CrPC82 recall 14925y

IN THE COURT OF SH. SANDEEP GUPTA MM ROHINI DISTT. COURTS, DELHI

FIR No. 406/2003 u/s 153A &

FIR No. 166/2006 u/s 153A and 295A PS NARELA DELHI.

सुनवाई की तारीख़: नवम्बर २४, २०१४.

मुख्य न्यायमूर्ति सुश्री जी० रोहिणी,

दिल्ली उच्च न्यायालय. – ११०००३

1.  इस पत्र के २ माह पूर्व मैंने आप से हमारे विरुद्ध लम्बित उपरोक्त अभियोगों को वापस लेने का आग्रह किया था. आप की सुविधा के लिए पिछले पत्र की प्रति संलग्न कर रहा हूँ. लेकिन आप हर उस व्यक्ति को नष्ट करने के लिए नियुक्त की गई हैं, जो धर्म की रक्षा के लिए लड़े. आश्चर्य यह है कि फिर भी आप के न्यायपालिका का नारा, “यतो धर्मस्ततो जयः” है. वह भी संविधान के अनुसूची ३ के प्रारूप ८ के अनुसार शपथ ले कर! क्या आप को लज्जा नहीं आती? अपनी नहीं – तो अपनी भावी पीढ़ी पर तरस खाइए.

2.      एलिजाबेथ के दास राज्यपालों के पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईमाम दिन में पांच समय अज़ान द्वारा ईशनिंदा करते हैं और खुतबे देते हैं कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुष्मन हैं| अविश्वासियों को कत्ल कर दो| अज़ान और मस्जिद से दिए जाने वाले खुतबों के विरुद्ध काफ़िर शिकायत नहीं कर सकते और न जज सुनवाई कर सकता है| पुलिस किसी ईमाम के विरुद्ध आज तक अभियोग न चला सकी| मुसलमानों को अविश्वासियों के नारियों का लव जिहाद, बलात्कार करने का अधिकार इस्लाम (कुरान २३:६) और लोकतन्त्रीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| इस असीमित मौलिक मजहबी अधिकार को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए एलिजाबेथ के मनोनीत राष्ट्रपति व राज्यपाल, विवश हो कर, शपथ लेते हैं| [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९). अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधियों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति देकर भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपालों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत एकाधिकार प्राप्त है| लोकसेवक या जज भारतीय संविधान, और कुरान के आगे विवश हैं!

Indian Constitution Schedule 3 Form VIII

Form of oath or affirmation to be made by the Judges of a High Court:

“I, A.B., having been appointed (nominated) Chief Justice (or a Judge) of the High Court at (or of) ..........do swear in the name of God/ solemnly affirm that I will bear true faith and allegiance to the Constitution of India as by law established, that I will uphold the sovereignty and integrity of India, that I will duly and faithfully and to the best of my ability, knowledge and judgment perform the duties of my office without fear or favour, affection or ill-will and that I will uphold the Constitution and the laws.

3.  किसी भी हरे भरे वृक्ष को नष्ट करने के लिए एक गिद्ध का निवास ही पर्याप्त है| इसी प्रकार किसी भी संस्कृति को मिटाने के लिए एक मुसलमान या ईसाई का निवास पर्याप्त है| अकेला कोलम्बस अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अकेला मैकाले संस्कृत भाषा और गुरुकुलों को निगल गया| अकेला मुहम्मद अपने आश्रय दाता यहूदियों के तीन प्रजातियों बनू कैनुका, बनू नजीर और बनू कुरेज़ा को निगल गया|

4.  गुरुकुलगौगंगा और गायत्री वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाएं हैंआक्रांता अब्रह्मी संस्कृतियों ने भारत को इंडिया और वसुंधरा के प्रत्येक मनुष्य को अपना दास बना रखा है

5.  सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से हमारे वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है|

6.  क्या आप उपनिवेश और भारतीय संविधान का विरोध कर सकती हैं?

7.  क्या आप अपने बेटे को निःशुल्क गुरुकुल में शिक्षा दिला सकती हैं?

8.  क्या किसान बैल से खेती कर सकता है?

9.  क्या आप गंगा में गंदे नालों को जोड़ने से रोक सकती हैं?

10. क्या आप वेदों की माता गायत्री का जप करती हैं?

11. आप ही बताएं, “यतो धर्मस्ततो जयः” कहाँ से होगा?

12.  मानवजाति को अब्रह्मी संस्कृतियों और उपनिवेश से मुक्ति दिलाने में हमारी सहायता कीजिए.

प्रार्थना

अतः हम आप से प्रार्थना करते हैं कि इस प्रार्थना पत्र को जन हित याचिका के रूप में स्वीकार करें और हमारे दोनों अभियोगों प्राथमिकियों ४०६/२००३ और १६६/२००६ थाना नरेला का निस्तारण स्वयं करें| हमारे विरुद्ध NBW और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ८२ के अधीन चलने वाली कार्यवाही स्थगित करें| मैं ८१+ वर्ष का हूँ| मैं अर्थाभाव और वृद्धा वस्था की बीमारियों से पीड़ित हूँ| अतएव मुझे कानूनी सहायता दिलाने की कृपा करें|

(अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१)

वर्तमान पता; मंगल आश्रम, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड.

 

CrPC82 recall 14925y

Registration Number is : GNCTD/E/2014/05610 

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