Bhartiya Swatantrta Adhiniyam 1947

(aryanravi9@gmail.com) द्वारा साभार...

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ (1947)

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ ( Indian Independence Act 1947) युनाइटेड किंगडम की पार्लियामेंट (HOUSE OF LORDS) द्वारा पारित वह विधान है जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित भारत का दो स्वतंत्र उपनिवेशों (भारत तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया। यह अधिनियम 18 जुलाई 1947 को स्वीकृत हुआ और १५ अगस्त १९४७ को भारत बंट गया।

“An Act to make provision for the setting up in India of two independent Dominions, to substitute other provisions for certain provisions of the Government of India Act 1935, which apply outside those Dominions, and to provide for other matters consequential on or connected with the setting up of those Dominions

“[18th July 1947]

स्वतंत्र उपनिवेश का अर्थ स्वतंत्रता नहीं है. इसके अतिरिक्त १९४७ से आजतक उपरोक्त अधिनियम में कोई संशोधन हुआ हो तो बताइए.

शब्दों independent Dominions ने हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वतंत्रता के संघर्ष पर पानी फेर दिया. तब से आज तक स्वतंत्रता की मांग ही Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन अपराध बन चुका है.  

उपनिवेशवासियों को धोखा दिया जा रहा है. इंडिया स्वतंत्र नहीं ब्रिटेन का स्वतंत्र? उपनिवेश है. आईये देखें उपनिवेश किसे कहते हैं? 

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।

२०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्रका जोड़ा जाना. चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

इंडियन उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्ष के आंदोलन के बाद भी “India that is Bh arat” (इंडिया) आज भी स्वतंत्र?, ब्रिटिश उपनिवेश है. दोनों शब्द एक दूसरे के विरोधी हैं. क्योंकि उपनिवेशवासी कभी स्वतंत्र हो ही नहीं सकता! इंडिया में लागू, आज भी, सभी कानून ब्रिटेन द्वारा ही बनाये गए हैं.

१८ जुलाई, १९४७ से आजतक मुझे एक भी उपनिवेश विरोधी का ज्ञान नहीं है. जब कि एक से बढ़ कर एक कानूनविद धरती पर पैदा हुए, जिनको भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम१९४७का पूरा ज्ञान रहा, लेकिन किसी ने उपनिवेश, कुरान, बाइबल और भारतीय संविधान का विरोध कभी नहीं किया.

मुझे आज तक कोई यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि इंडिया को उपनिवेश बनाने और इंडिया और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र उपनिवेशों में बांटने का ब्रिटेन को अधिकार कैसे था? विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30 

हमारे यहाँ एक कहावत है, “रात भर सोहर भईल (पुत्र जन्म के उत्सव में गाए जाने वाले गीत) बिहाने (प्रातःकाल) देखलीं (देखा) त बाबू (शिशु) के छुन्निये (penis) नाहीं इंडिया आज भी एलिजाबेथ का स्वतंत्र उपनिवेश है. फिर भी सत्ता हस्तान्तरण के बाद से ही उपनिवेशवासी १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने के लिए विवश हैं. 

इंडिया ब्रिटेन का स्वतंत्र उपनिवेश है, जिसका विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.  

15 अगस्त आजादी नहीं धोखा है, देश वासियों की दासता पक्का करने का समझौता है , शासन नहीं शासक बदला है, गोरा नहीं अब काला है 15 अगस्त 1947 को देश आजाद नहीं हुआ - तो हर वर्ष क्यों ख़ुशी मनाई जाती है?

उपनिवेशवासियों के साथ भयानक षड्यंत्र किया जा रहा है l नेहरू का एक पत्र है जो साबित करता है कि 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद नहीं हुआ था। पत्र से जाहिर होता है कि देश को कांग्रेस ने एक और झूठ बताया है। 1948 में लिखे गए इस पत्र मे नेहरू ने इंग्लैंड की महारानी के निर्देश और आदेश पर राजगोपालाचारी को भारत उपनिवेश में महारानी का प्रतिनिधि बताया है।

22 जून 1948 को भारत के दुसरे गवर्नर के रूप में चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने निम्न शपथ ली l “मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यथाविधि यह शपथ लेता हूँ कि मैं सम्राट जार्ज षष्ठ (George 6) और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी के प्रति कानून के मुताबिक विश्वास के साथ वफादारी निभाऊंगा, एवं मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यह शपथ लेता हूँ की मैं गवर्नर जनरल के पद पर होते हुए सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी की यथावत सेवा करूँगा l ”

इस सन्दर्भ में निम्नलिखित तथ्यों को जानें …. :

1. भारत को, सत्ता हस्तांतरण 14-15 अगस्त 1947 के गुप्त दस्तावेज के तहत, जो की 1999 तक प्रकाश में नहीं आने थे (50 वर्षों तक ), खंडित किया गयाl

2. संसद को भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों में संशोधन करने का अधिकार नहीं हैl

3. संविधान के अनुच्छेद 348 के अंतर्गत उच्चतम न्यायलय, उच्च न्यायलय तथा संसद की कार्यवाही अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी में होने के बजाय अंग्रेजी भाषा में होगी l

4. अप्रैल 1947 में लन्दन में उपनिवेश देशों के प्रधानमंत्री अथवा अधिकारी उपस्थित हुए, यहाँ के घोषणा पत्र के खंड 3 में भारत वर्ष की इस इच्छा को निश्चयात्मक रूप में बताया है की वह

क ) इंडिया ज्यों का त्यों ब्रिटिश का राज समूह सदस्य बना रहेगा तथा

ख ) ब्रिटिश राष्ट्र समूह के देशों के स्वेच्छापूर्ण मिलाप का ब्रिटिश सम्राट को चिन्ह (प्रतीक) समझेगा, जिनमे शामिल हैं ….. (इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, श्री लंका) तथा

ग ) सम्राट को ब्रिटिश समूह का अध्यक्ष स्वीकार करेगा l

5. भारत की विदेश नीति तथा अर्थ नीति, भारत के ब्रिटिश का उपनिवेश होने के कारण स्वतंत्र नहीं है अर्थात उन्हीं के अधीन हैl

6. नौ-सेना के जहाज़ों पर आज भी तथाकथित भारतीय राष्ट्रीय ध्वज नहीं हैl

7. वायुसेना के विमानों पर आज भी VT (VICTORIA TERRITORY}  ही लिखा मिलता है.

8. जन गन मन अधिनायक जय हे हमारा राष्ट्र-गान नहीं है, अपितु जार्ज पंचम के भारत आगमन पर उसके स्वागत में गाया गया गान है, उपनिवेशिक प्रथाओं के कारण दबाव में इसी गीत को राष्ट्र-गान बना दिया गया जो की हमारी गुलामी का प्रतीक है l

9. सन 1948 में बने बर्तानिया कानून के अंतर्गत भाग 1 (1) 1948 के बर्तानिया के कानून के अनुसार हर भारतवासी बर्तानिया की रियाया है और यह कानून भारत के गणराज्य प्राप्त कर लेने के पश्चात भी लागू हैl

10. यदि 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ तो प्रथम गवर्नर जनरल माउन्ट-बेटन को क्यों बनाया गया?

11. 14 अगस्त 1947 को भारतीय स्वतन्त्रता विधि से भारत के दो उपनिवेश बनाए गए जिन्हें ब्रिटिश Common-Wealth की धारा नं. 9 (1) – (2) – (3) तथा धारा नं. 8 (1) – (2) धारा नं. 339 (1) धारा नं. 362 (1) – (3) – (5) G – 18 के अनुच्छेद 576 और 7 के अंतर्गत …. इन कानूनों को तोडना या भंग करना भारत सरकार की सीमाशक्ति से बाहर की बात है तथा प्रत्येक भारतीय नागरिक इन धाराओं के अनुसार ब्रिटिश नागरिक अर्थात गोरी सन्तानों का दास है l

12. भारतीय संविधान की व्याख्या अनुच्छेद 147 के अनुसार गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट 1935 तथा indian independence act 1947 के अधीन ही की जा सकती है दोनों एक्ट ब्रिटिश सरकार ने लागू कियेl

13. भारत सरकार के संविधान के अनुच्छेद नं. 366, 371, 372 एवं 392 को बदलने या रद्द करने की क्षमता भारत सरकार को नहीं है l

14. भारत सरकार के पास ऐसे ठोस प्रमाण अभी तक नहीं हैं, जिनसे नेताजी की वायुयान दुर्घटना में मृत्यु साबित होती है l इसके उपरान्त मोहनदास गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने ब्रिटिश न्यायाधीश के साथ यह समझौता किया कि अगर नेताजी ने भारत में प्रवेश किया, तो उनको गिरफ्तार कर ब्रिटिश हुकूमत को सौंप दिया जाएगाl बाद में ब्रिटिश सरकार के कार्यकाल के दौरान उन सभी राष्ट्रभक्तों की गिरफ्तारी और सुपुर्दगी पर मुहर लगाई गई - जिनको ब्रिटिश सरकार पकड़ नहीं पाई थी l

15. डंकल व् गैट, साम्राज्यवाद को भारत में पीछे के दरवाजों से लाने का सुलभ रास्ता बनाया है ताकि भारत की सत्ता फिर से इनके हाथों में आसानी से सौंपी जा सकेl उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट होता है की सम्पूर्ण भारतीय जनमानस को आज तक एक धोखे में ही रखा जा रहा है, तथाकथित नेहरु गाँधी परिवार ही नहीं, अपितु अन्य सभी बैरिस्टर इस सच्चाई से पूर्ण रूप से अवगत थे, परन्तु सत्तालोलुप प्रवृत्ति के चलते आज तक सत्ताधारी के नेतृत्व में लोकसेवक भारत की जनता को अँधेरे में रख रहे हैं और आज भी विश्वासघात करने में पूर्ण रूप से सफल हो रहे हैंl

 

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