किए गए या किए जाने के लिए प्रयतित, कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के वंचित नहीं होता, जब तक कि वह यह न जानता हो, या विश्वास करने का कारण न रखता हो, कि उस कार्य को करने वाला व्यक्ति ऐसा लोक सेवक है ।

स्पष्टीकरण 2--ोई व्यक्ति किसी लोक सेवक के निदेश से किए गए, या किए जाने के लिए प्रयतित, किसी कार्य के वरिद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार से वंचित नहीं होता, जब तक कि वह यह न जानता हो, या विश्वास करने का कारण न रखता हो, कि उस कार्य को करने वाला व्यक्ति ऐसे निदेश से कार्य कर रहा है, जब तक कि वह व्यक्ति उस प्राधिकार का कथन न कर दे, जिसके अधीन वह कार्य कर रहा है, या यदि उसके पास लिखित प्राधिकार है, तो जब तक कि वह ऐसे प्राधिकार को मांगे जाने पर पेश न कर दे ।

102. शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना--शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार उसी क्षण प्रारंभ हो जाता है, जब अपराध करने के प्रयत्न या धमकी से शरीर के संकट की युक्तियुक्त आशंका पैदा होती है, चाहे वह अपराध न किया गया हो, और वह तब तक बना रहता है जब तक शरीर के संकट की ऐसी आशंका बनी रहती है ।

103. कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मॄत्यु कारित करने तक का होता है--संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, धारा 99 में वर्णित निर्बन्धनों के अध्यधीन दोकर्ता की मॄत्यु या अन्य अपहानि स्वेच्छया कारित भारतीय दंड संहिता, 1860 17

करने तक का है, यदि वह अपराध जिसके किए जाने के, या किए जाने के प्रयत्न के कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात्् प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात््:--

पहला--लूट ;

दूसरा--रात्रौ गॄह-भेदन ;

तीसरा--अग्नि द्वारा रिष्टि, जो किसी ऐसे निर्माण, तंबू या जलयान को की गई है, जो मानव आवास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में लाया जाता है ;

चौथा--चोरी, रिष्टि या गॄह-अतिचार, जो ऐसी परिस्थितियों में किया गया है, जिनसे युक्तियुक्ति रूप से यह आशंका कारित हो कि यदि प्राइवेट प्रतिरक्षा के ऐसे अधिकार का प्रयोग न किया गया तो परिणाम मॄत्यु या घोर उपहति होगा ।

104. ऐसे अधिकार का विस्तार मॄत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का कब होता है--यदि वह अपराध, जिसके किए जाने या किए जाने के प्रयत्न से प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, ऐसी चोरी, रिष्टि या आपराधिक अतिचार है, जो पूर्वगामी अंतिम धारा में प्रगणित भांतियों में से किसी भांति का न हो, तो उस अधिकार का विस्तार स्वेच्छया मॄत्यु कारित करने तक का नहीं होता किन्तु उसका विस्तार धारा 99 में वर्णित निर्बंधनों के अध्यधीन दोकर्ता की मॄत्यु से भिन्न कोई अपहानि स्वेच्छया कारित करने तक का होता है ।

105. सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना--सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार तब प्रारंभ होता है, जब सम्पत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका प्रारंभ होती है ।

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार, चोरी के विरुद्ध अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक अथवा या तो लोक प्राधिकारियों की सहायता अभिप्राप्त कर लेने या संपत्ति प्रत्युद्धॄत हो जाने तक बना रहता है ।

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मॄत्यु या उपहाति, या सदो अवरोध कारित करता रहता या कारित करने का प्रयत्न करता रहता है, अथवा जब तक तत्काल मॄत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल वैयक्तिक अवरोध का, भय बना रहता है ।

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार आपराधिक अतिचार या रिष्टि के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी आपराधिक अतिचार या रिष्टि करता रहता है ।

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार रात्रौ गॄह-भेदन के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक ऐसे गॄहभेदन से आरंभ हुआ गॄह-अतिचार होता रहता है ।

106. घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जब कि निर्दो व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है--जिस हमले से मॄत्यु की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित होती है उसके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करने में यदि प्रतिरक्षक ऐसी स्थिति में हो कि निर्दो व्यक्ति की अपहानि की जोखिम के बिना वह उस अधिकार का प्रयोग कार्यसाधक रूप से न कर सकता हो तो उसके प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार वह जोखिम उठाने तक का है । 

153. बल्वा कराने के आशय से स्वैरिता से प्रकोपन देना--जो कोई अवैध बात के करने द्वारा किसी व्यक्ति को परिद्वेष से या स्वैरिता से प्रकोपित इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बल्वे का अपराध किया जाएगा ; यदि बल्वा किया जाए--यदि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बल्वे का अपराध किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, और यदि बल्वा न किया जाए--यदि बल्वे का अपराध न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

1[153क. धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना--जो कोई--

(क) बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय या भाषायी या प्रादेशिक समूहों, जातियों या समुदायों के बीच असौहार्द्र अथवा शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएं, धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करेगा, अथवा (अज़ान से समूहोंजातियों या समुदायों के बीच असौहार्द्र अथवा शत्रुताघॄणा या वैमनस्य की भावनाएं नहीं बनतीं)

(ख) कोई ऐसा कार्य करेगा, जो विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और जो लोकप्रशान्ति में विघ्न डालता है या जिससे उसमें विघ्न पड़ना सम्भाव्य हो,  

2[अथवा] ...

295. किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना--जो कोई किसी उपासना स्थान को या व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा पवित्र मानी गई किसी वस्तु को नष्ट, नुकसानग्रस्त या अपवित्र इस आशय से करेगा कि किसी वर्ग के धर्म का तद्द्वारा अपमान किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि व्यक्तियों का कोई वर्ग ऐसे नाश, नुकसान या अपवित्र किए जाने को वह अपने धर्म के प्रति अपमान समझेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । 

5[295क. विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों (ईमाम द्वारा मस्जिदों की अज़ान और खुत्बों से धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान या धार्मिक भावनायें आहत नहीं होतीं)--जो कोई [भारत के नागरिकों के] किसी वर्ग की धार्मिक भावनओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान [उच्चारित या लिखित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा] करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि [तीन वर्ष] तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा ।] ( लेकिन मस्जिदों से अज़ान और कत्ल करने के खुत्बे अपराध नहीं माने जायेंगे|) 

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) जाति हिंसक, बलात्कारी व दासता पोषक है. मै नीचे भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ को उधृत करता हूँ:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार. (लेकिन बहुसंख्यक को अपनी देवनागरी लिपि, संस्कृत भाषा और संस्कृति बनाये रखने का अधिकार नहीं मिलेगा!)

धारा १९६. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – (१) कोई न्यायालय, - भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय ६ के अधीन या धारा १५३(क), धारा २९५(क) या धारा ५०५ की उपधारा (१) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८(क) में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं. .... (यह धारा इसलिए बनाई गई है कि जो भी मस्जिदों के अज़ान और कत्ल करने के खुत्बों का विरोध करे - मिटा दिया जाये). ताकि बहुसंख्यकों को मिटाने में रूकावट न पड़े|)

स्पष्टतः अंग्रेजों की कांग्रेस द्वारा संकलित भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की असाधारण सामरिक योजना ने वैदिक सनातन संस्कृति के समूल नाश में अभूतपूर्व बड़ी सफलता प्राप्त की है| जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) वैदिक सनातन संस्कृति के विरुद्ध आक्रमण को, ईसाइयत और इस्लाम के सभी मिशन और जिहाद द्वारा संरक्षणपोषण व संवर्धन देता है, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है, वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है| ईसाई और मुसलमान को तो उनके मजहब ही वीर्यहीन कर शासक के वश में कर चुके हैं, हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को शासक एन केन प्रकारेण वीर्यहीन कर वश में कर रहे हैं|

अमेरिकीसंयुक्त राष्ट्र और भारतीय संविधान ने आप को उपासना की आजादी दी है. ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं. इसमें पवित्र क्या हैउपासना की आजादी कहाँ हैलूट व यौनसुख के ललक में मुसलमान स्वयं अल्लाह के दास बने हैं. मानव मात्र को दास बनाने के लिए ललकारते हैं. अपने इष्ट देवता व संस्कृति का अपमान करते मुसलमान को लज्जा इसलिए नहीं आती कि खतना करके उनको वीर्यहीन कर दिया जाता है. वीर्यवान सांड को बांधा भी नहीं जा सकता. वीर्यहीन होते ही वह बैल बन कर किसान के लिए अन्न पैदा करता हैजिसे किसान स्वयं खा जाता है और बैल को भूसा खिलाता है. क्यों कि वीर्य स्वतंत्रताओजतेज और स्मृति का जनक है| किसान को सांड़ को वीर्यहीन करना पड़ता है लेकिन यहूदी और मुसलमान धर्म की आड़ में स्वेच्छा से वीर्यहीन बनते हैं| 

एक ओर ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर (अ)ब्रह्मिक संस्कृति|

ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति वीर्यरक्षा यानी मानव के ओज, तेज, स्मृति और परमानंद की प्राप्ति के लिये निःशुल्क गुरुकुल चलाती थी और (अ)ब्रह्मिक संस्कृति महँगी शिक्षा व्यवस्था लाद कर खतना और यौनशिक्षा द्वारा मानवमात्र को वीर्यहीन कर (किसान की भांति सांड़ से बैल बना कर) मानवमात्र को दास बना रही हैं|

वीर्य महिमा के समर्थन में मुझे वर्तमान में एक ही प्रमाण देना है| शेर से कई गुने भारी हाथी सदैव झुण्ड में चलते हैं| फिर भी अकेले शेर से परास्त होते हैं| क्योंकि हाथी कामी होता है और शेर जीवन में एक बार सम्भोग करता है| अतः वीर्यवान|

प्रमाण और भी हैं लेकिन उसे विवादास्पद माना जायेगा| जैसे परशुराम की कोई सेना नहीं थी| परशुराम ने २१ बार क्षत्रियों का संहार किया था| हनुमान ने अकेले परम प्रतापी रावण के लंका को जला दिया था| ब्रह्मचारी चाणक्य ने सिकन्दर के भारत पर आधिपत्य को समाप्त कर दिया था| अतएव वीर्य रक्षा के केंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में हमारी सहायता कीजिए|

जड़ (निर्जीव) और चेतन परमाणु उर्जा

जिसे आज के वैज्ञानिक परमाणु कहते हैं| उसे हमारे ही नहीं – ईसाइयों व मुसलमानों के  पूर्वज भी ब्रह्म कहते थे| आज का परमाणु ऊर्जा विज्ञान निर्जीव परमाणु ऊर्जा विज्ञान है| जब कि हमारे पूर्वजों का विज्ञान जैविक परमाणुओं के भेदन पर आधारित था| हमारा ज्ञान और विज्ञान आज के जड़ परमाणु उर्जा से अत्यधिक विकसित था| आज की परमाणु उर्जा जड़ परमाणुओं के भेदन पर आश्रित है| लेकिन महाभारत काल में अश्वस्थामा के ब्रह्मास्त्र के संधान और लक्ष्य भेदन के प्रकरण से स्पष्ट होता है कि ब्रह्मास्त्र स्वचालित नहीं थे| एक बार छोड़ देने के बाद भी उनकी दिशा और लक्ष्य भेदन को नियंत्रित किया जा सकता था| इतना ही नहीं लक्ष्य पर वार कर ब्रह्मास्त्र छोड़ने वाले के पास वापस भी आ जाते थे| उनके मलबों को ठिकाने लगाने की समस्या नहीं थी| विकिरण से जीवन को होने वाली हानि की समस्या नहीं थी| ब्रह्म ज्ञान की शिक्षा गुरुकुलों में दी जाती थी| गुरुकुलों को मैकाले ने मिटा दिया| आर्यावर्त सरकार गुरुकुलों और गौ संवर्धन को पुनर्स्थापित करेगी| क्या आप मानवता के हित में हमारी सहायता करेंगे?   

भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति और राज्यपाल के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं-अज़ान का प्रसारण करने वाले और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले किसी इमाम के विरुद्ध अभियोग नहीं चला सकता| लेकिन भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ व १०५ के अधिकार का प्रयोग करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने के लिए संस्तुति देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों ही विवश हैं| भारतीय संविधान में ईसाइयत और इस्लाम को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए ही राष्ट्रपति और राज्यपाल को क्रमशः अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेनी पड़ती है|

कुरान पवित्र कैसे?

कुरान इस्लाम के तथाकथित अल्लाह के आदेशों का संग्रह है.

 ‘मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्य, उपास्य नहीं।अतएव ईमान उपासना की दासता है. अजान ईश निंदा है. आप के उपासना की आजादी छीनने का इस्लाम को अधिकार किसने दिया है?

धार्मिक सद्भाव कहाँ है?

उपासना की स्वतंत्रता मात्र वैदिक सनातन धर्म में है|

"यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रध्यार्चितुमिच्छति| तस्य तस्याचलां श्रधां तामेव विदधाम्यहम||"

जो जो भक्त जिस जिस देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करना चाहता है, उस-उस देवता के प्रति मै उसकी श्रद्धा को दृढ़ कर  देता हूँ| (गीता ७:२१)

जब कि अल्लाह का कथन नीचे उद्धृत है,

३:१९ दीन तो अल्लाह की दृष्टि में केवल इस्लाम ही है| ... (कुरान ३:१९)

३:८५ जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ... (कुरान ३:८५)

अल्लाह के उपरोक्त कथन के आधार पर मस्जिदों से ईमाम और मौलवी मुसलमानों को शिक्षा देते हैं कि गैर-मुसलमानों को कत्ल कर दो| इतना ही नहींमस्जिद से इस्लामी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तानी मौलिक धर्मतंत्री सैयद अबुल आला मौदूदी घोषित करता है कि इस्लाम विश्व की पूरी धरती चाहता है उसका कोई भूभाग नहीं, बल्कि पूरा ग्रह इसलिए नहीं कि ग्रह पर इस्लाम की सार्वभौमिकता के लिए तमाम देशों को आक्रमण कर छीन लिया जाये बल्कि इसलिए कि मानव जाति को इस्लाम से, जो कि मानव मात्र के सुख-समृद्धि(?) का कार्यक्रम है, लाभ हो|

मौदूदी जोर दे कर कहता है कि यद्यपि गैर-मुसलमान झूठे मानव निर्मित मजहबों को मानने के लिए स्वतन्त्र हैं, तथापि उनके पास अल्लाह के  धरती के किसी भाग पर अपनी मनुष्य निर्मित गलत धारणा की हुकूमत चलाने का कोई अधिकार नहीं| यदि वे (काफ़िर) ऐसा करते हैं, तो मुसलमानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे काफिरों की राजनैतिक शक्ति छीन लें और उनको (काफिरों को) इस्लामी तौर तरीके से जीने के लिए विवश करें|

वीर्य के रक्षा की शिक्षा गुरुकुलों में दी जाती थी, जिसे मैकाले ने मिटा दिया. गुरुकुलों की शिक्षा निःशुल्क होती थी| क्या आप गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में हमारी सहायता करेंगे? क्या किसी गैर-मुसलमान ने सोचा कि मुहम्मद से लेकर पाकपिता गाँधी तक यह कहते हुए क्यों नहीं आये कि अपने अनुयायियों को स्वयं दास बनाकर मुहम्मद का लक्ष्य मानवमात्र को शासकों का दास बनाना है? गैर-मुसलमान के इष्ट देवों और आस्था का अपमान करने वाली व उपासना की आजादी छीनने वाली अजान व इस्लाम को, आप सहयोग दें तो हम प्रतिबंधित कर देंगे..

समाचार के अनुसार, “पाकिस्‍तान ने अनुरोध किया है कि इस्‍लाम को लेकर लोगों के बीच बढ़ते डर को देखते हुए धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए तत्‍काल कदम उठाए जाएं”| मुसलमानों की उपरोक्त गवाही धार्मिक सद्भाव न दे कर स्वयं मुसलमानों को अल्लाह का दास बनाती है और गैर-मुसलमान को अल्लाह के उपासना की दासता स्वीकार करने को विवश करती है| यदि आप भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ लेते हैं तो आप स्वतंत्र नहीं रह सकते. क्यों कि जारज व प्रेत ईसा की आज्ञा है कि जो ईसा को राजा स्वीकार न करे, उसे ईसाई कत्ल कर दें. (बाइबल, लूका १९:२७). इसी प्रकार यदि आप भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ लेते हैं, तो आप को उपासना की स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है. अजान व (कुरान ८:३९). भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) दास मुसलमानों और ईसाइयों को आप को दास बनाने का असीमित मौलिक अधिकार देता है. वोट द्वारा भी आप मुसलमानों और ईसाइयों को आप की हत्या के लिए मिले उपरोक्त संवैधानिक अधिकार को छीन नहीं सकते.

मुसलमान याद रखें कि धार्मिक सद्भाव अजान व नमाज़ को बंद करने के बाद ही आएगा. अतएव कदम तो मुसलमानों को उठाना है. वे गैर-मुसलमानों के इष्ट देवताओं का अपमान करने वाली अजान बंद करदें. कुरान ने मुसलमानों को गैर-मुसलमानों के हत्या की और केवल इस्लाम धर्म के ही अस्तित्व को स्वीकार करने की आज्ञा दी है| अतएव कुरान जलाये जाने योग्य है|

हारुन के अनुसार, “संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव बान की मून को लिखे पत्र में कहा है कि इस घटना से मुसलमानों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है|”

कुरान जलाने से मुसलमानों की धार्मिक भावना को १४०० से अधिक वर्षों में एक बार ठेस पहुंची है और गैर-मुसलमान के धार्मिक भावना को ईमाम प्रतिदिन लाउडस्पीकर पर कम से कम १५ बार ठेस पहुंचाता है| अतएव कुरान जलाये जाने और मस्जिद नष्ट किये जाने योग्य है| ऐसा करना स्वयं मुसलमानों के हित में है|

इस्लाम मुसलमानों का शत्रु

धृतराष्ट्र के न्यायपालिका ने जुए में हारने के बाद पांडवों को निर्णय दिया था कि दास के अधिकार नहीं होते| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो लिखते हैं कि पराजित शत्रु को जीवन भर अधीन कर दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| 

अल्लाह ने, किसान के सांड की भांति, मुसलमानों को दास बनाने लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया है|

इतना ही नहीँ, मुसलमान स्वेच्छा से अपनी कब्र खोद रहे है। इस्लाम अपने अनुयायियों का ही शत्रु है। इस्लाम का अल्लाह अपने अनुयायी मुसलमानों से वादे जन्नत की करता है, लेकिन १४०० से अधिक वर्षो से मुसलमानों को कब्र में सड़ा रहा है और आगे कयामत तक सड़ाएगा। मुसलमान यह न भूलें कि ईसाई वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए उनका दोहन कर रहे हैं|

मालेगांव और मक्का के लिए बेचैनी क्यों?

जब हमने बाबरी ढांचा गिराया था तो मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़े गए, जिनमे से ३८ की विधिवत प्राथमिकियां पंजीकृत हैं. जिसका विवरण हमारी पुस्तक 'अजान' के १० वें संलग्नक में उपलब्ध है. इन्हें आप हमारी नीचे की वेब साईट पर निः शुल्क पढ़ सकते हैं|

http://www.aryavrt.com/azaan

बाबरी विध्वंस के ४९ अभियुक्त बने और १७ वर्षों तक लिब्रहान आयोग जाँच की नौटंकी करता रहा. हमने १५ जनवरी २००१ को शपथपत्र दिया कि ढांचा हमने गिराया है, उसे चुरा लिया. जनता का ८ करोड़ रुपया डकार गया. लेकिन हमारे मंदिरों को तोड़ने वाला कोई अभियुक्त नहीं और न कोई जाँच आयोग. आतंकवादी भगवा धारी हैं या एलिजाबेथ? हमने अपनी स्थिति साध्वी प्रज्ञा के बंदी बनते ही स्पष्ट कर दी थी. असीमानंद जी ने जज को जो बताया उससे अधिक हमने पहले ही बता दिया था. लेकिन तब एलिजाबेथ ने उसे मीडिया को प्रकाशित करने से मना कर दिया था. अब इन्द्रेश और सांसद योगी आदित्यनाथ को लूटना है, अतः प्रकाशित किया जा रहा है. निम्नलिखित वेबसाइट पढ़ें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

उपरोक्त कथन से स्पष्ट हो जाता है कि इमाम प्रतिदिन विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी काफिरों के हत्या की, नारियों के बलात्कार की, लूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं| राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी लोगों ने भय वश नहीं, बल्कि एक रणनीति के अंतर्गत, अपना जीवन, माल, नारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैं| आश्चर्य है कि ई०स० ६३२ से आज तक इस्लाम और मस्जिद का एक भी विरोधी सुरक्षित अथवा जीवित नहीं है| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

अधीन रखने के लिए अधिनियम

इस्लाम द्वारा अपमानित होकर भी कोई विरोध न कर सके – यह सुनिश्चित करने के लिए इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को लागू किया गया था| गहन अध्ययन से पता चलता है कि नागरिक की भावनाओं से इन धाराओं का कोई सरोकार नहीं है| क्यों कि इन धाराओं के अंतर्गत किये अपराध राज्य के विरुद्ध अपराध हैं| इन धाराओं के  अपराध में अभियोग चलाने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत वाइसराय, राष्ट्रपति, राज्यपाल या जिलाधीश को दिया गया है| पुलिस और जज भी असहाय हैं| मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी कहा या प्रसारित किया जाता है, वह सब कुछ उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत अपराध ही है, जो मस्जिदों या ईमामों पर लागू नहीं है| उपरोक्त धाराओं का संकलन इसलिए किया गया है की ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, तो उसको कुचल दिया जाये ताकि लोग भयवश आतताई इस्लाम का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को समाप्त कर दिया जाये| यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति, राज्यपाल या जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया – जब कि यह अपमान स्वयं वाइसराय, राष्ट्रपति और राज्यपाल का भी होता रहा है|

हम लोग अलग मिटटी के बने हैं| इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि हम अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| हम अज़ान का विरोध कर रहेमस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं| आइये इस धर्म युद्ध में हमारा साथ दीजिए| अपने पर नहीं तो अपने दुधमुहों और अपनी नारियों पर तरस खाइए| (कुरान २३:६). हम जो भी कर रहे हैं, भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा में कर रहे हैं| जो भी हमारे विरोधी हैं, मानवता के शत्रु हैं|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के मस्जिद विध्वंसक लोग हैं| वस्तुतः हम ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| (कुरान :३५). हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है| हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने और मानव जाति को दास बनाने के लिए संकलित किया गया है| इंडिया में मुसलमानों को इसलिए रोका गया है कि इन्होंने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| काफिरों को कत्ल कर सकते हैं| हमारा कथन है कि यदि आप अपनी, अपने देश अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान कोनिजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए|

मुसलमानों ने सउदी अरब, इराक और अफगानिस्तान से कोई सबक नहीं सीखाएलिजाबेथ ईसा के आदेश (बाइबल, लूका १९:२७) से अभी हिंदुओं को मरवा रही है| जब हिंदू मिट जायेंगे तो मुसलमानों की बारी आएगी| अपने असली शत्रु को पहचानें मुसलमान!

मुसलमान इतिहासकार सगर्व लिखते हैं कि मुहम्मद ने कितने शांतिप्रिय नागरिकों को कत्ल किया| कितने मंदिर तोड़े| कितनी अबला नारियों के गहने लूटे, उनके सगे-सम्बन्धियों को कत्ल किया और उसी रात उनका बलात्कार किया| लेकिन जब सर्बो ने मुसलमान नारियों का बलात्कार किया और जब लेबनान के नागरिक ठिकानों पर इजराएल ने बमबारी की तो मुसलमानों को मानवाधिकार याद गया|

अफगानिस्तान और ईराक पर अमेरिकी आधिपत्य से मुसलमान आतंकित हैं| लेकिन मुसलमान भूल गए हैं कि जहाँ अल्लाह ने मुसलमानों को सृष्टि सौँप रखी है (कुरान :२५५), वहीं ईसा ने ईसाइयों को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने का अधिकार दे रखा है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता| (बाइबल, लूका १९:२७). मुसलमान विचार करें कि तब क्या होगा, जब ईसाई मुसलमानों को कत्ल कर विश्व के सभी इस्लामी राज्यों पर आधिपत्य जमा लेंगे? अकेले इजराएल से तो मुसलमान निपट नहीं पाए, सभी ईसाई राज्यों से मुसलमान कैसे निपटेंगे?

जी हाँ! यदि आप चाहें तो हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोग न कुरान व मस्जिदें रहने देंगे और न अजान होने देंगे. क्योंकि काबा लूट का माल है. (कुरान १७:८१) अजान ईशनिंदा है. हमने बाबरी ढांचा गिराया है. हम इस्लाम के विरोधी हैं. हमारे ९ अधिकारी मक्का, मालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं. यदि इस्लाम धरती पर रहेगा तो कोई मंदिर या गैर-मुसलमान नहीं बच सकता. किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती. क्यों कि अल्लाह व इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद २९(१). काफ़िर को कत्ल करने व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलने के लिए ईसाईयों व मुसलमानों को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, राष्ट्रपति, राज्यपाल व जज, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार के लिए विवश हैं| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| मुसलमान काफिरों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे| हमारे पास भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| आइये प्रण करें कि हम धरती पर इस्लाम को नहीं रहने देंगे|

हज के लिए अनुदान और हमारे ईश्वर को गाली देने वाले ईमाम को हमारे कर से वेतन दिलाने की व्यवस्था है, वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर के| आप सहयोग दें| हम इन्हें बंद करेंगे| कुरान जलाने वाले को कत्ल करने वाले मुसलमान सरकार के संरक्षण में अजान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? १८६० से आज तक ईमामों के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं की गई? जब कि इस्लाम व मस्जिद का विरोध करने के कारण हम प्रताड़ित हो रहे हैं. हमारे पूर्वजों से भूल हुई है. उन्होंने इस्लाम की हठधर्मी को मुसलमानों पर लागू नहीं किया. हर काफ़िर आर्यावर्त सरकार को सहयोग दे. आर्यावर्त सरकार मुसलमानों की हठधर्मी मुसलमानों पर लागू करेगी. हम इस्लाम को नहीं रहने देंगे|

जो सरकार अपने संरक्षण में मंदिर तोड़वाती हो, आप के इष्ट देवताओं का अपमान कराती हो, आप की नारियों का बलात्कार कराती हो, धर्मान्तरण कराती हो और आप को आप की मातृभूमि से उजड़वाती हो, उसे सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है. जो सरकार अपने जिलाधीश, पुलिस और सैनिक को नहीं बचा पा रही, आप को क्या बचायेगी? वैदिक सनातन धर्म मानव मात्र को सम्पत्ति का अधिकार देता है. (मनुस्मृति ८:३०८) और उपासना की आजादी भी. (गीता ७:२१). जेहोवा लूट में हिस्सा नहीं लेता है. अल्लाह को २०% पर संतोष करना पड़ता है. (कुरान ८:१, ४१ व ६९). आप के पास सम्पत्ति तो रही नहीं| एलिजाबेथ व उसके मातहतों का आप के श्रम में हिस्सा ९५% है| जिन्हें सम्पत्ति, नारी, सम्मान, मानवाधिकार और अपने वैदिक सनातन धर्म को बचाना हो, लुटेरे संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को हटाने व अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें| एलिजाबेथ के रोम राज्य को मिटाने में मदद दें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

 

 


Comments