Bechara Indian President

 

राष्ट्रपति की शक्तियां और कर्तव्य

Jul 25, 11:50 am

 

नई दिल्ली। संविधान के संरक्षक राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण कार्यक्रम बेहद रस्मी होता है। राष्ट्रीय महत्व के इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति की शक्तियों और कर्तव्यों समेत शपथ ग्रहण पर एक नजर:

गणराज्य

26 जनवरी, 1950 को संविधान के अस्तित्व में आने के साथ ही देश ने 'संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य' के रूप में नई यात्रा शुरू की। परिभाषा के मुताबिक गणराज्य (रिपब्लिक) का आशय होता है कि राष्ट्र का मुखिया निर्वाचित होगा जिसको राष्ट्रपति कहा जाता है।

इंडिया 'संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य' कभी नहीं बना| भारतीय संविधान का संकलन एक धोखा है| इसका संकलन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||)} और राष्ट्रकुल का एक सदस्य भी| स्वतंत्र कोई नहीं|

 

राष्ट्रपति

 

अनुच्छेद 52 : भारत का एक राष्ट्रपति होगा

अनुच्छेद 53 : संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। वह इसका उपयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेगा। इसकी अपनी सीमाएं भी हैं :

1. यह संघ की कार्यपालिका शक्ति (राज्यों की नहीं) होती है जो उसमें निहित होती है।

2. संविधान के अनुरूप ही उन शक्तियों का प्रयोग किया जा सकता है।

3. सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर की हैसियत से की जाने वाली शक्ति का उपयोग विधि के अनुरूप होना चाहिए।

शपथ ग्रहण (अनुच्छेद 60)

प्रत्येक राष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करने से पहले देश के मुख्य न्यायमूर्ति या उनकी अनुपस्थिति में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा :

'मैं प्रणब मुखर्जी, ईश्वर की शपथ लेता/ सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक राष्ट्रपति पद के कर्तव्यों का निर्वहन सत्यनिष्ठा से करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूंगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूंगा।'

 क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72)

राष्ट्रपति के पास किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, निलंबन, लघुकरण और परिहार की शक्ति है। मृत्युदंड पाए अपराधी की सजा पर भी फैसला लेने का उसको अधिकार है।

मंत्रिपरिषद

अनुच्छेद 74 : राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी। इसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार काम करेगा।

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को, अल्पसंख्यक घोषित कर, वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत इस्लाम मिशन जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. (कुरान :१२)

सबको पता है कि इंडिया में गणतंत्र नहीं जेसुइट सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है. ईसाईयों व सोनिया सहित इंडिया के नागरिक ईसा की भेंड़े हैं| इंडिया के नागरिक पास जीने का अधिकार है और पूँजी सम्पत्ति रखने का| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग). सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. अब नए प्रेसिडेंट महामहिम प्रणब दादा भी सोनिया द्वारा मनोनीत हो गए| फिर चुनाव की नौटंकी किसलिए? यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

कौन है सोनिया?

देश की छाती पर सवार जेसुइट सोनिया ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै उनकी आयु का विचार करूंगी, लिंग का, परिस्थिति का. मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है| सोनिया के सहयोग से अर्मगेद्दन के पश्चात ईसा जेरूसलम को अपनी अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बनाएगा| ममता व मुलायम के प्रिय इस्लाम सहित सभी मजहबों और संस्कृतियों को निषिद्ध कर देगा| केवल ईसा और उसके चित्र की पूजा हो सकेगी| बाइबल के अनुसार ईसा यहूदियों के मंदिर में ईश्वर बन कर बैठेगा और मात्र अपनी पूजा कराएगा| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा की बारी है| विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

और हामिद का अल्लाह कहता है,

३:१९ दीन तो अल्लाह की दृष्टि में केवल इस्लाम ही है| ...

३:८५ जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...

किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती. इस्लाम सदा सदा के लिए काफिरों के गले पर रखी हुई तलवार है. अजान गैर-मुसलमान मानव जाति के आराध्य देवों का अपमान और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर-जमानती अपराध है-जिसके बदले दण्डित करने के स्थान पर ईमामों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर १० अरब रुपयों वार्षिक से अधिक वेतन दिया जा रहा है. (एआईआरएससी१९९३प० २०८६).

मस्जिदों से ईमाम और मौलवी मुसलमानों को शिक्षा देते हैं कि गैर-मुसलमानों को कत्ल कर दो| इतना ही नहींमस्जिद से इस्लामी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तानी मौलिक धर्मतंत्री सैयद अबुल आला मौदूदी घोषित करता है कि इस्लाम विश्व की पूरी धरती चाहता है उसका कोई भूभाग नहीं, बल्कि पूरा ग्रह इसलिए नहीं कि ग्रह पर इस्लाम की सार्वभौमिकता के लिए तमाम देशों को आक्रमण कर छीन लिया जाये बल्कि इसलिए कि मानव जाति को इस्लाम से, जो कि मानव मात्र के सुख-समृद्धि(?) का कार्यक्रम है, लाभ हो|

मौदूदी जोर दे कर कहता है कि यद्यपि गैर-मुसलमान झूठे मानव निर्मित मजहबों को मानने के लिए स्वतन्त्र हैं, तथापि उनके पास अल्लाह के  धरती के किसी भाग पर अपनी मनुष्य निर्मित गलत धारणा की हुकूमत चलाने का कोई अधिकार नहीं| यदि वे (काफ़िर) ऐसा करते हैं, तो मुसलमानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे काफिरों की राजनैतिक शक्ति छीन लें और उनको (काफिरों को) इस्लामी तौर तरीके से जीने के लिए विवश करें|

उपरोक्त संस्कृतियों को बनाये रखने का भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर ईसाई व मुसलमान को असीमित मौलिक अधिकार देता है|

इसी संविधान के रक्षा की आज महामहिमदादा ने भारतीय संविधान के उपरोक्त अनुच्छेद ६० के अधीन शपथ ली है| 

अनुच्छेद 75 : प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा। अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।

सरकारी कार्य का संचालन

अनुच्छेद 77 : भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्यवाही राष्ट्रपति के नाम से की जाएगी।

अनुच्छेद 78 : प्रधानमंत्री का कर्तव्य होगा कि संघ के प्रशासन संबंधी मंत्रिपरिषद के निर्णयों से राष्ट्रपति को सूचित करेगा।

संसद का गठन

अनुच्छेद 79 : संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी।

अनुच्छेद 80 : साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 व्यक्तियों को राष्ट्रपति, राज्यसभा के लिए नामांकित कर सकता है।

संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन

अनुच्छेद 85 : राष्ट्रपति समय-समय पर, संसद के प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर, जो वह ठीक समझे, अधिवेशन के लिए आहूत करेगा।

-सदनों या किसी सदन का सत्रावसान कर सकेगा

-लोकसभा का विघटन कर सकेगा

भाषण का अधिकार (अनुच्छेद 86)

वह संसद के किसी एक सदन में या एक साथ दोनों सदनों में भाषण दे सकेगा।

विशेष भाषण (अनुच्छेद 87)

वह प्रत्येक लोकसभा चुनाव के बाद प्रथम सत्र और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में संसद के दोनों सदनों में भाषण करेगा।

आपातकाल

अनुच्छेद 352 : युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में आपातकाल की घोषणा कर सकता है।

अनुच्छेद 356 : राष्ट्रपति द्वारा किसी राज्य के सांविधानिक तंत्र के विफल होने की दशा में राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

अनुच्छेद 360 : भारत या उसके राज्य क्षेत्र के किसी भाग में वित्तीय संकट की दशा में वित्तीय आपात की घोषणा का अधिकार राष्ट्रपति को है।

 

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