Elizabeth kaun hai

एलिजाबेथ को चुनौती

 प्राथमिकी संख्याएं ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला, उत्तर पश्चिम दिल्ली (विचाराधीन) MM वि० संदीप गुप्ता रोहिणी|

एलिजाबेथ को अर्मागेद्दन लाना है| ईसा ने दस करोड से अधिक अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल लिया और अब विश्व के सभी धर्मों को नष्ट कर मात्र अपनी पूजा कराएगा!

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

 १.      पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईशनिन्दक ईमाम मुसलमानों को आप के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है, जो भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध है. भारतीय न्याय व्यवस्था का मुकुट सर्वोच्च न्यायालय ईमामों को ईशनिंदा और जाति हिंसा करने के बदले में सरकारी खजाने से वेतन (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) और मुसलमानों को हज अनुदान दिलवाता है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/ ).

 २.      मैं सन १९९१ आज तक मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध कर रहा हूँ. जिसके कारण एलिजाबेथ के मातहतों और उपकरणों द्वारा मनोनीत राज्यपालों द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देकर उपरोक्त अभियोगों के अतिरिक्त मेरे विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ४८ अन्य अभियोग चले, जिनमे से ३ आज भी लम्बित हैं.

 मैं स्वीकार करता हूँ कि हम ग्राहम स्टेन्स और उसके दो पुत्रों की हत्या के अभियुक्त हैं. हमारे दारा उर्फ रविन्द्रपाल सिंह १९९९ से जेल में बंद हैं. हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे धनंजय देसाई भी जेल में बंद हैं. अब कमलेश तिवारी भी रासुका मे बंद हो गए हैं. साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकर|

 चूंकि दोनों अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो जजों द्वरा निरस्त कर दी गई| मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था| जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया| बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ| मेरे विरुद्ध चले रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ दिनांक ८ मार्च, २०१६ को निरस्त हो गए. मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, ०६-०२-२०१३ को निरस्त हो गया| इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है| मैं अज़ान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ| ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता| (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है| (मनुस्मृति ८:३०८). हम् भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को निरस्त करना चाहते हैं| हम मानव जाति को बचाना व विदेशी बैंकों में जमा देश का धन वापस लाना चाहते हैं और एलिजाबेथ राज्यपालों के माध्यम से आप को लूट रही व मिटा रही है| किसके साथ हैं आप?

 मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्धरत हूँ. इसलिए भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ का अपराधी हूँ. विवरण के लिए नीचे धारा का उल्लेख है:-

 121. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना--जो कोई 1[भारत सरकार] के विरुद्ध युद्ध करेगा, या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा, वह मॄत्यु या 2[आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा 3[और जुर्माने से भी दंडनीय होगा] ।

 मैं एलिजाबेथ को चुनौती देता हूँ कि भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मुझे मृत्युदंड दे.

उपनिवेश किसे कहते हैं? 

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं जहाँ उस राज्य की जनता निवास करती है।

कौन है एलिजाबेथ, जिसके उपनिवेश में रहने के लिए उपनिवेशवासी विवश हैं?

एलिजाबेथ की आस्था ईसा में है और उसकी एकमात्र पुस्तक बाइबल है, जिसके अनुसार, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्यकरूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७).

सबको अपने अधीन कराने वाला, (बाइबल, लूका १९:२७), मनुष्य के पुत्र का मांस खाने व लहू पीने की शिक्षा देने वाला (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), बपतिस्मा न लेने वालों को नर्क भेजने वालातलवार चलवाने वाला (बाइबल, मत्ती १०:३४), धरती पर आग लगवाने वाला (बाइबल, लूका १२:४९), परिवार में शत्रुता पैदा करानेवाला {(बाइबल, मत्ती १०:३५-३६) व (बाइबल, लूका १२:५१-५३)}, बेटी से विवाह कराने वाला (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) व मनुष्य को भेंड़ बनाने वाला ईसा, जिस डायन का पूज्य है, आप उस के उपनिवेश में जीवित कैसे बच सकते है?

इसके अतिरिक्त 

५३ ईसाई व मुसलमान उपनिवेशवासियों की मल्लिका जेसुइट एलिजाबेथ ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

“… मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्धकरूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै न उनकी आयु का विचार करूंगी, न लिंग का, न परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी,उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चोंके सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव न हो तो मै गुप्त रूप सेविष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियोंके पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसीवरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

बाइबल का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध है.

बाइबल, बपतिस्मा और चर्च के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) एलिजाबेथ को अपनी उपरोक्त संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

http://www.aryavrt.com/azaan-aur-snvidhan

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

 Your Registration Number is : DARPG/E/2015/06559

  http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त पंजीकृत न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

जवाब आया है. नीचे पढ़ें और   http://pgportal.gov.in पर DARPG/E/2015/06559 से सत्यापित करें. 

 Current Status:Closed (NO ACTION REQUIRED)Reason:OthersDate of Action:01 Jun 2015Details:not a grievance.

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ६० व १५९ और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन व दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है उसके अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे रखा है.

राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| इन्हीं धाराओं के अधीन मेरे विरुद्ध धारा १९६ के अधीन संस्तुति देकर राज्यपालों ने अब तक ५० अभियोग चलवाये| ३ आज भी लम्बित हैं| मुझे जेल में जहर दिया गया है.  मेरी २ अरब की सम्पत्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से एलिजाबेथ ने लूट ली है.

 

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