Bio-Data

मैं एक २७ गांवों के जमींदार के यहाँ पैदा हुआ था| तब मेरे पूर्वज विक्टोरिया का नमक खाते थे और पूरे अँगरेज़ थे| अँगरेज़ गए और जमीन्दारी गई और परिवार गाँधी भक्त हो गया| मैं भी उन्हीं में था| लेकिन दुबई में १२ जनवरी, १९९१ को मेरी भगवत गीता फाड़ी और जलाई गई - तभी से मेरी अब्रह्मी संस्कृतियों से शत्रुता है|

धरती पर अब्रह्मी संस्कृतियों के रहने से वैदिक सनातन धर्म व आप के जीवन को खतरा है| क्यों कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का एक फंदा (बूबी ट्रैप Booby trap) है| अतः आर्यावर्त सरकार के पास भारतीय दंड संहिता की धारा ९७, १०२ व १०५ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| आप सहयोग दें तो आर्यावर्त सरकार ईसाइयत व इस्लाम और ईसाई व मुसलमान इंडिया में नहीं रहने देगी|

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. इस प्रकार अब्रह्मी संस्कृतियाँ प्रत्येक मनुष्य को बलिपशु बनाती हैं.

उपनिवेशवासियों से स्वतंत्रता का वादा किया गया था| उपनिवेशवासियों को एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने में लज्जा क्यों नहीं आती?

ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८ के अंतर्गत हर इंडियन, चाहे मुसलमान या ईसाई ही क्यों न हो, नागरिकता विहीन बर्तानियों की प्रजा है| क्योंकि उपनिवेशवासी बिना पारपत्र एवं वीसा के ब्रिटेन में नहीं घुस सकता. 

लेकिन उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. यानी कि आप की मृत्यु हर हाल में पक्की! विरोध करें तो फांसी होगी और न करें तो ईसाई व मुसलमान कत्ल कर देंगे.

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भारतीय संविधान ने आप को उपासना की स्वतंत्रता दी है| लेकिन जो बपतिस्मा नहीं लेगा उसे एलिजाबेथ नर्क में भेजेगी और ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं| स्वयं अल्लाह के दास हैं| आप को दास बनाने के लिए ललकारते हैं| अपने इष्ट देवता संस्कृति का अपमान सहन करते आप को लज्जा क्यों नहीं आती? आप को धोखा दिया जा रहा है.

आर्यावर्त सरकार उपनिवेश के विरोध में आप का सहयोग चाहती है. लेकिन आप आतंक की साया में जीवित बलिपशु हैं. क्या गुप्त सहयोग कर सकते हैं?

अभी भी समय है, बचना हो तो आर्यावर्त सरकार की शरण में आयें|


हम अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधी हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| काबा हमारी है| अज़ान गाली है| कुरान सारी दुनियां में फुंक रही है| हम अज़ान यानी ईशनिंदा और जातिसंहार से मुक्ति के लिए इस्लाम का उन्मूलन करने के लिए आप का सहयोग चाहते हैं| हम धरती पर एक भी मस्जिद नहीं रहने देना चाहते| क्यों कि मस्जिदों से ईमाम मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं| हमारी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को, भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन, आत्म रक्षा के अधिकार के प्रयोग के लिए दंडित किया जा रहा है| हम साध्वी की मुक्ति के लिए आप से सहयोग चाहते हैं|

मैं मालेगांव मस्जिद बम कांड सहित ५० अभियोगों में अभियुक्त रहा हूँ| ४२ बार जेल गया हूँ| साध्वी प्रज्ञा सहित मेरे ९ सहयोगी बिना आरोप सन २००८ से जेलों में बंद हैं| लेकिन कोई भी मनुष्य कत्ल करने और सम्पत्ति के अधिकार छीनने वाली अब्रह्मी संस्कृतियों और संविधान पर ऊँगली उठाने का साहस नहीं करता है| हमने साहस किया है और हम उन्हीं लोगों द्वारा दंडित हो रहे हैं जिनके लिए हम लड़ रहे हैं|फिर भी आज तक ईसाइयत और इस्लाम को नहीं मिटा पाया. 

चूंकि अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो जजों द्वरा निरस्त कर दी गई| मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था| जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया| बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ| अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं| मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, ०६-०२-२०१३ को निरस्त हो गया| इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है| मैं अज़ान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ| ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता| (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है| (मनुस्मृति ८:३०८). हम् भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को निरस्त करना चाहते हैं| हम मानव जाति को बचाना व विदेशी बैंकों में जमा देश का धन वापस लाना चाहते हैं और एलिजाबेथ राज्यपालों के माध्यम से आप को लूट रही व मिटा रही है| किसके साथ हैं आप?

पीठ पीछे युद्ध या हमले की वैदिक सनातन धर्म अनुमति नहीं देता| अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया से निकालें| एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिसमें मैकाले को एक भी चोर या भिखारी नहीं मिला और दूसरी ओर ब्रिटिश इंडियन उपनिवेश, जिसमे सभी चोर और भिखारी हैं|

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिस व्यवस्था में महाराज अश्वपतिने कहा था

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

दूसरी ओर ब्रिटिश उपनिवेश है, जिसमें कुमारी माँ मरियम वन्दनीय है और मरियम की अवैध सन्तान ईसा ईश्वर का एकमात्र पुत्र, जो स्वयं को शूली पर चढ़ने से न बचा सका, सबका मुक्तिदाता है| जिसमे कोई नारी सुरक्षित नहीं| अब्रह्मी संस्कृतियों ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६).

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिसके राम चरित मानस की पंक्तियाँ उद्धृत कर रहा हूँ,

“अनुज बधू भगिनी सुत नारी| सुनु सठ कन्या सम ए चारी|

“इन्हहिं कुदृष्टि बिलोकइ जोई| ताहि बधें कछु पाप न होई||

राम चरित मानस, किष्किन्धाकाण्ड; ;

अर्थ: [श्री रामजी ने कहा] हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्रवधू और कन्या ए चारों समान हैं| इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता|

और दूसरी ओर अब्रह्मी संस्कृतियां जिनमें बेटी व पुत्रवधू से विवाह की छूट है| कुमारी माएं प्रायः घर घर मिलती हैं|

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वैदिक सनातन संस्कृति की मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि आप का स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया| लेकिन यदि आप का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया| इसके विपरीत भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयतइस्लामसमाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ईसाइयतइस्लामसमाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता हैउसके लिए लूटहत्याबलात्कारदूसरों को दास बनानागाय खानाआदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाताअपितु वह जीविकामुक्तिस्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है। सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४)(कुरान ८:१४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१), (अब २०.६.१९७९ से लुप्त) व ३९ग]. अब्रह्मी संस्कृतियों में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिएदार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए८:३९. आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं हैकिसी भी नारी का बलात्कार कीजिए| (बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं - बेटी (बाइबल १कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान३३:३७-३८) से निकाह कीजिएअल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता हैकिसी का भी उपासना स्थल तोड़िये[(बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरानबनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबलव्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१४१ व ६९)]. किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है। जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइएन बने तो कत्ल कर दीजिए(बाइबललूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) – जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआरकलकत्ता१९८५प१०४). अज़ान द्वारा ईशनिंदा कीजिये और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दीजिए| बदले में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी खजाने से वेतन देने का आदेश दे रखा है| (एआईआरएससी१९९३प० २०८६). इतना ही नहीं हज अनुदान के लिए भी कानून बना रखा है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकारhttp://indiankanoon.org/doc/709044/). इन मूर्खों और दासों के लिए वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबलउत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण मेंइतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वाराजजों सेउत्पीड़ित कराया जा रहा है

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अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६० व १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ द्वारा जिन अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं|

अब्रह्मी संस्कृतियों को नष्ट कर के ही आप जीवित बच पाएंगे| वीर्यवान बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों को पुनर्जीवित कर आर्य अब्रह्मी संस्कृतियों को मात्र पांच वर्षो में मिटा सकते हैं| क्यों कि यदि गैस चैंबरों में मरने के लिए विवश खतना कराए हुए नपुंसक यहूदी मेमनों को ज्वलंत शेरों में मात्र ५ वर्ष में बदला जा सकता है तो वीर्यवान बनाने वाले गुरुकुलों में शिक्षित आर्यों के लिए तो अब्रह्मी संस्कृतियों' को मिटाने के लिए कहीं करोड़ों गुना अधिक उपयुक्त परिस्थितियां (आज भी विश्व १ में अरब आर्य) आज भी हैं|

यह न भूलें कि अब्रह्मी संस्कृतियों से उनके अनुयायी स्वयं पीड़ित हैं| वे स्वयं एक दूसरे का संहार कर रहे हैं| उनके तथाकथित पैगम्बरों ने उनके जीवनी शक्ति वीर्य को उनसे छीन कर उनको दास बना रखा है| उन्हें नहीं मालूम कि प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| मनुष्य को जन्म के साथ ही प्राप्त वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु  है| वीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों और शक्तिवान का दास ही बन सकता है, स्वतन्त्र नहीं रह सकता| वीर्यहीन व्यक्ति का मानवाधिकार नहीं होता| वीर्यहीन मनुष्य रोगग्रसित चलता फिरता मुर्दा और दास है| भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है| चरित्र, दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करिये|

कोयला जब अत्यधिक दबाव और ताप में पड़ जाता हैतो हीरा बन जाता है और सोने को जितना जलाया जाता हैवह उतना ही शुद्ध हो जाता है|

जो उपलब्धि इस्लाम ई० स० ७१२ से ई० स० १८३५ तक अर्जित न कर सका, गुरुकुल मिटा कर उससे अधिक ईसाइयत ने मात्र ई० स० १८५७ से ई० स० १९०५ के बीच अर्जित कर लिया| और जो सोनिया ने अपने १० वर्षों के काल में अर्जित किया है, उसे तो मैकाले सोच भी नहीं सका| बेचारा समलैंगिक सम्बन्ध को अपराध घोषित कर दुनिया छोड़ गया|

जेफरसन के घोषणापत्र"हम इन सिद्धांतों को स्वयंसिद्ध मानते हैं कि सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं और उन्हें अपने स्रष्टा द्वारा कुछ अविच्छिन्न अधिकार मिले हैं। जीवनस्वतंत्रता और सुख की खोज इन्हीं अधिकारों में है।“ का हम सम्मान करते हैं लेकिन वेदों के सिद्धांत, मानवमात्र को जन्म के साथ ही प्राप्त वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमानसर्वज्ञसर्व-व्याप्तवह शक्ति है जिससे सब कुछयहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। मल ही बल है और वीर्य ही जीवनवीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दातास्वतंत्रतापरमानंदआरोग्यओजतेज और स्मृति का जनक है|” का हम तिरष्कार करते हैं|

क्या आप अपनी पत्नी, बहन या कन्या को व्यभिचार करने से विधिवत रोक सकते हैं? आप ने कठोरता की तो? आप घरेलू हिंसा अधिनियम, २००५ के अंतर्गत जेल में होंगे| वह भी पड़ोसी के एक फोन पर|

विकल्प मात्र उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्ध है| साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. वैदिक सनातन संस्कृति के बचने के हर मार्ग अवरुद्ध कर दिये गए हैं| आप को वीर्यवान बनाने के शिक्षा केन्द्र गुरुकुलों को नष्ट कर दिया गया| आप आत्मरक्षा के लिये शस्त्र भी नहीं रख सकते| यदि आप स्वयं का एवं मानव जाति का भला करना चाहते हों तो गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करने, प्रजा को सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देने और वैदिक सनातन धर्म की आधार शिलाओं गायत्री, गीता, गंगा और गो की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिये| हम बैल आधारित खेती और गो वंश की वृद्धि को प्रोत्साहित करेंगे| इन को मिटाया जा रहा है| हम पुनः इंडिया को सोने की चिड़िया भारत बना देंगे|

एक ओर ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर (अ)ब्रह्मिक संस्कृति| ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति वीर्यरक्षा यानी मानव के आरोग्य, ओज, तेज, स्मृति और परमानंद की प्राप्ति के लिये निःशुल्क गुरुकुल चलाती थी और (अ)ब्रह्मिक संस्कृति महँगी शिक्षा व्यवस्था लाद कर खतना और यौनशिक्षा द्वारा मानवमात्र को वीर्यहीन कर (किसान की भांति सांड़ से बैल बना कर) मानवमात्र को दास बना रही हैं|

पहले उपनिवेश से मुक्ति लीजिए| यदि न मिले तो शक्ति अर्जित करिये| इसके लिए गौ, आचार्य और गुरुकुल चाहिए| अतएव यौनशिक्षा देने वाले मैकाले के स्कूलों का बहिष्कार कीजिए| अपने संतानों को संस्कार देकर वीर्यवान ब्रह्मचारी बनाइए| अन्याय करने वाले से बड़ा अपराधी अन्याय को सहन करने वाला होता है|

शारीरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत वीर्य है| सन १८३५ तक हमारे यहाँ ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य था| तभी तक भारत सोने की चिड़िया बना रहा| ब्रह्मचर्य के शिक्षा केन्द्र गुरुकुल और शिक्षक दोनों समाज पर आश्रित थे| राज्य किसी का हो विद्या निर्बाध गति से चलती रहती थी| वह भी निःशुल्क| किसान को सांड़ को दास बना कर खेती के योग्य बैल बनाने के लिए सांड़ का बंध्याकरण करना पड़ता हैलेकिन आप गुरुकुल का ब्रह्मचारी बनाने के स्थान पर महंगे स्कूलों में अपने बच्चों को यौन शिक्षा दिला रहे हैं| ताकि वह नपुंसक बन कर एलिजाबेथ की दासता करे|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी 

अप्रैल, २१,२०१४.


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