Celibacy of NMO

आप को मैं यह पत्र इस क्षमायाचना याचना के साथ लिख रहा हूँ कि यद्यपि मैं विकास की मुंहताज, लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से दूषित अंग्रेजी, जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ| क्योंकि मानवमात्र की लिपि, भाषा व ज्ञान-विज्ञान उसके चक्रों व ब्रह्मकमल (सहस्रार) में परब्रह्म जन्म के साथ ही दे देता है| वेद परब्रह्म का संविधान है| बिना ब्रह्मज्ञान के इसे समझा नहीं जा सकता| बिना ब्रह्मचर्य (वीर्य रक्षा) के ब्रह्मज्ञान नहीं मिल सकता और बिना गाय के दूध सेवन और निःशुल्क शिक्षा के केन्द्र गुरुकुल में योग्य आचार्य से शिक्षा ग्रहण के कोई ब्रह्मचारी नहीं बन सकता|

विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है| यह निर्विवाद रूप से स्थापित है कि संसार के अब तक के पुस्तकालयों में एकमात्र ज्ञान-विज्ञान के कोष ऋग्वेद से प्राचीन कोई साहित्य नहीं है, जो संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में लिखा गया है| पाणिनी के अष्टाध्यायी में आज तकएक अक्षर भी बदला  जा सका| ठीक इसके विपरीत अंग्रेजी और उर्दू लिपियों में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ हैं| तमाम रद्दोबदल के बाद भी ठीक नहीं होतीं! संगणक (कम्प्यूटर) विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं कि संगणन के लिये संस्कृत सर्वोत्तम भाषा है|

मेरी कामना है कि मानवता के हित में इस सनातन लिपि और वैज्ञानिक संस्कृत भाषा का उद्भव हो|

अब आता हूँ, मुख्य विषय पर,

राउल विन्ची उर्फ राहुल गाँधी और उनकी आका एलिजाबेथ कथोलिक ईसाई हैं| यानी सभी ईसा की भेंड़| उन्हें अर्मगेद्दन द्वारा सभी मजहबों को मिटा कर केवल ईसा की पूजा करानी है| जो बिना मानवमात्र को नपुंसक बनाये सम्भव नहीं है|

मनुष्य को जन्म के साथ ही प्राप्त, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। इसका जितना अधिक संचय होगा मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज,तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/veerya-1

 

अब्रह्मी संस्कृतियां खतना, कामुक सुख, समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कौटुम्बिक व्यभिचार आदि को संरक्षण देकर संप्रभु मनुष्य को वीर्यहीन कर दास बनाती हैं और वैदिक सनातन संस्कृति ब्रह्मचारी यानी अहम् ब्रह्मास्मियानी संप्रभु मनुष्य। आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो,जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही अहम् ब्रह्मास्मिका अन्यतम तात्पर्य है।

निर्णय ईसाई व मुसलमान सहित मानवमात्र को करना है कि वह ईश्वर बनना चाहता है अथवा शासकों व पुरोहितों का दास? किसान सांड़ को वीर्यहीन कर दास बना लेता है और (अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं के प्रयोग द्वारा वीर्यहीन कर मनुष्य को दास बनाती हैं| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, कौटुम्बिक व्यभिचार, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक विवाह सम्बन्ध को संरक्षण देना है| संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२). विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. अब्रह्मी संस्कृतियां वीर्यहीन कर मानवमात्र को दास बना चुकी हैं

क्या आप को ज्ञात है कि चाणक्य ने विवाह नहीं किया था? चाणक्य को चंद्रगुप्त को चक्रवर्ती सम्राट बनाने में उनके ब्रह्मचर्य का प्रभाव था और नमो को आज के शिखर पर पहुँचने का प्रभाव भी उनका और उनकी पत्नी का ब्रह्मचर्य पालन ही है|

एक ओर वेश्यावृत्ति को संरक्षण देने वाली अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं और दूसरी ओर सती के महिमा मंडन को अपराध घोषित करने वाला एलिजाबेथ के उपनिवेश का अधिनियम. किसे पसंद करेंगे आप?

THE COMMISSION OF SATI (PREVENTION) ACT, 1987

एक ओर वीर्यवान ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुल हैं और दूसरी ओर वीर्यहीन बनाने वाले मैकाले के यौनशिक्षा स्कूल और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले मकतब| मनुष्य किसे चाहेगा?

एक ओर वैदिक सनातन संस्कृति के वेद हैं, जो बताते हैं कि प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको जन्म के साथ ही प्राप्त वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है|

और दूसरी ओर अब्रह्मी संस्कृतियाँ जो खतना कर मानवमात्र को यौन अपराधी और नपुंसक बनाती हैं| किसे पसंद करेंगे आप?

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar 

http://www.aryavrt.com/muj13w51a-yaun-shoshan

नमो को यदि मानवजाति पर शासन करना हो तो मनुष्य को ईश्वर बनाने वाले वैदिक सनातन संस्कृति के गुरुकुलों को पुनर्जीवित करें|

APT  


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