Chunav14 Muj14W15



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 15, Apr 04-10, 2014. This issue is Chunav14 Muj14W15


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Chunav14 Muj14W15

चुनाव|

चुनाव धोखा है| चुनाव विश्व के ५३ देशो की मल्लिका एलिजाबेथ द्वारा मानवजाति को डायनासोर की भांति लुप्त करने के लिए कराया जा रहा है|

इंडिया स्वतंत्र नहीं आज भी ब्रिटिश उपनिवेश हैसाध्वी प्रज्ञाएलिजाबेथ की सरकार ने जिनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है, जो कैंसर से पीड़ित हैं और जो  अपने ८ सहयोगी सहित २००८ से बिना किसी आरोप के जेल में बंद हैं, ने स्वतंत्रता के उस युद्ध को प्रारम्भ कर दिया हैजिसे १५ अगस्त१९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. हम पर आरोप है कि हमने मस्जिदों में बम विष्फोट कराए हैं, जबकि हम जानना चाहते हैं कि मस्जिदों से किये जाने वाले ईशनिंदा व जातिसंहार का विरोध करना अपराध कैसे है?  

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मानवमात्र की हत्या का और भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) सम्पत्ति और उत्पादन के साधन लूटने का एलिजाबेथ को असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| गहन अध्ययन से पता चलता है कि मतदाता संविधानके अनुच्छेद २९(१), ३९(ग) व द०प्र०स० की धाराओं १९६ व १९७ को समाप्त व अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित नहीं कर सकते| (बाइबल, लूका १९:२७), (कुरान २:१९१) व भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को दिया गया उन(मतदाताओं) की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार नहीं बदल सकते| इसी भारतीय संविधान के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, विवश कर दिए गए हैं| इसलिए चुनाव धोखाधड़ी है|

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है| ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया का हर नागरिक व लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित व दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| पराधीन व बेबस लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| न्यायालय, (भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर), मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) और ईमामों को आप के कर के पैसे से वेतन दिलवाने के लिए, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), विवश कर दिए गए हैं| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). किसी को भी अज़ान द्वारा ईशनिंदा करने और मस्जिद से काफिरों के नरसंहार की शिक्षा देने वाले इमामों का विरोध करने का अधिकार नहीं है|

चुनाव द्वारा एलिजाबेथ के इंडियन उपनिवेश के मातहतों और मतदाताओं से स्वीकृति ली जा रही है कि उन को एलिज़ाबेथ की दासता स्वीकार है| वे उपनिवेश को स्वतंत्रता मानेंगे| उन को अपनी सम्पत्ति और जीने के अधिकार को छीने जाने पर आपत्ति नहीं है| उन लोगों को जिस विधि से भी हो नपुंसक (बाइबल, उत्पत्ति १७:११) बनाये जाने पर आपत्ति नहीं है| उन को वैदिक सनातन संस्कृति और गुरुकुलों को मिटने से आपत्ति नहीं है| उनको अज़ान, ईशनिंदा, नरसंहार और लव जिहाद से आपत्ति नहीं है| उनको आतताइयों को इंडिया में रखे जाने और विशेष सुविधाएँ दिए जाने पर आपत्ति नहीं है|

एलिजाबेथ इंडिया में एफडीआई लागू करा चुकी है| यदि अम्बानी, टाटा, बिड़ला आदि चुनाव का विरोध और गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में आर्यावर्त सरकार को गुप्त सहयोग नहीं देंगे तो उनका सब कुछ लुट जायेगा|

अमेरिका आज भी हैलेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गईएलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगीसबका मांस खाएगी और लहू पीयेगी| (बाइबलयूहन्ना ६:५३).  इंडिया तो रहेगालेकिन वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी न रहेंगेजिन्हें बचना हो वे आर्यावर्त सरकार को सहयोग देंयह युद्ध मात्र हम लड़ सकते हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया हैहम मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के अभियुक्त हैं| जिन लोगों को अपना जीवन, स्वतंत्रता, अपनी नारियों का और अपना सम्मान चाहिएवे हमे सहयोग दें| हम अब्रह्मी संस्कृतियों को नहीं रहने देंगे|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सूस) +९१ ९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/01902

 http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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