Chunav kisliye

चुनाव का नाटक बंद करे एलिजाबेथ!

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) है| इसकी शर्त है:-

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने और बनाये रखने की, जजों ने शपथ ली है, से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है? १९५० से आज तक इस मानव घाती भारतीय संविधान का किसने विरोध किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग भारतीय संविधान का उन्मूलन करेंगे.

उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार जिसके पास भी सम्पत्ति या पूँजी है, वह अपराधी है. टाटा व अम्बानी के पास सम्पत्ति व पूँजी इसलिए है कि वे जनता को लूट कर एलिजाबेथ तक हिस्सा पहुंचाते हैं.

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ... अनुच्छेद ३९(ग).

उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार नागरिक के पास धन का संकेन्द्रण नहीं होना चाहिए. जनता की सम्पत्ति लूटना लोकसेवक की संवैधानिक जिम्मेदारी है. लोकसेवक एलिजाबेथ के लिए जनता का धन छीनता है, जो अपराध ही नहीं है.

अतएव भ्रष्टाचार के लिए भारतीय संविधान उत्तर दायी है, लोकसेवक नहीं.

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग मान लेते हैं कि जन लोकपाल की नियुक्ति हो जाती है. बाबा रामदेव के आंदोलन से विदेशों का सारा काला धन इंडिया आ जाता है. सारी भ्रष्टाचार की रकम भी सरकारी खजाने में पहुंच जाती है. तो भी जनता को क्या मिलेगा? रोम राज्य के भावी महाराज राहुल के कथनानुसार सारी रकम का पांच प्रतिशत. शेष ९५% तो शासक के मातहत और उपकरण खा जायेंगे. स्पष्ट है कि इनकी गिद्ध दृष्टि लूट पर एकाधिकार प्राप्त करने पर गड़ी है. मानव मात्र के अधिकारों से इनका कोई सरोकार नहीं|

उपरोक्त अनुच्छेद के संकलन का फलितार्थ समझिए. सम्पत्ति का संकेन्द्रण तो हो लेकिन एलिजाबेथके पास. इसके गणित को समझिए. इस अनुच्छेद के अधीन नागरिक की सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ की है. लोक सेवक को नागरिक की सम्पत्ति को लूट कर एलिजाबेथ तक पहुचाने के लिए ही नियुक्त किया जाता है. नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोक सेवक को नागरिक को लूटना पड़ेगा. पीड़ित नागरिक को शिकायत करने का या शिकायत का संज्ञान लेने का अधिकार न तो पुलिस के पास है और न जज के पास.

लोकसेवक जनता को लूट रहे हैं| लोकसेवक के पास जब लूट का माल एकत्र हो जा रहा है तो उसके विरुद्ध अभियोग चला दिया जा रहा है| जो भी रकम उसके पास होती है, उसे लोकसेवक लूट कर एलिजाबेथ तक पहुंचा रहे हैं| मुख्य मंत्री मायावती अब तक अपने १५ मंत्रियों से त्यागपत्र ले चुकी है और फिर भी दूध की धुली है| वह जेल जरूर जायेगी लेकिन तब तक नहीं, जब तक एलिजाबेथ को हिस्सा देती रहेगी|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से लोकसेवकों की नियुक्ति जनता को लूटने के लिए की जाती है. लोकसेवक लोक यानी जनता को लूटता तो है, लेकिन कुत्ते की हड्डी की भांति उस लूट का उपभोग नहीं कर पाता. क्यों कि लूट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ से नियंत्रित किया गया है. जो लोकसेवक एलिजाबेथ को हिस्सा नहीं देता, उसे जेल भेज किया जाता है.

जब तक भारतीय संविधान, बाइबल और कुरान है, भ्रष्टाचार सदाचार है और नारियों का बलात्कार ईसाइयत और इस्लाम का नैतिक और लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार. लोक लेखा समिति को भ्रष्टाचार नहीं मिटाना है. उसे लूट में अपना हिस्सा चाहिए. जिसे भी नैतिक समझ होगी वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को हटाने की मांग करेगा. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को समाप्त करने की मांग करेगा.

जब तक भारतीय संविधान, दंप्रसंकीधारा१९७ और ईवीएम है तब तक चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकता| २६ जनवरी, १९५० से आजतक किसीने भी संविधान के अनुच्छेद ३१ के पुनर्स्थापन या अनुच्छेद ३९(ग) व दंप्रसंकीधारा१९७ के उन्मूलन की मांग नहीं की| उपरोक्त अनुच्छेदों व धाराने एलिजाबेथ को लूटका एकाधिकार दे दिया है. चुनावआयोग इसी भ्रष्टाचारी संविधान में निष्ठा की शपथ दिलाता है! इसे आप निष्पक्ष चुनाव कैसे कहेंगे?

जहां भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के मौलिक अधिकार को सांसदों और जजों ने मिलकर नागरिकों से लूट लिया और अनुच्छेद ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार नहीं देता, वहीं दंप्रसं की धारा १९७ ने सत्ता का केन्द्रीयकरण एलिजाबेथ के हाथों में कर दिया है. एलिजाबेथ के मनोनीत लुटेरों के विरुद्ध कहीं सुनवाई नहीं हो सकती| यह कहना गलत है कि कानून सबके लिए एक समान है अथवा कानून अपना कार्य करता है. एलिजाबेथ द्वारा दंप्रसं की धारा १९७ भयादोहन के लिए उपयोग में लाई जा रही है. पुलिस, नागरिक व जज सभी दंप्रसं की धारा १९७ से पीड़ित हैं. आज अपराधी वह है जिसे एलिजाबेथ अपराधी माने. यही कारण है कि जहां येदियुरप्पा और मधु कोड़ा जेल में हैं, वहीं मुख्य मंत्री मायावती किसानों, लोकसेवकों और यहाँ तक कि रामप्रसाद बिस्मिल जैसे उन हुतात्माओं तक की जमीनें लूट रही है, जिसके बलिदान के कारण वह मुख्य मंत्री बनी है. चुनाव द्वारा भी जनता एलिजाबेथ की लूट से मुक्ति नहीं पा सकती|

टीम अन्ना हों या योगगुरू अथवा पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी इनका आंदोलन जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए नहीं हो रहा है| सभी एलिजाबेथ के लूट के इसी एकाधिकार को जन लोकपाल को देना चाहते है. यदि भ्रष्टाचार मिटाना इनका लक्ष्य होता तो यह लोग भारतीयसंविधानकेअनुच्छेद३९(ग) व दंप्रसंकीधारा१९७ के उन्मूलन के लिए आंदोलन करते|

मीडिया के अनुसार स्वयं संचार मंत्री राजा ने अपने जमानत के लिए कभी आवेदन ही नहीं दिया. क्यों कि राजा जानते हैं कि वे ज्यों ही बाहर आयेंगे, उनकी लाश भी नहीं मिलेगी. २जी घोटाले में एलिजाबेथ के दोनों मातहत एवं उपकरण प्रधानमंत्री भी शामिल हैं और तत्कालीन वित्त मंत्री व वर्तमान गृह मंत्री चिदम्बरम भी. यह दंप्रसं की धारा १९७ का ही कमाल है कि न तो एलिजाबेथ के विरुद्ध अभियोग चल सकता है और न प्रधान मंत्री व गृह मंत्री के विरुद्ध! पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी के अनुसार २जी घोटाले का सबसे अधिक हिस्सा एलिजाबेथ के दोनों बहनों को मिला है.

इसी प्रकार मीडिया के अनुसार कलमाड़ी ने सवाल उठाया है कि राष्ट्रकुल खेलों में उन्होंने मात्र ५% धन खर्च किया और वे जेल में हैं और मुख्य मंत्री शीला दीक्षित ने ९५% खर्च किया फिर उनके विरुद्ध अभियोग क्यों नहीं चला?

उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष चुनाव होना तभी माना जा सकता है जब मुख्य मंत्री मायावती को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ दिया गया संरक्षण वापस ले एलिजाबेथ सरकार, मुख्य मंत्री मायावती पर हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल के ३.३ एकड़ भूमि घोटाले की गोरखपुर जिले के कैन्ट थाने में प्राथमिकी पंजीकृत हो और मेरी १.८८ एकड़ भूमि घोटाले की प्राथमिकी राजघाट थाने में दर्ज हो| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मेरे मामले में राजस्व अभिलेखों में जालसाजी सिद्ध की है| जिन राजस्व अभिलेखों के आधार पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मेरा कब्जा स्वीकार किया उन अभिलेखों से भी १९९४ में मेरा नाम हटा दिया गया है और इन भ्रष्टाचारों में एलिजाबेथ और राज्यपाल बनवारी की सहभागिता हैएलिजाबेथ, मायावती और बनवारी त्यागपत्र दें और हमारी भूमियां वापस हो| अन्यथा चुनाव ठगी है|

Comments