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दादा को सादर प्रणाम|

आप सोनिया के मनोनीत ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया, जो भारत है, के प्रथम नागरिक हैं| इंडिया, जो भारत है, स्वतन्त्र नहीं हुआ| देखें, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(ii).  

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी हैं| हमारे ९ अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं| सिंह जीवन में मात्र एक बार सम्भोग करता है, इसीलिए वन का सर्वाधिक शक्तिशाली जीव है| ईशा के ३३० वर्ष पूर्व यूनानियों की सत्ता को निर्मूल करने वाले चाणक्य ने विवाह नहीं किया था|

खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो लिखते हैं कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (अधीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने, किसान के सांड की भांति, यहूदियों मुसलमानों को दास बनाने के लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया है| यहूदी और मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं और जीवन भर रोगी, अशक्त और दास बन कर जीते हैं|

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है|  ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया, जो भारत है, का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास हो कर अपने ही सर्वनाश का  उपकरण बन गया है और अपनी सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटारहा है|

खूनी आस्थाएँ ईसाइयत, इस्लाम, चर्च और मस्जिद मानवमात्र को वीर्यहीन कर हत्या, लूट और बलात्कार के उपदेशक स्रोत हैं| इनको धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है|

भ्रष्टाचार भारतीय संविधान से प्रायोजित है| विकल्पहीन लोकसेवकों की नियुक्ति ही लूटने के लिए की जाती है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ|  जहां भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के मौलिक अधिकार को सांसदों और जजों ने मिलकर नागरिकों से लूट लिया और अनुच्छेद ३९() व्यक्ति को सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं देता, वहीं दंप्रसं की धारा १९७ ने सत्ता का केन्द्रीयकरण सोनिया के हाथों में कर दिया है| सोनिया के मनोनीत लुटेरों के विरुद्ध कहीं सुनवाई नहीं हो सकती| यह कहना गलत है कि कानून सबके लिए एक समान है अथवा कानून अपना कार्य करता है| सोनिया द्वारा दंप्रसं की धारा १९७ भयादोहन के लिए उपयोग में लाई जा रही है| लोकसेवक, पुलिस, नागरिक जज सभी दंप्रसं की धारा १९७ से पीड़ित हैं| आज अपराधी वह है जिसे सोनिया अपराधी माने| यही कारण है कि जहां येदियुरप्पा और मधु कोड़ा जेल गए, वहीं किसानों, लोकसेवकों और यहाँ तक कि रामप्रसाद बिस्मिल जैसे उन हुतात्माओं तक की जमीनें लूटने, जिसके बलिदान के कारण वे मुख्य मंत्री राज्यपाल बने, वाले मुख्य मंत्री मुलायम मायावती जेल नहीं भेजे जा रहे हैं| चुनाव द्वारा भी जनता सोनिया की लूट से मुक्ति नहीं पा सकती|

सोनिया लोकसेवकों को मिटाने के लिए लोकसेवकों का ही उपयोग कर रही है| हमारे विरुद्ध अभियोग चला कर लोकसेवक स्वयं अपने सर्वनाश के लिए सेवा करने के लिए विवश हैं| दादा! आप यह युद्ध नहीं लड़ सकते| यदि अपना अस्तित्व चाहें तो मेरी छिपकर सहायता करें|

भवदीय:-

 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

गुरुवार, 29 अगस्त 2013

 

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