Declare Azaan Crime

हम इस्लाम को तथाकथित अल्लाह और उसके लूट, हत्या और बलात्कार की संहिता कुरान से जानते हैं|

इंडिया में ईसाइयत और इस्लाम को ईसाई व मुस्लिम सहित सबको अपना दास बनाने अन्यथा कत्ल व नरसंहार के लिए रखा गया है| अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना जजों ने मुसलमानों का मजहबी अधिकार स्वीकार किया हुआ है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|  

भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इस्लाम को संरक्षण देने के लिए किया गया है| कोई भी नागरिक खूनी, लुटेरे और बलात्कारी अल्लाह के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकता| यहाँ तक कि जज, पुलिस और सांसद व विधायक भी शिकायत नहीं कर सकते| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन विवश राज्यपाल मस्जिदों से अजान और अल्लाह के कुरान के अनुसार मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले ईमाम के विरुद्ध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत सन १८६० से आज तक कार्यवाही नहीं कर सके| जो भी मस्जिद, अजान, नमाज़ का विरोध करता है, उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्यपाल या राष्ट्रपति की संस्तुति पर प्रताड़ित और जजों द्वारा तबाह कर दिया जाता है| मस्जिद, अजान, कुरान और नमाज़ का विरोध करने के कारण मैं स्वयं ४२ बार हवालात काट चुका हूँ| इस्लाम की अधिक जानकारी के लिए नीचे की लिंक देखें,

http://www.aryavrt.com/fatwa

नागरिकों के जान-माल की रक्षा के लिए मस्जिद का निर्माण और उनसे प्रसारित की जाने वाली अज़ान संज्ञेय अपराध घोषित होनी चाहिए|


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