Bio-Data

मैं एक २७ गांवों के जमींदार के यहाँ पैदा हुआ था| तब मेरे पूर्वज विक्टोरिया का नमक खाते थे और पूरे अँगरेज़ थे| अँगरेज़ गए और जमीन्दारी गई और परिवार गाँधी भक्त हो गया| मैं भी उन्हीं में था| लेकिन दुबई में १२ जनवरी, १९९१ को मेरी भगवत गीता फाड़ी और जलाई गई - तभी से मेरी अब्रह्मी संस्कृतियों से शत्रुता है|

धरती पर अब्रह्मी संस्कृतियों के रहने से वैदिक सनातन धर्म व आप के जीवन को खतरा है| क्यों कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का एक फंदा (बूबी ट्रैप Booby trap) है| अतः आर्यावर्त सरकार के पास भारतीय दंड संहिता की धारा ९७, १०२ व १०५ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| आप सहयोग दें तो आर्यावर्त सरकार ईसाइयत व इस्लाम और ईसाई व मुसलमान इंडिया में नहीं रहने देगी|

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. इस प्रकार अब्रह्मी संस्कृतियाँ प्रत्येक मनुष्य को बलिपशु बनाती हैं.

उपनिवेशवासियों से स्वतंत्रता का वादा किया गया था| उपनिवेशवासियों को एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने में लज्जा क्यों नहीं आती?

ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८ के अंतर्गत हर इंडियन, चाहे मुसलमान या ईसाई ही क्यों न हो, नागरिकता विहीन बर्तानियों की प्रजा है| क्योंकि उपनिवेशवासी बिना पारपत्र एवं वीसा के ब्रिटेन में नहीं घुस सकता. 

लेकिन उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. यानी कि आप की मृत्यु हर हाल में पक्की! विरोध करें तो फांसी होगी और न करें तो ईसाई व मुसलमान कत्ल कर देंगे.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-snvidhan

भारतीय संविधान ने आप को उपासना की स्वतंत्रता दी है| लेकिन जो बपतिस्मा नहीं लेगा उसे एलिजाबेथ नर्क में भेजेगी और ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं| स्वयं अल्लाह के दास हैं| आप को दास बनाने के लिए ललकारते हैं| अपने इष्ट देवता संस्कृति का अपमान सहन करते आप को लज्जा क्यों नहीं आती? आप को धोखा दिया जा रहा है.

आर्यावर्त सरकार उपनिवेश के विरोध में आप का सहयोग चाहती है. लेकिन आप आतंक की साया में जीवित बलिपशु हैं. क्या गुप्त सहयोग कर सकते हैं?

अभी भी समय है, बचना हो तो आर्यावर्त सरकार की शरण में आयें|

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कौन हैं वे जिन्हें गांधी ने इंडिया में रोका? उनका लक्ष्य और उनकी उपलब्धियां क्या हैं? उनको पंथनिरपेक्ष यानी सेकुलर, सर्वधर्मसमभाववादी व गंगा जमुनी संस्कृति का अंग मानने का आधार क्या है?

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

क्या आप ने आतताई ईसाइयत और इस्लाम को पंथनिरपेक्ष घोषित किये जाने और इंडिया में रोके जाने का विरोध किया?

क्योंकि सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष और अल्पसंख्यक झूठे शब्द हैं.

ईसाई व मुसलमान, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं, अल्पसंख्यक कैसे हैं?

मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है, वे आतताई क्यों नहीं हैं?

क्योंकि ईसा के आदेश से ईसाई अपनी बेटी से विवाह करते हैं| (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६)

जेहोवा ने किसी भी ईसाई को धरती के किसी नारी का उसके पुरुषों के आँखों के सामने, बलात्कार का अधिकार दिया है| (बाइबल, याशयाह १३:१६). (बाइबल, लूका २४:४४) के साथ पठित.

जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते, उसका घात करने का प्रत्येक ईसाई को अधिकार है. (बाइबल, लूका १९:२७). भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाई को अपनी इस संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

जो भी बपतिस्मा नहीं लेता, संसार को पापस्थल और सबको पापी स्वीकार नहीं करता, उसे नर्क में भेजने का ईसा का वचन है.

जो लोग यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा नहीं लेते तो उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा और वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे और यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा ले लेंगे तो स्वर्ग जायेंगे और ईसा के साथ सदा रहेंगे| उनकी हत्या करना ईसाई के स्वर्ग प्राप्ति का सुगम मार्ग है.

पैगम्बरों ने वीर्यहीन कर मनुष्य के शत्रु और मित्र को पहचानने का विवेक नष्ट कर दिया है. उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का गांधी ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया. उपनिवेशवासियों का देश उपनिवेशवासियों को ९० वर्षों के लिए अंग्रेजों द्वारा किरायेदारी पर दिलवा गया. मानवमात्र की हत्या करना, जिनकी संस्कृति है, उनको पंथनिरपेक्ष घोषित कर गांधी ने रोक लिया. उनको गोमांस खाने की पूरी छूट दी. उपनिवेशवासी आज भी इसी गांधी का महिमामंडन कर रहे हैं और उपनिवेश विरोधियों को नष्ट करने की मूर्खता कर रहे हैं.

अज़ान को पंथनिरपेक्ष पूजा मानने की भूल कर रहे हैं.

सत्ता के हस्तानान्तरण की पहली शर्त ही इस्लाम का दोहन है. इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रहीइसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकतेइसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैंहिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है| अंग्रेजों ने पाक पिता गांधी द्वारा वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए मुसलमानों को इंडिया में रखवाया है.

यदि कोई काफ़िर २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी का विरोध कर दे तो उसका सर्वनाश करने के लिए प्रजातंत्र के चारो स्तम्भ तत्पर हैं. अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं. काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार हैजो काफ़िर इस कठोर सच्चाई का विरोध करेगा, उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी जायेगी. उसका नार्को टेस्ट किया जायेगा. उसे जेल में जहर दिया जायेगा, ताकि वह घुट घुट कर मरे. हमारी साध्वी प्रज्ञा के साथ यही किया गया है. उसके मुंह में गोमांस ठूसा जायेगा. हमारे जगतगुरु एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ के साथ यही किया गया. सभी जज जानते हैं. किसी जज के पास न्याय करने का साहस ही नहीं है?

मस्जिदों से प्रतिदिन ५ बार नियमित रूप से और नियमित समय पर लाउडस्पीकर पर अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण किया जाता है और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं| काफिरों को अज़ान और कलिमाद्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|”

अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं. कोई जज कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

जिस मूसा के मानसपुत्र जेहोवा ने अपने अनुयायियों को मूर्ख बनाया (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और वीर्यहीन कर दिया, (बाइबल, उत्पत्ति १७:११), वह एलिजाबेथ का सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष भगवान है! जो जेहोवा को भगवान नहीं मानता, पद, प्रभुता और पेट के लोभ में उसे नष्ट करना लोकसेवक की विवशता है.

 ‘जो बपतिस्मा नहीं लेते, उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा, वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे|कहने वाले सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष कैसे है?

इस्लाम ने ईश्वर को अपूज्य घोषित कर दिया है| (अज़ान). मात्र अल्लाह पूज्य है’, (अज़ान, कुरान ३:१९), कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? क्योंकि कुरान के अनुसार दीन तो अल्लाह की दृष्टि में मात्र इस्लाम ही है| (कुरान ३:१९)और जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...” (कुरान ३:८५).

मस्जिदों से ई० सन ६३२ से ही होने वाली अज़ान यानी ईशनिंदा और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? अज़ान और खुत्बे साम्प्रदायिक सद्भाव कैसे लाते हैं?

मात्र अल्लाह पूज्य है और मात्र ईसा ही धरती का राजा हो सकता है, कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? हमें एलिजाबेथ की दासता के लिए विवश क्यों किया जा रहा है?

कृपया मुझे बताएं कि एलिजाबेथ की सरकार अज़ान लगाने वाले ईमामों के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत अभियोग चलाने की अनुमति कब देगी? काफिरों के आस्था का अपमान कब बंद होगा? काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे कब बंद होंगे?

काफ़िर मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे क्यों होने दे रहे हैं?

जी हां काफ़िर कम्युनल हैं. सेकुलर मुसलमान और ईसाई काफिरों के आस पास क्यों रहते हैं?

आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता| उसका कोई रंग नहीं होता. ऐसा प्रचारित किया जाता है| सितम्बर २०१३ पाकिस्तान में चरमपंथियों ने चर्च पर हमला कर सैकड़ों लोगों को मार दिया, केन्या (नेरोबी) में अलजवाहर के इशारे पर (मुंबई हमले के तर्ज पर ) एक शापिंग मॉल में लोगों को मुस्लिम आतंकवादियों ने बंधक बनाया और उनका धर्म पूछ-पूछ कर हत्याएं कीं, कश्मीर घाटी से हिंदुओं का पलायन करा कर पहले ही खाली कराया जा चुका है| फिर भी हमारे सेकुलर नेता शुतुरमुर्ग की तरह सच्चाई से मुँह छुपा कर यह यान कब तक देते रहेंगे कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता| क्या इस कथन में कोई सच्चाई है? क्या यही कारण नहीं है कि आतंकवाद से लड़ने के सभी प्रयास असफल रहे हैं? जब तक समस्या की जड़, उसकी मानसिकता और स्रोत पर प्रहार नहीं होगा - सफलता नहीं

एलिजाबेथ सरकार ने अपने जहरीले दांत इंडिया में गाड़ दिए हैं| जब तक मुसलमान मंदिर तोड़ रहे हैं, कश्मीरी हिंदुओं को उजाड़ रहे हैं, काफिरों की सम्पत्तियों और नारियों का उपभोग रहे हैं, काफिरों के ईष्ट देवों और वैदिक सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं. अज़ान लगा रहे व नमाज़ पढ़ रहे हैं, भारतीय इस्राएली सैनिकों पर हमले कर रहे हैं और इस्राएल कश्मीर मांग रहे हैं, एलिजाबेथ उसे जिहाद मान रही है, लेकिन ज्यों ही मुसलमानों ने विश्व व्यापार केन्द्र और लन्दन की यातायात सेवाओं पर हमला किया, ईसाई नारियां लूटीं, अमेरिकी सैनिकों पर हमले किये और अमेरिका और ब्रिटेन माँगा, वे ही मुसलमान आतंकवादी हो गए| कश्मीर इस्राएल पर समझौता करने के लिए अमेरिका और राष्ट्रसंघ तत्पर है, अल्लाह ने सारी दुनिया मुसलमानों को दे दी है| अल्लाह ईसाइयों का सेकुलर भगवान भी है, फिर ईसाई मुसलमानों को अमेरिका क्यों नहीं दे देते?

सेकुलर कौन है?

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| फिर अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी सेकुलर कैसे हैं?

अज़ान में भारतीय संविधान की उद्देशिका में उल्लिखित काफ़िर के उपासना की स्वतंत्रता कहाँ है? तथाकथित धर्म/पंथनिरपेक्षता कहाँ है? सर्वधर्मसमभाव कहाँ है? गंगा-जमुनी संस्कृति कहाँ है?

मै या किसी भी धर्म के अनुयायी ऐसा सोच भी हीं सकते. मै अपने धर्म के प्रति उदासीन प्रयास करने पर भी नही हो सकता - मै किसी दूसरे धर्म के प्रति भी उदासीन नही हो सकता -- क्योकि वे हमारे समाज के ही अंग है -- उनको व्यवधान हो, इसलिये उनके प्रति उदासीन हीं हो सकता -- फ़िर धर्म-निरपेक्षता कैसे संभव है? देश भी धर्म-निरपेक्ष हीं हो सकता. क्योकि सब धर्मो के लिये उचित व्यवस्था करना देश का कर्तव्य है -- देश उदासीन हीं हो सकता -- फ़िर सच क्या है? गोल मोल बात करने से ग़लत सही नही हो सकता -- धर्म-निरपेक्षता संभव हीं है -- इसलिये मै कहता हूँ कि भारतीय संविधान ग़लत है.

रितुराज जी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५ का उल्लेख किया है. प्रश्न संविधान की ग़लत व्याख्या से संबंधित है. भारतीय संविधान में समानता की बात लिखी है -- आरक्षण समानता के विरुद्ध है. वह संवैधानिक कैसे हो गया? मजे की बात है कि वह भी संवैधानिक है -- अर्थात सविधान में कुछ ऐसा है कि असमानता संवैधानिक है यदि असमांता संवैधानिक है तो अनुच्छेद १५ दिखावा है मात्र किताबी बात है. इसलिये मैंने कहा कि भारतीय संविधान ही ग़लत है ? आगे आपने धर्म - निरपेक्ष शब्द का उपयोग किया -- विनम्रता पूर्वक कहुंगा कि धर्म्-निरपेक्ष का अर्थ सर्वधर्मसमभाव नही होता -- इंडिया के किसी भी भाषा-बोली में निरपेक्ष का अर्थ सम भाव नही होता. निरपेक्ष का अर्थ है किसी और की कोई अपेक्षा कराने वाला -- धर्म-निरपेक्ष का मतलब हुआ हमारा संविधान किसी धर्म से कोई अपेक्षा नही करता-निरपेक्ष का अर्थ अपने ऊपर अवलम्बित --किसी के सहारे की जरुरत नही -- आशा तृष्णा से मुक्त उदासीन -- क्या मै अपने धर्म से उदासीन हो जाऊ? क्या मै धर्म से कोई अपेक्षा करु? मै या किसी भी धर्म के अनुयायी को संविधान संशोधन के लिये संसद का सदस्य बनना पड़ता है. पर वहाँ पर हमने कुछ बंदरो को बैठा रखा है, जो ख़ुद तो कुछ करते नही है और दूसरों को करने भी नही देते है. संविधान ने विधायिका को चुनने का हमे एक विवेकपूर्ण काम दिया पर हमने उसे पूरा करने की बजाय मुँह मोड़कर बैठ गए और अब दोष संविधान पर डाल रहे है जिसका कभी हमने भी नही पढ़ा. अब जब कर्म किए है तो फल भी भोगने पड़ेंगे. आज आप अपने आस पास नजर दौड़ा कर देखेगे तो कितने लोग अपने कर्तव्य का पालन करते है|

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हम अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधी हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| काबा हमारी है| अज़ान गाली है| कुरान सारी दुनियां में फुंक रही है| हम अज़ान यानी ईशनिंदा और जातिसंहार से मुक्ति के लिए इस्लाम का उन्मूलन करने के लिए आप का सहयोग चाहते हैं| हम धरती पर एक भी मस्जिद नहीं रहने देना चाहते| क्यों कि मस्जिदों से ईमाम मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं| हमारी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को, भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन, आत्म रक्षा के अधिकार के प्रयोग के लिए दंडित किया जा रहा है| हम साध्वी की मुक्ति के लिए आप से सहयोग चाहते हैं|

मैं मालेगांव मस्जिद बम कांड सहित ५० अभियोगों में अभियुक्त रहा हूँ| ४२ बार जेल गया हूँ| साध्वी प्रज्ञा सहित मेरे ९ सहयोगी बिना आरोप सन २००८ से जेलों में बंद हैं| लेकिन कोई भी मनुष्य कत्ल करने और सम्पत्ति के अधिकार छीनने वाली अब्रह्मी संस्कृतियों और संविधान पर ऊँगली उठाने का साहस नहीं करता है| हमने साहस किया है और हम उन्हीं लोगों द्वारा दंडित हो रहे हैं जिनके लिए हम लड़ रहे हैं|फिर भी आज तक ईसाइयत और इस्लाम को नहीं मिटा पाया. 

चूंकि अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो जजों द्वरा निरस्त कर दी गई| मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था| जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया| बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ| अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं| मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, ०६-०२-२०१३ को निरस्त हो गया| इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है| मैं अज़ान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ| ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता| (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है| (मनुस्मृति ८:३०८). हम् भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को निरस्त करना चाहते हैं| हम मानव जाति को बचाना व विदेशी बैंकों में जमा देश का धन वापस लाना चाहते हैं और एलिजाबेथ राज्यपालों के माध्यम से आप को लूट रही व मिटा रही है| किसके साथ हैं आप?

पीठ पीछे युद्ध या हमले की वैदिक सनातन धर्म अनुमति नहीं देता| अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया से निकालें| एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिसमें मैकाले को एक भी चोर या भिखारी नहीं मिला और दूसरी ओर ब्रिटिश इंडियन उपनिवेश, जिसमे सभी चोर और भिखारी हैं|

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिस व्यवस्था में महाराज अश्वपतिने कहा था

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

दूसरी ओर ब्रिटिश उपनिवेश है, जिसमें कुमारी माँ मरियम वन्दनीय है और मरियम की अवैध सन्तान ईसा ईश्वर का एकमात्र पुत्र, जो स्वयं को शूली पर चढ़ने से न बचा सका, सबका मुक्तिदाता है| जिसमे कोई नारी सुरक्षित नहीं| अब्रह्मी संस्कृतियों ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६).

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिसके राम चरित मानस की पंक्तियाँ उद्धृत कर रहा हूँ,

“अनुज बधू भगिनी सुत नारी| सुनु सठ कन्या सम ए चारी|

“इन्हहिं कुदृष्टि बिलोकइ जोई| ताहि बधें कछु पाप न होई||

राम चरित मानस, किष्किन्धाकाण्ड; ;

अर्थ: [श्री रामजी ने कहा] हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्रवधू और कन्या ए चारों समान हैं| इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता|

और दूसरी ओर अब्रह्मी संस्कृतियां जिनमें बेटी व पुत्रवधू से विवाह की छूट है| कुमारी माएं प्रायः घर घर मिलती हैं|

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar 

http://www.aryavrt.com/muj13w51a-yaun-shoshan

वैदिक सनातन संस्कृति की मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि आप का स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया| लेकिन यदि आप का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया| इसके विपरीत भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयतइस्लामसमाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ईसाइयतइस्लामसमाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता हैउसके लिए लूटहत्याबलात्कारदूसरों को दास बनानागाय खानाआदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाताअपितु वह जीविकामुक्तिस्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है। सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४)(कुरान ८:१४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१), (अब २०.६.१९७९ से लुप्त) व ३९ग]. अब्रह्मी संस्कृतियों में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिएदार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए८:३९. आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं हैकिसी भी नारी का बलात्कार कीजिए| (बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं - बेटी (बाइबल १कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान३३:३७-३८) से निकाह कीजिएअल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता हैकिसी का भी उपासना स्थल तोड़िये[(बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरानबनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबलव्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१४१ व ६९)]. किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है। जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइएन बने तो कत्ल कर दीजिए(बाइबललूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) – जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआरकलकत्ता१९८५प१०४). अज़ान द्वारा ईशनिंदा कीजिये और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दीजिए| बदले में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी खजाने से वेतन देने का आदेश दे रखा है| (एआईआरएससी१९९३प० २०८६). इतना ही नहीं हज अनुदान के लिए भी कानून बना रखा है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकारhttp://indiankanoon.org/doc/709044/). इन मूर्खों और दासों के लिए वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबलउत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण मेंइतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वाराजजों सेउत्पीड़ित कराया जा रहा है

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६० व १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ द्वारा जिन अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं|

अब्रह्मी संस्कृतियों को नष्ट कर के ही आप जीवित बच पाएंगे| वीर्यवान बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों को पुनर्जीवित कर आर्य अब्रह्मी संस्कृतियों को मात्र पांच वर्षो में मिटा सकते हैं| क्यों कि यदि गैस चैंबरों में मरने के लिए विवश खतना कराए हुए नपुंसक यहूदी मेमनों को ज्वलंत शेरों में मात्र ५ वर्ष में बदला जा सकता है तो वीर्यवान बनाने वाले गुरुकुलों में शिक्षित आर्यों के लिए तो अब्रह्मी संस्कृतियों' को मिटाने के लिए कहीं करोड़ों गुना अधिक उपयुक्त परिस्थितियां (आज भी विश्व १ में अरब आर्य) आज भी हैं|

यह न भूलें कि अब्रह्मी संस्कृतियों से उनके अनुयायी स्वयं पीड़ित हैं| वे स्वयं एक दूसरे का संहार कर रहे हैं| उनके तथाकथित पैगम्बरों ने उनके जीवनी शक्ति वीर्य को उनसे छीन कर उनको दास बना रखा है| उन्हें नहीं मालूम कि प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| मनुष्य को जन्म के साथ ही प्राप्त वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु  है| वीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों और शक्तिवान का दास ही बन सकता है, स्वतन्त्र नहीं रह सकता| वीर्यहीन व्यक्ति का मानवाधिकार नहीं होता| वीर्यहीन मनुष्य रोगग्रसित चलता फिरता मुर्दा और दास है| भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है| चरित्र, दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करिये|

कोयला जब अत्यधिक दबाव और ताप में पड़ जाता हैतो हीरा बन जाता है और सोने को जितना जलाया जाता हैवह उतना ही शुद्ध हो जाता है|

जो उपलब्धि इस्लाम ई० स० ७१२ से ई० स० १८३५ तक अर्जित न कर सका, गुरुकुल मिटा कर उससे अधिक ईसाइयत ने मात्र ई० स० १८५७ से ई० स० १९०५ के बीच अर्जित कर लिया| और जो सोनिया ने अपने १० वर्षों के काल में अर्जित किया है, उसे तो मैकाले सोच भी नहीं सका| बेचारा समलैंगिक सम्बन्ध को अपराध घोषित कर दुनिया छोड़ गया|

जेफरसन के घोषणापत्र"हम इन सिद्धांतों को स्वयंसिद्ध मानते हैं कि सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं और उन्हें अपने स्रष्टा द्वारा कुछ अविच्छिन्न अधिकार मिले हैं। जीवनस्वतंत्रता और सुख की खोज इन्हीं अधिकारों में है।“ का हम सम्मान करते हैं लेकिन वेदों के सिद्धांत, मानवमात्र को जन्म के साथ ही प्राप्त वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमानसर्वज्ञसर्व-व्याप्तवह शक्ति है जिससे सब कुछयहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। मल ही बल है और वीर्य ही जीवनवीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दातास्वतंत्रतापरमानंदआरोग्यओजतेज और स्मृति का जनक है|” का हम तिरष्कार करते हैं|

क्या आप अपनी पत्नी, बहन या कन्या को व्यभिचार करने से विधिवत रोक सकते हैं? आप ने कठोरता की तो? आप घरेलू हिंसा अधिनियम, २००५ के अंतर्गत जेल में होंगे| वह भी पड़ोसी के एक फोन पर|

विकल्प मात्र उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्ध है| साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. वैदिक सनातन संस्कृति के बचने के हर मार्ग अवरुद्ध कर दिये गए हैं| आप को वीर्यवान बनाने के शिक्षा केन्द्र गुरुकुलों को नष्ट कर दिया गया| आप आत्मरक्षा के लिये शस्त्र भी नहीं रख सकते| यदि आप स्वयं का एवं मानव जाति का भला करना चाहते हों तो गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करने, प्रजा को सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देने और वैदिक सनातन धर्म की आधार शिलाओं गायत्री, गीता, गंगा और गो की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिये| हम बैल आधारित खेती और गो वंश की वृद्धि को प्रोत्साहित करेंगे| इन को मिटाया जा रहा है| हम पुनः इंडिया को सोने की चिड़िया भारत बना देंगे|

एक ओर ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर (अ)ब्रह्मिक संस्कृति| ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति वीर्यरक्षा यानी मानव के आरोग्य, ओज, तेज, स्मृति और परमानंद की प्राप्ति के लिये निःशुल्क गुरुकुल चलाती थी और (अ)ब्रह्मिक संस्कृति महँगी शिक्षा व्यवस्था लाद कर खतना और यौनशिक्षा द्वारा मानवमात्र को वीर्यहीन कर (किसान की भांति सांड़ से बैल बना कर) मानवमात्र को दास बना रही हैं|

पहले उपनिवेश से मुक्ति लीजिए| यदि न मिले तो शक्ति अर्जित करिये| इसके लिए गौ, आचार्य और गुरुकुल चाहिए| अतएव यौनशिक्षा देने वाले मैकाले के स्कूलों का बहिष्कार कीजिए| अपने संतानों को संस्कार देकर वीर्यवान ब्रह्मचारी बनाइए| अन्याय करने वाले से बड़ा अपराधी अन्याय को सहन करने वाला होता है|

शारीरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत वीर्य है| सन १८३५ तक हमारे यहाँ ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य था| तभी तक भारत सोने की चिड़िया बना रहा| ब्रह्मचर्य के शिक्षा केन्द्र गुरुकुल और शिक्षक दोनों समाज पर आश्रित थे| राज्य किसी का हो विद्या निर्बाध गति से चलती रहती थी| वह भी निःशुल्क| किसान को सांड़ को दास बना कर खेती के योग्य बैल बनाने के लिए सांड़ का बंध्याकरण करना पड़ता हैलेकिन आप गुरुकुल का ब्रह्मचारी बनाने के स्थान पर महंगे स्कूलों में अपने बच्चों को यौन शिक्षा दिला रहे हैं| ताकि वह नपुंसक बन कर एलिजाबेथ की दासता करे|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी 

अप्रैल, २१,२०१४.

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मेरा परिचय.

मैं पूर्वी उत्तर प्रदेश (तब का UNITED PROVINCES) के सरयूपारीण तथाकथित ब्राह्मण, एक २७ गांवों के जमींदार, के यहाँ ग्राम मुजहना, तहसील हाटा, तब का जिला गोरखपुर में पैदा हुआ था| वर्तमान में यह ग्राम तहसील कप्तानगंज, जिला कुशीनगर, में आ गया है. मेरे पिताजी का नाम स्व० बेनी माधव त्रिपाठी और माँ का नाम स्व० राम संवारी त्रिपाठी है. तब मेरे पूर्वज विक्टोरिया का नमक खाते थे और पूरे अँगरेज़ थे| अँगरेज़ गए, जमीन्दारी गई और परिवार गाँधी भक्त हो गया| मैं भी उन्हीं में था| लेकिन दुबई में १२ जनवरी, १९९१ को मेरी भगवत गीता सेकुलर, सहिष्णु मुसलमानों द्वारा सहिष्णु इस्लाम के निर्देश के अनुसार फाड़ी, बूट से रौंदी और जलाई गई.

गीता जलाये जाने का कारण जानने के खोज में मुझे ज्ञान का वृक्ष ‘वेद’ मिल गया और मैंने उसका फल खा लिया. तभी से मेरे लिए अब्रह्मी संस्कृतियों के मूर्खों के स्वर्ग का दरवाज़ा सदा के लिए बंद हो गया है. (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और (कुरान २:३५).

चौंकाने वाले प्रमाण!

उपनिवेशवासियों को धोखा दिया जा रहा है. इंडिया स्वतंत्र नहीं, इंडियन उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्ष के आंदोलन व अनगिनत बलिदानों के बाद भी “India that is Bharat” (इंडिया) आज भी ब्रिटेन का स्वतंत्र? उपनिवेश है. आईये देखें उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।

शब्द स्वतंत्र और उपनिवेश एक दूसरे के विरोधी हैं. प्रत्येक उपनिवेशवासी एलिजाबेथ का बलिपशु है, क्योंकि उपनिवेशवासी कभी स्वतंत्र हो ही नहीं सकता!

इंडिया में लागू, आज भी, सभी कानून ब्रिटेन द्वारा ही बनाये गए हैं. शासन आज भी ब्रिटिश उच्चायुक्त के निर्देश पर ही, राष्ट्रपति और राज्यपाल के माध्यम से चलता है.

ईसाई बपतिस्मा को अस्तित्व के लिए आवश्यक बताता है और मुसलमान काफ़िर को कत्ल करने से जन्नत पाता है.

लेकिन भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से, मजहब का पालन करते हुए न्यायिक जांच (Inquisition) और बपतिस्मा में लिप्त ईसाई और अज़ान और खुत्बों में लिप्त मुसलमान असहिष्णु नहीं हैं! लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन ईशनिंदा और हत्या का विरोध करने वाले उपनिवेशवासी असहिष्णु हैं!

 ‘जो बपतिस्मा नहीं लेते, उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा, वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे|’ कहने वाले सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष कैसे है?

इस्लाम ने ईश्वर को अपूज्य घोषित कर दिया है| (अज़ान). मात्र अल्लाह पूज्य है’, (अज़ान, कुरान ३:१९), कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? क्योंकि कुरान के अनुसार दीन तो अल्लाह की दृष्टि में मात्र इस्लाम ही है| (कुरान ३:१९)और जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...” (कुरान ३:८५).

कदम तो मुसलमानों को उठाना है| वे काफिरों के इष्ट देवताओं का अपमान करना बंद करदें| कुरान ने मुसलमानों को काफिरों के हत्या की और मात्र इस्लाम धर्म के ही अस्तित्व को स्वीकार करने की आज्ञा दी है| अतएव मुसलमान कुरान त्याग दें|

लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान धूर्त मुहम्मद के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें|

मुसलमान याद रखें कि धार्मिक सद्भाव अज़ान व नमाज़ को बंद करने के बाद ही आएगा|

हारुन के अनुसार, “संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव बान की मून को लिखे पत्र में कहा है कि इस घटना से मुसलमानों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है|”

कुरान जलाने से मुसलमानों की धार्मिक भावना को एक बार ठेस पहुंची है और काफ़िर के धार्मिक भावना को ईमाम प्रतिदिन लाउडस्पीकर पर कम से कम १५ बार ठेस पहुंचाता है और उसे यह भी नहीं मालूम कि वह क्या कर रहा है?

कोई न्यायालय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अस्तित्व में रहते, न आप का कुछ बिगाड़ सकती है और न आप के लोकसेवकों का|

ये कलियुग है इसलिए हिन्दू विरोधी आतंकवादियों व उनके समर्थकों के प्रति किसी भी सातविक प्रतिक्रिया के लिए कोई जगह नहीं है। हिन्दू धर्म में आपाकलीन धर्म का प्रावधान है जिसपर हमें आज के हालात में अमल करना चाहिए। ये हमारे लिए सच्चाई का सामना करने का वक्त है। एक सभ्यता के रूप में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए या तो हमें हिन्दू के रूप में संगठित होकर हिंसक व अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का मुकावला करना चाहिए या फिर परसियन,वेवीलोनियन और मिश्र की सभ्यता की तरह नष्ट होने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। ये सभ्यतायें अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का संगठित होकर मुकावला करने में असमर्थ रहीं इसलिए इनका सर्वनाश हो गया। हमें शाम, दाम, दण्ड, भेद नियम का पालन करते हुए हर हाल में अत्याचारी इस्लामिक आतंकवाद का सर्वनाश सुनिश्चित करना चाहिए वरना ये राक्षश हमें समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

बाइबल, कुरान व भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहितायें हैं| इन से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है|

खूनी ईसाई व मुसलमान अल्पसंख्यक कैसे? जाति हिंसक क्यों नहीं?

बाइबल, कुरान व भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहितायें हैं| इन से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है|

अब्रह्मी संस्कृतियाँ मानवता को वश में करने के लिए नपुंसक बना देने वाले गढ़े गए मजहब हैं. अब्रह्मी संस्कृतियाँ को डायनासोर की भांति मानवजाति को दास बनाने अन्यथा मिटाने के लिए गढ़ा गया है. हम उस भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को क्यों स्वीकार करें, जिसने हमें मार डालने का मुसलमानों और ईसाइयों को निरंकुश मौलिक अधिकार प्रदान किया है? यह इन मजहबों के खिलाफ जागने और लड़ने का समय है. अब्रह्मी संस्कृतियों मानव जाति के लिए खतरा हैं. मुसलमानों और ईसाइयों के साथ कोई सह - अस्तित्व नहीं हो सकता है. जब तक मुसलमान व ईसाई मुहम्मद और यीशु में विश्वास करते हैं, वे दूसरों के लिए और यहां तक कि खुद एक दूसरे के लिए खतरा हैं.

भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म के अस्तित्व में बने रहने के सभी मार्गों को बंद करने के लिये किया गया है|

आसन्न संकट

वैदिक सनातन धर्म भयानक चक्रव्यूह में फंस चुका है| जिसके कारण, डायनासोर की भांति, मानव जाति का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा|

भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म के अस्तित्व में बने रहने के सभी मार्गों को बंद करने के लिये किया गया है|

चूंकि अब्रह्मी संस्कृतियों दोनों को ही वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, इसलिए पाकिस्तान को अमेरिकी सहायता तब तक मिलती रहेगी, जब तक वैदिक सनातन धर्म का अस्तित्व बचा रहेगा|

मीडिया को हमारे राम राज्य से परहेज़ क्यों है? पाक पिता गाँधी ने ही हमसे राम राज्य का वादा किया था, हम एलिजाबेथ का रोम राज्य क्यों सहन करें? अमेरिकी, भारतीय और संयुक्त राष्ट्र संघ का सार्वभौमिक मानवाधिकार का घोषणापत्र हमे उपासना की स्वतंत्रताका वचन देता है| हम अल्लाह के उपासना की दासता और ईसा का रोम राज्य क्यों स्वीकार करें?

संघ परिवार हमें अतिवादी और आतंकवादी मानता है| क्यों कि मीडिया को हमारे राम राज्य से परहेज़ है. हम को एलिजाबेथ का रोम राज्य सहन करने के लिए विवश किया जा रहा है|

अमेरिकी, भारतीय और संयुक्त राष्ट्र संघ का सार्वभौमिक मानवाधिकार का घोषणापत्र हमे उपासना की स्वतंत्रताका वचन देता है| | पाक पिता गाँधी ने ही हमसे राम राज्य का वादा किया था. जज हमें अल्लाह के उपासना की दासता और ईसा का रोम राज्य स्वीकार करने के लिए विवश किया जा रहा है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) वैदिक सनातन धर्म के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता| नीतीश ने संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली है, अतएव नीतीश अपनी शपथ का सम्मान करते हुए अपनी नारियों को अब्रह्मी संस्कृतियों को सौंप चुके हैं| अपनी सम्पत्ति और पूँजी से अपना अधिकार त्याग चुके हैं और चाहते हैं कि सारे उपनिवेशवासी एलिजाबेथ की भेंड़ बन जाएँ और मुसलमान इस्लाम का परित्याग कर दें|

जिन संतों को अपने मठ, मंदिर, गीता, गौ, गायत्री, गंगा और वैदिक सनातन धर्म का अस्तित्व चाहिए, वे हमसे फोन (०)९१५२५७९०४१/९८६८३२४०२५ पर सम्पर्क करें|

इंडिया के उपनिवेशवासी एक आक्रांत एवं पराजित राष्ट्र की भेंड़े हैं।

इंडिया के उपनिवेशवासियों के पास प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| (भारतीय दंड संहिता की धाराएं १०२ व १०५). लेकिन जहां राज्य स्वयं वैदिक सनातन धर्म को मिटा रहा हो, वहाँ राज्य ही राज्य से लड़ सकता है| आर्यावर्त सरकार की स्थापना वैदिक सनातन धर्म के रक्षा के लिए की गई है| निर्णय इंडिया के उपनिवेशवासियों के हाथ में है| वोट द्वारा भी वे जीने, सम्पत्ति व पूँजी का अधिकार नहीं पा सकते|

नीतीश को सीधे-सीधे कहना चाहिए कि

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) वैदिक सनातन धर्म के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता| नीतीश ने संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली है, अतएव नीतीश अपनी शपथ का सम्मान करते हुए अपनी नारियों को अब्रह्मी संस्कृतियों को सौंप चुके हैं| अपनी सम्पत्ति और पूँजी से अपना अधिकार त्याग चुके हैं और चाहते हैं कि सारे उपनिवेशवासी एलिजाबेथ की भेंड़ बन जाएँ और मुसलमान इस्लाम का परित्याग कर दें|

संतों का शत्रु भारतीय संविधान है| जिसे वैदिक सनातन धर्म, जीवन और सम्पत्ति चाहिए आर्यावर्त सरकार से ९८६८३२४०२५ पर सम्पर्क करें|

अब्रह्मी संस्कृतियों वैदिक सनातन धर्म के शत्रु हैं| अतएव एक दूसरे के मित्र हैं| एलिजाबेथ नौटंकी बंद करे|

आप भारतीय संविधान के रहते वैदिक सनातन धर्म की रक्षा नहीं कर सकते| जिसे भी वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना हो, मुझसे मिले|

भारतीय संविधान की शपथ लेने वाले वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति की रक्षा नहीं कर सकते| मिटें या ईसाइयत व इस्लाम मिटाने के लिए सहयोग दें|

विलियम जी ने सती के सम्बन्ध में कुछ नैसर्गिक प्रश्न उठाये हैं| मेरा भी एक प्रश्न है| वह कौन सा कारण है कि सती प्रथा को बंद करने के लिये तो आज तक सभी बेचैन हैं, लेकिन ३ तलाक का विरोध करने का किसी के पास साहस ही नहीं?

जो कारण मेरे समझ के आया है वह यह है कि लूट और नारी बलात्कार के प्रलोभन पर ही तो अब्रह्मी संस्कृतियों का अस्तित्व है| नारी बलात्कार की छूट से दोहरा लाभ है| इससे अब्रह्मी संस्कृतियों का प्रसार भी हुआ और लोग दास भी बन गए|

जहाँ तक सती का प्रश्न है, यह सच है कि इसका विवरण रामायण और महाभारत दोनों में मिलता है| इस्लाम से सती प्रथा को जोड़ना गलत है|

यह सत्य है कि सती प्रथा सनातन है| सती का प्रचलन वीर्य रक्षा के लिये किया गया था| लेकिन इसके विरोधी यह तो बताएं कि वे तीन तलाक का ई० सन ६३२ से आज तक विरोध क्यों नहीं कर सके?

विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/veerya-1

वैदिक सनातन संस्कृति

सच यह है कि नमो हमे उपनिवेश से मुक्ति नहीं दे सकते| संविधान से मुक्ति नहीं दे सकते|

अब्रह्मी संस्कृतियों के आगमन के साथ से ही बुद्धिजीवी और कलाकार इन (अब्रह्मी संस्कृतियों) के दुर्व्यवहार से पीड़ित हो रहे हैं|

दरअसल, हमारे बुद्धिजीवियों का मनोविज्ञान बिल्कुल दुर्व्यवहारित पत्नी, यौन दुर्व्यवहारित बच्चे या बलात्कार की शिकार नारी के मनोविज्ञान की तरह है| दुर्व्यवहार पीड़ितों की प्रतिक्रिया और हमारे बुद्धिजीवियों के बीच समानताएं देखें| जीवन और जीविका जाने का भय आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों के आगमन और निरंतरता के बादसे अस्तित्व में बने रहने का कारण है? क्या कवयित्री आसमा बिन्त मरवान से बेहतर प्रमाण हो सकता है?

रविवार, 27 जुलाई 2014

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क्या आप अपने नौनिहालों को चरित्रवान और ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों में शिक्षा देने के लिए भेज सकते हैं?

क्या आप अपने लेख देवनागरी में लिख सकते हैं?

क्या आप उपनिवेश के विरुद्ध युद्ध में आर्यावर्त सरकार का साथ दे सकते हैं?

शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

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स्वामी रुपेश्वरानन्द मिले १४७२१ को.

मूर्ख अग्निवेश हर व्यक्ति को परब्रह्म उसके जन्म के साथ ही वीर्य के रूप में अपनी सारी शक्ति दे देता है|

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इंडिया के जवानों के साहस और वीरता का नेताओं ने इतना सम्मान किया कि हर बार रण में जवानों द्वारा जीती धरती को मेज़ पर हार गए. क्यों कि एलिजाबेथ के दास थे, हैं और रहेंगे!

इस्लाम और ईसाइयत की पहचान है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को निगलने के लिए बना है|

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. इनसे हमारे अस्तित्व और धर्म को भय है, अतः इन्हें मिटने दीजिए.

गांधी माने कठपुतली और ब्रिटिश अधिकारी ह्यूम द्वारा स्थापित कांग्रेस माने ब्रिटिश सत्ताको अमर रखने के लिए नपुंसकों का एक दल. एलिजाबेथ के दास माननीय प्रधानमंत्री नमो उपनिवेश और भारतीय संविधान के अस्तित्व में रहते कुछ नहीं कर सकते.

जिसे कांग्रेस आज़ादीबताती है वह सत्ता का हस्तांतरण है. इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है और इंडिया का हर उपनिवेशवासी अधिकार विहीन दास पशु. किसान के पशु या दास का कोई अधिकार नहीं होता. ईसाई, मुसलमान, माननीय प्रधानमंत्री नमो सहित इंडिया के उपनिवेशवासी के पास कोई अधिकार नहीं है. लेकिन ऐसा लिखने या कहने वाला जीवित नहीं छोड़ा जाता. स्वराज्य की स्थापना राज द्रोह है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

जब तक भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ अस्तित्व में रहेंगे, एलिजाबेथ को अम्बानियों आदि को लूटने से कोई नहीं रोक सकता| विदेशी कम्पनियाँ एलिजाबेथ को मोटी रकम देने के लिए तैयार हैं| एफडीआई लागू हो गई है| अतः एलिजाबेथ टाटा अम्बानी आदि की अकूत सम्पत्तियां और पूँजी लूट कर इंगलैंड ले जायेगी|

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राज्यतंत्र ही हमारी समस्या का समाधान है| यदि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) नहीं मिटेगा तो मानव जाति मिट जायेगी और यदि भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) नहीं मिटता तो भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो सकता| लोकसेवक दप्रसं की धारा १९७ से शासित हैं|

भारतीय संविधान लूट संहिता है| संसद और न्यायपालिका डाकुओं के संगठित समूह हैं| यह वैश्विक समस्या है| चोर कभी सुखी नहीं होता|

इन लोगों की भरपूर कोशिश है कि उपनिवेशवासी समस्या की जड़ भारतीय संविधान पर ऊँगली न उठा पाए, अन्यथा एलिजाबेथ का सारा खेल खटाई में पड़ जायेगा|

लोकसेवक उपनिवेशवासी को लूट रहे हैं| लोकसेवक के पास जब लूट का माल एकत्र हो जा रहा है तो उसके विरुद्ध अभियोग चला दिया जा रहा है| जो भी रकम उसके पास होती है, उसे लोकसेवक लूट कर एलिजाबेथ तक पहुंचा रहे हैं| ५ वर्षों से कम समय में मुख्य मंत्री मायावती अब तक अपने २० मंत्रियों को निकाल चुकी है और फिर भी दूध की धुली है| वह जेल जरूर जायेगी लेकिन तब तक नहीं, जब तक वैदिक सनातन धर्म को मिटाएगी और एलिजाबेथ को हिस्सा देती रहेगी|

रजवाड़े और उनके प्रिवीपर्स लूटे, जमीनें लूटीं और लुट रही हैं, जमींदारी लूटी, सोना लूटा, बैंक लूटे, खानें व कारखाने लूटे| परिवहन, रेल आदि सेवाएं लूटी गईं| अब एलिजाबेथ एफडीआई लागू कर अम्बानी, टाटा, बिड़ला आदि को लूटेगी| लोकसेवक एलिजाबेथ की भेंड़ बन कर देश को लूट कर एलिजाबेथ को हिस्सा देने के लिए विवश हैं| क्या आप अपनी स्वतंत्रता और सम्मान नहीं चाहेंगे?

लोकसेवक एलिजाबेथ के हाथों की कठपुतली बन कर लोकसेवकों को ही मिटा रहे हैं| वे यह भूल रहे हैं कि एलिजाबेथ का अगला हमला उन पर ही होगा|

जिस सम्पत्ति के लिए नेता व लोकसेवक उपनिवेशवासी व मानवजाति को संकट में डाल रहे हैं, उसे लूटने के लिए ही लोकतंत्र, समाजवाद, अब्रह्मी संस्कृतियों की स्थापना की गई है| इन व्यवस्थाओं में उपनिवेशवासी की स्थिति किसान के बैल से भी गई बीती है| सम्मान, सम्पत्ति और स्वतंत्रता चाहते हों तो वैदिक पंथी बनें, अन्यथा मिटने के लिए तैयार रहें|

प्रदेश को लूटने का उत्तरदायित्व लोकसेवक को भारतीय संविधान से प्राप्त है| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)}| पाठक की सुविधा के लिए बता दूं कि अनुच्छेद ३१ संविधान से लुप्त कर दिया गया है|

लोकसेवक की नियुक्ति ही इसलिए की जाती है कि वे पता लगाएं कि किसके पास धन, धरती और सुंदर लड़की है| फिर उसकी सूचना एलिजाबेथ को दी जाती है| दलाली तय होती है| फिर चाहे कत्ल करना पड़े या बुलडोजर लगवाना अथवा अभिलेखों में हेरा फेरी| उसे लूट लिया जाता है| आप प्रमाण देते रहिये, क्या मजाल कि संतों का स्टिंग आपरेशन करने वाली मीडिया एलिजाबेथ के विरुद्ध समाचार ही प्रकाशित कर दे|

८०० करोड़ के भ्रष्टाचार के लिए पूर्व मुख्य मंत्री मधु कोड़ा जेल में हैं और ७८००० करोड़ के भ्रष्टाचारी आन्ध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री रेड्डी का बेटा जगनमोहन एलिजाबेथ को ललकार रहा है और एलिजाबेथ की बोलती बंद है! पूर्व राज्यपाल एन डी तिवारी ने विरोध किया और यौन शोषण के अपराध में नप गए| अब जज डी एन ए करवा रहे हैं| लेकिन

अतएव भ्रष्टाचार के लिए भारतीय संविधान उत्तर दायी है, लोकसेवक नहीं|

उपरोक्त अनुच्छेद के संकलन का फलितार्थ समझिए| सम्पत्ति का संकेंद्रण तो हो लेकिन एलिजाबेथ के पास| इसके गणित को समझिए| इस अनुच्छेद के अधीन उपनिवेशवासी की सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ की है| लोकसेवक को उपनिवेशवासी की सम्पत्ति को लूट कर एलिजाबेथ तक पहुचाने के लिए ही नियुक्त किया जाता है| नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोकसेवक को उपनिवेशवासी को लूटना पड़ेगा| पीड़ित उपनिवेशवासी को शिकायत करने का या शिकायत का संज्ञान लेने का अधिकार न तो पुलिस के पास है और न जज के पास|

उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार उपनिवेशवासी के पास धन का संकेंद्रण नहीं होना चाहिए| उपनिवेशवासी की सम्पत्ति लूटना लोकसेवक की संवैधानिक उत्तरदायित्व है| राजा ने एलिजाबेथ के लिए उपनिवेशवासी का धन छीना है, जो अपराध ही नहीं है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)

कानून के अभाव में भी पटेल को रजवाड़ों को लूटने में समय नहीं लगा| लोगों की जमींदारी गई, सोना गया, खानें गईं, कारखाने गए, रेलें गईं और कोई कुछ नहीं कर पाया. अपने उपनिवेश के दासों को लूटने में एलिज़ाबेथ को कितने मिनट लगेंगे? अब तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) है|

ईस्ट इंडिया कम्पनी मात्र संतानहीन की सम्पत्ति राजगामी किया करती थी| भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) एलिजाबेथ को सबकी सम्पत्ति राजगामी करने का पूरा अधिकार देता है| एलिजाबेथ जिसकी चाहती है, उसकी सम्पत्ति व भूमि राजस्व अभिलेखों में हेरा फेरी करा कर राजगामी करती है| धरती का हर उपनिवेशवासी जेहोवा या अल्लाह का दास तो है ही|

उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार उपनिवेशवासी के पास धन का संकेंद्रण नहीं होना चाहिए| उपनिवेशवासी की सम्पत्ति लूटना लोकसेवक की संवैधानिक उत्तरदायित्व है| राजा ने एलिजाबेथ के लिए उपनिवेशवासी का धन छीना है, जो अपराध ही नहीं है|

उपरोक्त अनुच्छेद के संकलन का फलितार्थ समझिए| सम्पत्ति का संकेंद्रण तो हो लेकिन एलिजाबेथ के पास| इसके गणित को समझिए| इस अनुच्छेद के अधीन उपनिवेशवासी की सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ की है| लोकसेवक को उपनिवेशवासी की सम्पत्ति को लूट कर एलिजाबेथ तक पहुचाने के लिए ही नियुक्त किया जाता है| नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोकसेवक को उपनिवेशवासी को लूटना पड़ेगा| पीड़ित उपनिवेशवासी को शिकायत करने का या शिकायत का संज्ञान लेने का अधिकार न तो पुलिस के पास है और न जज के पास|

उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार उपनिवेशवासी के पास धन का संकेंद्रण नहीं होना चाहिए| उपनिवेशवासी की सम्पत्ति लूटना लोकसेवक की संवैधानिक उत्तरदायित्व है| राजा ने एलिजाबेथ के लिए उपनिवेशवासी का धन छीना है, जो अपराध ही नहीं है|

किसी के पास लोकसेवकों द्वारा किये गए अपने उत्पीडन व लूट के विरुद्ध शिकायत करने का अधिकार ही नहीं है| भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए संकलित किया गया है| देखें भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग). लोकसेवक की नियुक्ति ही उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ इसलिए संकलित की गई है कि लोकसेवक उपनिवेशवासी को लूटे लेकिन लूट का धन लोकसेवक अपने पास न रख पाए|

जब तक भारतीय संविधान, बाइबल और कुरान है, भ्रष्टाचार सदाचार है और नारियों का बलात्कार अब्रह्मी संस्कृतियों का नैतिक और लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार| लोक लेखा समिति को भ्रष्टाचार नहीं मिटाना है| उसे लूट में अपना हिस्सा चाहिए| जिसे भी नैतिक समझ होगी वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को हटाने की मांग करेगा| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को समाप्त करने की मांग करेगा|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से लोकसेवकों की नियुक्ति उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| लोकसेवक लोक यानी उपनिवेशवासी को लूटता तो है, लेकिन कुत्ते की हड्डी की भांति उस लूट का उपभोग नहीं कर पाता| क्यों कि लूट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ से नियंत्रित किया गया है| जो लोकसेवक एलिजाबेथ को हिस्सा नहीं देता, उसे जेल भेज किया जाता है|

मै नीचे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दो आदेश उद्धृत कर रहा हूँ| लोकसेवकों के अपराध सिद्ध हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के प्रभाव से लोकसेवकों का अपराध, अपराध न रह कर उनका सम्वैधानिक कर्तव्य बन गया है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के प्रभाव में १९८९ से आज तक बेचारे जज या लोकसेवक मुझे मेरी भूमि तो दे ही नहीं सकते, लेकिन जज का सुझाव था कि मुझे बदले में भूमि दे दी जाये, वह भी आज तक कोई कर न सका| और जब जज कुछ न कर सके तो जन लोकपाल क्या कर लेगा, जब योगगुरू रामदेव स्वयम लोकपाल की परिधि से प्रधान मंत्री और जज को मुक्त रखने के समर्थक हैं|

जब तक भारतीय संविधान, बाइबल और कुरान है, भ्रष्टाचार सदाचार है और नारियों का बलात्कार अब्रह्मी संस्कृतियों का नैतिक और लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार| लोक लेखा समिति को भ्रष्टाचार नहीं मिटाना है| उसे लूट में अपना हिस्सा चाहिए| जिसे भी नैतिक समझ होगी वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को हटाने की मांग करेगा| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को समाप्त करने की मांग करेगा|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से लोकसेवकों की नियुक्ति उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| लोकसेवक लोक यानी उपनिवेशवासी को लूटता तो है, लेकिन कुत्ते की हड्डी की भांति उस लूट का उपभोग नहीं कर पाता| क्यों कि लूट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ से नियंत्रित किया गया है| जो लोकसेवक एलिजाबेथ को हिस्सा नहीं देता, उसे जेल भेज किया जाता है|

सम्पत्ति और पूँजी लूटने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को हम भ्रष्टाचारी नहीं मानते| अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के मौलिक अधिकार छीनने वाले सांसदों व जजों को भी हम भ्रष्टाचारी नहीं मानते| १० रूपये भेंट लेने वाले जजों को और चौराहे पर ड्राईवर से ५० रूपये वसूलते ट्राफिक पुलिस को भी हम भ्रष्टाचारी नहीं मानते| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अस्तित्व में रहते हम किसी लोकसेवक का कुछ बिगाड़ भी नहीं सकते|

भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए संकलित किया गया है| देखें भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग). लोकसेवक की नियुक्ति ही उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ इसलिए संकलित की गई है कि लोकसेवक उपनिवेशवासी को लूटे लेकिन लूट का धन लोकसेवक अपने पास न रख पाए|

दंड की कौन कहे, भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए संकलित किया गया है| देखें भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग). लोकसेवक की नियुक्ति ही उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ इसलिए संकलित की गई है कि लोकसेवक उपनिवेशवासी को लूटे लेकिन लूट का धन लोकसेवक अपने पास न रख पाए|

(संदर्भः महाभारत, शान्तिपर्व, अध्याय १५)

दण्डः शास्ति प्रजाः सर्वा दण्ड एवाभिरक्षति|

दण्डः सुप्तेषु जागर्र्ति दण्डं धर्म विदुर्बुधाः ॥2॥

भावार्थः (अपराधियों को नियंत्रण में रखने के लिए दण्ड की व्यवस्था हर प्रभावी एवं सफल शासकीय तंत्र का आवश्यक अंग होती है|) यही दण्ड है जो प्रजा को शासित-अनुशासित रखता है और यही उन सबकी रक्षा करता है| यही दण्ड रात्रिकाल में जगा रहता है और इसी को विद्वज्जन धर्म के तौर पर देखते हैं|

किसी के पास लोकसेवकों द्वारा किये गए अपने उत्पीडन व लूट के विरुद्ध शिकायत करने का अधिकार ही नहीं है| भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए संकलित किया गया है| देखें भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग). लोकसेवक की नियुक्ति ही उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ इसलिए संकलित की गई है कि लोकसेवक उपनिवेशवासी को लूटे लेकिन लूट का धन लोकसेवक अपने पास न रख पाए|

जब तक भारतीय संविधान, बाइबल और कुरान है, भ्रष्टाचार सदाचार है और नारियों का बलात्कार अब्रह्मी संस्कृतियों का नैतिक और लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार| लोक लेखा समिति को भ्रष्टाचार नहीं मिटाना है| उसे लूट में अपना हिस्सा चाहिए| जिसे भी नैतिक समझ होगी वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को हटाने की मांग करेगा| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को समाप्त करने की मांग करेगा|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से लोकसेवकों की नियुक्ति उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| लोकसेवक लोक यानी उपनिवेशवासी को लूटता तो है, लेकिन कुत्ते की हड्डी की भांति उस लूट का उपभोग नहीं कर पाता| क्यों कि लूट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ से नियंत्रित किया गया है| जो लोकसेवक एलिजाबेथ को हिस्सा नहीं देता, उसे जेल भेज किया जाता है|

दासता से मुक्ति, चरित्र, दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहें तो निःशुल्क ब्रह्मचारी बनाने वाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करें| क्यों कि गुरुकुल वीर्यवान ब्रह्मचारी बनाते हैं. आप का एक ब्रह्मचारी इस्लाम से निपटने के लिए काफी है.

भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है| दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करिये|

मानवमात्र को नपुंसक बनाने वाली अब्रह्मी संस्कृतियाँ धरती पर क्यों रहनी चाहियें?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वैदिक सनातन संस्कृति को बनाये रखने के लिए भारतीय संविधान में कौन सा अनुच्छेद है? उपरोक्त कथन के अनुसार वैदिक सनातन संस्कृति को धरती पर रहने ही नहीं दिया जायेगा?

क्या आप लोगों को पता है कि इस्लाम काफ़िर और दार उल हर्ब के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता?

मनुष्य के ईश्वरीय शक्ति के मूल स्रोत वीर्य को नष्ट करना धूर्त पैगम्बरों ने मजहब का अपरिहार्य कर्म बना रखा है, वह भी विश्वास के आधार पर. बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिरभी आप खूनी, लुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए विवश कर दिए गए हैं? बैरिस्टर २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता मोहनदास करमचन्द गांधी ने मजहब के आधार पर देश का बंटवारा भी किया और मुसलमानों को जिन्ना के सुझाव के बाद भी इंडिया से जाने नहीं दिया! तब हमने विरोध क्यों नहीं किया?

प्रमोद जी का मुकदमा जायेगा किसके पास? उन्हीं जजों के पास न, जहां सुकन्या कीर्ति होगई| उसकी माँ सुमित्रा सुशीला बन गई| वादी किशोर समरीते पर ५० लाख रु० दंड लगा| निर्णय हुआ मात्र ६ दिन में| जो इतने उल्लू हैं कि पिछले ६ वर्षों में उन्हें साध्वी प्रज्ञा के उत्पीड़न से पीड़ा ही नहीं हुई. क्या प्रमोद जी जानते हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों की हत्या करना ईसाई व मुसलमान का संवैधानिक [भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)] और मजहबी असीमित मौलिक मजहबी अधिकार है, जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता? (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). साध्वी प्रज्ञा आप के जीवन की भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधिकार से रक्षा करना चाहती हैं. जब कि भारतीय संविधान आप की हत्या करने के लिए संकलित किया गया है.

देश में कोई आतंक नहीं हो रहा है| सारी घटनाएँ अब्रह्मी संस्कृतियों -के मिशन और जेहाद हैं| जो एलिजाबेथ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा प्रायोजित हैं| उपनिवेशवासी पहले उपरोक्त सच्चाइयों को कहने का साहस जुटाएं| मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट है| जो सरकार चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बे नहीं बंद करा सकती, वह भारतीय संविधान प्रायोजित जिहाद और मिशन कैसे मिटा सकती है|

वस्तुतः जेहोवा या अल्लाह का अस्तित्व नहीं है| मूसा या मुहम्मद की बात करें, जिसने यहूदियों (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमानों (कुरान २:३५) को मूर्ख बनाया| मूसा और मुहम्मद तो नर्क में गए और अपना उत्तराधिकार शासकों और पुरोहितों को सौंप गए| मूसा / मुहम्मद ने यहूदियों/मुसलमानों से उनके आरोग्य, ओज, तेज, स्मृति, आदि को उनका खतना कर उनसे छीन लिया और परजीवी और मानव जाति का शत्रु बना दिया| मुसलमान मुटठी भर यहूदियों का ही कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे| ईसाई उनका शोषण कर रहे हैं| मुसलमान इसलिए जीवित हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति जीवित है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, उनका हाल ओसामा और सद्दाम जैसा होगा|

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकताईश्वर को, जो उस को सम्प्रभु आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उन के उपासना की स्वतंत्रता छीनते हैं? धूर्त मूसा रचित बाइबल के महामूर्ख जेहोवा और धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

 

 “क्या आप को मालूम है कि "नेटिव" (आदिम) शब्द का प्रयोग "नियम रहित निम्नस्तर जाति" जिनका भाग्य ही श्वेतों द्वारा शासित होता है, के अपमानजनक अर्थ में होने लगा है और आज भी जारी है। शासित देश (उपनिवेश) में लोकसेवकों (नमो) के माध्यम से शासन होता रहा है।

 “आप को (कुरान ४:८९, ५:१०१ और १०२) और (बाइबल, लूका १९:२७, व्यवस्था विवरण १३:६-११) पढ़ना चाहिए|

उपनिवेशवासियों पर शासन करना श्वेतों का उत्तरदायित्व है. एलिजाबेथ अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रही है. उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. यहाँ यह स्पष्ट कर दूं कि ईसाई कहते हैं कि बाइबल के पुराने नियम लागू नहीं हैं.

http://biblemitr.com/bible.php?BookType=NEW&BookID=49&Chapter=24

44) ईसा ने उन से कहा, ''मैंने तुम्हारे साथ रहते समय तुम लोगों से कहा था कि जो कुछ मूसा की संहिता में और नबियों में तथा भजनों में मेरे विषय में लिखा है, सब का पूरा हो जाना आवश्यक है''

http://biblemitr.com/bible.php?BookType=NEW&BookID=47&Chapter=5

17) ''यह न समझो कि मैं संहिता अथवा नबियों के लेखों को रद्द करने आया हूँ। उन्हें रद्द करने नहीं, बल्कि पूरा करने आया हूँ।

18) मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ- आकाश और पृथ्वी भले ही टल जाये, किन्तु संहिता की एक मात्रा अथवा एक बिन्दु भी पूरा हुए बिना नहीं टलेगा।

मैं उपनिवेश से मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहा हूँ. उपरोक्त लेखन का परिणाम भलीभांति जानता हूँ. अपराधी, आदिम एवं असभ्य इंडियन हूँ.

दास बनाने का क्रमिक इतिहास|

मानव जाति को वीर्यहीन कर पराजित व दास बनाने का षड्यंत्र तो मूसा ने खतना द्वारा लगभग ३२०० वर्षों पूर्व ही प्रारम्भ कर दिया था| मैकाले ने गुरुकुलों को मिटा कर उसे आगे बढ़ाया| यह संस्कृतियों का युद्ध है और इसे अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देकर नहीं लड़ा जा सकता| या तो अब्रह्मी संस्कृतियां रहेंगी अथवा वैदिक सनातन संस्कृति|

क्या नमो हमें भारत दिला देंगे?

मूसा पहला व्यक्ति था जिसने लूट, बलात्कार और हत्या को मन-गढ़न्त जेहोवा द्वारा घोषित हठधर्म बताया| मूसा ने मिस्र के मूल निवासियों और उनकी संस्कृति का विनाश कर दिया| आज उसी मिस्र से यहूदी लुप्त हो गए| नाजी मिटे, समाजवादी मिटे| दैत्य और रक्ष संस्कृतियाँ भी मिट गई| अब अब्रह्मी संस्कृतियों की बारी है| आर्यावर्त सरकार को सहयोग तो दें|

क्या मोदी खतना बंद करा देंगे?

रुडयार्ड किपलिंग जैसे लोगों ने वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी आदिमों पर शासन करने हेतु "श्वेतों का उत्तरदायित्व" के रूप में एक पुराणरूढ़ दर्शन (मिथ्) ही प्रस्तुत कर लिया है. इंडियन उपनिवेश के तो राष्ट्रगान के अनुसार ही एलिजाबेथ आज भी हम उपनिवेशवासियों की अधिनायक और भाग्य विधाता है.

इसी आधार पर "श्वेत पुरुषों के दायित्व" का सिद्धांत विकसित हुआ है। शासितों में आत्मविश्वास का लोप सामान्य बात है। फलत: सर्वमान्य विश्वास की बात ही नहीं उठ सकती। सारा शासन अप्रत्यक्ष रूप से होता रहा है। शासन की भाषा बाहर से आने पर देवनागरी लिपि एवं संस्कृतका विकास अवरुद्ध हो गया है। सरकारी पदों पर अल्पसंख्यकों की नियुक्ति का अनुपात असंतुलित किया गया है। शासन की क्रमबद्धता नष्ट होने से जनस्वीकृति, जनमत, हितरक्षा आदि असंभव हैं। विकासहीनता में शासन यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और रूढ़िवादिता एवं अनुदार परंपराओं का वह अभिभावक बन गया है।

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी हैं| हमारा कथन है कि भारतीय संविधान मानव जाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है| यदि आप अपनी, अपने देश अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ अब्रह्मी संस्कृतियों को, निजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए|

बाइबल और कुरान अपराध संहिताएं हैं भारतीय संविधान इनकी संरक्षक| इनको नष्ट करेंअन्यथा मानवजाति मिट जायेगी.

उपरोक्त तथ्यों के कारण अब्रह्मी संस्कृतियों के दानवता का मुझे आभास हुआ|

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान के गहन अध्ययन के बाद मुझे पता लगा कि येहोवा, ईसा और मुहम्मद मनुष्य को वीर्यहीन कर दास बनाने की छलरचनायें हैं| जहाँ वैदिक सनातन संस्कृति के गुरुकुलों में निःशुल्क वीर्यरक्षा की शिक्षा दी जाती है, वहीं मैकाले के स्कूल महंगी यौनशिक्षा देते हैं और मकतब कत्ल करने और नारी बलात्कार की| हम विरोध क्यों नहीं करते? मानवमात्र के मुक्ति का मार्ग गुरुकुलों का पुनर्जीवन है|

इंडिया में अब्रह्मी संस्कृतियों को ईसाई व मुस्लिम सहित सबको अपना दास बनाने अन्यथा कत्ल व नरसंहार के लिए रखा गया है|

१९९१ के बाद पहली बार मुझे पता लगा कि मैं असभ्य, असहिष्णु, अविश्वासी और काफ़िर हूँ. मैंने अपना ५८ वर्ष का जीवन बर्बाद कर दिया. खतना नहीं कराया. लव जिहाद नहीं किया. नारियों का बलात्कार नहीं किया. ईशा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. बेटी से विवाह नहीं किया और न ही पुत्र वधू से निकाह किया. दूसरों की सम्पत्ति नहीं लूटी.

तभी मुझे पता चला कि ईसाई व मुसलमान हमें सभ्यता सिखाने के लिए इंडिया में आये और रहते हैं| क्यों कि हम असभ्य भगवा आतंकवादी समलैंगिक विवाह नहीं करते| हम सहजीवन से घृणा करते हैं| हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह नहीं करते और न पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करते हैं| हमारा ईश्वर धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग नहीं देता| (बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०). सभ्य मूसा और मुहम्मद की छलरचनाओं जेहोवा और अल्लाह ने अपने सभ्य अनुयायियों को ऐसे ही अधिकार दिये हैं|

हम कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत नहीं है| ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उसने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना कर (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) छिन्न भिन्न कर दिया है|  हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| जबकि कुमारी माताएं अमेरिका और यूरोप के प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| किसी नारी को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. इस प्रकार अब्रह्मी संस्कृतियाँ प्रत्येक मनुष्य को बलिपशु बनाती हैं.

उपनिवेशवासियों से स्वतंत्रताका वादा किया गया था| उपनिवेशवासियों को एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने में लज्जा क्यों नहीं आती?

ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८ के अंतर्गत हर इंडियन, चाहे मुसलमान या ईसाई ही क्यों न हो, नागरिकता विहीन बर्तानियों की प्रजा है| क्योंकि उपनिवेशवासी बिना पारपत्र एवं वीसा के ब्रिटेन में नहीं घुस सकता.

लेकिन उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. यानी कि आप की मृत्यु हर हाल में पक्की! विरोध करें तो फांसी होगी और न करें तो ईसाई व मुसलमान कत्ल कर देंगे.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-snvidhan

भारतीय संविधान ने आप को उपासना की स्वतंत्रतादी है| लेकिन जो बपतिस्मा नहीं लेगा उसे एलिजाबेथ नर्क में भेजेगी और ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं| स्वयं अल्लाह के दास हैं| आप को दास बनाने के लिए ललकारते हैं| अपने इष्ट देवता व संस्कृति का अपमान सहन करते आप को लज्जा क्यों नहीं आती? आप को धोखा दिया जा रहा है. यानी कि ईसाइयत और इस्लाम में उपासना की स्वतंत्रता नहीं है? फिरभी पंथनिरपेक्ष और सेकुलर हैं.

आर्यावर्त सरकार उपनिवेश के विरोध में आप का सहयोग चाहती है. लेकिन आप आतंक की साया में जीवित बलिपशु हैं. अब्रह्मी संस्कृतियों का कोई विरोधी जीवित नहीं छोड़ा जाता.

क्या गुप्त सहयोग कर सकते हैं?

अभी भी समय है, बचना हो तो आर्यावर्त सरकार की शरण में आयें|

कौन हैं वे जिन्हें गांधी ने इंडिया में रोका? उनका लक्ष्य और उनकी उपलब्धियां क्या हैं? उनको पंथनिरपेक्ष यानी सेकुलर, सर्वधर्मसमभाववादी व गंगा जमुनी संस्कृति का अंग मानने का आधार क्या है?

भारतीय संविधान को इंडिया में इस्लाम और ईसाइयत के सहयोग से मानवजाति के नरसंहार के लिए संकलित किया गया है. भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम१९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), ३९(ग) दंड प्रक्रिया संहिता की धारायें १९६ व १९७ आदि. ईसाइयत, बपतिस्मा, चर्च, इस्लाम, अज़ान, मस्जिद और मदरसे राष्ट्रपति और राज्यपाल से प्रायोजित हैं|

http://www.aryavrt.com/muj16w46ay-sval-16n12y

Current Status   :         Closed (NO ACTION REQUIRED)

Date of Action    :         18 Nov 2016

Details     :         FILE

http://www.aryavrt.com/muj16w45y-dyakepatr-16n06y

Current Status   :         Closed (NO ACTION REQUIRED)

Date of Action    :         08 Nov 2016

Details     :         FILE

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

http://www.aryavrt.com/muj16w46by-krkiisima-16n12y

DARPG/E/2016/20790

Current Status   :         Closed (NO ACTION REQUIRED)

Reason    :         Others

Date of Action    :         22 Nov 2016

Details     :         Not a grievance.

क्या आप ने आतताई ईसाइयत और इस्लाम को पंथनिरपेक्ष घोषित किये जाने और इंडिया में रोके जाने का विरोध किया?

क्योंकि सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष और अल्पसंख्यक झूठे शब्द हैं.

ईसाई व मुसलमान, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं, अल्पसंख्यक कैसे हैं?

मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है, वे आतताई क्यों नहीं हैं?

क्योंकि ईसा के आदेश से ईसाई अपनी बेटी से विवाह करते हैं| (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६)

जेहोवा ने किसी भी ईसाई को धरती के किसी नारी का उसके पुरुषों के आँखों के सामने, बलात्कार का अधिकार दिया है| (बाइबल, याशयाह १३:१६). (बाइबल, लूका २४:४४) के साथ पठित.

जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते, उसका घात करने का प्रत्येक ईसाई को अधिकार है. (बाइबल, लूका १९:२७). भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाई को अपनी इस संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

जो भी बपतिस्मा नहीं लेता, संसार को पापस्थल और सबको पापी स्वीकार नहीं करता, उसे नर्क में भेजने का ईसा का वचन है.

जो लोग यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा नहीं लेते तो उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा और वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे और यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा ले लेंगे तो स्वर्ग जायेंगे और ईसा के साथ सदा रहेंगे| उनकी हत्या करना ईसाई के स्वर्ग प्राप्ति का सुगम मार्ग है.

पैगम्बरों ने वीर्यहीन कर मनुष्य के शत्रु और मित्र को पहचानने का विवेक नष्ट कर दिया है. उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का गांधी ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया. उपनिवेशवासियों का देश उपनिवेशवासियों को ९० वर्षों के लिए अंग्रेजों द्वारा किरायेदारी पर दिलवा गया. मानवमात्र की हत्या करना, जिनकी संस्कृति है, उनको पंथनिरपेक्ष घोषित कर गांधी ने रोक लिया. उनको गोमांस खाने की पूरी छूट दी. उपनिवेशवासी आज भी इसी गांधी का महिमामंडन कर रहे हैं और उपनिवेश विरोधियों को नष्ट करने की मूर्खता कर रहे हैं.

अज़ान को पंथनिरपेक्ष पूजा मानने की भूल कर रहे हैं.

मस्जिदों से प्रतिदिन ५ बार नियमित रूप से और नियमित समय पर लाउडस्पीकर पर अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण किया जाता है और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं| काफिरों को अज़ान और कलिमाद्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|”

जिस मूसा के मानसपुत्र जेहोवा ने अपने अनुयायियों को मूर्ख बनाया (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और वीर्यहीन कर दिया, (बाइबल, उत्पत्ति १७:११), वह एलिजाबेथ का सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष भगवान है! जो जेहोवा को भगवान नहीं मानता, पद, प्रभुता और पेट के लोभ में उसे नष्ट करना लोकसेवक की विवशता है.

 ‘जो बपतिस्मा नहीं लेते, उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा, वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे|’ कहने वाले सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष कैसे है?

इस्लाम ने ईश्वर को अपूज्य घोषित कर दिया है| (अज़ान). मात्र अल्लाह पूज्य है’, (अज़ान, कुरान ३:१९), कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? क्योंकि कुरान के अनुसार दीन तो अल्लाह की दृष्टि में मात्र इस्लाम ही है| (कुरान ३:१९)और जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...” (कुरान ३:८५).

मस्जिदों से ई० सन ६३२ से ही होने वाली अज़ान यानी ईशनिंदा और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? अज़ान और खुत्बे साम्प्रदायिक सद्भाव कैसे लाते हैं?

मात्र अल्लाह पूज्य है और मात्र ईसा ही धरती का राजा हो सकता है, कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? हमें एलिजाबेथ की दासता के लिए विवश क्यों किया जा रहा है?

कृपया मुझे बताएं कि एलिजाबेथ की सरकार अज़ान लगाने वाले ईमामों के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत अभियोग चलाने की अनुमति कब देगी? काफिरों के आस्था का अपमान कब बंद होगा? काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे कब बंद होंगे?

काफ़िर मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे क्यों होने दे रहे हैं?

जी हां काफ़िर कम्युनल हैं. सेकुलर मुसलमान और ईसाई काफिरों के आस पास क्यों रहते हैं?

आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता| उसका कोई रंग नहीं होता. ऐसा प्रचारित किया जाता है| सितम्बर २०१३ पाकिस्तान में चरमपंथियों ने चर्च पर हमला कर सैकड़ों लोगों को मार दिया, केन्या (नेरोबी) में अलजवाहर के इशारे पर (मुंबई हमले के तर्ज पर ) एक शापिंग मॉल में लोगों को मुस्लिम आतंकवादियों ने बंधक बनाया और उनका धर्म पूछ-पूछ कर हत्याएं कीं, कश्मीर घाटी से हिंदुओं का पलायन करा कर पहले ही खाली कराया जा चुका है| फिर भी हमारे सेकुलर नेता शुतुरमुर्ग की तरह सच्चाई से मुँह छुपा कर यह बयान कब तक देते रहेंगे कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता| क्या इस कथन में कोई सच्चाई है? क्या यही कारण नहीं है कि आतंकवाद से लड़ने के सभी प्रयास असफल रहे हैं? जब तक समस्या की जड़, उसकी मानसिकता और स्रोत पर प्रहार नहीं होगा - सफलता नहीं

एलिजाबेथ सरकार ने अपने जहरीले दांत इंडिया में गाड़ दिए हैं| जब तक मुसलमान मंदिर तोड़ रहे हैं, कश्मीरी हिंदुओं को उजाड़ रहे हैं, काफिरों की सम्पत्तियों और नारियों का उपभोग रहे हैं, काफिरों के ईष्ट देवों और वैदिक सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं. अज़ान लगा रहे व नमाज़ पढ़ रहे हैं, भारतीय व इस्राएली सैनिकों पर हमले कर रहे हैं और इस्राएल व कश्मीर मांग रहे हैं, एलिजाबेथ उसे जिहाद मान रही है, लेकिन ज्यों ही मुसलमानों ने विश्व व्यापार केन्द्र और लन्दन की यातायात सेवाओं पर हमला किया, ईसाई नारियां लूटीं, अमेरिकी सैनिकों पर हमले किये और अमेरिका और ब्रिटेन माँगा, वे ही मुसलमान आतंकवादी हो गए| कश्मीर व इस्राएल पर समझौता करने के लिए अमेरिका और राष्ट्रसंघ तत्पर है, अल्लाह ने सारी दुनिया मुसलमानों को दे दी है| अल्लाह ईसाइयों का सेकुलर भगवान भी है, फिर ईसाई मुसलमानों को अमेरिका क्यों नहीं दे देते?

सेकुलर कौन है?

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| फिर अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी सेकुलर कैसे हैं?

अज़ान में भारतीय संविधान की उद्देशिका में उल्लिखित काफ़िर के उपासना की स्वतंत्रता कहाँ है? तथाकथित धर्म/पंथनिरपेक्षता कहाँ है? सर्वधर्मसमभाव कहाँ है? गंगा-जमुनी संस्कृति कहाँ है?

मै या किसी भी धर्म के अनुयायी ऐसा सोच भी नहीं सकते. मै अपने धर्म के प्रति उदासीन प्रयास करने पर भी नही हो सकता - मै किसी दूसरे धर्म के प्रति भी उदासीन नही हो सकता -- क्योकि वे हमारे समाज के ही अंग है -- उनको व्यवधान न हो, इसलिये उनके प्रति उदासीन नहीं हो सकता -- फ़िर धर्म-निरपेक्षता कैसे संभव है? देश भी धर्म-निरपेक्ष नहीं हो सकता. क्योकि सब धर्मो के लिये उचित व्यवस्था करना देश का कर्तव्य है -- देश उदासीन नहीं हो सकता -- फ़िर सच क्या है? गोल मोल बात करने से ग़लत सही नही हो सकता -- धर्म-निरपेक्षता संभव नहीं है -- इसलिये मै कहता हूँ कि भारतीय संविधान ग़लत है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५ का उल्लेख है. प्रश्न संविधान की ग़लत व्याख्या से संबंधित है. भारतीय संविधान में समानता की बात लिखी है -- आरक्षण समानता के विरुद्ध है. वह संवैधानिक कैसे हो गया? मजे की बात है कि वह भी संवैधानिक है -- अर्थात सविधान में कुछ ऐसा है कि असमानता संवैधानिक है यदि असमानता संवैधानिक है तो अनुच्छेद १५ दिखावा है - मात्र किताबी बात है. इसलिये मैंने कहा कि भारतीय संविधान ही ग़लत है ? लोग धर्म - निरपेक्ष शब्द का उपयोग करते हैं -- विनम्रता पूर्वक कहूँगा कि धर्म-निरपेक्ष का अर्थ सर्वधर्मसमभाव नही होता -- इंडिया के किसी भी भाषा-बोली में निरपेक्ष का अर्थ सम भाव नही होता. निरपेक्ष का अर्थ है किसी और की कोई अपेक्षा न कराने वाला -- धर्म-निरपेक्ष का मतलब हुआ हमारा संविधान किसी धर्म से कोई अपेक्षा नही करता-निरपेक्ष का अर्थ अपने ऊपर अवलम्बित --किसी के सहारे की जरुरत नही -- आशा तृष्णा से मुक्त उदासीन -- क्या मै अपने धर्म से उदासीन हो जाऊ? क्या मै धर्म से कोई अपेक्षा न करु? मै या किसी भी धर्म के अनुयायी को संविधान संशोधन के लिये संसद का सदस्य बनना पड़ता है. पर वहाँ पर हमने कुछ बंदरो को बैठा रखा है, जो ख़ुद तो कुछ करते नही है और दूसरों को करने भी नही देते है. संविधान ने विधायिका को चुनने का हमे एक विवेकपूर्ण काम दिया पर हमने उसे पूरा करने की बजाय मुँह मोड़कर बैठ गए और अब दोष संविधान पर डाल रहे है जिसका कभी हमने क ख ग भी नही पढ़ा. अब जब कर्म किए है तो फल भी भोगने पड़ेंगे. आज आप अपने आस पास नजर दौड़ा कर देखेगे तो कितने लोग अपने कर्तव्य का पालन करते है|

हम अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधी हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| काबा हमारी है| अज़ान गाली है| कुरान सारी दुनियां में फुंक रही है| हम अज़ान यानी ईशनिंदा और जातिसंहार से मुक्ति के लिए इस्लाम का उन्मूलन करने के लिए आप का सहयोग चाहते हैं| हम धरती पर एक भी मस्जिद नहीं रहने देना चाहते| क्यों कि मस्जिदों से ईमाम मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं| हमारी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को, भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन, आत्म रक्षा के अधिकार के प्रयोग के लिए दंडित किया जा रहा है| हम साध्वी की मुक्ति के लिए आप से सहयोग चाहते हैं|

पीठ पीछे युद्ध या हमले की वैदिक सनातन धर्म अनुमति नहीं देता| अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया से निकालें| एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिसमें मैकाले को एक भी चोर या भिखारी नहीं मिला और दूसरी ओर ब्रिटिश इंडियन उपनिवेश, जिसमे सभी चोर और भिखारी हैं|

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिस व्यवस्था में महाराज अश्वपतिने कहा था

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

दूसरी ओर ब्रिटिश उपनिवेश है, जिसमें कुमारी माँ मरियम वन्दनीय है और मरियम की अवैध सन्तान ईसा ईश्वर का एकमात्र पुत्र, जो स्वयं को शूली पर चढ़ने से न बचा सका, सबका मुक्तिदाता है| जिसमे कोई नारी सुरक्षित नहीं| अब्रह्मी संस्कृतियों ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६).

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिसके राम चरित मानस की पंक्तियाँ उद्धृत कर रहा हूँ,

अनुज बधू भगिनी सुत नारी| सुनु सठ कन्या सम ए चारी|

इन्हहिं कुदृष्टि बिलोकइ जोई| ताहि बधें कछु पाप न होई||”

राम चरित मानस, किष्किन्धाकाण्ड; ;

अर्थ: [श्री रामजी ने कहा] हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्रवधू और कन्या ए चारों समान हैं| इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता|

और दूसरी ओर अब्रह्मी संस्कृतियां जिनमें बेटी व पुत्रवधू से विवाह की छूट है| कुमारी माएं प्रायः घर घर मिलती हैं|

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

http://www.aryavrt.com/muj13w51a-yaun-shoshan

http://www.aryavrt.com/antim-manav

जो उपलब्धि इस्लाम ई० स० ७१२ से ई० स० १८३५ तक अर्जित न कर सका, गुरुकुल मिटा कर उससे अधिक ईसाइयत ने मात्र ई० स० १८५७ से ई० स० १९०५ के बीच अर्जित कर लिया| और जो सोनिया ने अपने १० वर्षों के काल में अर्जित किया है, उसे तो मैकाले सोच भी नहीं सका| बेचारा समलैंगिक सम्बन्ध को अपराध घोषित कर दुनिया छोड़ गया|

क्या आप अपनी पत्नी, बहन या कन्या को व्यभिचार करने से विधिवत रोक सकते हैं? आप ने कठोरता की तो? आप घरेलू हिंसा अधिनियम, २००५ के अंतर्गत जेल में होंगे| वह भी पड़ोसी के एक फोन पर|

विकल्प मात्र उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्ध है| मैने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}.

वैदिक सनातन संस्कृति के बचने के हर मार्ग अवरुद्ध कर दिये गए हैं| आप को वीर्यवान बनाने के शिक्षा केन्द्र गुरुकुलों को नष्ट कर दिया गया| आप आत्मरक्षा के लिये शस्त्र भी नहीं रख सकते| यदि आप स्वयं का एवं मानव जाति का भला करना चाहते हों तो गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करने, प्रजा को सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देने और वैदिक सनातन धर्म की आधार शिलाओं गौ, गुरुकुल, गायत्री व गंगा की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिये| हम बैल आधारित खेती और गो वंश की वृद्धि को प्रोत्साहित करेंगे| इन को मिटाया जा चुका है| हम पुनः इंडिया को सोने की चिड़िया भारत बना देंगे|

एक ओर ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर (अ)ब्रह्मिक संस्कृति| ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति वीर्यरक्षा यानी मानव के आरोग्य, ओज, तेज, स्मृति और परमानंद की प्राप्ति के लिये निःशुल्क गुरुकुल चलाती थी और (अ)ब्रह्मिक संस्कृति महँगी शिक्षा व्यवस्था लाद कर खतना और यौनशिक्षा द्वारा मानवमात्र को वीर्यहीन कर (किसान की भांति सांड़ से बैल बना कर) दास बना रही हैं|

पहले उपनिवेश से मुक्ति लीजिए| यदि न मिले तो शक्ति अर्जित करिये| इसके लिए गौ, आचार्य और गुरुकुल चाहिए| अतएव यौनशिक्षा देने वाले मैकाले के स्कूलों का बहिष्कार कीजिए| अपने संतानों को संस्कार देकर वीर्यवान ब्रह्मचारी बनाइए| अन्याय करने वाले से बड़ा अपराधी अन्याय को सहन करने वाला होता है|

शारीरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत वीर्य है| सन १८३५ तक हमारे यहाँ ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य था| तभी तक भारत सोने की चिड़िया बना रहा| ब्रह्मचर्य के शिक्षा केन्द्र गुरुकुल और शिक्षक दोनों समाज पर आश्रित थे| राज्य किसी का हो विद्या निर्बाध गति से चलती रहती थी| वह भी निःशुल्क| किसान को सांड़ को दास बना कर खेती के योग्य बैल बनाने के लिए सांड़ का बंध्याकरण करना पड़ता है| लेकिन आप गुरुकुल का ब्रह्मचारी बनाने के स्थान पर महंगे स्कूलों में अपने बच्चों को यौन शिक्षा दिला रहे हैं| ताकि वह नपुंसक बन कर एलिजाबेथ की दासता करे|

 

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सत्ता के शीर्ष पर मनोनीत राज्यपाल उपनिवेशवासियों द्वारा चुने प्रतिनिधि नहीं होते. फिर भी उपनिवेशवासियों द्वारा चुनी हुई किसी सरकार को मिनटों में गिरा देते हैं.

मनोनीत न्यायाधीश राज्यपालों के माध्यम से दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन एलिजाबेथ से शासित हैं.

१८ जुलाई, १९४७ से आजतक मुझे एक भी उपनिवेश विरोधी का ज्ञान नहीं है. जब कि एक से बढ़ कर एक कानूनविद धरती पर पैदा हुए, जिनको भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम१९४७का पूरा ज्ञान रहा, लेकिन किसी ने उपनिवेश, कुरान, बाइबल और भारतीय संविधान का विरोध कभी नहीं किया.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

हमारे यहाँ एक कहावत है, “रात भर सोहर भईल (पुत्र जन्म के उत्सव में गाए जाने वाले गीत) बिहाने (प्रातःकाल) देखलीं (देखा) त बाबू (शिशु) के छुन्निये (penis) नाहीं इंडिया आज भी एलिजाबेथ का स्वतंत्र? उपनिवेश है और एलिज़ाबेथ तंत्र लागू है. फिरभी सत्ता हस्तान्तरण के बाद से ही उपनिवेशवासी १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने के लिए विवश हैं.

इतना ही नहीं उपनिवेश से मुक्ति का प्रयत्न भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

मुझे आज तक कोई यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि इंडिया को उपनिवेश बनाने और इंडिया और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र उपनिवेशों में बांटने का ब्रिटेन को अधिकार कैसे था?

लेकिन मात्र पाठक ही नहीं, ब्रिटेन का हर उपनिवेशवासी बलिपशु है. बलि का बकरा मैं मैं तो कर सकता है, लेकिन स्वयं को बलि चढ़ने से नहीं बचा सकता. कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता. बधिक को बकरे को बलि चढाने में अपराधबोध नहीं होता.

ईसाई व मुसलमान सहित किसी उपनिवेशवासी के पास जीवित रहने का अधिकार नहीं है. बाइबल, लूका १९:२७ और कुरान २:१९१-१९४. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित.

सत्ता के हस्तानान्तरण की पहली शर्त ही इस्लाम का दोहन है. इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है| अंग्रेजों ने पाक पिता गांधी द्वारा वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए मुसलमानों और ईसाईयों को इंडिया में रखवाया है.

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

गांधीवध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर उपनिवेशवासियों पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. वह भी अत्यंत धूर्तता से. यह अनुच्छेद इस कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है. हमारा साम्राज्य पूरे विश्व में था, आज हमारा कोई देश नहीं है.

एलिजाबेथ के बाइबल के अनुसार, स्वयं को स्वतंत्र मानने वाले उपनिवेशवासियों के पास जीवित रहने का अधिकार नहीं है. "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७).

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| "तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी रहे. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद यानी काफिरों की हत्या करने का असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार है| (भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)). 

जो भी उपनिवेश, बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करेगा, भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन उसकी फांसी होगी. भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन जेल जायेगा. उस पर मकोका अथवा रासुका लगेगी; वह भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल की संस्तुति पर. ईसाई व मुसलमान उसको कत्ल करेंगे. पुलिस की पिटाई करेंगे. थाना फूंकेंगे. वाहन जलायेंगे. दुकानें लूटेंगे. फतवे जारी करेंगे. लेकिन क्या मजाल कोई मुसलमान बंदी बना दिया जाये.

मस्जिदों से प्रसारित की जाने वाली अज़ान ईशनिंदा है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

मात्र पाठक ही नहीं, जो भी उपनिवेश विरोधी नहीं है, दया के पात्र हैं| उपनिवेशवासियों ने अपने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ व ३९(ग). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान २:१९१, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| [(बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:६)]. इसके बदले में एलिजाबेथ का ईसा उपनिवेशवासियों को अपनी बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह का व अल्लाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार दे चुका है| जहां भारतीय संविधान ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीँ वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है| यद्यपि असली अल्पसंख्यक सनातनी हैं|

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदेश सरकारों को तो गोडसे समर्थकों पर कानूनी कार्यवाही करने का सुझाव दे दिया. लेकिन एन आई ए उनके अधीन है और दिल्ली पुलिस भी. हम मालेगांव बम धमाकों के आरोपी हैं. २००८ से एलिजाबेथ सरकार ने हमें तबाह कर रखा है. जिसके दो कारण हैं. पहला हम मस्जिद, जहां से काफिरों को कत्ल करने के खुत्बों का और अज़ान का प्रसारण किया जाता है, के विरोधी हैं और दूसरा हमने उपनिवेश के विरोध में आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. हम जानना चाहते हैं कि मस्जिद में विष्फोट और उपनिवेश का विरोध अपराध कैसे है?

मैं जान सकता हूँ कि किस आधार पर जजों ने कन्हैया को जमानत दे दी और हमें जेलों में बंद कर रखा है? क्यों कि प्राइवेट प्रतिरक्षा और आजादी का हमे अधिकार है.

लेकिन उपनिवेशवासी के वश में कुछ नहीं है. उपनिवेशवासी मोहरे हैं. लोकसेवक और जजों के कंधे पर रायफल रख कर गोली एलिजाबेथ चलवा रही है. विस्तृत विवरण देने का, अपनी योग्यता अनुसार, प्रयत्न बाद में करूँगा, लेकिन मुझे प्रमाण मिल गया कि

मस्जिदों से, नियम से प्रतिदिन ५ बार ईमाम/मुअज्जिन अज़ान द्वारा प्रसारित करता है कि गैर मुसलमान काफ़िर हैं| काफ़िर अपने ईष्टदेवों की उपासना नहीं कर सकते| ईमाम मस्जिदों से मुसलमानों को शिक्षा देता है कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं और काफिरों को कत्ल करने से मुसलमानों को जन्नत मिलेगी| लेकिन मस्जिद अपराध स्थल नहीं माने जाते. अज़ान और खुत्बों के प्रसारण से कोई अपमानित नहीं होता. किसी को भी असहिष्णुता नहीं दिखाई देती. आज तक कोई भयभीत नही हुआ. किसी ने भी देश छोड़ने का मन नहीं बनाया. किसी ने अपने पुरष्कार वापस नहीं लौटाए. किसी के आस्था को ठेस नहीं लगती. मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों को पुलिस संरक्षण में प्रसारित किया जाता है. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से अज़ान देने वालों को काफिरों के कर से वेतन दिया जाता है.

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन, मालेगांव के मामले सहित, मेरे विरुद्ध ५० अभियोग चले. ३ आज भी लम्बित हैं. ४२ बार जेल गया हूँ| साध्वी प्रज्ञा सहित मेरे ९ सहयोगी बिना आरोप सन २००८ से जेलों में बंद हैं| लेकिन कोई भी मनुष्य कत्ल करने और सम्पत्ति के अधिकार छीनने वाली अब्रह्मी संस्कृतियों और उपनिवेशवासी के गले पर रखी तलवार, भारतीय संविधान, पर ऊँगली उठाने का साहस नहीं करता है| हमने साहस किया है और हम उन्हीं लोगों द्वारा दंडित हो रहे हैं जिनके लिए हम लड़ रहे हैं| फिर भी आज तक ईसाइयत और इस्लाम को नहीं मिटा पाया.

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये गए अपराध राज्य के विरुद्ध अपराध हैं, जिनका नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है. राज्यपाल का मनोनयन मनुष्य के पुत्र का मांस खाने लहू पीने वाली डायन (बाइबल, यूहन्ना :५३) एलिजाबेथ के मातहत और उपकरण करते हैं. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का संकलन हर उस व्यक्ति को कत्ल कराने, उसका मांस खाने और लहू पीने का डायन एलिजाबेथ को सुगम मार्ग प्रशस्त करता है, जो ईसा को राजा नहीं स्वीकार करता. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित (बाइबल, लूका १९:२७). सन १८६० में उपरोक्त २ धाराएँ लागू हुई थीं, लेकिन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के प्रभाव के कारण आज तक बपतिस्मा, चर्च, अज़ान और मस्जिद पर लागू नहीं की गईं.

उल्टे काफिरों के कर के धन से अज़ान द्वारा काफिरों के ईश्वर का अपमान करने और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे देने के बदले मुअज्जिन/ईमाम वेतन पाते हैं. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). कोई जज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई ही नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

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ईशनिंदा के अपराध में कमलेश तिवारी पर रासुका भी लगी है और अब तक उनका सर कलम कर लाने वाले को ४१ करोड़ रु० देने का फतवा जारी हो चुका है. लेकिन काफिरों के ईष्टदेवों के निंदक मुसलमान और बपतिस्मा दिलाने वाले ईसाई आजतक अभियुक्त नहीं बने!

ईशनिन्दक के लिए ईसाइयत और इस्लाम में मृत्यु दंड निर्धारित है. मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इन कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद से आज तक मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं की गईं. षड्यंत्र स्पष्ट है वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है. जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है, वहीँ ईशनिंदा के विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत प्रताड़ित किया जा रहा है. कमलेश तिवारी तो रासुका में बंद हो गए. क्योंकि एलिजाबेथ को उपनिवेशवासियों को धरती से समाप्त करना है. उनको फांसी देने की मांग के लिए पुलिस की पिटाई हो चुकी है. थाना फूंका जा चुका है. राष्ट्रपति और राज्यपाल लाचार हैं.

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है और अब कमलेश तिवारी ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय, जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है.

एलिजाबेथ को उपनिवेश के वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को कत्ल करना है क्यों कि उपनिवेशवासियों के पूर्वजों ने ईशा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया (बाइबल, लूका १९:२७ के साथ पठनीय) भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१). राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये जाने वाले अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं.

मस्जिदों, जहां से मुसलमान काफिरों के ईष्ट देवों और वैदिक सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं. अज़ान लगा रहे व नमाज़ पढ़ रहे हैं, के लाउडस्पीकर नहीं उतारे जाते. क्यों कि अज़ान, नमाज़ और खुत्बे पंथनिरपेक्ष माने जाते हैं और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार प्राप्त है.

इनके विपरीत मंदिरों, जहां से घोषणा की जाती है, धर्म की जय हो| अधर्म का नाश हो|| प्राणियों में सद्भावना हो... विश्व का कल्याण हो...|” के लाउडस्पीकर पुलिस उतरवा देती है. क्योंकि ऐसा कहना साम्प्रदायिक है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() से प्राप्त अधिकार से अपने मजहब का पालन करते हुए ईसाई न्यायिक जांच (Inquisition) और बपतिस्मा में लिप्त है और मुसलमान अज़ान और खुत्बों में. विरोधी कत्ल हो रहे हैं और रासुका में जेल जा रहे हैं. पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपाल, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, ईसाई व मुसलमान को, भारतीय संविधान और कानूनों द्वारा संरक्षणपोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

लेकिन वेदों के अनुसार आत्मा अजर अमर है. संभाजी, बंदा वैरागी आदि की भांति मैं मरूंगा नहीं.

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय.

नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि.

तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-

न्यन्यानि संयाति नवानि देही ।।गीता २:२२।।

जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रोंको त्यागकर दूसरे नये वस्त्रोंको ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरोंको त्यागकर दूसरे नये शरीरोंको प्राप्त होता है । ।।गीता २:२२।।

इंडिया में ईशनिंदा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दण्डनीय अपराध है. दोनों धाराएँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, इंडियन उपनिवेश [भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता] की स्वामिनी एलिजाबेथ के दासों राष्ट्रपति, राज्यपाल या जिलाधीश, द्वारा नियंत्रित है. बिना दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश की संस्तुति के जज भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोगों की सुनवाई नहीं कर सकता. एक बार अभियोग किसी जज के पास चला जाये, तो मामला न्यायालय के विचाराधीन हो जाता है, जिसके निर्णय की कोई सीमा नहीं है.

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया हैभारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६० व १५९ और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ द्वारा जिन अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं|

अब ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रही हैं| इनसे अपनी मुक्ति का मार्ग ढूंढिए.

मैं आर्यावर्त सरकार का संस्थापक हूँ और आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को इसलिए मिटाना चाहता हूँ कि ए संस्कृतियां मानव मात्र को वीर्यहीन यानी ईश्वर विहीन करके अपने अनुयायियों सहित सबको दास बनाकर उपासना की स्वतंत्रता का परित्याग करने के लिए विवश करती हैं|

इंडिया, जो भारत है, कभी स्वतंत्र नहीं हुआ. आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है. लेकिन १५ अगस्त १९४७ से आज तक किसी हिंदू या मुसलमान ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध नहीं किया| किसी मौलवी ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध फतवा नहीं दिया और न कोई तालिबानी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध लड़ा. सब ने अपने आश्रय दाता वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के साथ विश्वासघात किया| किसी हिंदू या मुसलमान के पास एलिजाबेथ का विरोध करने का साहस नहीं है| क्योंकि उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस कानून के संरक्षणपोषण व संवर्धन करने के लिए, पद, प्रभुता व पेट के लोभमें, राष्ट्रपति व राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| यानी कि उपनिवेश का विरोध किया नहीं कि राष्ट्रपति और राज्यपाल विरोधी को फांसी दिलवाने के लिए विवश हैं.

अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं. कोई जज कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

चर्च से बपतिस्मा व मस्जिद से अज़ान और खुत्बे के प्रसारण (भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन) अपराध हैं. लेकिन राज्यपाल मुसलमानों पर अभियोग नहीं चला सकते.

बिना दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश की संस्तुति के जज भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोगों की सुनवाई नहीं कर सकता. जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है, वहीँ ईशनिंदा के विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीड़ित किया जा रहा है| लेकिन जेहोवा, उसका एकलौता पुत्र ईसा और अल्लाह अपराधी नहीं हैं. क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है|

किसी का भी उपासना स्थल सुरक्षित नहीं| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. ईसाई व मुसलमान जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटें| [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)]. वह भी भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल और न्यायपालिका के संरक्षण में! किसी का जीवन सुरक्षित है। जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)} वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण में|

इतना ही नहीं! अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये जाने वाले अपराधों को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल, पद, प्रभुता और पेट के लोभ में, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ लेने के लिए विवश हैंइन्हीं धाराओं के अधीन मेरे विरुद्ध उपरोक्त धारा १९६ को लागू कर अब तक मेरे विरुद्ध ५० अभियोग चले| ५ आज भी लम्बित हैं|

मुहम्मद के कार्टून बनाने पर ईशनिंदा के लिए मौत का फतवा देने वाले मूर्ख मुसलमान (कुरान २:३५), वैदिक सनातन धर्म का और ईश्वर का, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, राष्ट्रपति/राज्यपाल द्वारा दिए गए संरक्षण में, भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध करते हैं और एलिजाबेथ के मातहत उनका संरक्षणपोषण व संवर्धन करते हैं.

क्या होता है, जब कोई जज अल्लाह, इस्लाम, कुरान, बाइबल, बपतिस्मा, धर्मान्तरण, नारी बलात्कार आदि के विरुद्ध कार्यवाही कर दे?

न्यायमूर्ति खस्तगीर, कलकत्ता कुरान पेटिशन में कारण बताओ नोटिस देने के कारण मुख्य न्यायाधीश न बन सकीं.

एम एम जिले सिंह लोहाट को कुरान पर टिप्पणी करने के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी.

एम एम एम एस रोहिल्ला को बुखारी के विरुद्ध एनबीडब्लू जारी करने के कारण नौकरी गवानी पड़ी.

इसके अतिरिक्त विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://intellibriefs.blogspot.in/2005/02/imam-and-shankaracharya-not-rule-of.html

उपनिवेशवासी ने अपने पूजा स्थल रखने के अधिकार गवां चुके हैं. [(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३)] गवां दिए हैं| भारतीय संविधान, अनुच्छेद ३९(ग)] और उपासना की स्वतंत्रता (अज़ान, कुरान ३:१९) गवां दी है|

अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी वैदिक सनातन धर्म और वैदिक राजतंत्र को स्वीकार नहीं कर सकते| अतएव इन संस्कृतियों को धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं है| इमाम अज़ान, नमाज़ और खुत्बों द्वारा प्रतिदिन पाठक व विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी अविश्वासियों के हत्या कीनारियों के बलात्कार कीलूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैंराष्ट्रपति ओबामा सहित सभी लोगों ने भय वश नहींबल्कि मानवमात्र को दास बनाने के रणनीति के अंतर्गतअपना जीवनधननारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैं|

ई०स० ६३२ से आज तक इस्लाम और मस्जिद का एक भी विरोधी सुरक्षित अथवा जीवित नहीं हैचाहे वह आसमा बिन्त मरवान होंया अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी होंया तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैंविशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

 

जानते हैं क्यों?

सत्ता के हस्तांतरण के दिन, यानी १५ अगस्त, १९४७ को, इंडिया पर एक पैसा विदेश कर्ज नहीं था और खजाने में १५५ करोड़ रूपये थे| आज प्रति व्यक्ति ८६००० रूपये से अधिक का कर्जदार है| एलिजाबेथ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से उपनिवेशवासियों की जमीनें और जमींदारी लूटी| सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे| अब लूटने के लिए विदेशों से ५००० हजार से अधिक कम्पनियां बुला ली हैं| एक ईस्ट इंडिया कम्पनी को इंडिया आज तक झेल रहा है| अभी भी मुक्ति नहीं मिली है| ए कम्पनियां उपनिवेशवासियों का क्या हाल करेंगी?

राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षणपोषण व संवर्धन में! उपनिवेशवासी अपना पूजास्थल, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या किसी उपनिवेशवासी को लज्जा नहीं आती? क्या कोई उपनिवेशवासी विरोध कर सकता है?

जो लोग कहते हैं कि मात्र बपतिस्मा लेने वाला मुक्ति पा सकता है और मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है, वे पंथ निरपेक्ष हैं. लेकिन जो लोग कहते हैं कि सभी धर्म ईश्वर तक पहुँचने के अलग अलग मार्ग हैं, वे साम्प्रदायिक हैं.

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विश्वास

मैं महात्मा बुद्ध के कथन को उद्धृत करता हूँ,

“किसी के कथन अथवा लेखन पर, उसे आप ने चाहे जहां से पढ़ा या सुना हो, यहाँ तक कि मेरे कथन पर भी, तब तक विश्वास न करो, जब तक उस कथन से आप अपने तर्क और विवेक की कसौटी से सहमत न हों|”

ठीक इसके विपरीत,

ईसाइयत और इस्लाम की नीवं ही विश्वास पर आधारित है.

ईसाई चर्चों से घोषित करते हैं, “बाइबल, रोमियों ५:८ के अनुसार, “अपने पुत्र की मृत्यु के द्वारा परमेश्वर ने अपने प्रेम को हमारे लिए प्रदर्शित किया।यीशु मसीह को हमारे लिए क्यों मरना पड़ा? क्योंकि वचन बताता है कि सभी मनुष्य पापी हैं। पाप करनेका अर्थ है निशान को खोना। बाइबिल बताती है, सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा (सम्पूर्ण पवित्रता) से रहित हैं रोमियों ३:२३। अन्य शब्दों में, हमारे पाप हमें परमेश्वर से दूर करते हैं जो कि सम्पूर्ण पवित्र है धर्मी और न्यायी, तथा इसीलिए परमेश्वर को पापी मनुष्य का न्याय करना उचित है।

मुसलमान इनसे भी आगे हैं| (कुरान :३५) वे हत्यारे, लूट के स्वामी प्रोत्साहक, नारियों का बलात्कार कराने वाले अल्लाह को ईश्वर मानते हैं| बिना प्रमाण विश्वास करते हैं कि मुहम्मद अपने घोड़े बुरॉक पर सवार हो सातो (?) आसमान चीर कर अल्लाह से स्वर्ग में मिल आया| अल्लाह (इसे शासकों पढ़ें) की दासता के लिए वे मानव बम बन रहे हैं|

मुसलमान विश्वास करते हैं कि जो जघन्य अपराधी अल्लाह पर विश्वास नहीं करता, उसको कत्ल कर देना ही उस पर रहम करना है| जिहाद यानी लूट, हत्या बलात्कार स्वर्ग प्राप्ति का एक मात्र उपाय है| जब तक विश्वासी झूठ से घिरे रहेंगे, वे सत्य का सूर्य देख सकेंगे| आज तक पादरियों, पुरोहितों, मौलवियों और इमामों ने उन्हें यही झूठ बताया है कि मात्र ईसा मुक्तिदाता है और अल्लाह ही जन्नत दे सकता है| वे या तो प्रभु इशु की भेंड़े बन जाएँ अथवा मुजाहिद| मुसलमान और ईसाई बुरे नहीं हैं, उनको बुरा अब्रह्मी संस्कृतियां बना ही हैं| जो जितना ही अधिक कट्टर मुसलमान और ईसाई है, वह उतना ही मानवद्रोही, खून का प्यासा, बलात्कारी और दास है| उनके धर्मों के विकास का आधार ही घृणा, हत्या, बलात्कार और लूट है|

और

वैदिक सनातन संस्कृति की मान्यता है कि यदि पाठक का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि पाठक का स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया| लेकिन यदि पाठक का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया| इसके विपरीत भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है। सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१), (अब २०.६.१९७९ से लुप्त) व ३९ग]. अब्रह्मी संस्कृतियों में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिए| दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| ८:३९. आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है| किसी भी नारी का बलात्कार कीजिए| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं - बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कीजिए| अल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता है| किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)]. किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है। जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). अज़ान द्वारा ईशनिंदा कीजिये और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दीजिए| बदले में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी खजाने से वेतन देने का आदेश दे रखा है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). इतना ही नहीं हज अनुदान के लिए भी कानून बना रखा है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/).

परमेश्वर बनाम जेहोवा और अल्लाह

जेहोवा और अल्लाह का अस्तित्व नहीं...

जेहोवा का कहना है कि धरती चपटी है और चार खम्भों पर टिकी है. जो जेहोवा धरती को चार खम्भों पर टिकी बताता है, उसने धरती ६ दिनों में बना डाली.

http://www.answering-christianity.com/earth_flat.htm

धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

जिस अल्लाह को यह भी नहीं मालूम कि सूर्य कभी डूबता नहीं, (कुरान १८:८६) वह सर्वज्ञ कैसे है?

परमेश्वर का किसी भी देवता से बैर नहीं है.

उसकी पूजा करिये या नहीं वह आप को कत्ल नहीं करता.

उपासना की स्वतंत्रता मात्र वैदिक सनातन धर्म में है|

यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रध्यार्चितुमिच्छति| तस्य तस्याचलां श्रधां तामेव विदधाम्यहम||

जो जो भक्त जिस जिस देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करना चाहता है, उस-उस देवता के प्रति मै उसकी श्रद्धा को दृढ़ कर देता हूँ| (गीता :२१)

अब्रह्मी संस्कृतियाँ अपने अनुयायियों की ही शत्रु हैं. क्योंकि  

क्या पाठक जानते हैं?

विवेकवान के लिए स्वर्ग में कोई स्थान ही नहीं है

यह मैं नहीं कहता, बाइबल और कुरान कहते हैं.

जबकि मनुष्य को परब्रह्म द्वारा अपनी सारी शक्ति वीर्य/रज के रुप में दी गई है। वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, वह शक्ति है, जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्यहीन व्यक्ति दास है.

मुझे पता चल गया कि परमेश्वर हिंदू, ईसाई व मुसलमान आदि में भेद नहीं करता. आइये अब स्वर्ग का विश्लेषण करते हैं.

किसान को सांड़ को वीर्यहीन कर दास (बैल) बनाने के लिए उसका बन्ध्याकरण करना पड़ता हैअब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी स्वेच्छा से गाजे बाजे के साथ खतना करा कर दास बनते हैं विश्वामित्र के प्रचंड शक्ति को नियंत्रित करने के लिए इंद्र ने एक भी सैनिक नहीं भेजा, मात्र मेनका को भेज दिया. अब्रह्मी संस्कृति के पैगम्बरों मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६ व ७०:३०) की छलरचनाओं, जेहोवा और अल्लाह ने नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०) दे दिया है और धरती की सभी नारियां अपने अनुयायियों को सौंप दी हैं. पैगम्बरों के अनुयायियों के रहते धरती की कोई नारी सुरक्षित नहीं|

 

क्या ईसाईयों व मुसलमानों ने कभी सोचा?

ब्रह्म बनाम पापी या काफ़िर.

परब्रह्म यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. बाइबल के वचन के विरूद्ध मनुष्य जन्मना पापी नहीं है. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वाराउसके जन्म के साथ ही दिया गया, ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोत, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्मअष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, सर्वशक्तिमानसर्वज्ञसर्व-व्याप्तवह शक्ति है जिससे सब कुछयहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं।  वीर्यवान को पराजित या अधीन नहीं किया जा सकता हैमनुष्य की छोड़ियेवीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता और न बांधा ही जा सकता है|

सिंह का कोई संगठन नहीं होता और न ही सिंह किसी दूसरे सिंह को रहने देता है, तथापि, वीर्यवान होने के कारण, पूरे जंगल पर राज्य करता है.

पाठक विचार कीजिए पैगम्बर लोग मानवमात्र की ईश्वरीय शक्ति को छीन कर दास बनाते हैं अथवा स्वर्ग देते हैं?

इसीलिए मैं पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष नहीं हूँ, मैं भगवा आतंकवादी हूँ ! दुनिया कहती है इंसान बनो. लेकिन हमारा वैदिक सनातन धर्म तो कहता है,

 “अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या|

“तस्यां हिरण्ययः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः||

“अथर्ववेद;१०.२.३१.

“अर्थ - (अष्टचक्रा, नव द्वारा अयोध्या देवानां पूः) आठ चक्र और नौ द्वारों वाली अयोध्या देवों की पुरी है, (तस्यां हिरण्ययः कोशः) उसमें प्रकाश वाला कोष है , (स्वर्गः ज्योतिषा आवृतः) जो आनन्द और प्रकाश से युक्त है|”

यानी कि स्वर्ग मनुष्य के शरीर में ही है. इसे मनुष्य जीते जी प्राप्त कर सकता है. मनुष्य को किसी को लूटने या कत्ल करने की आवश्यकता नहीं है. नारियों के बलात्कारी को तो स्वर्ग मिल ही नहीं सकता. क्योंकि शरीर में स्थित चक्रों का भेदन तो मनुष्य वीर्य रक्षा के बाद ही कर सकता है.

खतना क्यों?

मूसा ने वीर्यक्ष्ररण को बाइबल में महिमामंडित किया, लूट और यौन सुख के लोभ में मनुष्य स्वयं अपराध में लिप्त है. बाइबल में वीर्यहीन बनना मजहब का आवश्यक कृत्य है. प्रमाण देखिये,

और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.(बाइबल, उत्पत्ति १७:११).

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

यद्यपि बाइबल में खतना करने की स्पष्ट आज्ञा है, तथापि इस्लाम में खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह (रिवाज) है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य विचार यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त भी नहीं है. फिर भी मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से खतना कराते हैं.

यह मुसलमानों के हित में है कि वे खतना का बहिष्कार करें. अपनी संतानों को गुरुकुलों में पढ़ा कर वीर्यवान ब्रह्म बनाएँ. अन्यथा मुसलमानों का अंत निश्चित है.

दैवी शक्तियों का दुरूपयोग न हो पाए, इसीलिए परमात्मा ने इसका नियंत्रण माया के आवरण में कर दिया है. समय समय पर दैवी शक्ति का जिसने भी दुरूपयोग किया, वह नष्ट हो गया, चाहे वह सहस्रबाहु, या हिरण्यकश्यप या रावण अथवा कंस ही क्यों न रहा हो.

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९() के संरक्षण, संवर्धन पोषण की राष्ट्रपति और राज्यपाल ने और बनाये रखने की, जजों ने शपथ ली है, से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है? १९५० से आज तक इस मानव घाती भारतीय संविधान का किस विधायक या सांसद ने विरोध किया? हम भारतीय संविधान का उन्मूलन करेंगे|

अरक्षितारम् राजानं बलिषड्भागहारिणम्|

तमाहुः सर्वलोकस्य समग्रमलहारकम्|| (मनुस्मृति ८:३०८)

यानी वैदिक सनातन धर्म में राज्य को १६.६७% से अधिक कर लेने का अधिकार नहीं है| पाठक को अपनी रक्षा करनी है तो हमें सहयोग दें. आर्यावर्त सरकार हत्यारों और लुटेरों की संहिता भारतीय संविधान को निरस्त करेगी|

इस अनुच्छेद के अधीन राज्य प्रजा को स्वयं लूटता है| जब सम्पत्ति और पूँजी पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार उपनिवेशवासी का अधिकार ही नहीं, तो कोई लूटे उपनिवेशवासी को तो ५% ही मिलेगा| शेष ९५% तो राहुल के अनुसार बिचौलिए खायेंगे|

इस्लाम और ईसाइयत आज भी इंडिया पर शासन कर रहे हैं. वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों का इंडिया पर कोई अधिकार नहीं है और न हमारे न्याय व्यवस्था को मान्यता ही है. वैदिक सनातन धर्म आधारित राजतंत्र में तो महाराजा अश्वपति ने कहा था,

“न मे स्तेनो जनपदे न कदर्यो न मद्यपः|

“नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

हम दास इंडियन यह कहने का साहस नहीं कर सकते कि हमारे पतन के कारण पैगम्बर मूसा, ईसा और मोहम्मद और उनके ही अनुयायी हैं.

मानवताको मिटाने के लिए माउंटबेटन ने २०वीं सदी के मीरजाफर (गांधी) से १९४७ में गुप्त समझौता किया. संसार के इतिहास में कहीं भी और कभी भी बिना युद्ध ३५ लाख से अधिक लोग नहीं कत्ल किये गए, जितने कि मानवताको मिटाने के लिए माउंटबेटन ने २०वीं सदी के मीरजाफर (गांधी) से गुप्त समझौता कर बंटवारे के समय १९४७ में कत्ल कराए. आज जब कुछ ईसाई बच्चों सहित कत्ल हो रहे हैं, नारियां नीलाम की जा रही हैं, तो मीडिया को छाती पीटने का अधिकार कहाँ है?

वीर्य ब्रह्म यानी चेतन परमाणु का मिश्रण है| प्रत्येक प्राणी में विद्यमान है| अप्राकृतिक मैथुन ईश्वर से स्वेच्छा से सम्बन्ध तोडना है| जमील जी! ऐसी बातें किसी को भी शोभा नहीं देतीं|

| अविश्वासियों को धोखा देने के लिए मुसलमान तकिय्या (कुरान ३:२८ व १६:१०६) का प्रयोग कर यह विश्वास दिलाते हैं कि कुछ दिग्भ्रमित मुसलमानों ने उनके मजहब का अपहरण कर लिया है और इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं| लेकिन इस्लाम का अपहरण नहीं होता है| यद्यपि काफ़िर ऐसा ही मानते हैं क्यों कि उनकी गलत धारणा है कि सभी धर्म समान हैं| काफ़िरों की यह त्रुटिपूर्ण धारणा इसलिए है कि वे समझते हैं कि कोई धर्म शांतिप्रिय उपनिवेशवासियों की हत्या और लूटमार को बढ़ावा कैसे दे सकता है? अतः सचमुच ही कुछ सिरफिरे मुसलमानों ने इस्लाम का अपहरण कर रखा है| यदि एक बार अविश्वासियों को इस्लाम की असलियत समझ में आ जाये तो वे इस्लाम से बचने का सही मार्ग ढूँढना प्रारम्भ कर देंगे|

| इस्लाम की उन्नति के लिए अल्लाह मुसलमानों को धोखा देने की अनुमति देता है| इसे अल्लाह तकिय्या कहता है| लेकिन अविश्वासियों को तकिय्या के इस्लामी सिद्धांत का ज्ञान नहीं है| तकिय्या के सिद्धांत का ज्ञान अविश्वासियों को अल्लाह की धोखाधड़ी से बचायेगा| वे मौलवियों व ईमामों की हर बात पर विश्वास करना बंद कर देंगे|

| धरती पर शरिया कानून लगाने के लिए प्रयत्नशील रहना हर मुसलमान का मजहबी दायित्व है| इसे जिहाद कहा जाता है| हर व्यक्ति को मुसलमान बनाना और धरती को शरिया आधारित इस्लामी राज्य बना लेना ही जिहाद है| यदि काफ़िर इस सच्चाई को जान लें तो वे इस्लाम को धरती पर टिकने नहीं देंगे|

| चूंकि मूर्ख मुसलमानों ने (कुरान २:३५) स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| अतः शासक निज हित में इस्लाम को संरक्षा, सुरक्षा और बढ़ावा दे रहे हैं और सच्चाई को छिपाने के हर प्रयास कर रहे हैं|

मानवजाति ने स्वेच्छा से वीर्यहीन बन कर किसान के बैल की भांति अपने मुक्ति(मोक्ष) के मार्ग का परित्याग कर दासता स्वीकार कर लिया है|

 

ईसाइयत {(बाइबलमत्ती १०:३४) व (बाइबललूका १२:४९)और इस्लाम (कुरान २:२१६) निरंतर युद्धरत सम्प्रदाय हैंदोनों ही लोकतंत्र की आड़ में विश्व में अपनी तानाशाही स्थापित करने के लिये मानवजाति के स्वतंत्रता व चरित्र को मिटा रहे हैंइस बर्बरता और सभ्यता और एक विश्व आपदा के बीच टकराव को टालने के लिए एक ही रास्ता है कि ईसाई और इस्लाम मजहब के भ्रम को बेनकाब किया जाय और उन्हें रहस्यमय नहीं रहने दिया जाय. गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को मुसलमानों और ईसाइयों के साथ शांति से जीने के लिए यह आवश्यक है कि अब्रह्मी संस्कृतियों से प्रत्येक ईसाई व मुसलमान को विलग कर दिया जाये|

मुसलमानों और ईसाइयों को अपने अब्रह्मी संस्कृतियों को त्यागना होगा, अपने नफरत की संस्कृति (मात्र अल्लाह पूज्य है की अज़ान द्वारा घोषणा और अकेले यीशु मोक्ष प्रदान कर सकते हैं की घोषणा का परित्याग करना पडेगा) गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों में साथी के रूप में शामिल होना होगा| अन्यथा गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को नैतिक अधिकार है कि वे मुसलमानों और ईसाइयों से स्वयं को अलग कर लें| अब्रह्मी संस्कृतियों को प्रतिबंधित करें| मुसलमानों और ईसाइयों के आव्रजन को प्रतिबंधित कर दें और उन्हें कत्ल कर दें, जो मानवजाति को दास बनाने अन्यथा कत्ल करने का षड्यंत्र कर रहे हैं - सर्वधर्म समभाव के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के आचरण मानवता और नैतिकता के विरुद्ध हैं|

उपनिवेशवासी को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, उत्पत्ति :१७) (कुरान :३५)]. जीने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, लूका १९:२७) (कुरान २:१९१)].

उपनिवेशवासी ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)], सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९), नारियां [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०)] एलिजाबेथ को सौंप दी है. नारी का बलात्कार या तो मुसलमान करेगा अथवा ईसाई| [(कुरान २३:६ व ७०:३०) (बाइबल, याशयाह १३:१६)].

फिर भी इनको उपनिवेशवासी स्वतंत्रता मानते हैं|. ईराक के सद्दाम रहे हों या ओसामा अथवा उनका इस्लाम, ईसा उनका दोहन कर रहा है|

जिन मस्जिदों से हमारे इष्टदेवों की निंदा की जाती है और हमें कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं, उनमे विष्फोट अपराध कैसे है? अपराधी तो बाइबल, कुरान, भारतीय संविधान, राष्ट्रपति और राज्यपाल हैं, जो मानवजाति के हत्यारों का महिमामंडन, संरक्षण, पोषण व संवर्धन कर रहे हैं? नमो के पास साहस हो तो साध्वी प्रज्ञा को मुक्त कराने, इस्लाम और ईसाइयत को मिटाने और गुरुकुलों की स्थापना में हमें सहयोग दें|

स्पष्टतः अंग्रेजों की कांग्रेस द्वारा संकलित भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की असाधारण सामरिक योजना ने वैदिक सनातन संस्कृति के समूल नाश में अभूतपूर्व बड़ी सफलता प्राप्त की है| जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयत और इस्लाम के सभी मिशन और जिहाद को और वैदिक सनातन संस्कृति के विरुद्ध आक्रमण को, संरक्षणपोषण व संवर्धन देता है, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है| राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास कोई विकल्प नहीं है| या तो वे अपने ही सर्वनाश की शपथ लें, अन्यथा पद न लें| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है, वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है|

जब उपनिवेशवासी के पास जीवित रहने, (भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)), सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार (भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)) ही नहीं है| आतंकियों के संरक्षक भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) और राष्ट्रपति और राज्यपाल भी हैं, वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ की शपथ लेकर| अतएव दोषी तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है और राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षणपोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है|

डेनिअल पाइप्स के अनुसार बुद्धिजीवी और लोकसेवक यह मानने के लिए विवश हैं कि हिंसा में ईसाइयत और इस्लाम की कोई भूमिका नहीं!

इस सम्बंध में मैं अपने विरुद्ध नरेला थाने से चले अभियोग ११०/२००१ का उल्लेख करूँगा. ११०/२००१ के विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

२६ फरवरी, २००५ को आरोप मुक्त होने और अपील की समय सीमा बीत जाने के बाद आर्यावर्त सरकार ने अपने साप्ताहिक पत्रिका ‘मुजहना’ द्वारा विश्व के सभी राष्ट्राध्यक्षों को इस्लाम से आगाह किया और किसी प्रकार के संदेह के निवारण के लिए मिलने के लिए समय देने का आग्रह भी किया. ११ वर्ष से अधिक निकल चुके हैं – इस्लाम का जिहाद दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है और यह तब तक बढ़ता ही रहेगा, जब तक अर्मागेद्दन द्वारा धरती पर मात्र ईशा की पूजा न हो ले. लेकिन सबने आसन्न संकट की अनदेखी की!

यही सर्वधर्म समभाव है. जिसे विश्व के ५३ उपनिवेश देशों की मल्लिका की वर्तमान मल्लिका गौ-नर भक्षी जेसुइट एलिजाबेथ लाना चाहती है.

आइये तुलना करते हैं, कमलेश तिवारी के प्रेसनोट की, वर्तमान में जारी विरोध प्रदर्शनों से,

प्रेसनोट जारी करने के अपराध में कमलेश तिवारी पर रासुका लगी है. क्योंकि कमलेश तिवारी ने नबी के विरोध में प्रेसनोट जारी किया है. धर्म विशेष के विरुद्ध आपत्ति की है. मुसलमान मस्जिदों से प्रतिदिन अज़ान, नमाज़ और खुत्बों में काफिरों के धर्म के विरुद्ध आपत्ति करते रहते हैं – तब रासुका क्यों नहीं लगती?

आजतक फतवा जारी करने वाला कोई मुसलमान रासुका में बंद नहीं किया गया.

कानूनविद केशरी जहां के राज्यपाल हैं, उस मालदा में हिंसा, आगजनी, पुलिस पिटाई हुई व थाना फूंका गया. किसी मुसलमान पर रासुका नहीं लगा.

चूंकि अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव हमने बाबरी ढांचा ध्वस्त कर दिया.

कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो जजों द्वारा निरस्त कर दी गई| मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था| जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया|

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ| अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं| मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, ०६-०२-२०१३ को निरस्त हो गया| इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है| मैं अज़ान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ| ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता| (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है| (मनुस्मृति ८:३०८). हम् भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को निरस्त करना चाहते हैं| हम मानव जाति को बचाना व विदेशी बैंकों में जमा देश का धन वापस लाना चाहते हैं और एलिजाबेथ राज्यपालों के माध्यम से पाठक को लूट रही व मिटा रही है| किसके साथ हैं पाठक?

सेना देश के सीमाओं की रक्षक है| फिर भी इंडिया में सेना का मनोबल तोड़ने के लिए१९४७ से ही षड्यंत्र जारी हैक्योकि एलिजाबेथ को वैदिक सनातन संस्कृति मिटाना है. १९४७ में इंडियन सेना पाकिस्तानियों को पराजित कर रही थीसेना वापस बुला ली गईसैनिक हथियार और परेड के स्थान पर जूते बनाने लगेपरिणाम १९६२ में चीन के हाथों पराजय के रूप में आया१९६५ में जीती हुई धरती के साथ हम प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को गवां बैठे१९७१ में पाकिस्तान के ९३ हजार युद्ध बंदी छोड़ दिए गए लेकिन इंडिया के लगभग ५० सैनिक वापस नहीं लिये गएएलिजाबेथ के लिए इतना कुछ करने के बाद इंदिरा और राजीव दोनों मारे गएकारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को वापस जाने दिया गयाअटल विरोध करते तो वे भी मारे जातेएडमिरल विष्णु भागवत के बाद अब वीके सिंह का नम्बर लगा हैहालात इतने भयानक हैं कि भयंकर बेरोज़गारी के बाद भी कोई नेवी में जाना नहीं चाहता है. मेरे मोबाईल पर प्रतिदिन नेवी में नौकरी करने के लिए विज्ञापन आ रहे हैं. मैं पाठक लोगों से बारम्बार आग्रह कर रहा हूँ कि लोगों को उपनिवेश का विरोध करने के लिए जागृत कीजिए.

वस्तुतः, हमारे बुद्धिजीवियों का मनोविज्ञान बिल्कुल दुर्व्यवहारित पत्नी, यौन दुर्व्यवहारित बच्चे या बलात्कार की शिकार नारी के मनोविज्ञान की तरह है| दुर्व्यवहार पीड़ितों की प्रतिक्रिया और हमारे बुद्धिजीवियों के बीच समानताएं देखें| जीवन और जीविका जाने का भय आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों के आगमन और निरंतरता से अस्तित्व में बने रहने का कारण है? क्या कवयित्री आसमा बिन्त मरवान से बेहतर प्रमाण हो सकता है?

जब मानव के विश्वास को ठेस लगती है तो वह प्रतिवाद पर उतर आता है| मुसलमान और ईसाई प्रतिवाद की आड़ में जीते हैं| बाइबल के अनुसार ईसाईयत व कुरान के अनुसार इस्लाम, हत्यारे, लुटेरे व बलात्कारी ईसाई व मुसलमान दासों का अंधकार पूर्ण, छलरचनाओं जेहोवा और अल्लाह का, काल्पनिक स्वर्ग है| लेकिन वे ऐसा मानने को तैयार नहीं| एक बार इनको प्रकाश मिल जाये तो ये लोग दुबारा उस अंधकार के स्वर्ग में नहीं जा सकते| मीडिया, पुरोहित, ईमाम, शिक्षक और शासक यही स्थिति आने नहीं दे रहे हैं|

व्यभिचार से उत्पन्न ईसा अपने अनुयायियों को स्वयं पापी व्यभिचारी बनाता है| बाप की कुदृष्टि पुत्रवधुओं और बेटियों पर रहती है, जो माँ-बेटी, सास-बहुओं और बाप-बेटों में कलह कुंवारी माताओं के उत्पत्ति का कारण बनती है| इसका वर्णन स्वयं बाइबल करती है. आगे पढ़िये...

क्या तुम समझते हो कि मै पृथ्वी पर मिलाप कराने आया हूँ? मै तुमसे कहता हूँ, नहीं, वरन अलग कराने आया हूँ|” (बाइबल, लूका १२:५१)

क्यों कि अब से एक घर में पांच जन आपस में विरोध रखेंगे, तीन दो से और दो तीन से|” (बाइबल, लूका १२:५२)

पिता पुत्र से और पुत्र पिता से विरोध रखेगा; माँ बेटी से, सास बहू से और बहू सास से विरोध रखेगी|” (बाइबल, लूका १२:५३)

"परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७).

काबा उपनिवेशवासियों का शिव मंदिर है| उसके परिसर में स्थित ३५९ मूर्तियां अली ने तोड़ डाली थी|

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

अब्रह्