Dharmo Rakshti Rakshatah

धर्मो रक्षति रक्षतः

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत.

अर्थ: रक्षा किया हुआ धर्म ही रक्षा करता है, और अरक्षित धर्म मार डालता है, अतएव अरक्षित धर्म कहीं हमे न मार डाले, इसलिए बल पूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए. (मनु स्मृति ८:१५).

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को, अल्पसंख्यक घोषित कर, वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरानसूरह अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः आतंक के बल पर वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. (कुरान ८:१२)

नेताओंसुधारकोंसंतोंमीडिया, इस्लामी ईमामों व मौलवियोंमिशनरी और जजों सहित लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैं| सच छुपा नहीं हैन ही इसे जानना मुश्किल है|  मानव उन्मूलन की कीमत पर  आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है| मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगाजब तक हम उनके साधन और प्रेरणा स्रोत को नष्ट न कर दें. उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणा स्रोत कुरान (कुरान ८:३९और बाइबल (बाइबललूका १९:२७) है

एक प्रमुख अंतर यह भी है कि जहां ईसाइयत और इस्लाम को अन्य संस्कृतियों को मिटाने में लंबा समय लगा वहीँ वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए २६ नवम्बर, १९४९ को संविधान बना कर ईसाइयत और इस्लाम के हाथों में सौँप दिया गया है| अजान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| प्रेसिडेंट व हर राज्यपाल ने अजान व मस्जिद को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), पुलिस के संरक्षण और दंप्रसंकीधारा१९६ के कवच में रखा है| अजान देने के बदले सरकारें इमामों को सरकारी खजाने से वेतन दे रही हैं| वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से! (एआईआरएससी१९९३प० २०८६). अजान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआरकलकत्ता१९८५प१०४). इसके विपरीत जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध कर रहा है, दंप्रसंकीधारा१९६ के अंतर्गत जेल में ठूस दिया जा रहा है|

हम सचमुच एक आक्रांत एवं पराजित राष्ट्र की भेंड़े हैं।

 

पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी ने वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए संकलित भारतीय संविधान के रक्षा की शपथ ली थी| दिखावे के लिए विरोध कर, अब वैदिक सनातन धर्म कैसे मिटता है-यही देखने के लिए जीवित हैं|

सोनिया को सबको ईसा की भेंड़ बनाना है| किसान सांड को दास बनाने के लिए वीर्यहीन करता है और सोनिया दास बनाने के लिए वेश्याओं का महिमा मंडन और पोषण कर रही है| नसबंदी करा रही है| २९ मई, २०१२ को पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी को डीएनए के लिए अपना खून देना है, ताकि वेश्याओं के अधिकार सुरक्षित हों| लेकिन तलाक के तलवार की साया में जीने वाली मुस्लिम नारियों के अधिकारों की सोनिया को कोई चिंता नहीं है|

सोनिया को परेशानी यह है कि हमारा ईश्वर जारज और प्रेत नहीं है| हम वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| इससे वीर्यहीनता के प्रसार और देश के नागरिकों को बैल बनाने में सोनिया को कठिनाई हो रही है|

कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है. [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. अनुच्छेद २५(२)].

जज शीघ्र ही कुमारी माताओं को इनाम देने का आदेश पारित करेंगे. आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले 

ही बना चुका है. [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. अनुच्छेद २५(२)].

नीचे मैं राम चरित मानस की पंक्तियाँ उद्धृत कर रहा हूँ,

अनुज बधू भगिनी सुत नारी| सुनु सठ कन्या सम ए चारी|

इन्हहिं कुदृष्टि बिलोकइ जोई| ताहि बधें कछु पाप न होई||

राम चरित मानस, किष्किन्धाकाण्ड; ८;४

अर्थ: [श्री रामजी ने कहा] हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्रवधू और कन्या – ए चारों समान हैं| इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता|

पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी के लिए बहुविवाह वर्जित है| लेकिन वैश्या उज्जला शर्मा के बहु पुरुष यौन सम्बन्ध के अधिकार की रक्षा के लिए न्यायपालिका बेचैन है! क्यों कि वैदिक सनातन धर्म दोनों प्रकार के यौन सम्बन्धों का विरोधी है| पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानन्द बलात्कारी और भ्रूण हत्यारे बन गए| लेकिन सबको अपने अधीन कराने वाला, (बाइबललूका १९:२७), मनुष्य के पुत्र का मांस खाने व लहू पीने की शिक्षा देने वाला (बाइबलयूहन्ना ६:५३), तलवार चलवाने वाला (बाइबलमत्ती १०:३४), धरती पर आग लगवाने वाला (बाइबललूका १२:४९), परिवार में शत्रुता पैदा कराने वाला {(बाइबलमत्ती १०:३५-३६) व (बाइबललूका १२:५१-५३)}, बेटी से विवाह कराने वाला (बाइबलकोरिन्थिंस ७:३६) व मनुष्य को भेंड़ बनाने वाला ईशा आज भी ईश्वर का पुत्र है?

ईसा के समर्थन से बेटी (बाइबलकोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह करने वाले दास ईसाई व पुत्रवधू (कुरान३३:३७-३८) से निकाह करने वाले मुसलमान और धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग पाने वाले (बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) दास और भेंड़ ईसाई व मुसलमान और सोनिया के मातहत और उपकरण लोकसेवक वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए आप को अजान द्वारा और आप की नारियों का बलात्कार कर आप को अपमानित और वीर्यहीन कर रहे हैं?

वैदिक सनातन धर्म सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को पाप मानता है| अतएव दोनों को आतताई जजों से कानूनी मान्यता मिल गई है. आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं. समलैंगिक सम्बन्ध और कन्याओं को पब में शराब पीने और नंगे नाचने का अधिकार, सगोत्रीय विवाह के कानून तो जजों ने ही पास किये हैं| गांड मारिये और मराइए और जजों के गुण गाइए| आतताई जजों से वैदिक सनातन धर्म बचाना हो तो सोनिया को जेल भेजने में हमें सहयोग दीजिए|

उपरोक्त उद्धरण के अनुसार ईसाई और मुसलमान का वध करना अपराध नहीं है| दंड देने का अधिकार राज्य के पास होता हैआर्यावर्त सरकार की स्थापना धर्म रक्षार्थ की गई है| यदि ईसाई व मुसलमान भी जीवन और सम्मान चाहें तो आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें, अन्यथा मानव जाति ही डायनासोर की भांति लुप्त हो जायेगी|

http://www.wordproject.org/in/05/13.htm

[बाइबल, व्यवस्था विवरण १३:६-११ और कुरान ४:८९]

06. यदि तेरा सगा भाई, वा बेटा, वा बेटी, वा तेरी अर्द्धांगिन, वा प्राण प्रिय तेरा कोई मित्र निराले में तुझ को यह कहकर फुसलाने लगे, कि आओ हम दूसरे देवताओं की उपासना वा पूजा करें, जिन्हें न तो तू न तेरे पुरखा जानते थे, 

07. चाहे वे तुम्हारे निकट रहने वाले आस पास के लोगों के, चाहे पृथ्वी के एक छोर से लेके दूसरे छोर तक दूर दूर के रहने वालों के देवता हों, 

08. तो तू उसकी न मानना, और न तो उसकी बात सुनना, और न उस पर तरस खाना, और न कोमलता दिखाना, और न उसको छिपा रखना; 

09. उसको अवश्य घात करना; उसके घात करने में पहिले तेरा हाथ उठे, पीछे सब लोगों के हाथ उठे। 

10. उस पर ऐसा पत्थरवाह करना कि वह मर जाए, क्योंकि उसने तुझ को तेरे उस परमेश्वर यहोवा से, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है, बहकाने का यत्न किया है। 

11. और सब इस्राएली सुनकर भय खाएंगे, और ऐसा बुरा काम फिर तेरे बीच न करेंगे॥ 

12. यदि तेरे किसी नगर के विषय में, जिसे तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे रहने के लिये देता है, ऐसी बात तेरे सुनने में आए, 

13. कि कितने अधम पुरूषों ने तेरे ही बीच में से निकलकर अपने नगर के निवासियों यह कहकर बहका दिया है, कि आओ हम और देवताओं की जिन से अब तक अनजान रहे उपासना करें, 

14. तो पूछपाछ करना, और खोजना, और भलीं भांति पता लगाना; और यदि यह बात सच हो, और कुछ भी सन्देह न रहे कि तेरे बीच ऐसा घिनौना काम किया जाता है, 

15. तो अवश्य उस नगर के निवासियों तलवार से मान डालना, और पशु आदि उस सब समेत जो उस में हो उसको तलवार से सत्यानाश करना। 

16. और उस में की सारी लूट चौक के बीच इकट्ठी करके उस नगर को लूट समेत अपने परमेश्वर यहोवा के लिये मानो सर्व्वांग होम करके जलाना; और वह सदा के लिये डीह रहे, वह फिर बसाया न जाए। 

(कुरान :८९)

वे चाहते हैं कि जिस तरह से वे काफिर हुए हैं उसी तरह से तुम भी ‘काफिर’ हो जाओफिर तुम एक जैसे हो जाओः तो उनमें से किसी को अपना साथी न बनाना जब तक वे अल्लाह की राह में हिजरत न करेंऔर यदि वे इससे फिर जावें तो उन्हें जहाँ कहीं पाओं पकड़ों और उनका वध (कत्ल) करो। और उनमें से किसी को साथी और सहायक मत बनाना।” (कुरान ४:८९)

बाइबल व कुरान के उपरोक्त उद्धरणों से स्पष्ट हैं कि ईसाईयत और इस्लाम धर्मान्तरण करने व कराने वालों को मृत्यु दंड देते है| अतएव भारतीय संविधान के अनुच्छेद २५ में दिया गया आस्था की आजादी के अधिकार का उन्मूलन करें या सत्ता छोड़ो|

हर मुसलमान व ईसाई खूनी है| सोनिया कैथोलिक ईसाई है| धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है| (व्यवस्था विवरण, १३:६-११). व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है| (कुरान ४:८९). २०१३ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे| न १४३४ वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे| अतएव धर्मत्यागी सोनिया व हामिद को उनके ही मजहब के अनुसार कत्ल करने का हमे भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार है| क्यों कि बाइबल, लूका १९:२७ के ईसा के आदेश से सोनिया हमे कत्ल करेगी और कुरान २१:९८ के आदेश से हामिद अंसारी कत्ल करेगा| इनको सत्ता में बैठा कर सरकार राजनीति के अपराधीकरण को कैसे मिटायेगी? जो हत्या के योग्य हैं, उन्हें सत्ता सौंप कर संघ सरकार जनता को क्या सन्देश दे रही है? इनसे अपनी रक्षा का हमारे पास और कोई मार्ग नहीं है|

हर ईसाई व मुसलमान का धर्म ही दास बनना और बनाना व मानव मात्र की हत्या करना है| भारत के प्रत्येक नागरिक के पास भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधिकार से प्राइवेट प्रतिरक्षा में हर ईसाई व मुसलमान को कत्ल करने का कानूनी अधिकार है| लेकिन हिंसा का एकाधिकार राज्य सरकार के पास होता है इसीलिए आर्यावर्त सरकार की स्थापना की गई है| आर्यावर्त सरकार के पास ईसाइयत और इस्लाम को मिटाने के निम्नलिखित कारण हैं,

पहला कारण:

हर ईसाई व मुसलमान दास है| विश्व के प्रत्येक व्यक्ति को दास बनाना उसका धर्म है| दास न बनने वाले को कत्ल करना उनका मजहबी दायित्व है| म० क० गाँधी ने हमसे रामराज्य और आजादी का वादा किया था| भारत के किसी कानून के अधीन हमें सोनिया की भेंड़ बनने और अपनी आजादी गवांने के लिए विवश नहीं किया जा सकता| न कत्ल किया जा सकता है| अतएव ईसाई व मुसलमान ईसाइयत और इस्लाम छोड़ें या भारत|

दूसरा कारण:

गो और मानव भक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) सोनिया को भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने सबकी सम्पत्ति और पूँजी लूटने का अधिकार दिया है और अनुच्छेद २९(१) ने जो भी ईसा को राजा स्वीकार न करे-उसे कत्ल करने का अधिकार| (बाइबल, लूका १९:२७). हर ईसाई भेंड़ व मूर्ख (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) है और हर मुसलमान मूर्ख (कुरान २:३५) और मुजाहिद| हमारी हत्या करने वाली गो व नर भक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) सोनिया को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है|

तीसरा कारण:

ईसाइयत और इस्लाम धर्मान्तरण का अधिकार नहीं देते| [बाइबल, व्यवस्था विवरण १३:६-११ और कुरान ४:८९].

 

धर्मान्तरण स्वयं जेहोवा के अनुसार घिनौना कार्य है| आर्यावर्त सरकार ईसाइयत के इसी लेख का अनुसरण कर ईसाइयत मिटाना और ईसाईयों को को कत्ल करना चाहती है| आप का सहयोग अपेक्षित है|



जिन्हें भी वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करनी हो, आर्यावर्त सरकार की सहायता करें| केवल हम मानव जाति की रक्षा कर सकते हैं|

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