धर्मान्तरण धोखा है

धर्मान्तरण धोखा है|

वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का षडयंत्र -

भारतीय संविधान

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार

अन्तःकरण की और धर्म की अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता-(१) लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य 

तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी व्यक्तियों को अन्तःकरण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, 

आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा|

देखना यह है कि क्या अब्रह्मी संस्कृतियाँ, अपने अनुयायियों सहित, किसी को अन्तःकरण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देती हैं? बाइबल कहती है,

बाइबल, पुराना नियम, व्यवस्था विवरण १३:६-११

६:कोई तुम्हारे निकट का व्यक्ति गुप्त रूप से दूसरे देवताओं की पूजा के लिए तुम्हें सहमत कर सकता है| यह तुम्हारा अपना भाई, पुत्र, पुत्री, 

तुम्हारी प्रिय पत्नी या तुम्हारा प्रिय दोस्त हो सकता है| वह व्यक्ति कह सकता है, ‘आओ चलें, दूसरे देवताओं की सेवा करें|’ (ये वैसे देवता हैं, 

जिन्हें तुमने और तुम्हारे पूर्वजों ने कभी नहीं जाना)

(७: वे उन लोगों के देवता हैं जो तुम्हारे चारों ओर अन्य देशों में रहते हैं, कुछ समीप और कुछ बहुत दूर|)

८: तुम्हें उस व्यक्ति के साथ सहमत नहीं होना चाहिए| उसकी बात मत सुनो| उस पर दया न दिखाओ| उसे छोडना नहीं| उसकी रक्षा मत करो|

९-१०: तुम्हें उसे मार डालना चाहिए| तुम्हें उसे पत्थरों से मार डालना चाहिए! पत्थर उठाने वालों में तुम्हें पहला होना चाहिए और उसे मारना 

चाहिए| तब सभी लोगों को उसे मार देने के लिए उस पर पत्थर फेंकना चाहिए| क्यों? क्यों कि उस व्यक्ति ने तुम्हें यहोवा तुम्हारे परमेश्वर से दूर हटाने का प्रयास किया| यहोवा केवल एक है जो तुम्हें मिस्र से लाया, जहां तुम दास थे|

११: तब इस्राएल के सभी लोग सुनेंगे और भयभीत होंगे और वे तुम्हारे बीच और अधिक इस प्रकार के बुरे काम नहीं करेंगे|

और कुरान कहता है,

वे चाहते हैं कि जिस तरह से वे काफिर हुए हैं उसी तरह से तुम भी ‘काफिर’ हो जाओफिर तुम एक जैसे हो जाओः तो उनमें से किसी को अपना 

साथी न बनाना जब तक वे अल्लाह की राह में हिजरत न करेंऔर यदि वे इससे फिर जावें तो उन्हें जहाँ कहीं पाओ पकड़ो और उनका वध 

(कत्ल) करो। और उनमें से किसी को साथी और सहायक मत बनाना।” (कुरान ४:८९)

यानी दोनों ही धर्मान्तरण करने वाले को मृत्युदंड देते हैं.

हर मुसलमान  ईसाई खूनी है| एलिजाबेथ कैथोलिक ईसाई है| धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है| (व्यवस्था विवरण१३:-११) (बाइबल, लूका २४:४४) के साथ पठनीय धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है| (कुरान :८९). २०१५ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे| १४३६ वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे| अतएव धर्मत्यागी एलिजाबेथ हामिद को उनके ही मजहब के अनुसार कत्ल करने का हमे भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार है| क्यों कि बाइबललूका १९:२७ के ईसा के आदेश से एलिजाबेथ हमे कत्ल करेगी और कुरान २१:९८ के आदेश से हामिद अंसारी कत्ल करेगा| इनसे अपनी रक्षा का हमारे पास और कोई मार्ग नहीं है| इनको सत्ता में बैठा कर सरकार राजनीति के अपराधीकरण को कैसे मिटायेगी? जो हत्या के योग्य हैं, उन्हें सत्ता सौंप कर संघ सरकार जनता को क्या सन्देश दे रही है?

बाइबल व कुरान के उपरोक्त उद्धरणों से स्पष्ट हैं कि ईसाईयत और इस्लाम धर्मान्तरण करने व कराने वालों को मृत्यु दंड देते है| अतएव भारतीय 

संविधान के अनुच्छेद २५ में दिया गया आस्था की आजादी के अधिकार का उन्मूलन करें या सत्ता छोड़ो|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१


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