Dhara 196 Muj14W27A



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 27A, Jun 27 - Jul 03, 2014. This issue is Dhara 196 Muj14W27A


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Dhara 196 Muj14W27A

उपनिवेश की जंजीरों से मुक्ति हेतु अंतरराष्ट्रीय संगठन|

विषय: अभियोग वापसी हेतु|

सन्दर्भ: प्राथमिकी संख्याएं ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला| (विचाराधीन) मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट वि० श्री संदीप गुप्ता रोहिणी|

मान्यवर महामहिम,

उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की जनता निवास करती है। यानी उपनिवेश का हर शासक या नागरिक एलिजाबेथ का दास है|

एलिजाबेथ ने ५३ देशों को अपना उपनिवेश बना रखा है| सभी ईसाई या इस्लामी राष्ट्र हैं| सभी मात्र इसलिए बचे हुए हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति मिटी नहीं है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, तुर्की के खलीफा, ईराक के सद्दाम, ओसामा और अफगानिस्तान के भांति इस्लाम मिट जायेगा और अल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा| ईसाई मुसलमान को कत्ल करेगा और मुसलमान ईसाई को!

बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिर भी आप खूनी, लुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए विवश हैं?

केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). एलिजाबेथ के साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी है| एलिजाबेथ के सहयोग से अर्मगेद्दन के पश्चात ईसा जेरूसलम को अपनी अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बनाएगा| इस्लाम सहित सभी मजहबों और संस्कृतियों को निषिद्ध कर देगा| बाइबल के अनुसार केवल ईसा और उसके चित्र की पूजा हो सकेगी| ईसा यहूदियों के मंदिर में ईश्वर बन कर बैठेगा| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा की बारी है| विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://www,countdown.org/armageddon/antichrist.htm

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी खूनी इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा हैधरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार हैचुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को अपनी लूटहत्या और बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता हैअल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|"

इस प्रकार अब्रह्मी संस्कृतियों को समाप्त करना ही मानवजाति के अस्तित्व को बचाने का एक मात्र मार्ग हैजो बिना उपनिवेश और भारतीय संविधान से मुक्ति लिए सम्भव नहीं है|

लेकिन १९४७ से आज तक किसी ने उपनिवेश का और १९५० से आज तक भारतीय संविधान का विरोध नहीं किया|

अब्रह्मी संस्कृतियों द्वारा भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये जाने वाले अपराधों को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल विवश कर दिए गए हैंराष्ट्रपति और राज्यपाल पद, प्रभुता और पेट के लोभ में, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ लेते हैं|

भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध धारा १९६ की संस्तुति पर अब तक ५० अभियोग चले| जिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं| लेकिन १८६० से आज तक अज़ान और मस्जिद के विरुद्ध कोई अभियोग न चला|

भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार से हमने बाबरी ढांचा गिराया है. हमारे ९ अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं| क्यों कि विवाद का मूल बिंदु है कि अपराध स्थल मस्जिद धरती पर क्यों रहें?

आक्रांता अब्रह्मी संस्कृतियों ने भारत को इंडिया और वसुंधरा के प्रत्येक मनुष्य को अपना दास बना रखा है| भारत सहित ५३ ईसाई और मुसलमान देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं| मुसलमानों का ईसाई शोषण कर रहे हैं|

हमारा उत्पीड़न इसलिए होता है कि हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह कराने वाले ईसा व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाह और धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग देने वाले (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) जेहोवा और अल्लाह को ईश्वर मामने के लिए तैयार नहीं हैं|

इसी प्रकार पूजा स्थल तोड़वाने वाले, (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३), लूट व दूसरे के नारी के अपहरण की शिक्षा देने वाले (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), दुधमुहों की हत्या कराने वाले और नारियों का उनके पुरूषों के आँखों के सामने बलात्कार कराने वाले जेहोवा को ईश्वर मामने के लिए तैयार नहीं हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६)

जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५प१०४) ने ही दिया है| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च  न्यायपालिका द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है|

अतएव हमारे विरुद्ध अभियोग समाप्त हों|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१.

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jun 30, 2014, 5:25 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Jun 30, 2014, 5:24 AM
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