Corruption myth Hd

आप का ध्यान भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ. इस अनुच्छेद की तर्कपूर्ण विवेचना कीजिए. अनुच्छेद नीचे उद्धृत है:-

 ३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

राज्य के स्थापना का उद्देश्य प्रजा के जान-माल की रक्षा करना है. अनुच्छेद ३९(ग) के अधीन राज्य प्रजा को स्वयं लूटता है. भारतीय संविधान के उद्देशिका में समाजवादी शब्द ३-१-१९७७ को जोड़ा गया और १९९१ में बिना संशोधन के अपना टनों सोना बिकने के बाद मुद्रा का २३% अवमूल्यन करके देश बाजारी व्यवस्था पर उतर आया. फिर भी यह अनुच्छेद ज्यों का त्यों इसलिए बना हुआ है. कि इस अनुच्छेद के अनुसार व्यक्ति की स्थिति किसान के पशु से भी बुरी है. जिसकी सम्पत्ति चाहती है, सोनिया लूट लेती है. कार्ल मार्क्स ने सम्पत्ति का समाजीकरण किया था. वह भी विफल हो गया. देखें नीचे:-

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार नागरिक के पास धन का संकेन्द्रण नहीं होना चाहिए. अतएव जनता की सम्पत्ति लूटना लोकसेवक की संवैधानिक जिम्मेदारी है. अतएव भ्रष्टाचार के लिए भारतीय संविधान उत्तर दायी है, लोकसेवक नहीं. लोकसेवक के विकल्प हीनता का तो सोनिया शोषण करती है. यदि लोकसेवक को नौकरी करनी है तो जनता को लूटना पड़ेगा. सोनिया को हिस्सा देना पड़ेगा. यदि घोटाले की रकम मिल भी जाये तो भी राहुल के अनुसार रकम का ९५% सोनिया व उसके मातहत और उपकरण खा जायेंगे. लेकिन जनता को फिर भी कुछ नहीं मिलने वाला. उपरोक्त कानूनों से मै स्वयं पिछले २४ वर्षों से पीड़ित हूँ. देखें नीचे लिंक पर:-

 

http://www.aryavrt.com/nl-petition-transfered

 

सोनिया द्वारा मनोनीत राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ लेते है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण दे कर जजों व लोकसेवकों को जनता को लूटने के लिए नियुक्त किया गया है| जब तक जज तारीख पर १० रूपये भेंट लेते हैं, इलाहाबाद उच्च न्यायलय का रजिस्ट्रार तारीख देने के लिए ५०० रूपये और जब तक चौराहे पर ट्राफिक पुलिस वसूली करता है, इन्हें तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता जब तक सोनिया को हिस्सा मिलता हैं, उनको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन सोनिया अपने द्वारा मनोनीत राज्यपालों से संरक्षण दिलवाती है. हिस्सा न मिले तो सोनिया संरक्षण वापस ले लेती है.

अतएव भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहें तो संविधान के उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) को संविधान से हटाने, अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित करने और धारा १९७ को भी हटाने में हमारी सहायता करें.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

 

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ap tripathi,
Apr 2, 2011, 1:14 AM
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