Chunav ka Virodh Muj14W012A



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 12A, Mar 14-20, 2014. This issue is Chunav ka Virodh Muj14W012A


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Chunav ka Virodh Muj14W012A

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| मतदाता चुनाव द्वारा भी ईसाइयत और इस्लाम से मुक्ति नहीं पा सकते| चर्चों व मस्जिदों से ईसाई व मुसलमान को अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| इन आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए रखा गया है|

कुटरचित, मृत्यु के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने ईसाई व मुसलमान को अपनी अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया है और इसके सहयोग से अब्रह्मी संस्कृतियां वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का अनवरत युद्ध लड़ रही हैं|

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति व राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| मतदाता भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग), कुरान (कुरान २:१९१) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) के हठधर्म से अब्रह्मी संस्कृतियों को प्राप्त अपनी हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार नहीं बदल सकते|

ईमाम मुसलमानों को आप के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| बदले में न्यायालय, (भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर), मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) और ईमामों को आप के कर के पैसे से वेतन दिलवाने के लिए, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), विवश कर दिए गए हैं| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६).

इतना ही नहीं मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| लेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है|

यानी कि वैदिक सनातन संस्कृति के बचने का कोई विकल्प तब तक नहीं है, जब तक भारतीय संविधान रद्द नहीं किया जाता और आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को धरती से समाप्त नहीं किया जाता|

जहां आर्यों ने सभी देशों और मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम के लोगों को अल्पसंख्यक घोषित कर वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति और मूल निवासियों को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियों आज तक विफल नहीं हुए| अमेरिका आज भी है, लेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| बेबीलोन, अफ्रीका और आष्ट्रेलिया आदि आज भी हैं लेकिन वहाँ के आदिवासी और उनकी संस्कृति मिट गई| इंडिया उपनिवेश है और इंडिया का हर नागरिक एलिजाबेथ की प्रजा! एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगी, जजों और लोकसेवकों का मांस खाएगी और लहू पीयेगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३).  इंडिया तो रहेगा| लेकिन द्रविणों सहित वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी न रहेंगे|

साध्वी प्रज्ञा, सरकार ने जिनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है, जो कैंसर से पीड़ित हैं और जो २००८ से बिना किसी आरोप के जेल में बंद हैं, ने स्वतंत्रता के उस युद्ध को प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. हम पर आरोप है कि हमने मस्जिदों में बम विष्फोट कराए हैं| यह चुनाव आप के स्वतंत्रता के युद्ध को असफल करने के लिए हो रहा है|

नागरिकों को अपने भले बुरे का निर्णय स्वयं करना है| नागरिक उपनिवेश और अब्रह्मी संस्कृतियों से अपनी रक्षा हेतु आर्यावर्त सरकार को सहयोग देंगे या अपनी स्वतंत्रता, संपत्ति और जीवन को मिटाना चाहेंगे|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

मार्च १७/०३/१४

Registration Number is : DARPG/E/2014/01428

  

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AyodhyaP Tripathi,
Mar 17, 2014, 12:04 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Mar 17, 2014, 12:01 AM
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